पंजाब की राजनीति में सोमवार (15 जून) को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला जब श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को एक कथित आपत्तिजनक वायरल वीडियो के मामले में "गुरु का दोषी और पंथ विरोधी" घोषित कर दिया। इसके साथ ही, अकाल तख्त ने सिख समुदाय से मुख्यमंत्री के सामाजिक बहिष्कार की अपील भी की है। अकाल तख्त के इस फैसले के बाद कांग्रेस और बीजेपी ने भगवंत मान से तत्काल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग कर दी है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान की एक कथित आपत्तिजनक वीडियो अकाल तख्त साहिब को ईमेल के माध्यम से भेजी गई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री को तलब किया था, जिसके बाद भगवंत मान 14 जनवरी को अकाल तख्त सचिवालय में पेश हुए थे। उस दौरान मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि वायरल वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की गई है और इसकी जांच किसी भी फॉरेंसिक लैब से करवाई जा सकती है। इसके बाद अकाल तख्त ने वीडियो को दो अलग-अलग फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा था। इस संबंध में सोमवार को अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में पांच सिंह साहिबानों की एक बैठक हुई। बैठक के उपरांत, अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने अपना फैसला सुनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान को "गुरु के दोषी" और "पंथ विरोधी" करार दिया।
पंजाब की राजनीति में सोमवार (15 जून) को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला जब श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को एक कथित आपत्तिजनक वायरल वीडियो के मामले में "गुरु का दोषी और पंथ विरोधी" घोषित कर दिया। इसके साथ ही, अकाल तख्त ने सिख समुदाय से मुख्यमंत्री के सामाजिक बहिष्कार की अपील भी की है। अकाल तख्त के इस फैसले के बाद कांग्रेस और बीजेपी ने भगवंत मान से तत्काल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग कर दी है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान की एक कथित आपत्तिजनक वीडियो अकाल तख्त साहिब को ईमेल के माध्यम से भेजी गई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री को तलब किया था, जिसके बाद भगवंत मान 14 जनवरी को अकाल तख्त सचिवालय में पेश हुए थे। उस दौरान मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि वायरल वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की गई है और इसकी जांच किसी भी फॉरेंसिक लैब से करवाई जा सकती है। इसके बाद अकाल तख्त ने वीडियो को दो अलग-अलग फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा था। इस संबंध में सोमवार को अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में पांच सिंह साहिबानों की एक बैठक हुई। बैठक के उपरांत, अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने अपना फैसला सुनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान को "गुरु के दोषी" और "पंथ विरोधी" करार दिया।
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- बदायूं के उझानी कोतवाली क्षेत्र में मथुरा-बरेली नेशनल हाइवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहाँ एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने ई-रिक्शा को टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में ई-रिक्शा में सवार छह महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जो शादी का शगुन देने जा रही थीं। हादसे में कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं।1
- थाना मुरादनगर की पुलिस टीम ने एक पुलिस मुठभेड़ के दौरान लूट की घटना को अंजाम देने वाले एक अभियुक्त को घायल अवस्था में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अभियुक्त के कब्जे से एक अवैध तमंचा, एक खोखा कारतूस, एक जिंदा कारतूस, एक मोबाइल फोन, एक ऑटो रिक्शा और 700 रुपये नकद बरामद किए हैं।1
- उत्तर पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार थाना पुलिस ने पेट्रोलिंग के दौरान दो ऑटो लिफ्टरों को गिरफ्तार कर कुल चार चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। यह कार्रवाई उस समय हुई जब पुलिस टीम ने एक मोटरसाइकिल पर बिना हेलमेट के आ रहे दो व्यक्तियों को शक के आधार पर रोका। पुलिस द्वारा मोटरसाइकिल के कागजात मांगे जाने पर आरोपी उन्हें नहीं दिखा सके। जाँच में पता चला कि वह मोटरसाइकिल ज्योति नगर थाना क्षेत्र से चोरी की गई थी। इसके बाद, दोनों आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की गई, जिसके दौरान उनकी निशानदेही पर तीन और चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गईं, जिससे बरामद कुल मोटरसाइकिलों की संख्या चार हो गई।1
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- भक्तों को भगवान से एक अद्भुत और अपूर्व मिलन का बेसब्री से इंतजार है। इस पावन मिलन के लिए अब सिर्फ 29 दिन की प्रतीक्षा शेष है।1
- लखनऊ में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक फर्जी आईपीएस अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब आरोपी ने ₹40 का बन-मक्खन खाया और पैसे देने से इनकार करते हुए, दुकानदार से उसे सैल्यूट करने को कहा। दुकानदार ने इसकी शिकायत पुलिस से की। महानगर थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने बताया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान मड़ियांव के भरतनगर निवासी मिथलेश शुक्ला के रूप में हुई है। थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ करने पर मिथलेश ने रोते हुए अपना जुर्म कबूल कर लिया। जाँच में पता चला कि वह कोई अधिकारी नहीं बल्कि नोएडा में सैमसंग कंपनी में अकाउंटेंट है। लगभग दो साल पहले उसने इलेक्ट्रॉनिक्स का शोरूम चलाया था, जिसमें घाटा होने के बाद वह बंद कर चुका था और उसने निजी नौकरी कर ली थी। आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि वह इससे पहले लखनऊ में दो बार आईपीएस बनकर दुकानदारों पर रौब झाड़ चुका है और बिना पैसे दिए सामान हड़प चुका है। महानगर पुलिस ने मिथलेश शुक्ला के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मंगलवार को उसे कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया है। महज ₹40 बचाने के चक्कर में 'फर्जी साहब' का यह रूतबा अब जेल की हवा खा रहा है।1
- रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी ने मंगलवार को असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और भक्ति में लीन दिखाई दिए। अनंत अंबानी द्वारा की गई पूजा और मंदिर की परंपराओं के अनुसार किए गए अनुष्ठान, खासकर कबूतर उड़ाना और बकरे छोड़ना, अब चर्चा का विषय बन गए हैं। कामाख्या मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और इसे तांत्रिक साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां देवी के योनि स्वरूप की पूजा की जाती है, जिसे पूरे ब्रह्मांड के जन्म और जीवन का स्रोत माना जाता है। माता कामाख्या ही समस्त जगत की माता हैं, और इसी प्रतीक स्वरूप में मंदिर में देवी का रजपर्व, जिसे अंबुवाची उत्सव के नाम से जाना जाता है, मनाया जाता है। यह मंदिर तांत्रिक परंपरा का सिद्ध स्थान भी है। समय के साथ, मंदिर में कई ऐसी लोक परंपराएं विकसित हुई हैं जो शास्त्रीय पूजा-पद्धति के साथ-साथ स्थानीय असमिया और जनजातीय मान्यताओं से भी प्रभावित हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है कबूतर उड़ाना और बकरा छोड़ना। ये परंपराएं लोक-आस्थाओं का हिस्सा मानी जाती हैं और इनका स्पष्ट जिक्र किसी शास्त्रीय ग्रंथ में नहीं मिलता, बल्कि ये स्थानीय धार्मिक संस्कृति और श्रद्धालुओं की मान्यताओं से विकसित हुई हैं। लोग मन्नत मांगने या पूरी होने पर भेंट के रूप में यहां कबूतर उड़ाते और बकरे छोड़ते हैं, जिसे जीवित अर्पण या जीवित बलि कहा जाता है। इस बलि में कोई रक्तपात, कष्ट या हिंसा नहीं होती, यह एक अहिंसक बलि है। कहा जाता है कि कबूतर मनुष्य के लालच, विकारों और घमंड का प्रतीक हैं। कबूतर उड़ाकर ये सभी विकार देवी को समर्पित कर दिए जाते हैं। एक लोककथा के अनुसार, एक दंपती ने संतान का आशीर्वाद मांगा और मनौती मानी थी। जब उन्हें संतान हुई, तो वे कपोत बलि देने आए। इस दौरान, कबूतर के साथियों और बच्चों की आवाज सुनकर दंपती भावुक हो गए और उन्होंने बलि का विचार त्याग कर कबूतर को माता को समर्पित करते हुए ऐसे ही उड़ा दिया। तभी से यह परंपरा बन गई। मान्यता है कि पक्षियों को आजाद करना पुण्य का कार्य है, जिससे देवी की कृपा प्राप्त होती है। कुछ लोग इसे बंधनों, कष्टों या नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक भी मानते हैं।1