एक बीज से शुरू हुई कहानी… अब 200 पौधों की हरित पाठशाला बन गई कभी-कभी किसी बड़े बदलाव की शुरुआत किसी बड़ी योजना से नहीं, बल्कि एक छोटे-से बीज से होती है। सांदीपनि विद्यालय राहतगढ़ के प्राथमिक विभाग में शुरू हुई “पाठशाला नर्सरी” भी ऐसी ही एक छोटी-सी पहल थी, जिसका उद्देश्य केवल पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि बच्चों को करके सीखने, प्रकृति को समझने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने का अवसर देना था। नर्सरी तैयार करने के लिए बच्चों ने अपने घरों से मिट्टी, गोबर की खाद, अलग-अलग पौधों के बीज तथा दूध की खाली पैकेट जैसी अनुपयोगी सामग्री एकत्र की। इन्हीं पैकेटों को गमलों का रूप देकर बच्चों ने उनमें बीज बोए। शुरुआत में बच्चों ने आम, नीम , मुनगा , खजूर , जामुन और इमली जैसे पौधों की गुठलियों से पौधे तैयार करने का प्रयास किया। इसके साथ ही अलग-अलग प्रकार के पौधों को नर्सरी में शामिल किया गया, ताकि बच्चे पौधों की विविधता को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उन्हें वास्तविक रूप में देखकर समझ सकें। आज नर्सरी में अनेक प्रकार के पौधे विकसित हो रहे हैं। इनमें सोयाबीन, उड़द और मूंगफली जैसी फसल वाले पौधे, मिर्च और धनिया जैसे मसाले वाले पौधे, विभिन्न फूल वाले पौधे जैसे गेंदा, तथा बेल वाले पौधे जैसे करेला, लौकी और कद्दू भी शामिल हैं। इस विविधता ने नर्सरी को बच्चों के लिए एक वास्तविक जीवित प्रयोगशाला बना दिया है। कुल 100 बीजों से शुरू हुई इस यात्रा में लगभग 70 बीज सफलतापूर्वक पौधों में विकसित हो चुके हैं, जबकि आसपास से प्राकृतिक रूप से उगे छोटे पौधों को भी बच्चे नर्सरी में लाकर संरक्षित कर रहे हैं। इस तरह नर्सरी में अब लगभग 200 पौधे विकसित हो चुके हैं। पौधों के साथ बच्चों का तुलनात्मक अध्ययन इस नर्सरी की सबसे खास बात यह है कि बच्चे केवल पौधे उगा नहीं रहे, बल्कि उनके विकास का तुलनात्मक अध्ययन भी कर रहे हैं। बच्चे अलग-अलग पौधों की ऊंचाई, पत्तियों की संख्या, वृद्धि की गति, पानी की आवश्यकता और देखभाल में होने वाले अंतर का नियमित अवलोकन कर रहे हैं। वे अपने अवलोकनों को दर्ज करते हैं और अलग-अलग पौधों के विकास की तुलना करते हैं। इस प्रक्रिया में गणित उनके लिए किताब का विषय नहीं रह जाता—वे वास्तव में पौधों की ऊंचाई मापकर आंकड़े तैयार करते हैं। पर्यावरण अध्ययन में वे पौधों की पहचान, उनकी वृद्धि, आवश्यकताओं और उपयोग को समझते हैं तथा हिंदी में अपने अनुभवों और अवलोकनों को लिखकर व्यक्त करते हैं। इस तरह एक ही नर्सरी में हिंदी, गणित और पर्यावरण अध्ययन का सीखना स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे से जुड़ गया है। बरसात में उगे पौधों को मिला नया जीवन कहानी यहीं नहीं रुकी। बरसात के दिनों में बच्चे अपने आसपास उगने वाले छोटे-छोटे पौधों पर भी नजर रखने लगे। कई पौधे बारिश के पानी से अपने आप उग आते हैं, लेकिन देखभाल न मिलने के कारण कुछ समय बाद सूख जाते हैं और स्वतः नष्ट हो जाते है । बच्चे ऐसे पौधों को पहचानकर सावधानीपूर्वक नर्सरी में स्थानांतरित कर रहे हैं और उनकी देखभाल कर रहे हैं। अर्थात् नर्सरी में केवल बच्चों द्वारा बोए गए बीज ही नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा स्वयं उगाए गए पौधों को भी नया जीवन मिल रहा है। ➡️ अब समाज भी बन रहा है इस हरित यात्रा का हिस्सा धीरे-धीरे इस पहल की खुशबू विद्यालय की चारदीवारी से बाहर भी पहुंचने लगी। बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों ने भी नर्सरी के लिए पौधे उपलब्ध कराकर इस अभियान में सहभागिता की। समाज के लोगों से भी आह्वान किया गया कि उनके आसपास बरसात में उगने वाले छोटे पौधे यदि देखभाल के अभाव में सूखने वाले हों, तो उन्हें विद्यालय की नर्सरी तक पहुंचाया जाए। बच्चे उन्हें विकसित करेंगे और आगे विद्यालय परिसर तथा समाज में रोपित किया जाएगा। इस तरह पाठशाला नर्सरी अब केवल विद्यालय की गतिविधि नहीं रही, बल्कि विद्यालय, परिवार और समाज की साझा हरित पहल बनती जा रही है। ➡️ बच्चों के हाथों तैयार पौधे बने सम्मान और स्नेह के उपहार सबसे सुंदर पड़ाव तब आया, जब बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए पौधे दूसरों के लिए उपहार बनने लगे। नर्सरी में बच्चों द्वारा तैयार किए गए पौधों को डाइट के प्राचार्य श्री अखिलेश पाठक, डाइट से श्री राजकुमार असाटी तथा पीपल फाउंडेशन, भोपाल से आए सदस्यों को स्नेहपूर्वक भेंट किया गया। यह केवल एक पौधे का उपहार नहीं था, बल्कि बच्चों की मेहनत, सीख और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का उपहार था। लोक शिक्षण संचलानय से असिस्टेंट डायरेक्टर श्रीमती साक्षी जैन ने भी बच्चों की इस अभिनव पहल की सराहना की और उनके प्रयासों को प्रोत्साहित किया। बच्चों के लिए इससे बड़ी खुशी क्या होगी कि जिस पौधे को उन्होंने बीज से तैयार किया, उसे वे स्वयं किसी अतिथि को अपने हाथों से भेंट कर रहे हैं। ➡️ अब पौधे उगेंगे भी और बच्चों की कहानियां भी नर्सरी की पूरी यात्रा को बच्चों की अभिव्यक्ति से जोड़ते हुए आगे दीवार पत्रिका (बाल पत्रिका) तैयार की जाएगी। इसमें बच्चे अपने अनुभव, पौधों के विकास के आंकड़े, चित्र, तुलनात्मक अध्ययन, अवलोकन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद बच्चों की सीख और उनके कार्यों को समाज के सामने रखने के लिए बाल मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चे स्वयं अपनी नर्सरी, पौधों की विकास यात्रा और उससे मिली सीख को प्रस्तुत करेंगे।
एक बीज से शुरू हुई कहानी… अब 200 पौधों की हरित पाठशाला बन गई कभी-कभी किसी बड़े बदलाव की शुरुआत किसी बड़ी योजना से नहीं, बल्कि एक छोटे-से बीज से होती है। सांदीपनि विद्यालय राहतगढ़ के प्राथमिक विभाग में शुरू हुई “पाठशाला नर्सरी” भी ऐसी ही एक छोटी-सी पहल थी, जिसका उद्देश्य केवल पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि बच्चों को करके सीखने, प्रकृति को समझने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने का अवसर देना था। नर्सरी तैयार करने के लिए बच्चों ने अपने घरों से मिट्टी, गोबर की खाद, अलग-अलग पौधों के बीज तथा दूध की खाली पैकेट जैसी अनुपयोगी सामग्री एकत्र की। इन्हीं पैकेटों को गमलों का रूप देकर बच्चों ने उनमें बीज बोए। शुरुआत में बच्चों ने आम, नीम , मुनगा , खजूर , जामुन और इमली जैसे पौधों की गुठलियों से पौधे तैयार करने का प्रयास किया। इसके साथ ही अलग-अलग प्रकार के पौधों को नर्सरी में शामिल किया गया, ताकि बच्चे पौधों की विविधता को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उन्हें वास्तविक रूप में देखकर समझ सकें। आज नर्सरी में अनेक प्रकार के पौधे विकसित हो रहे हैं। इनमें सोयाबीन, उड़द और मूंगफली जैसी फसल वाले पौधे, मिर्च और धनिया जैसे मसाले वाले पौधे, विभिन्न फूल वाले पौधे जैसे गेंदा, तथा बेल वाले पौधे जैसे करेला, लौकी और कद्दू भी शामिल हैं। इस विविधता ने नर्सरी को बच्चों के लिए एक वास्तविक जीवित प्रयोगशाला बना दिया है। कुल 100 बीजों से शुरू हुई इस यात्रा में लगभग 70 बीज सफलतापूर्वक पौधों में विकसित हो चुके हैं, जबकि आसपास से प्राकृतिक रूप से उगे छोटे पौधों को भी बच्चे नर्सरी में लाकर संरक्षित कर रहे हैं। इस तरह नर्सरी में अब लगभग 200 पौधे विकसित हो चुके हैं। पौधों के साथ बच्चों का तुलनात्मक अध्ययन इस नर्सरी की सबसे खास बात यह है कि बच्चे केवल पौधे उगा नहीं रहे, बल्कि उनके विकास का तुलनात्मक अध्ययन भी कर रहे हैं। बच्चे अलग-अलग पौधों की ऊंचाई, पत्तियों की संख्या, वृद्धि की गति, पानी की आवश्यकता और देखभाल में होने वाले अंतर का नियमित अवलोकन कर रहे हैं। वे अपने अवलोकनों को दर्ज करते हैं और अलग-अलग पौधों के विकास की तुलना करते हैं। इस प्रक्रिया में गणित उनके लिए किताब का विषय नहीं रह जाता—वे वास्तव में पौधों की ऊंचाई मापकर आंकड़े तैयार करते हैं। पर्यावरण अध्ययन में वे पौधों की पहचान, उनकी वृद्धि, आवश्यकताओं और उपयोग को समझते हैं तथा हिंदी में अपने अनुभवों और अवलोकनों को लिखकर व्यक्त करते हैं। इस तरह एक ही नर्सरी में हिंदी, गणित और पर्यावरण अध्ययन का सीखना स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे से जुड़ गया है। बरसात में उगे पौधों को मिला नया जीवन कहानी यहीं नहीं रुकी। बरसात के दिनों में बच्चे अपने आसपास उगने वाले छोटे-छोटे पौधों पर भी नजर रखने लगे। कई पौधे बारिश के पानी से अपने आप उग आते हैं, लेकिन देखभाल न मिलने के कारण कुछ समय बाद सूख जाते हैं और स्वतः नष्ट हो जाते है । बच्चे ऐसे पौधों को पहचानकर सावधानीपूर्वक नर्सरी में स्थानांतरित कर रहे हैं और उनकी देखभाल कर रहे हैं। अर्थात् नर्सरी में केवल बच्चों द्वारा बोए गए बीज ही नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा स्वयं उगाए गए पौधों को भी नया जीवन मिल रहा है। ➡️ अब समाज भी बन रहा है इस हरित यात्रा का हिस्सा धीरे-धीरे इस पहल की खुशबू विद्यालय की चारदीवारी से बाहर भी पहुंचने लगी। बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों ने भी नर्सरी के लिए पौधे उपलब्ध कराकर इस अभियान में सहभागिता की। समाज के लोगों से भी आह्वान किया गया कि उनके आसपास बरसात में उगने वाले छोटे पौधे यदि देखभाल के अभाव में सूखने वाले हों, तो उन्हें विद्यालय की नर्सरी तक पहुंचाया जाए। बच्चे उन्हें विकसित करेंगे और आगे विद्यालय परिसर तथा समाज में रोपित किया जाएगा। इस तरह पाठशाला नर्सरी अब केवल विद्यालय की गतिविधि नहीं रही, बल्कि विद्यालय, परिवार और समाज की साझा हरित पहल बनती जा रही है। ➡️ बच्चों के हाथों तैयार पौधे बने सम्मान और स्नेह के उपहार सबसे सुंदर पड़ाव तब आया, जब बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए पौधे दूसरों के लिए उपहार बनने लगे। नर्सरी में बच्चों द्वारा तैयार किए गए पौधों को डाइट के प्राचार्य श्री अखिलेश पाठक, डाइट से श्री राजकुमार असाटी तथा पीपल फाउंडेशन, भोपाल से आए सदस्यों को स्नेहपूर्वक भेंट किया गया। यह केवल एक पौधे का उपहार नहीं था, बल्कि बच्चों की मेहनत, सीख और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का उपहार था। लोक शिक्षण संचलानय से असिस्टेंट डायरेक्टर श्रीमती साक्षी जैन ने भी बच्चों की इस अभिनव पहल की सराहना की और उनके प्रयासों को प्रोत्साहित किया। बच्चों के लिए इससे बड़ी खुशी क्या होगी कि जिस पौधे को उन्होंने बीज से तैयार किया, उसे वे स्वयं किसी अतिथि को अपने हाथों से भेंट कर रहे हैं। ➡️ अब पौधे उगेंगे भी और बच्चों की कहानियां भी नर्सरी की पूरी यात्रा को बच्चों की अभिव्यक्ति से जोड़ते हुए आगे दीवार पत्रिका (बाल पत्रिका) तैयार की जाएगी। इसमें बच्चे अपने अनुभव, पौधों के विकास के आंकड़े, चित्र, तुलनात्मक अध्ययन, अवलोकन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद बच्चों की सीख और उनके कार्यों को समाज के सामने रखने के लिए बाल मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चे स्वयं अपनी नर्सरी, पौधों की विकास यात्रा और उससे मिली सीख को प्रस्तुत करेंगे।
- देखिए एक शराबी आई पुलिस अधिकारी की गाड़ी के सामने कैसे लेट गया🤣😄 रेलवे स्टेशन सागर मध्य प्रदेश शराबी लेट पुलिस अधिकारी की गाड़ी के सामने 😄🤣1
- नेपाल में आई अभी तक की सबसे बड़ी आपदा जनजीवन अस्त-व्यस्त भारी नुकसान!! नेपाल में कोसी नदी के पानी से भारी बाढ़ का पानी बिहार की ओर जा रहा है बिहार में भी अलर्ट घोषित किया गया।2
- एमपी मध्य प्रदेश जिला सागर नरयावली विधानसभा क्षेत्र मुल्लाजी का खेड़ा ग्राम पंचायत वार्ड क्रमांक की सड़क है यह मीडिया वाले सभी सत्ता के दलाल है भाजपा सरकार की दलाल बन चुकी है मीडिया वाले1
- नेपाल में सैलाब का खौफनाक मंजर! नेपाल से सामने आया एक और खौफनाक वीडियो नेपाल में सैलाब का खौफनाक मंजर! 😱🌊 नेपाल से सामने आया एक और खौफनाक वीडियो, जिसमें सैलाब का रौद्र रूप साफ नजर आ रहा है। चारों तरफ पानी का कहर और लोगों में चीख-पुकार का माहौल दिखाई दे रहा है। प्रकृति के इस विकराल रूप ने हर किसी को दहला दिया है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। देखिए कैसे पलभर में तबाही का मंजर बन गया पूरा इलाका!1
- झूलेलाल मंदिर में चालीहा महोत्सव हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है, पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर और राम शर्मा का हुआ सम्मान लोकेशन:-बीना रिपोर्टर:-राकेश सेन बीना :-पूज्य सिंधी पंचायत द्वारा गांधी वार्ड सिंधी कॉलोनी स्थित झूलेलाल मंदिर पर चालीहा महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। 19 जुलाई से प्रारंभ हुए इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को बुलाकर सम्मानित किया जा रहा है। बुधवार को झूलेलाल मंदिर पर पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर, समाजसेवी राम शर्मा, उद्योगपति महेंद्र यादव एवं राधे-राधे प्रभात फेरी मंडल के सदस्यों का स्वागत किया गया। *पंडित विष्णु शर्मा (सोनू महाराज) ने कहा* कि कलयुग में केवल प्रभु का नाम ही सब कुछ है। भगवान झूलेलाल का अवतार धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए हुआ था। 40 दिनों तक नियम-संयम से की गई साधना भक्त को ईश्वर के निकट ले जाती है। सभी को प्रेम और सद्भावना के साथ भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए। *पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर ने कहा* कि भगवान झूलेलाल वरुण देवता के अवतार हैं। जब मुगलों के अत्याचारों से लोग परेशान थे, तब समाज के लोगों ने सिंधु नदी के तट पर बैठकर भगवान की आराधना की थी। तब आकाशवाणी हुई कि आने वाले समय में झूलेलाल जी का अवतार होगा और सभी संकट समाप्त होंगे। सिंधी पंचायत समाज द्वारा जिस तरह से सभी समुदायों को जोड़ने की पहल की जा रही है, वह प्रशंसनीय है। *समाजसेवी राम शर्मा ने कहा* कि सिंधी समाज ने जो भाईचारा और सद्भावना का उदाहरण पेश करते हुए विभिन्न समुदाय के लोगों को सम्मान दिया है, वह निश्चित ही स्वागत योग्य है। इस तरह के आयोजन समाज में एकता और प्रेम को बढ़ाते हैं। इस अवसर पर मंदिर में विशेष महाआरती हुई, जिसमें श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। चालीहा पर्व का विशेष धार्मिक महत्व है, 40 दिनों तक व्रत और आराधना के बाद 41वें दिन यह पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। कार्यक्रम में राम टहलरेजा, चंदू बाधवानी, पार्षद प्रकाश बजाज, बालचंद वाधवानी, अशोक कुकरेजा, पवन लालवानी, जोधन सिंह, आशीष बाधवानी, गोलू, लक्ष्य नाथानी आदि उपस्थित थे। अंत में प्रसाद वितरण किया गया।4
- लोकशन बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना। ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस सेवादल के संस्थापक डॉ. एन.एस. सुब्बाराव की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम ब्लॉक कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष ओमप्रकाश पंजाबी एवं शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय के नेतृत्व में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में डॉ. एन.एस. सुब्बाराव के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने उनके जीवन, देश सेवा और कांग्रेस सेवादल के प्रति योगदान को याद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहर कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सेवादल देश सेवा और पार्टी के प्रति समर्पित संगठन है। वहीं विशेष अतिथि अनुसूचित जाति कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अशोक परिहार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओमप्रकाश पंजाबी ने की, जबकि संचालन विक्रांत गोलनदाज ने किया। शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय ने डॉ. सुब्बाराव के जीवन परिचय एवं उनके योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर केदार पटेल, बलराम अहिरवार, सुखलाल अहिरवार, महेंद्र नवैया, खुशीलाल अहिरवार, कृष्णा कैथोरिया, जननू लाल राय, पीयूष तिवारी, रामकिशन अहिरवार, शेर सिंह अहिरवार, लक्ष्मण चंदेल, प्रभुदयाल सोनी, सुरेश सेन, मोतीलाल अहिरवार, ओपी लारोट सहित कांग्रेस सेवादल के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। लोकशन बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना। ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस सेवादल के संस्थापक डॉ. एन.एस. सुब्बाराव की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम ब्लॉक कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष ओमप्रकाश पंजाबी एवं शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय के नेतृत्व में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में डॉ. एन.एस. सुब्बाराव के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने उनके जीवन, देश सेवा और कांग्रेस सेवादल के प्रति योगदान को याद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहर कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सेवादल देश सेवा और पार्टी के प्रति समर्पित संगठन है। वहीं विशेष अतिथि अनुसूचित जाति कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अशोक परिहार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओमप्रकाश पंजाबी ने की, जबकि संचालन विक्रांत गोलनदाज ने किया। शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय ने डॉ. सुब्बाराव के जीवन परिचय एवं उनके योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर केदार पटेल, बलराम अहिरवार, सुखलाल अहिरवार, महेंद्र नवैया, खुशीलाल अहिरवार, कृष्णा कैथोरिया, जननू लाल राय, पीयूष तिवारी, रामकिशन अहिरवार, शेर सिंह अहिरवार, लक्ष्मण चंदेल, प्रभुदयाल सोनी, सुरेश सेन, मोतीलाल अहिरवार, ओपी लारोट सहित कांग्रेस सेवादल के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- लोकशन बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना। ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस सेवादल के संस्थापक डॉ. एन.एस. सुब्बाराव की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम ब्लॉक कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष ओमप्रकाश पंजाबी एवं शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय के नेतृत्व में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में डॉ. एन.एस. सुब्बाराव के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने उनके जीवन, देश सेवा और कांग्रेस सेवादल के प्रति योगदान को याद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहर कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सेवादल देश सेवा और पार्टी के प्रति समर्पित संगठन है। वहीं विशेष अतिथि अनुसूचित जाति कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अशोक परिहार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओमप्रकाश पंजाबी ने की, जबकि संचालन विक्रांत गोलनदाज ने किया। शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय ने डॉ. सुब्बाराव के जीवन परिचय एवं उनके योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर केदार पटेल, बलराम अहिरवार, सुखलाल अहिरवार, महेंद्र नवैया, खुशीलाल अहिरवार, कृष्णा कैथोरिया, जननू लाल राय, पीयूष तिवारी, रामकिशन अहिरवार, शेर सिंह अहिरवार, लक्ष्मण चंदेल, प्रभुदयाल सोनी, सुरेश सेन, मोतीलाल अहिरवार, ओपी लारोट सहित कांग्रेस सेवादल के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। लोकशन बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना। ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस सेवादल के संस्थापक डॉ. एन.एस. सुब्बाराव की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम ब्लॉक कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष ओमप्रकाश पंजाबी एवं शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय के नेतृत्व में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में डॉ. एन.एस. सुब्बाराव के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने उनके जीवन, देश सेवा और कांग्रेस सेवादल के प्रति योगदान को याद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहर कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सेवादल देश सेवा और पार्टी के प्रति समर्पित संगठन है। वहीं विशेष अतिथि अनुसूचित जाति कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अशोक परिहार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओमप्रकाश पंजाबी ने की, जबकि संचालन विक्रांत गोलनदाज ने किया। शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय ने डॉ. सुब्बाराव के जीवन परिचय एवं उनके योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर केदार पटेल, बलराम अहिरवार, सुखलाल अहिरवार, महेंद्र नवैया, खुशीलाल अहिरवार, कृष्णा कैथोरिया, जननू लाल राय, पीयूष तिवारी, रामकिशन अहिरवार, शेर सिंह अहिरवार, लक्ष्मण चंदेल, प्रभुदयाल सोनी, सुरेश सेन, मोतीलाल अहिरवार, ओपी लारोट सहित कांग्रेस सेवादल के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- लोकशन बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना। ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस सेवादल के संस्थापक डॉ. एन.एस. सुब्बाराव की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम ब्लॉक कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष ओमप्रकाश पंजाबी एवं शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय के नेतृत्व में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में डॉ. एन.एस. सुब्बाराव के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने उनके जीवन, देश सेवा और कांग्रेस सेवादल के प्रति योगदान को याद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहर कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सेवादल देश सेवा और पार्टी के प्रति समर्पित संगठन है। वहीं विशेष अतिथि अनुसूचित जाति कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अशोक परिहार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओमप्रकाश पंजाबी ने की, जबकि संचालन विक्रांत गोलनदाज ने किया। शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय ने डॉ. सुब्बाराव के जीवन परिचय एवं उनके योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर केदार पटेल, बलराम अहिरवार, सुखलाल अहिरवार, महेंद्र नवैया, खुशीलाल अहिरवार, कृष्णा कैथोरिया, जननू लाल राय, पीयूष तिवारी, रामकिशन अहिरवार, शेर सिंह अहिरवार, लक्ष्मण चंदेल, प्रभुदयाल सोनी, सुरेश सेन, मोतीलाल अहिरवार, ओपी लारोट सहित कांग्रेस सेवादल के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।1