पोस्ट की शुरुआत 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे' और 'हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे' के जाप के आह्वान से होती है, जिसमें हमेशा प्रसन्न रहने और 'श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!' का स्मरण करने का संदेश दिया गया है। सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम करते हुए, पोस्ट में श्री कृष्ण के अनमोल वचनों का उल्लेख किया गया है: यह भौतिक जगत नश्वर है और इसमें सुख-दुख तथा हर्ष-विषाद लगा रहता है। जो व्यक्ति सुख की प्राप्ति से हर्षित नहीं होता और अशुभ के प्राप्त होने पर उससे घृणा नहीं करता, वह पूर्ण ज्ञान में स्थिर रहता है और सच्चा ज्ञानी होता है, क्योंकि उसे ज्ञात होता है कि सब कुछ क्षण भर के लिए होता है। 'विचार संजीवनी' खंड में कहा गया है कि मनुष्य शरीर में आकर केवल भोग और संग्रह में लगे रहने से कोई लाभ नहीं होता; यह कोल्हू के बैल की तरह उम्र भर वहीं-का-वहीं रहना है। सच्चा लाभ तभी होगा जब भटकना मिट जाएगा, जिसके लिए हमें यह विचार करना चाहिए कि हम किसके अंश हैं। भगवद गीता के अध्याय 3, श्लोक 39 का अनुवाद और तात्पर्य भी प्रस्तुत किया गया है, जिसके अनुसार ज्ञानमय जीवात्मा की शुद्ध चेतना उसके काम रूपी नित्य शत्रु से ढकी रहती है। यह शत्रु कभी तुष्ट नहीं होता और अग्नि के समान जलता रहता है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए बताया गया है कि विषय-भोग से काम की तृप्ति नहीं होती, जैसे ईंधन डालने से अग्नि कभी नहीं बुझती। भौतिक जगत में समस्त कार्यकलापों का केंद्रबिंदु कामसुख है, और इन्द्रियतृप्ति के आधार पर भौतिक सभ्यता की प्रगति वास्तव में जीवात्मा के बंधन की अवधि को बढ़ाती है। इस प्रकार, काम अज्ञान का प्रतीक है, जो जीवात्मा को इस संसार में बांधे रखता है। आगे, एक मार्मिक कहानी 'बाँट के खाने वाला निवाला' प्रस्तुत की गई है, जिसमें एक दुकानदार अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर कपड़ों का शोरूम खोलने के दो साल बाद बिक्री आधी हो जाने और पिछले सात महीनों से जूझने के बाद आर्थिक संकट में है। उसे अपने चार कर्मचारियों में से एक को निकालने पर विवश होना पड़ा। दुकानदार ने उदासी में बताया कि वह सभी को काम पर नहीं रख सकता और उसे दीपक नामक नए लड़के को काम से निकालना होगा। यह सुनकर दीपक की सहकर्मी लड़की ने बताया कि दीपक के भाई का भी काम छूट गया है और उसकी माँ बीमार रहती है। तभी दूसरी लड़की ने सुझाव दिया कि किसी को निकालने के बजाय वे सभी अपनी तनख्वाह कम कर लें, जैसे बारह हजार की जगह नौ हजार कर दें। बाकी कर्मचारियों ने भी सहमति जताते हुए कहा कि वे इतने में ही काम चला लेंगे, क्योंकि किसी साथी के भूखे रहने से अच्छा है कि वे सब अपना निवाला थोड़ा कम कर दें। बच्चों के इस निस्वार्थ त्याग को देखकर दुकानदार की आँखों में आंसू आ गए और वे बच्चे उसकी नज़रों में उससे कहीं ज्यादा बड़े बन गए। अंत में, एक स्वास्थ्य टिप दी गई है कि अरबी का सेवन करने से त्वचा का रूखापन और झुर्रियां दूर होती हैं, जिससे त्वचा लंबे समय तक जवान रहती है। पोस्ट का समापन 'जय श्री कृष्ण' और 'प्रेम से बोलो राधे राधे' जैसे भक्तिमय उद्घोषों से होता है।
पोस्ट की शुरुआत 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे' और 'हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे' के जाप के आह्वान से होती है, जिसमें हमेशा प्रसन्न रहने और 'श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!' का स्मरण करने का संदेश दिया गया है। सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम करते हुए, पोस्ट में श्री कृष्ण के अनमोल वचनों का उल्लेख किया गया है: यह भौतिक जगत नश्वर है और इसमें सुख-दुख तथा हर्ष-विषाद लगा रहता है। जो व्यक्ति सुख की प्राप्ति से हर्षित नहीं होता और अशुभ के प्राप्त होने पर उससे घृणा नहीं करता, वह पूर्ण ज्ञान में स्थिर रहता है और सच्चा ज्ञानी होता है, क्योंकि उसे ज्ञात होता है कि सब कुछ क्षण भर के लिए होता है। 'विचार संजीवनी' खंड में कहा गया है कि मनुष्य शरीर में आकर केवल भोग और संग्रह में लगे रहने से कोई लाभ नहीं होता; यह कोल्हू के बैल की तरह उम्र भर वहीं-का-वहीं रहना है। सच्चा लाभ तभी होगा जब भटकना मिट जाएगा, जिसके लिए हमें यह विचार करना चाहिए कि हम किसके अंश हैं। भगवद गीता के अध्याय 3, श्लोक 39 का अनुवाद और तात्पर्य भी प्रस्तुत किया गया है, जिसके अनुसार ज्ञानमय जीवात्मा की शुद्ध चेतना उसके काम रूपी नित्य शत्रु से ढकी रहती है। यह शत्रु कभी तुष्ट नहीं होता और अग्नि के समान जलता रहता है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए बताया गया है कि विषय-भोग से काम की तृप्ति नहीं होती, जैसे ईंधन डालने से अग्नि कभी नहीं बुझती। भौतिक जगत में समस्त कार्यकलापों का केंद्रबिंदु कामसुख है, और इन्द्रियतृप्ति के आधार पर भौतिक सभ्यता की प्रगति वास्तव में जीवात्मा के बंधन की अवधि को बढ़ाती है। इस प्रकार, काम अज्ञान का प्रतीक है, जो जीवात्मा को इस संसार में बांधे रखता है। आगे, एक मार्मिक कहानी 'बाँट के खाने वाला निवाला' प्रस्तुत की गई है, जिसमें एक दुकानदार अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर कपड़ों का शोरूम खोलने के दो साल बाद बिक्री आधी हो जाने और पिछले सात महीनों से जूझने के बाद आर्थिक संकट में है। उसे अपने चार कर्मचारियों में से एक को निकालने पर विवश होना पड़ा। दुकानदार ने उदासी में बताया कि वह सभी को काम पर नहीं रख सकता और उसे दीपक नामक नए लड़के को काम से निकालना होगा। यह सुनकर दीपक की सहकर्मी लड़की ने बताया कि दीपक के भाई का भी काम छूट गया है और उसकी माँ बीमार रहती है। तभी दूसरी लड़की ने सुझाव दिया कि किसी को निकालने के बजाय वे सभी अपनी तनख्वाह कम कर लें, जैसे बारह हजार की जगह नौ हजार कर दें। बाकी कर्मचारियों ने भी सहमति जताते हुए कहा कि वे इतने में ही काम चला लेंगे, क्योंकि किसी साथी के भूखे रहने से अच्छा है कि वे सब अपना निवाला थोड़ा कम कर दें। बच्चों के इस निस्वार्थ त्याग को देखकर दुकानदार की आँखों में आंसू आ गए और वे बच्चे उसकी नज़रों में उससे कहीं ज्यादा बड़े बन गए। अंत में, एक स्वास्थ्य टिप दी गई है कि अरबी का सेवन करने से त्वचा का रूखापन और झुर्रियां दूर होती हैं, जिससे त्वचा लंबे समय तक जवान रहती है। पोस्ट का समापन 'जय श्री कृष्ण' और 'प्रेम से बोलो राधे राधे' जैसे भक्तिमय उद्घोषों से होता है।
- क्रांतिकारी टैक्सी यूनियन जयपुर ने सभी टैक्सी, कैब, ऑटो और कमर्शियल वाहन चालकों से आगामी 3 जून को जयपुर के कलेक्ट्रेट सर्किल पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की बड़ी अपील की है। यह आह्वान ड्राइवरों की लगातार बढ़ती समस्याओं, महंगे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, कम किराए, प्लेटफॉर्म शुल्क और बढ़ते खर्चों जैसे विभिन्न मुद्दों के समाधान के लिए किया गया है। यूनियन ने जोर दिया है कि जब तक ड्राइवर एकजुट नहीं होंगे, तब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। सभी ड्राइवरों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी आवाज बुलंद करने और अपने अधिकारों के लिए समय पर पहुंचकर इस अभियान को सफल बनाएं। इसके साथ ही, सभी ड्राइवर भाइयों से इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा साझा करने और अपने साथियों तक पहुंचाने का निवेदन किया गया है।1
- जयपुर स्थित श्री अमरापुर स्थान में सफलतापूर्वक एक बाल संस्कार शिविर का समापन हुआ है।1
- पहलवान विनेश फोगाट ने देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों की संघर्षपूर्ण परिस्थितियों पर अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की है, जहाँ उन्हें खेल के मैदान में उतरने से पहले अदालतों में भी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। उन्होंने कहा कि खेल में हार-जीत तो होती ही रहती है, लेकिन जब कोई खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए अदालती लड़ाई लड़ने के बाद मैदान पर आता है, तो वह केवल एक खेल नहीं रह जाता। फोगाट ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे खिलाड़ी जब गोल्ड मेडल जीतते हैं, तो वे पूरे देश का नाम रोशन करते हैं। उन्होंने तल्ख़ लहजे में कहा कि पहले यह देखा जाना चाहिए कि ये खिलाड़ी किस तरह 'शोषित होकर' अपने खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं। अपनी बात समाप्त करते हुए, उन्होंने 'जय हो लोकतंत्र की' कहकर अपने इरादे साफ किए और आत्मविश्वास के साथ घोषणा की कि 'मैं फिर से आऊंगी और जीत कर जाऊंगी'।1
- जयपुर में एक 11 साल की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि बच्ची जब पड़ोस में खेलने जाती थी, तो 46 साल के एक पड़ोसी ने उसकी नीयत बिगड़ जाने पर उसे डरा-धमका कर इस वारदात को अंजाम दिया। यह घटना अप्रैल-2026 के पहले हफ्ते में हुई बताई जा रही है। पीड़िता के परिजनों की शिकायत के अनुसार, उनकी 11 साल की बच्ची घर के बाहर खेल रही थी और खेलते-खेलते आरोपी पड़ोसी के घर चली गई। घर में बच्ची को अकेला पाकर पड़ोसी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और किसी को भी बताने पर गाली-गलौच कर डराया-धमकाया। इस घटना के बाद बच्ची काफी दिनों तक गुमसुम और डरी-सहमी रही। परिजनों द्वारा दबाव बनाने और पूछने पर, मासूम ने पड़ोसी अंकल द्वारा की गई दरिंदगी के बारे में बताया। नाबालिग बच्ची की बात सुनकर गुस्साए परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे और आरोपी पड़ोसी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नाबालिग पीड़िता का मेडिकल करवाया और उसके बयान दर्ज किए। इसके बाद पुलिस ने 46 साल के आरोपी पड़ोसी को दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया।1
- शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने श्रमिकों के अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलन के संबंध में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने इस आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।1
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- पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने केकड़ी को दोबारा जिला बनाए जाने को लेकर एक भावुक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिस क्षेत्र को जिला बनाया था, उसे बाद में भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया था। अब वे उसे फिर से जिला का दर्जा दिलाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। रघु शर्मा ने बेहद दृढ़ और भावुक लहजे में कहा, "यही मेरी कसम है कि जिसको मैंने जिला बनाया और इन बेईमानों ने हटाया, बीजेपी की सरकार ने हटाया, उसको वापस जिले का दर्जा रघु शर्मा दिला के रहेगा और मेरी सांस रहेगी, तो यह जिला बनेगा।" इस बयान के दौरान रघु शर्मा भावुक नजर आए और उन्होंने केकड़ी की जिला पुनर्स्थापना को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उनके इस संकल्प को केकड़ी के जिला दर्जे की बहाली के लिए चल रहे कांग्रेस के राजनीतिक अभियान और स्थानीय लोगों की लगातार मांग से जोड़कर देखा जा रहा है।1
- नेपाल की अस्मिता तमांग नाम की कक्षा 9 की एक छात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई जारी रख रही है। अपनी माँ के निधन के बाद, अस्मिता को अपने डेढ़ साल के छोटे भाई और अन्य छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। चूंकि उनके पिता काम पर चले जाते हैं और घर पर बच्चों की देखभाल के लिए कोई अन्य व्यक्ति नहीं होता, अस्मिता को अपने छोटे भाई को गोद में लेकर ही स्कूल जाना पड़ता है। इसी वजह से, वह कक्षा में भी अपने छोटे भाई को गोद में बैठाकर पढ़ती है। जब शिक्षक ने उससे इस स्थिति के बारे में पूछा, तो अस्मिता अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कक्षा में ही रो पड़ी। यह वीडियो अस्मिता के इस अनकहे संघर्ष और जुदाई की कहानी को दर्शाता है।1