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पेंशन जिहाद एक बहुत ही खतरनाक साजिस..आखिर पेंशन जिहाद होता क्या है आइए समझते है पहले इस पोष्ट को बिलकुल ठंढे दिमाग से पढ़ें और फिर इस पर बड़ी गंभीरता से विचार करें,,,,, दोस्तों अगर सरकारी नौकरी करने वाला कोई मुस्लिम व्यक्ति का सेवानिवृत्त(retirement) हो जाता है और उस समय उसकी 4 बीबियां हैं तो उन्हे पेंशन किस प्रकार से दी जाती है,,,,, अब पूरी प्रक्रिया समझिए पहले तो नामांकनों को देखा जाएगा और फिर उसके आधार पर यह निश्चित किया जाएगा की पेंशन का कितना भाग किसको देना है,,,,,, लेकिन यदि कोई नामांकन पहले से होगा तब और यदि कोई नामांकन नहीं है तो पेंशन को चारों के बीच बराबर बराबर मतलब सम्पूर्ण पेंशन राशि का 25-25% बांट दिया जाता है,,,,, और यदि इन चार पत्नियों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती है,,,, तो अन्य बची तीन पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का तीन भाग करके प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,, और यदि तीन मे से एक और पत्नी की मृत्यु हो जाती है,,,,, तो अन्य बची दो पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का 50-50% प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,,,, और यदि बची दो पत्नियों मे से किसी और एक की मृत्यु हो जाती है तो पेंशन की सम्पूर्ण राशि बची आखिरी पत्नी को तब तक दी जाएगी जब तक वो जीवित रहेगी,,,,, अब आइए इस विषय पर थोड़ा शोध करते है,,,, अगर मान लीजिए उस मुस्लिम की पहली पत्नी 60 साल की है दूसरी पत्नी 50 साल की और तीसरी पत्नी 40 साल की तथा चौथी पत्नी 30 साल की है,,,,,, और सभी चारों बीबियों ने करीब 70-70 साल का जीवन जिया,,,, तो कहने का मतलब पहली पत्नी शौहर के इंतकाल के वक्त यदि 60 साल की थी, तो दूसरी 50 साल की थी और तीसरी 40 साल की तथा चौथी 30 साल की थी,,,,,, तो जो पत्नी 60साल की थी उसने 10 साल, जो पत्नी 50 साल की थी उसने 20 साल, जो पत्नी 40 साल की थी उसने 30 साल और जो पत्नी 30 साल की थी उसने 40 साल लगातार सरकार से पेंशन लिया,,,,,,, अब इसको टोटल कर लेते है,,, 10 + 20 + 30 + 40 =100,, अब अगर ये आंकड़ा आपके समझ मे आ गया हो तो आप खुद समझ गये होगे की एक मुस्लिम व्यक्ति को सरकार की तरफ से लगातार 100 साल तक पेंशन मिलती है,,,,,,, जबकि इनकी तुलना में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति की पत्नी को सरकार की तरफ से ज्यादा से ज्यादा 10 या 20 साल ही पेंशन मिलती है,,,,, और इसका सीधा सा अर्थ ये है की चौथी पत्नी को आजीवन मुफ्त पेंशन दिलाने के लिए सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले एक नई मु*स्लिम लड़की से शादी करता है,,,, और जब मियां की मृत्यु हो जाती है तो बड़े ही गुप्त तरीके से वो नई वाली मुस्लिम महिला अपने ही पति की पहली पत्नी से पैदा हुए बड़े लड़के के साथ निकाह कर लेती है,,,,, और अब इसका भी सर्वे करना बहुत जरूरी है,, ऐसे ही पता नही कितने मुसलमान शरीयत का फायदा उठाकर 55 साल की उम्र मे शादी कर लेते हैं,,, इसीलिए कॉमन सिविल कोड, की सख्त जरूरत देश मे क्यों है,,,यह अब समझ मे आएगा,,,,, पेंशन जिहाद एक बहुत ही खतरनाक साजिस..आखिर पेंशन जिहाद होता क्या है आइए समझते है पहले इस पोष्ट को बिलकुल ठंढे दिमाग से पढ़ें और फिर इस पर बड़ी गंभीरता से विचार करें,,,,, दोस्तों अगर सरकारी नौकरी करने वाला कोई मुस्लिम व्यक्ति का सेवानिवृत्त(retirement) हो जाता है और उस समय उसकी 4 बीबियां हैं तो उन्हे पेंशन किस प्रकार से दी जाती है,,,,, अब पूरी प्रक्रिया समझिए पहले तो नामांकनों को देखा जाएगा और फिर उसके आधार पर यह निश्चित किया जाएगा की पेंशन का कितना भाग किसको देना है,,,,,, लेकिन यदि कोई नामांकन पहले से होगा तब और यदि कोई नामांकन नहीं है तो पेंशन को चारों के बीच बराबर बराबर मतलब सम्पूर्ण पेंशन राशि का 25-25% बांट दिया जाता है,,,,, और यदि इन चार पत्नियों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती है,,,, तो अन्य बची तीन पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का तीन भाग करके प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,, और यदि तीन मे से एक और पत्नी की मृत्यु हो जाती है,,,,, तो अन्य बची दो पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का 50-50% प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,,,, और यदि बची दो पत्नियों मे से किसी और एक की मृत्यु हो जाती है तो पेंशन की सम्पूर्ण राशि बची आखिरी पत्नी को तब तक दी जाएगी जब तक वो जीवित रहेगी,,,,, अब आइए इस विषय पर थोड़ा शोध करते है,,,, अगर मान लीजिए उस मुस्लिम की पहली पत्नी 60 साल की है दूसरी पत्नी 50 साल की और तीसरी पत्नी 40 साल की तथा चौथी पत्नी 30 साल की है,,,,,, और सभी चारों बीबियों ने करीब 70-70 साल का जीवन जिया,,,, तो कहने का मतलब पहली पत्नी शौहर के इंतकाल के वक्त यदि 60 साल की थी, तो दूसरी 50 साल की थी और तीसरी 40 साल की तथा चौथी 30 साल की थी,,,,,, तो जो पत्नी 60साल की थी उसने 10 साल, जो पत्नी 50 साल की थी उसने 20 साल, जो पत्नी 40 साल की थी उसने 30 साल और जो पत्नी 30 साल की थी उसने 40 साल लगातार सरकार से पेंशन लिया,,,,,,, अब इसको टोटल कर लेते है,,, 10 + 20 + 30 + 40 =100,, अब अगर ये आंकड़ा आपके समझ मे आ गया हो तो आप खुद समझ गये होगे की एक मुस्लिम व्यक्ति को सरकार की तरफ से लगातार 100 साल तक पेंशन मिलती है,,,,,,, जबकि इनकी तुलना में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति की पत्नी को सरकार की तरफ से ज्यादा से ज्यादा 10 या 20 साल ही पेंशन मिलती है,,,,, और इसका सीधा सा अर्थ ये है की चौथी पत्नी को आजीवन मुफ्त पेंशन दिलाने के लिए सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले एक नई मु*स्लिम लड़की से शादी करता है,,,, और जब मियां की मृत्यु हो जाती है तो बड़े ही गुप्त तरीके से वो नई वाली मुस्लिम महिला अपने ही पति की पहली पत्नी से पैदा हुए बड़े लड़के के साथ निकाह कर लेती है,,,,, और अब इसका भी सर्वे करना बहुत जरूरी है,, ऐसे ही पता नही कितने मुसलमान शरीयत का फायदा उठाकर 55 साल की उम्र मे शादी कर लेते हैं,,, इसीलिए कॉमन सिविल कोड, की सख्त जरूरत देश मे क्यों है,,,यह अब समझ मे आएगा,,,,,

12 hrs ago
user_डॉ. उमेश कुमार
डॉ. उमेश कुमार
गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
12 hrs ago
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पेंशन जिहाद एक बहुत ही खतरनाक साजिस..आखिर पेंशन जिहाद होता क्या है आइए समझते है पहले इस पोष्ट को बिलकुल ठंढे दिमाग से पढ़ें और फिर इस पर बड़ी गंभीरता से विचार करें,,,,, दोस्तों अगर सरकारी नौकरी करने वाला कोई मुस्लिम व्यक्ति का सेवानिवृत्त(retirement) हो जाता है और उस समय उसकी 4 बीबियां हैं तो उन्हे पेंशन किस प्रकार से दी जाती है,,,,, अब पूरी प्रक्रिया समझिए पहले तो नामांकनों को देखा जाएगा और फिर उसके आधार पर यह निश्चित किया जाएगा की पेंशन का कितना भाग किसको देना है,,,,,, लेकिन यदि कोई नामांकन पहले से होगा तब और यदि कोई नामांकन नहीं है तो पेंशन को चारों के बीच बराबर बराबर मतलब सम्पूर्ण पेंशन राशि का 25-25% बांट दिया जाता है,,,,, और यदि इन चार पत्नियों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती है,,,, तो अन्य बची तीन पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का तीन भाग करके प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,, और यदि तीन मे से एक और पत्नी की मृत्यु हो जाती है,,,,, तो अन्य बची दो पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का 50-50% प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,,,, और यदि बची दो पत्नियों मे से किसी और एक की मृत्यु हो जाती है तो पेंशन की सम्पूर्ण राशि बची आखिरी पत्नी को तब तक दी जाएगी जब तक वो जीवित रहेगी,,,,, अब आइए इस विषय पर थोड़ा शोध करते है,,,, अगर मान लीजिए उस मुस्लिम की पहली पत्नी 60 साल की है दूसरी पत्नी 50 साल की और तीसरी पत्नी 40 साल की तथा चौथी पत्नी 30 साल की है,,,,,, और सभी चारों बीबियों ने करीब 70-70 साल का जीवन जिया,,,, तो कहने का मतलब पहली पत्नी शौहर के इंतकाल के वक्त यदि 60 साल की थी, तो दूसरी 50 साल की थी और तीसरी 40 साल की तथा चौथी 30 साल की थी,,,,,, तो जो पत्नी 60साल की थी उसने 10 साल, जो पत्नी 50 साल की थी उसने 20 साल, जो पत्नी 40 साल की थी उसने 30 साल और जो पत्नी 30 साल की थी उसने 40 साल लगातार सरकार से पेंशन लिया,,,,,,, अब इसको टोटल कर लेते है,,, 10 + 20 + 30 + 40 =100,, अब अगर ये आंकड़ा आपके समझ मे आ गया हो तो आप खुद समझ गये होगे की एक मुस्लिम व्यक्ति को सरकार की तरफ से लगातार 100 साल तक पेंशन मिलती है,,,,,,, जबकि इनकी तुलना में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति की पत्नी को सरकार की तरफ से ज्यादा से ज्यादा 10 या 20 साल ही पेंशन मिलती है,,,,, और इसका सीधा सा अर्थ ये है की चौथी पत्नी को आजीवन मुफ्त पेंशन दिलाने के लिए सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले एक नई मु*स्लिम लड़की से शादी करता है,,,, और जब मियां की मृत्यु हो जाती है तो बड़े ही गुप्त तरीके से वो नई वाली मुस्लिम महिला अपने ही पति की पहली पत्नी से पैदा हुए बड़े लड़के के साथ निकाह कर लेती है,,,,, और अब इसका भी सर्वे करना बहुत जरूरी है,, ऐसे ही पता नही कितने मुसलमान शरीयत का फायदा उठाकर 55 साल की उम्र मे शादी कर लेते हैं,,, इसीलिए कॉमन सिविल कोड, की सख्त जरूरत देश मे क्यों है,,,यह अब समझ मे आएगा,,,,, पेंशन जिहाद एक बहुत ही खतरनाक साजिस..आखिर पेंशन जिहाद होता क्या है आइए समझते है पहले इस पोष्ट को बिलकुल ठंढे दिमाग से पढ़ें और फिर इस पर बड़ी गंभीरता से विचार करें,,,,, दोस्तों अगर सरकारी नौकरी करने वाला कोई मुस्लिम व्यक्ति का सेवानिवृत्त(retirement) हो जाता है और उस समय उसकी 4 बीबियां हैं तो उन्हे पेंशन किस प्रकार से दी जाती है,,,,, अब पूरी प्रक्रिया समझिए पहले तो नामांकनों को देखा जाएगा और फिर उसके आधार पर यह निश्चित किया जाएगा की पेंशन का कितना भाग किसको देना है,,,,,, लेकिन यदि कोई नामांकन पहले से होगा तब और यदि कोई नामांकन नहीं है तो पेंशन को चारों के बीच बराबर बराबर मतलब सम्पूर्ण पेंशन राशि का 25-25% बांट दिया जाता है,,,,, और यदि इन चार पत्नियों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती है,,,, तो अन्य बची तीन पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का तीन भाग करके प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,, और यदि तीन मे से एक और पत्नी की मृत्यु हो जाती है,,,,, तो अन्य बची दो पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का 50-50% प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,,,, और यदि बची दो पत्नियों मे से किसी और एक की मृत्यु हो जाती है तो पेंशन की सम्पूर्ण राशि बची आखिरी पत्नी को तब तक दी जाएगी जब तक वो जीवित रहेगी,,,,, अब आइए इस विषय पर थोड़ा शोध करते है,,,, अगर मान लीजिए उस मुस्लिम की पहली पत्नी 60 साल की है दूसरी पत्नी 50 साल की और तीसरी पत्नी 40 साल की तथा चौथी पत्नी 30 साल की है,,,,,, और सभी चारों बीबियों ने करीब 70-70 साल का जीवन जिया,,,, तो कहने का मतलब पहली पत्नी शौहर के इंतकाल के वक्त यदि 60 साल की थी, तो दूसरी 50 साल की थी और तीसरी 40 साल की तथा चौथी 30 साल की थी,,,,,, तो जो पत्नी 60साल की थी उसने 10 साल, जो पत्नी 50 साल की थी उसने 20 साल, जो पत्नी 40 साल की थी उसने 30 साल और जो पत्नी 30 साल की थी उसने 40 साल लगातार सरकार से पेंशन लिया,,,,,,, अब इसको टोटल कर लेते है,,, 10 + 20 + 30 + 40 =100,, अब अगर ये आंकड़ा आपके समझ मे आ गया हो तो आप खुद समझ गये होगे की एक मुस्लिम व्यक्ति को सरकार की तरफ से लगातार 100 साल तक पेंशन मिलती है,,,,,,, जबकि इनकी तुलना में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति की पत्नी को सरकार की तरफ से ज्यादा से ज्यादा 10 या 20 साल ही पेंशन मिलती है,,,,, और इसका सीधा सा अर्थ ये है की चौथी पत्नी को आजीवन मुफ्त पेंशन दिलाने के लिए सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले एक नई मु*स्लिम लड़की से शादी करता है,,,, और जब मियां की मृत्यु हो जाती है तो बड़े ही गुप्त तरीके से वो नई वाली मुस्लिम महिला अपने ही पति की पहली पत्नी से पैदा हुए बड़े लड़के के साथ निकाह कर लेती है,,,,, और अब इसका भी सर्वे करना बहुत जरूरी है,, ऐसे ही पता नही कितने मुसलमान शरीयत का फायदा उठाकर 55 साल की उम्र मे शादी कर लेते हैं,,, इसीलिए कॉमन सिविल कोड, की सख्त जरूरत देश मे क्यों है,,,यह अब समझ मे आएगा,,,,,

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    ग्राहक बनकर आए अपराधी ने मानगो उलीडीह थाना अंतर्गत शंकोसाई रोड न.1 में रिफ्यूजी कॉलोनी के सामने स्थित विश्वनाथ ज्वेलर्स में प्रवेश कर दुकान में मौजूद विश्वनाथ दत्ता जी के बेटे को झांसे में लेकर लगभग 25 लाख रुपए के जेवर लेकर फरार हो गया । दुकानदार विश्वनाथ दत्ता ने मामले की जानकारी भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह को दिया । सूचना मिलते ही मौके में पहुंचे विकास सिंह ने पीड़ित दुकानदार से मिलकर घटने जानकारी एवं सीसीटीवी फुटेज जिले के वरीय पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराया ।
    user_डॉ. उमेश कुमार
    डॉ. उमेश कुमार
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    Reporter आदित्यपुर (गमहरिया), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    13 hrs ago
  • राजनगर — प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर खुलकर सामने आई है। जहां एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजनगर सीएचसी की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक नजर आ रही है। अस्पताल परिसर के अंदर कुत्तों का बेधड़क घूमना और वार्ड के आसपास सोना न सिर्फ स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा करता है। इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के बीच इस अव्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। इतना ही नहीं, स्वास्थ्य केंद्र में पानी की भी भारी बर्बादी हो रही है। नल खुले पड़े हैं और पानी लगातार बह रहा है, लेकिन इसे रोकने वाला कोई जिम्मेदार नजर नहीं आता। यह स्थिति न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का भी स्पष्ट उदाहरण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन समिति और संबंधित पदाधिकारी पूरी तरह से लापरवाह बने हुए हैं। नियमित निगरानी और व्यवस्था सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान की यह स्थिति है, तो आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिल पाएंगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे या फिर यूं ही लापरवाही का आलम बना रहेगा? अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला
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    राजनगर — प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर खुलकर सामने आई है। जहां एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजनगर सीएचसी की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक नजर आ रही है।
अस्पताल परिसर के अंदर कुत्तों का बेधड़क घूमना और वार्ड के आसपास सोना न सिर्फ स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा करता है। इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के बीच इस अव्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
इतना ही नहीं, स्वास्थ्य केंद्र में पानी की भी भारी बर्बादी हो रही है। नल खुले पड़े हैं और पानी लगातार बह रहा है, लेकिन इसे रोकने वाला कोई जिम्मेदार नजर नहीं आता। यह स्थिति न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का भी स्पष्ट उदाहरण है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन समिति और संबंधित पदाधिकारी पूरी तरह से लापरवाह बने हुए हैं। नियमित निगरानी और व्यवस्था सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान की यह स्थिति है, तो आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिल पाएंगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे या फिर यूं ही लापरवाही का आलम बना रहेगा?
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला
    user_Ravi repoter Rajnagar
    Ravi repoter Rajnagar
    Reporting गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    49 min ago
  • Post by Ravi Gupta
    4
    Post by Ravi Gupta
    user_Ravi Gupta
    Ravi Gupta
    सरायकेला, सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    2 hrs ago
  • राजनगर चाॅगुआ में हरि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा , 251 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा से गूंजा क्षेत्र। श्री श्री सार्वजनिक हरि नाम संकीर्तन समिति राजनगर चाॅगुआ के तत्वावधान में हरि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर मंगलवार को भव्य कलश यात्रा आयोजन किया गया । इस धार्मिक आयोजन में 251 महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लिया , जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय में माहौल में सराबोर हो गया। कलश यात्रा हरि मंदिर परिसर से गाजे बाजे के साथ प्रारंभ होकर खरकाई नदी घाट ,मुरुमडीह तक पहुंची। जहां पंडितों द्वारा वैदिक मंत्र उच्चारण के बीच कलश में जल भरवाया गया। इसके बाद हरि नाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु गांव भ्रमण कर पुनः मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में विधिवत वैदिक मंत्र के साथ 251 कलश स्थापित कर हरि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। पूरे आयोजन के दौरान हरिनाम संकीर्तन की ध्वनि से वातावरण भक्ति में बना रहा। कार्यक्रम के उपरांत समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के बीच जलपान का वितरण किया गया। समिति द्वारा जानकारी दी गई की चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर अष्टम प्रहार अखंड हरी नाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न संकीर्तन मंडलियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। कलश यात्रा को सफल संचालन के लिए कमेटी के अध्यक्ष - श्री अश्विनी महतो ,सचिव -रितेश महतो , कोषाध्यक्ष - सोनेलाल महतो ,संयोजक श्री जवाहरलाल महतो ,मुख्य संयोजक एवं मूर्ति दाता श्री श्रवण महतो ,जमीन दाता- श्री डोमन महतो, सदस्य - दिलीप महतो ,अशोक महतो ,नरेंद्र महतो, नकुल महतो ,उदित महतो ,गुरुचरण महतो ,कमलेश्वर महतो ,रघुनाथ महतो, जागाय महतो ,प्रफुल्लो महतो, शिवचरण महतो ,बादल महतो ,खिरोद महतो ,सुभाष महतो ,रमेश पान, घनश्याम महतो ,जगत महतो ,राजीव महतो ,बाबलू प्रमाणिक ,महादेव महतो, रासु महतो ,सागर महतो ,पवन महतो विकास महतो ,कृष्णा महतो एवं चाॅगुआ राजनगर ग्रामवासी का सहरनीय योगदान।
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    राजनगर चाॅगुआ में हरि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा , 251 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा से गूंजा क्षेत्र। 
श्री श्री सार्वजनिक हरि नाम संकीर्तन समिति राजनगर चाॅगुआ के तत्वावधान में हरि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर मंगलवार को भव्य कलश यात्रा आयोजन किया गया । इस धार्मिक आयोजन में 251 महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लिया , जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय में माहौल में सराबोर हो गया।
कलश यात्रा हरि मंदिर परिसर से गाजे बाजे के साथ प्रारंभ होकर खरकाई नदी घाट ,मुरुमडीह तक पहुंची। जहां पंडितों द्वारा वैदिक मंत्र उच्चारण के बीच कलश में जल भरवाया गया। इसके बाद हरि नाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु गांव भ्रमण कर पुनः मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में विधिवत वैदिक मंत्र के साथ 251 कलश स्थापित कर हरि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। पूरे आयोजन के दौरान हरिनाम संकीर्तन की ध्वनि से वातावरण भक्ति में बना रहा। कार्यक्रम के उपरांत समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के बीच जलपान का वितरण किया गया।
समिति द्वारा जानकारी दी गई की चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर अष्टम प्रहार अखंड हरी नाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न संकीर्तन मंडलियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।
कलश यात्रा को सफल संचालन के लिए कमेटी के अध्यक्ष - श्री अश्विनी महतो ,सचिव -रितेश महतो , कोषाध्यक्ष - सोनेलाल महतो ,संयोजक श्री जवाहरलाल महतो ,मुख्य संयोजक एवं मूर्ति दाता श्री श्रवण महतो ,जमीन दाता- श्री डोमन महतो, सदस्य - दिलीप महतो ,अशोक महतो ,नरेंद्र महतो, नकुल महतो ,उदित महतो ,गुरुचरण महतो ,कमलेश्वर महतो ,रघुनाथ महतो, जागाय महतो ,प्रफुल्लो महतो, शिवचरण महतो ,बादल महतो ,खिरोद महतो ,सुभाष महतो ,रमेश पान, घनश्याम महतो ,जगत महतो ,राजीव महतो ,बाबलू प्रमाणिक ,महादेव महतो, रासु महतो ,सागर महतो ,पवन महतो विकास महतो ,कृष्णा महतो एवं चाॅगुआ राजनगर ग्रामवासी का सहरनीय योगदान।
    user_NUNU RAM MAHATO
    NUNU RAM MAHATO
    Local News Reporter गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    5 hrs ago
  • चाईबासा के बरकुंडिया गांव में हाथी ने महिला को पटक कर मार डाला, एक अन्य जख्मी  बरकुंडिया गांव के तूरामडीह टोले मे जंगली हाथी ने सोमवार की रात 11 बजे बांस फूस के कच्चे मंदिर को तहस नहस कर सो रही 58 वर्षीय महिला चांदू देवी गोप को पटक कर मार डाला और पुजारी लखन कूदादा को जख्मी कर दिया है। घटना के समय तेज गति से आंधी बारिश हो रही थी। उस समय हाथी द्वारा मंदिर पर हमला कर दिया गया। हाथी द्वारा तहस नहस किए जाने के दौरान उसने सो रही 58 वर्षीय महिला चांदू देवी गोप को पटक कर मार डाला । पुजारी लखन कूदादा लकड़ी और पुआल से दब गया। इस कारण हाथी की उस पर नजर नहीं पड़ी, लेकिन हाथी के पैर से उसका पैर दब जाने के के कारण वह जख्मी हो गया।  सुबह  गांव के लोग जमा हुए। इस घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे। वन विभाग द्वारा शव को उठा कर सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया गया। जख्मी लखन कूदादा का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है। उसकी खराब हालत को देखते हुए उसे आईसीयू वार्ड में दाखिल कराया गया है। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिवार वालो को सौंप दिया गया है। मृतक महिला चांदू देवी गोप के पुत्र गोपाल गोप ने बताया
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    चाईबासा के बरकुंडिया गांव में हाथी ने महिला को पटक कर मार डाला, एक अन्य जख्मी 
बरकुंडिया गांव के तूरामडीह टोले मे जंगली हाथी ने सोमवार की रात 11 बजे बांस फूस के कच्चे मंदिर को तहस नहस कर सो रही 58 वर्षीय महिला चांदू देवी गोप को पटक कर मार डाला और पुजारी लखन कूदादा को जख्मी कर दिया है।
घटना के समय तेज गति से आंधी बारिश हो रही थी। उस समय हाथी द्वारा मंदिर पर हमला कर दिया गया। हाथी द्वारा तहस नहस किए जाने के दौरान उसने सो रही 58 वर्षीय महिला चांदू देवी गोप को पटक कर मार डाला । पुजारी लखन कूदादा लकड़ी और पुआल से दब गया। इस कारण हाथी की उस पर नजर नहीं पड़ी, लेकिन हाथी के पैर से उसका पैर दब जाने के के कारण वह जख्मी हो गया। 
सुबह  गांव के लोग जमा हुए। इस घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे।
वन विभाग द्वारा शव को उठा कर सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया गया। जख्मी लखन कूदादा का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है। उसकी खराब हालत को देखते हुए उसे आईसीयू वार्ड में दाखिल कराया गया है। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिवार वालो को सौंप दिया गया है। मृतक महिला चांदू देवी गोप के पुत्र गोपाल गोप ने बताया
    user_कोल्हान ब्रेकिंग न्यूज
    कोल्हान ब्रेकिंग न्यूज
    Local News Reporter चाईबासा, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    1 hr ago
  • Post by Gautam Raftaar media
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    Post by Gautam Raftaar media
    user_Gautam Raftaar media
    Gautam Raftaar media
    बुंडू, रांची, झारखंड•
    2 hrs ago
  • 🦂.....ये देखो हमारे देश में पालें गए साँप जिनके द्वारा लोगो को थूका हुवा बहुत ही स्वादिष्ट खाना खिलाया जाता हैं😡🤬
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    🦂.....ये देखो हमारे देश में पालें गए साँप जिनके द्वारा लोगो को थूका हुवा बहुत ही स्वादिष्ट खाना खिलाया जाता हैं😡🤬
    user_डॉ. उमेश कुमार
    डॉ. उमेश कुमार
    गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
    6 hrs ago
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