जगराओं बना “मौत के गड्ढों का शहर”: बेजुबान गिरा गहरे गड्ढे में, बचाव के दौरान फटी गैस जगराओं 10 मार्च (प्रदीप पाल) बना “मौत के गड्ढों का शहर”: बेजुबान गिरा गहरे गड्ढे में, बचाव के दौरान फटी गैस पाइपलाइन — जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग बेखबर जगराओं शहर के कच्चा मलक रोड पर मंगलवार सुबह जो खौफनाक मंजर सामने आया उसने नगर कौंसिल, ठेकेदारों और जिम्मेदार विभागों की लापरवाही की परतें एक-एक कर खोल दीं। सड़क किनारे लंबे समय से खुले पड़े एक गहरे मौत के गड्ढे में एक बेजुबान जानवर गिर गया और उसकी जान पर बन आई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े खतरे के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और नेता शायद अपने एसी कमरों में विकास के कागजी दावे गिनने में व्यस्त रहे। गड्ढा इतना गहरा था कि उसमें गिरने के बाद बेजुबान बाहर निकल ही नहीं सका और काफी देर तक तड़पता रहा। जब आसपास मौजूद लोगों ने यह दर्दनाक मंजर देखा तो इलाके में हड़कंप मच गया। लोगों ने खुद ही उसे निकालने की कोशिशें शुरू कीं, लेकिन प्रशासन की लापरवाही इतनी भारी पड़ चुकी थी कि आखिरकार जेसीबी मशीन बुलानी पड़ी। लेकिन प्रशासन की लापरवाही का असली विस्फोट तब हुआ जब जेसीबी की मदद से जानवर को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी। नीचे दबाई गई गैस पाइपलाइन अचानक फट गई और तेज़ी से गैस लीक होने लगी। कुछ ही पलों में पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत फैल गई। हालात ऐसे बन गए कि मौके पर मौजूद लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। अगर समय रहते हालात काबू में न आते तो यह लापरवाही एक बड़े हादसे में बदल सकती थी। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार बेजुबान जानवर को गड्ढे से बाहर निकाला गया। इस दौरान पुलिस और फायर ब्रिगेड को भी मौके पर पहुंचना पड़ा। घटना की खबर मिलते ही नगर कौंसिल के पूर्व प्रधान जतिंदरपाल राणा और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन जब नगर कौंसिल के कार्यकारी प्रधान कंवरपाल से इस बारे में सवाल किया गया तो उनका जवाब सुनकर लोगों का गुस्सा और भड़क उठा। उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें इस गड्ढे के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लोगों का कहना था कि अगर शहर के बीचोंबीच मौत का इतना बड़ा गड्ढा पड़ा है और नगर कौंसिल के प्रधान को इसकी खबर तक नहीं है, तो फिर सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार लोग करते क्या हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि गैस पाइपलाइन और अन्य विभागों द्वारा काफी समय पहले सड़क किनारे गड्ढा खोदा गया था, लेकिन काम खत्म होने के बाद उसे भरने की जिम्मेदारी किसी ने नहीं निभाई। ठेकेदार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे और नगर कौंसिल तमाशा देखती रही। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जगराओं में शायद विकास का मतलब अब गड्ढे खोदना ही रह गया है। शहर की शायद ही कोई गली या सड़क बची हो जहां मौत के गड्ढे न खोदे गए हों। ऊपर से टूटी सड़कें और नीचे गैस पाइपलाइन का जाल—यानी शहरवासियों की जान हर वक्त खतरे में। शहरवासियों ने विधायक पर भी सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब शहर की सड़कों पर पड़े इन मौत के गड्ढों को देखने तक नहीं आते। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि शायद नेताओं को गड्ढे तब दिखाई देंगे जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा। वहीं नगर कौंसिल, जो पहले ही भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में रहती है, वहां शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। लोग कहते हैं कि जब जिम्मेदारी तय करने की बात आती है तो अधिकारी और नेता दोनों सवालों से बचते नजर आते हैं। घटना के दौरान लोगों का बढ़ता गुस्सा देखकर पुलिस ने तुरंत गैस कंपनी के कर्मचारियों को मौके पर बुलाया और लीक हो रही गैस बंद करवाई। हालांकि तब तक काफी मात्रा में गैस फैल चुकी थी, जिससे आसपास मौजूद लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हुई। शहरवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द इन मौत के गड्ढों को नहीं भरा गया और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जगराओं के लोग सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
जगराओं बना “मौत के गड्ढों का शहर”: बेजुबान गिरा गहरे गड्ढे में, बचाव के दौरान फटी गैस जगराओं 10 मार्च (प्रदीप पाल) बना “मौत के गड्ढों का शहर”: बेजुबान गिरा गहरे गड्ढे में, बचाव के दौरान फटी गैस पाइपलाइन — जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग बेखबर जगराओं शहर के कच्चा मलक रोड पर मंगलवार सुबह जो खौफनाक मंजर सामने आया उसने नगर कौंसिल, ठेकेदारों और जिम्मेदार विभागों की लापरवाही की परतें एक-एक कर खोल दीं। सड़क किनारे लंबे समय से खुले पड़े एक गहरे मौत के गड्ढे में एक बेजुबान जानवर गिर गया और उसकी जान पर बन आई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े खतरे के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और नेता शायद अपने एसी कमरों में विकास के कागजी दावे गिनने में व्यस्त रहे। गड्ढा इतना गहरा था कि उसमें गिरने के बाद बेजुबान बाहर निकल ही नहीं सका और काफी देर तक तड़पता रहा। जब आसपास मौजूद लोगों ने यह दर्दनाक मंजर देखा तो इलाके में हड़कंप मच गया। लोगों ने खुद ही उसे निकालने की कोशिशें शुरू कीं, लेकिन प्रशासन की लापरवाही इतनी भारी पड़ चुकी थी कि आखिरकार जेसीबी मशीन बुलानी पड़ी। लेकिन प्रशासन की लापरवाही का असली विस्फोट तब हुआ जब जेसीबी की मदद से जानवर को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी। नीचे दबाई गई गैस पाइपलाइन अचानक फट गई और तेज़ी से गैस लीक होने लगी। कुछ ही पलों
में पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत फैल गई। हालात ऐसे बन गए कि मौके पर मौजूद लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। अगर समय रहते हालात काबू में न आते तो यह लापरवाही एक बड़े हादसे में बदल सकती थी। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार बेजुबान जानवर को गड्ढे से बाहर निकाला गया। इस दौरान पुलिस और फायर ब्रिगेड को भी मौके पर पहुंचना पड़ा। घटना की खबर मिलते ही नगर कौंसिल के पूर्व प्रधान जतिंदरपाल राणा और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन जब नगर कौंसिल के कार्यकारी प्रधान कंवरपाल से इस बारे में सवाल किया गया तो उनका जवाब सुनकर लोगों का गुस्सा और भड़क उठा। उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें इस गड्ढे के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लोगों का कहना था कि अगर शहर के बीचोंबीच मौत का इतना बड़ा गड्ढा पड़ा है और नगर कौंसिल के प्रधान को इसकी खबर तक नहीं है, तो फिर सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार लोग करते क्या हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि गैस पाइपलाइन और अन्य विभागों द्वारा काफी समय पहले सड़क किनारे गड्ढा खोदा गया था, लेकिन काम खत्म होने के बाद उसे भरने की जिम्मेदारी किसी ने नहीं निभाई। ठेकेदार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे और नगर कौंसिल तमाशा देखती रही। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जगराओं में शायद विकास का मतलब अब गड्ढे खोदना
ही रह गया है। शहर की शायद ही कोई गली या सड़क बची हो जहां मौत के गड्ढे न खोदे गए हों। ऊपर से टूटी सड़कें और नीचे गैस पाइपलाइन का जाल—यानी शहरवासियों की जान हर वक्त खतरे में। शहरवासियों ने विधायक पर भी सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब शहर की सड़कों पर पड़े इन मौत के गड्ढों को देखने तक नहीं आते। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि शायद नेताओं को गड्ढे तब दिखाई देंगे जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा। वहीं नगर कौंसिल, जो पहले ही भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में रहती है, वहां शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। लोग कहते हैं कि जब जिम्मेदारी तय करने की बात आती है तो अधिकारी और नेता दोनों सवालों से बचते नजर आते हैं। घटना के दौरान लोगों का बढ़ता गुस्सा देखकर पुलिस ने तुरंत गैस कंपनी के कर्मचारियों को मौके पर बुलाया और लीक हो रही गैस बंद करवाई। हालांकि तब तक काफी मात्रा में गैस फैल चुकी थी, जिससे आसपास मौजूद लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हुई। शहरवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द इन मौत के गड्ढों को नहीं भरा गया और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जगराओं के लोग सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
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