अब घर बैठे पहचानिए मिलावटी खाद्य पदार्थ, फूड सेफ्टी वैन ने सिखाए आसान परीक्षण अब घर बैठे पहचानिए मिलावटी खाद्य पदार्थ, फूड सेफ्टी वैन ने सिखाए आसान परीक्षण कानपुर में मिलावट खोरी के खिलाफ चला अभियान क्या दूध में डिटर्जेंट मिला है? क्या हल्दी और लाल मिर्च में कृत्रिम रंग है? क्या काली मिर्च में पपीते के बीज या चांदी के वर्क में एल्युमिनियम की मिलावट है? इन सवालों का जवाब अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा। शुक्रवार को मोतीझील में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स मोबाइल प्रयोगशाला ने लाइव प्रदर्शन के जरिए लोगों को ऐसे आसान परीक्षण सिखाए, जिनसे कई खाद्य पदार्थों में प्रारंभिक स्तर की मिलावट की पहचान घर पर भी की जा सकती है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मोबाइल प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया और विभिन्न परीक्षणों का प्रदर्शन देखा। इस दौरान सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र द्विवेदी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार, नरेंद्र शर्मा, बृजमोहन गुप्ता, उपासना शाह तथा मोबाइल प्रयोगशाला पर तैनात विश्लेषक मौजूद रहे।विशेषज्ञों ने दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मसाले, खाद्य तेल, शहद, चायपत्ती, आटा, गुड़, चीनी तथा अन्य खाद्य पदार्थों में होने वाली सामान्य मिलावट की पहचान के सरल परीक्षणों का प्रदर्शन किया। मौके पर दूध में डिटर्जेंट और स्टार्च, घी में स्टार्च, हल्दी व लाल मिर्च में कृत्रिम रंग, काली मिर्च में पपीते के बीज, चांदी के वर्क में एल्युमिनियम सहित कई प्रकार की मिलावट की पहचान करके दिखाई गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये परीक्षण केवल प्रारंभिक पहचान के लिए हैं। किसी भी संदिग्ध नमूने की अंतिम पुष्टि विभागीय प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच के बाद ही की जाती है। जिलाधिकारी ने कहा कि मिलावट के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार जागरूक उपभोक्ता है। उन्होंने कहा कि फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स के माध्यम से लोगों को ऐसे सरल परीक्षण बताए जा रहे हैं, जिनसे वे खाद्य पदार्थों की प्रारंभिक जांच स्वयं कर सकते हैं। जागरूकता ही मिलावट के खिलाफ सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने लोगों से स्वच्छ एवं विश्वसनीय प्रतिष्ठानों से ही खाद्य सामग्री खरीदने, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर ध्यान देने तथा कहीं भी गंभीर मिलावट की जानकारी मिलने पर तत्काल खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचित करने की अपील की। *बॉक्स :* *ऐसे करें मिलावटी खाद्य पदार्थों की पहचान* *● चांदी के वर्क में एल्युमिनियम* वर्क को उंगलियों से मसलने पर शुद्ध चांदी का वर्क चूर्ण जैसा बिखर जाता है, जबकि एल्युमिनियम छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है। आग में जलाने पर भी दोनों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। *दूध और दुग्ध उत्पाद* ● दूध, पनीर, खोया और छेना में स्टार्च आयोडीन (टिंचर ऑफ आयोडीन) की 2-3 बूंद डालें। नीला रंग बनने पर स्टार्च की मिलावट की आशंका होती है। *● दूध में डिटर्जेंट* दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं। गाढ़ा झाग बनने पर डिटर्जेंट की मिलावट हो सकती है, जबकि शुद्ध दूध में केवल हल्की झाग बनती है। *● घी और मक्खन में स्टार्च* आधा चम्मच घी या मक्खन में आयोडीन की कुछ बूंद डालें। नीला रंग बनने पर स्टार्चयुक्त पदार्थ की मिलावट की आशंका होती है। पानी में डालने पर शुद्ध काली मिर्च नीचे बैठ जाती है, जबकि पपीते के बीज ऊपर तैरते हैं। देखने पर पपीते के बीज चिकने और अंडाकार होते हैं। पानी में लाल मिर्च पाउडर डालते ही यदि रंग की धारियां उतरने लगें तो कृत्रिम रंग की मिलावट हो सकती है। एक गिलास पानी में एक चम्मच हल्दी डालें। शुद्ध हल्दी नीचे बैठते समय हल्का पीला रंग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी पानी को गहरा पीला रंग देती है।असली दालचीनी की परतें बेहद पतली होती हैं। कैसिया की छाल मोटी और कई परतों वाली दिखाई देती है।थोड़ी हींग जलाने पर शुद्ध हींग कपूर की तरह जलती है। पानी में घोलने पर शुद्ध हींग का घोल दूधिया सफेद बनता है और उसमें तलछट नहीं रहती।तेल, शहद और मिठाइया ,पानी में शहद की एक बूंद डालें। शुद्ध शहद तुरंत नहीं घुलता, जबकि मिलावटी शहद पानी में फैलने लगता है। शहद में भीगी सूती बत्ती आसानी से जल जाती है, जबकि पानी मिला होने पर वह नहीं जलती या चटकने की आवाज करती है। कुछ प्रकार की रासायनिक मिलावट की पहचान विशेष अभिकर्मकों से की जाती है, जिसका प्रदर्शन मोबाइल प्रयोगशाला में किया गया।अच्छी गुणवत्ता वाली लौंग पानी में नीचे बैठ जाती है, जबकि इस्तेमाल की जा चुकी लौंग ऊपर तैरने लगती है।सरसों के बीज चिकने होते हैं और दबाने पर अंदर से पीले दिखाई देते हैं। सत्यानाशी (आरगेमोन) के बीज खुरदरे, काले और अंदर से सफेद होते हैं। फिल्टर पेपर या सफेद कागज पर पानी की कुछ बूंदें डालने से यदि रंग की धारियां बनें तो कृत्रिम रंग की मिलावट की आशंका हो सकती है।हरी मटर को आधे घंटे पानी में भिगोकर रखें। यदि पानी का रंग अलग होने लगे तो कृत्रिम रंग की मिलावट हो सकती है।
अब घर बैठे पहचानिए मिलावटी खाद्य पदार्थ, फूड सेफ्टी वैन ने सिखाए आसान परीक्षण अब घर बैठे पहचानिए मिलावटी खाद्य पदार्थ, फूड सेफ्टी वैन ने सिखाए आसान परीक्षण कानपुर में मिलावट खोरी के खिलाफ चला अभियान क्या दूध में डिटर्जेंट मिला है? क्या हल्दी और लाल मिर्च में कृत्रिम रंग है? क्या काली मिर्च में पपीते के बीज या चांदी के वर्क में एल्युमिनियम की मिलावट है? इन सवालों का जवाब अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा। शुक्रवार को मोतीझील में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स मोबाइल प्रयोगशाला ने लाइव प्रदर्शन के जरिए लोगों को ऐसे आसान परीक्षण सिखाए, जिनसे कई खाद्य पदार्थों में प्रारंभिक स्तर की मिलावट की पहचान घर पर भी की जा सकती है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मोबाइल प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया और विभिन्न परीक्षणों का प्रदर्शन देखा। इस दौरान सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र द्विवेदी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार, नरेंद्र शर्मा, बृजमोहन गुप्ता, उपासना शाह तथा मोबाइल प्रयोगशाला पर तैनात विश्लेषक मौजूद रहे।विशेषज्ञों ने दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मसाले, खाद्य तेल, शहद, चायपत्ती, आटा, गुड़, चीनी तथा अन्य खाद्य पदार्थों में होने वाली सामान्य मिलावट की पहचान के सरल परीक्षणों का प्रदर्शन किया। मौके पर दूध में डिटर्जेंट और स्टार्च, घी में स्टार्च, हल्दी व लाल मिर्च में कृत्रिम रंग, काली मिर्च में पपीते के बीज, चांदी के वर्क में एल्युमिनियम सहित कई प्रकार की मिलावट की पहचान करके दिखाई गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये परीक्षण केवल प्रारंभिक पहचान के लिए हैं। किसी भी संदिग्ध नमूने की अंतिम पुष्टि विभागीय प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच के बाद ही की जाती है। जिलाधिकारी ने कहा कि मिलावट के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार जागरूक उपभोक्ता है। उन्होंने कहा कि फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स के माध्यम से लोगों को ऐसे सरल परीक्षण बताए जा रहे हैं, जिनसे वे खाद्य पदार्थों की प्रारंभिक जांच स्वयं कर सकते हैं। जागरूकता ही मिलावट के खिलाफ सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने लोगों से स्वच्छ एवं विश्वसनीय प्रतिष्ठानों से ही खाद्य सामग्री खरीदने, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर ध्यान देने तथा कहीं भी गंभीर मिलावट की जानकारी मिलने पर तत्काल खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचित करने की अपील की। *बॉक्स :* *ऐसे करें मिलावटी खाद्य पदार्थों की पहचान* *● चांदी के वर्क में एल्युमिनियम* वर्क को उंगलियों से मसलने पर शुद्ध चांदी का वर्क चूर्ण जैसा बिखर जाता है, जबकि एल्युमिनियम छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है। आग में जलाने पर भी दोनों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। *दूध और दुग्ध उत्पाद* ● दूध, पनीर, खोया और छेना में स्टार्च आयोडीन (टिंचर ऑफ आयोडीन) की 2-3 बूंद डालें। नीला रंग बनने पर स्टार्च की मिलावट की आशंका होती है। *● दूध में डिटर्जेंट* दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं। गाढ़ा झाग बनने पर डिटर्जेंट की मिलावट हो सकती है, जबकि शुद्ध दूध में केवल हल्की झाग बनती है। *● घी और मक्खन में स्टार्च* आधा चम्मच घी या मक्खन में आयोडीन की कुछ बूंद डालें। नीला रंग बनने पर स्टार्चयुक्त पदार्थ की मिलावट की आशंका होती है। पानी में डालने पर शुद्ध काली मिर्च नीचे बैठ जाती है, जबकि पपीते के बीज ऊपर तैरते हैं। देखने पर पपीते के बीज चिकने और अंडाकार होते हैं। पानी में लाल मिर्च पाउडर डालते ही यदि रंग की धारियां उतरने लगें तो कृत्रिम रंग की मिलावट हो सकती है। एक गिलास पानी में एक चम्मच हल्दी डालें। शुद्ध हल्दी नीचे बैठते समय हल्का पीला रंग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी पानी को गहरा पीला रंग देती है।असली दालचीनी की परतें बेहद पतली होती हैं। कैसिया की छाल मोटी और कई परतों वाली दिखाई देती है।थोड़ी हींग जलाने पर शुद्ध हींग कपूर की तरह जलती है। पानी में घोलने पर शुद्ध हींग का घोल दूधिया सफेद बनता है और उसमें तलछट नहीं रहती।तेल, शहद और मिठाइया ,पानी में शहद की एक बूंद डालें। शुद्ध शहद तुरंत नहीं घुलता, जबकि मिलावटी शहद पानी में फैलने लगता है। शहद में भीगी सूती बत्ती आसानी से जल जाती है, जबकि पानी मिला होने पर वह नहीं जलती या चटकने की आवाज करती है। कुछ प्रकार की रासायनिक मिलावट की पहचान विशेष अभिकर्मकों से की जाती है, जिसका प्रदर्शन मोबाइल प्रयोगशाला में किया गया।अच्छी गुणवत्ता वाली लौंग पानी में नीचे बैठ जाती है, जबकि इस्तेमाल की जा चुकी लौंग ऊपर तैरने लगती है।सरसों के बीज चिकने होते हैं और दबाने पर अंदर से पीले दिखाई देते हैं। सत्यानाशी (आरगेमोन) के बीज खुरदरे, काले और अंदर से सफेद होते हैं। फिल्टर पेपर या सफेद कागज पर पानी की कुछ बूंदें डालने से यदि रंग की धारियां बनें तो कृत्रिम रंग की मिलावट की आशंका हो सकती है।हरी मटर को आधे घंटे पानी में भिगोकर रखें। यदि पानी का रंग अलग होने लगे तो कृत्रिम रंग की मिलावट हो सकती है।
- बर्रा विश्व बैंक स्थित स्मृति पैलेस में कुर्मी परिवार समागम द्वारा आज अधिवक्ताओं का सम्मान समारोह आयोजित किया गया, समाज में अधिवक्ताओं की भूमिका एवं उपयोगिता विषय पर गोष्ठी हुयी। समारोह की शुरुआत लौहपुरुष सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुयी। इसके पश्चात सभी ने खड़े होकर कुरमी ध्वज गीत गाया। कुर्मी परिवार समागम का उद्देश्य बताते हुए कानपुर उद्योग व्यापार मण्डल के जिलाध्यक्ष आशीष सचान ने कहा कि समाज की प्रतिभाओं और युवाओं के आगे बढ़ाना, हमारा संकल्प है। हमें शिक्षा, संस्कार और एकता के साथ युवा पीढ़ी को नेतृत्व के लिए तैयार करना है। हम सभी मतभेद भुलाकर समाज को मजबूत और संगठित बनाने का संकल्प ले। अतिथियों का स्वागत सरदार सेना के जिलाध्यक्ष अरबिन्द सिंह सचान, बी.डी. सचान, बृजेन्द्र स्वरूप सचान, अनुक्रम सिंह, अवधेश कटियार ने किया। अधिवक्ता न्यायपालिका व आम नागरिक के बीच अहम कड़ी के रूप में सजग प्रहरी का कार्य करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एकीकृत बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम कटियार ने कहा कि अधिवक्ता समाज कानून के शासन न्याय और सामाजिक समानता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण स्तम्भ है। इस अवसर पर अतिथियों ने रीना कटियार, मीनाक्षी सचान, लीना सचान, रुचि सचान, सुचेता सचान, रमा कटियार, प्रीति वर्मा, प्रियंका कटियार, रजनी कटियार, राकेश सचान, विनोद सिंह सचान, सुशील कटियार सहित अन्य अधिवक्ताओं का सम्मान पटका पहनाकर व स्मृति चिन्ह देकर किया। बाइट -आशीष सचान (कार्यक्रम आयोजक /कानपुर उद्योग व्यापार मण्डल के जिलाध्यक्ष)2
- उद्घाटन और बोर्ड के बाद भी अधूरी गली! किदवई नगर में पार्षद के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश उद्घाटन और बोर्ड के बाद भी अधूरी गली! किदवई नगर में पार्षद के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश स्मार्ट सिटी और विकास के दावों के बीच स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लापरवाही की एक और तस्वीर सामने आई है। मामला किदवई नगर के उस्मानपुर गाँव (वार्ड नंबर 92) का है, जहाँ मकान नंबर 41, 42 और 43 वाली गली में बदहाली चरम पर है। इलाके के लोगों का आरोप है कि नाली, सीवर और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं यहाँ नदारद हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इस गली के निर्माण के लिए बाकायदा पूजन किया गया, नारियल फोड़े गए और 'कार्य संपन्न' होने का बोर्ड तक लगा दिया गया, लेकिन ज़मीन पर काम एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा। वार्ड: 92 (उस्मानपुर गाँव, किदवई नगर) स्थानीय लोगों के आरोप- "हमारे यहाँ ना लाइट है, ना सीवर है और ना ही नालियों की व्यवस्था है। पार्षद अवधेश त्रिपाठी जी ने यहाँ आकर पूजन किया, नारियल फोड़ा, जय-जयकार हुई... यहाँ तक कि कार्य संपन्न होने का बोर्ड भी लगा दिया गया, लेकिन गली का निर्माण आज तक नहीं हुआ। हमें सिर्फ़ 15 दिन और महीने भर का झूठा आश्वासन देकर बरगलाया जा रहा है।" स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लगातार पार्षद और प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ़ आश्वासन ही मिलता है। अब देखना यह होगा कि 'कागज़ों और बोर्ड' पर संपन्न हो चुके इस विकास कार्य की सुध ज़मीनी स्तर पर कब ली जाती है।4
- ‼️माँ पार्वती के जन्मोत्सव से शिवमय हुआ कथा पंडाल, गूंजे हर-हर महादेव के जयघोष।‼️ ➡️उन्नाव के मगरवारा स्थित श्री गोकुल बाबा मंदिर में श्री शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस माँ पार्वती का दिव्य जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भजन-कीर्तन, पुष्पवर्षा और जयघोष से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। संत श्री प्रशांत प्रभु जी महाराज ने माँ पार्वती के अवतरण का मार्मिक प्रसंग सुनाया, वहीं श्रद्धालुओं ने वैभव लक्ष्मी महायज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं।...1
- कानपुर बिल्हौर पुलिस ने ट्यूबबेल के इंजनों के पार्ट्स चोरी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश। किया कानपुर बिल्हौर पुलिस ने ट्यूबबेल के इंजनों के पार्ट्स चोरी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश। किया1
- कानपुर किदवई नगर थाना क्षेत्र से मोबाइल स्नैचिंग करने वाले तीन नाबालिक सहित चार अभियुक्त को गिरफ्तार किया कानपुर किदवई नगर थाना क्षेत्र से मोबाइल स्नैचिंग करने वाले तीन नाबालिक सहित चार अभियुक्त को गिरफ्तार किया1