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बिहार में 100 वर्ष पुराना मंदिर नदी में बहा,हजारों लोगों की जान मुश्किल में ! बिहार के भागलपुर के शंकरपुर में 100 वर्ष पुराना मंदिर नदी में बहा , शंकर पुर गाँव में चैती माता दुर्गा मंदिर देखते ही देखते गंगा नदी में समा गया , मंदिर के डूबने के खौफनाक मंजर को देखने के लिये हजारों की संख्या में गाँव के लोग उमड़ पड़े,
आदर्श भारत TV
बिहार में 100 वर्ष पुराना मंदिर नदी में बहा,हजारों लोगों की जान मुश्किल में ! बिहार के भागलपुर के शंकरपुर में 100 वर्ष पुराना मंदिर नदी में बहा , शंकर पुर गाँव में चैती माता दुर्गा मंदिर देखते ही देखते गंगा नदी में समा गया , मंदिर के डूबने के खौफनाक मंजर को देखने के लिये हजारों की संख्या में गाँव के लोग उमड़ पड़े,
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- मुरादनगर थाना परिसर को अपना घर मानने वाले पत्रकार उनका कहना है थाना इंचार्ज जेब में 9:00 बजे से शुरू होती है पूरी रात। सभी का मामला पत्रकार अपने स्तर से निपट आते हैं मुरादनगर थाना इंचार्ज पत्रकारों के आगे मून। पालिका को लेकर कथित “गोदी मीडिया” की भूमिका पर उठे सवाल, पत्रकारिता के नाम पर पक्षपात के आरोप मुरादनगर। मुरादनगर पालिका क्षेत्र में इन दिनों कथित तौर पर कुछ ऐसे लोगों की गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जो स्वयं को पत्रकार बताते हैं। स्थानीय स्तर पर लियाकत बोस नामक व्यक्ति की भूमिका को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि लियाकत बोस नगरपालिका से जुड़े मामलों में निष्पक्ष पत्रकारिता करने के बजाय कथित रूप से एकतरफा तरीके से खबरें प्रस्तुत करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनता की समस्याओं और सरकारी व्यवस्था से जुड़े तथ्यों को निष्पक्ष रूप से सामने रखना है, न कि किसी संस्था या व्यक्ति के पक्ष में प्रचार करना। इसी को लेकर सवाल उठ रहा है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पत्रकार बताता है तो क्या उसके पास पत्रकारिता से संबंधित आवश्यक पहचान, संस्थान से अधिकृत नियुक्ति अथवा अन्य वैध प्रमाण मौजूद हैं? यदि नहीं, तो उसके द्वारा पत्रकारिता के नाम पर की जा रही गतिविधियों की जांच आवश्यक है। हालांकि, लियाकत बोस के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। यदि उनके पास पत्रकारिता से संबंधित वैध दस्तावेज अथवा आरोपों के संबंध में कोई स्पष्टीकरण है, तो उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए। पत्रकारिता की आड़ में किसी भी प्रकार की मनमानी पर रोक जरूरी स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। ऐसे में पत्रकारिता के नाम पर यदि कोई व्यक्ति नियमों की अनदेखी करता है या किसी सरकारी संस्था के पक्ष में लगातार एकतरफा प्रचार करता है, तो संबंधित अधिकारियों और पत्रकार संगठनों को मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। अब देखना यह है कि मुरादनगर पालिका और संबंधित प्रशासन ऐसे मामलों में कोई जांच करता है या नहीं, और यह भी कि स्वयं को पत्रकार बताने वाले व्यक्तियों की पत्रकारिता संबंधी वैधता की जांच किस स्तर पर की जाती है।1
- अलीगढ़ :- सड़कों के जाम में बेबस पिता,बीमार बेटी ने पिता की गोद में ही ली अंतिम सांस! बेटी की तबीयत बिगड़ी तो पिता उसे गोद में लेकर अस्पताल के लिए दौड़ा, लेकिन रास्ते में 2 KM लंबा जाम मिल गया। पिता जाम खुलने का इंतजार करता रहा… मगर जाम नहीं खुला। आखिरकार बीमार बेटी ने पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया।1
- जनपद गाजियाबाद में आज दिनांक 02.09.2026 को पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट गाजियाबाद महोदय की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण गोष्ठी आयोजित की गई। आज दिनांक 02.09.2026 को पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट गाजियाबाद महोदय की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण गोष्ठी आयोजित की गई। इस बैठक में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था/यातायात), पुलिस उपायुक्त (यातायात), अपर पुलिस उपायुक्त (यातायात), समस्त सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) तथा समस्त यातायात निरीक्षक उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य पिछले महीने की प्रवर्तन कार्यवाहियों की समीक्षा करना, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले जाम से आम जनता को निजात दिलाना था। इसके साथ ही पुलिस प्रबंधन और अन्य कार्यदायी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित कर लंबित कार्यों को यथाशीघ्र पूर्ण कराने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इसके अलावा निम्न बिन्दुओं पर कार्ययोजना के तहत निम्न कार्यों को पूर्ण कराने हेतु निर्णय लिया गयाः- साप्ताहिक विशेष ड्रंक एण्ड ड्राइव अभियानः प्रत्येक सप्ताह के अंत में सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए, प्रत्येक शुक्रवार और शनिवार की शाम को विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों की कड़ी चेकिंग की जाएगी तथा शराब पीकर वाहन चलाते पाये जाने वाले चालको के विरूद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाई जा सके। जैब्रा लाइन नियमों का पालनः शहर के प्रमुख चौराहों और तिराहों पर जहां जैब्रा लाइनें बनी हैं, वहां वाहन चालकों को पी.ए. (पब्लिक एड्रेस) सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों के जरिए सचेत किया जाएगा कि रेड लाईट होने पर अपने वाहन को जैब्रा लाइन के पीछे ही रोकें और यातायात नियमों का पालन करें। Ø आईटीएमएस के माध्यम से चालानः शहर में बिना हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग और रेड लाइट उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरूद्ध आईटीएमएस (ITMS) के द्वारा कुल 1,26,105 चालान किए गए हैं। भविष्य में भी यातायात पुलिस नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी विशेष सतर्कता बरतेगी। इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकलः प्रत्येक सबजोन में यातायात व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त करने के लिए एक इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल की तैनाती की जाएगी। जैसे ही सबजोन के किसी भी हिस्से में जाम लगने की सूचना मिलेगी, यह टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर यातायात को सुचारू और सामान्य कराएगी। सोशल मीडिया पर लाइव अपडेटः आम नागरिकों के दैनिक आवागमन को सुगम बनाने के लिए नगर के मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति की जानकारी यातायात पुलिस के सोशल मीडिया X हैंडल Gzbtrafficpol के माध्यम से नियमित रूप से अपडेट की जायेगी।1
- गाजियाबाद के मसूरी में किराए के कमरे पर मिला यातायात सिपाही का शव, पुलिस जांच में जुटी। गाजियाबाद के थाना मसूरी क्षेत्र से एक दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है। मसूरी स्थित आकाश नगर में यातायात पुलिस में तैनात एक पुलिसकर्मी अपने किराए के कमरे में मृत अवस्था में पाए गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। मृतक पुलिसकर्मी की पहचान योगेश कुमार शर्मा के रूप में हुई है, जो गाजियाबाद यातायात पुलिस में कार्यरत थे। वह अपने किराए के मकान में बेड पर मृत पड़े मिले। पुलिस के अनुसार मृतक के शरीर पर किसी भी तरह की बाहरी चोट या हिंसा के जाहिरा निशान नहीं मिले हैं। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल पुलिस मामले में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई कर रही है। बाइट- सुनील कुमार, सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मसूरी1
- कनावनी के किसानों का संघर्ष रंग लाया, आसपास के गांवों ने बढ़ाया समर्थन 20 वें दिन भी संघर्ष जारी गाजियाबाद। कनावनी के किसानों को आसपास के गांवों मकनपुर, अर्थला, पहलादगढ़ी, छिजारसी, बहलोलपुर, दुजाना और कचेडा सहित कई गांवों के किसानों का लगातार समर्थन मिल रहा है अन्य गांवों के किसान भी समर्थन देने धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं ग्रामीणों ने कनावनी के किसानों के संघर्ष में पूरी ताकत के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। किसानों का कहना है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार कनावनी गांव की भूमि का मुआवजा निर्धारित आधार पर दिया जाना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कथित रूप से अन्य गांवों के आधार पर मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया की जा रही है। किसानों का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई से माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन नहीं हो रहा है। किसान श्रीचंद नागर ने बताया कि कनावनी के किसान पिछले 20 दिनों से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हैं। किसानों की मांग बिल्कुल स्पष्ट है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए कनावनी गांव की भूमि का उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि आसपास के गांवों से मिल रहा समर्थन किसानों की एकजुटता को दर्शाता है और अब यह संघर्ष लगातार मजबूत हो रहा है। किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पूर्ण रूप से अनुपालन करते हुए कनावनी गांव की भूमि का उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक उनका धरना लगातार जारी रहेगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि मामले में किसी प्रकार की मनमानी न की जाए और न्यायालय के आदेश के अनुरूप ही मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जाए। किसानों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। आज धरने में मौजूद किसान एम.एस. नागर, चतर सिंह नागर, कैलाश नागर, श्याम सिंह अधाना, अंतराज कसाना, राजेंद्र नागर, जयपाल नागर, बाबू नागर, प्रवीण नागर, देवेंद्र नागर, अशोक कसाना, लेखराम जाटव, ओमप्रकाश बैंसला, बिजेंद्र बेसोया, अजय, अरुण, पिंटू आदि किसान मौजूद रहे।2
- गाजियाबाद पुलिस ने पूर्व आईबी अधिकारी सहित तीन लोग किए गिरफ्तार गाजियाबाद के इंदिरापुरम में NIA और CBI के नाम का डर दिखाकर करोड़ों की वसूली का खेल सामने आया है। खुद को बड़े सरकारी अधिकारी बताने वाले आरोपियों ने कारोबारी को ऐसा डराया कि मामला सेटल कराने के नाम पर 15 करोड़ रुपये तक की डिमांड कर डाली। पुलिस ने इस कथित वसूली गैंग के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 1 लाख 92 हजार रुपये कैश, तीन मोबाइल फोन और एक डायरी बरामद हुई है। वहीं दो आरोपी अभी फरार हैं। कहानी शुरू होती है गाजियाबाद के कारोबारी विकास मित्तल की दिल्ली स्थित फर्म से जुड़े एक नोटिस से... नोटिस NIA और CBI से संबंधित होने की बात सामने आई, और इसी को आरोपियों ने कमाई का हथियार बना लिया। पुलिस के मुताबिक, पहले फर्म के मैनेजर योगेश से संपर्क किया गया। सलमान नाम के शख्स ने दावा किया कि उसकी बड़े-बड़े अधिकारियों से पहचान है और वह नोटिस का सेटलमेंट करा सकता है। इसके बाद अनिल प्रताप सिंह ने खुद को उच्च रैंक का अधिकारी बताकर कारोबारी पक्ष से संपर्क किया। आरोप है कि कारोबारी को डराया गया— नोटिस का सेटलमेंट नहीं कराया तो जेल जाना पड़ेगा... फर्म बर्बाद हो जाएगी... और इसी डर के बीच मामले को निपटाने के नाम पर 15 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने कारोबारी से डराने-धमकाने के जरिए रकम वसूलना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, पैसे लेने के लिए आरोपी खुद कारोबारी के पास पहुंचे। इसी मामले में शिकायत मिलने के बाद इंदिरापुरम पुलिस, स्वाट और सर्विलांस टीम ने जांच शुरू की। CCTV फुटेज, मैनुअल इनपुट और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंकित द्विवेदी, अनिल प्रताप सिंह और सिद्धार्थ जैन के तौर पर हुई है। इनके पास से 1 लाख 92 हजार रुपये, तीन मोबाइल फोन और एक डायरी बरामद हुई है। वहीं इस पूरे मामले के दो किरदार अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं— अनिकेत उर्फ कबीर और सलमान। पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगा दी हैं। अब जांच सिर्फ तीन गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि NIA-CBI के नोटिस की जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची, इस कथित नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं और कारोबारी से अब तक कितनी रकम वसूली गई। यानी सरकारी जांच एजेंसियों का नाम... अफसर बनने का फर्जी रौब... जेल भेजने का डर... और फिर करोड़ों के सेटलमेंट की डिमांड— इंदिरापुरम में कथित फर्जी अफसरों के इस खेल ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है।1
- स्कूल टाइम पर जाम से बेहाल शालीमार गार्डन, जिम्मेदार कौन? गाजियाबाद। शालीमार गार्डन में स्कूल टाइम शुरू होते ही ग्रीन फील्ड स्कूल के आसपास सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। देखते ही देखते लंबा जाम लग जाता है। इस जाम में स्कूली बच्चे, अभिभावक, स्थानीय निवासी और नौकरी-पेशा लोग घंटों फंसने को मजबूर दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल के बाहर ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के लिए न तो स्कूल की ओर से पर्याप्त कर्मचारी या गार्ड नजर आते हैं और न ही स्कूल टाइम के दौरान यातायात पुलिस की नियमित व्यवस्था दिखाई देती है। स्कूल की छुट्टी और प्रवेश के समय सड़क पर एक साथ बड़ी संख्या में वाहन पहुंचते हैं। अभिभावक अपने बच्चों को लेने के लिए वाहन खड़े करते हैं, जिससे सड़क पर जगह कम पड़ जाती है और धीरे-धीरे जाम लंबा होता चला जाता है। सबसे बड़ी चिंता स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। जाम के बीच बच्चों को सड़क पार करने में परेशानी होती है और पैदल चलने वाले लोगों को भी वाहनों के बीच से निकलना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्कूल टाइम के दौरान कुछ समय के लिए ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए, स्कूल की ओर से ट्रैफिक गार्ड लगाए जाएं और वाहनों के खड़े होने के लिए उचित व्यवस्था की जाए तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अब सवाल यह है कि स्कूल टाइम में रोज लगने वाले इस जाम की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या स्कूल प्रबंधन को अपने गेट के बाहर यातायात व्यवस्था में सहयोग नहीं करना चाहिए? क्या ट्रैफिक पुलिस को स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय विशेष व्यवस्था नहीं करनी चाहिए? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—क्या बच्चों और आम लोगों को रोज इसी तरह जाम में फंसते रहना पड़ेगा? स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन, यातायात पुलिस और स्कूल प्रबंधन मिलकर मौके का निरीक्षण करें और स्कूल टाइम के दौरान स्थायी ट्रैफिक व्यवस्था लागू करें। संवाददाता रेनू पुरी4
- थाना वेव सिटी क्षेत्र में लूट का पर्दाफाश: 4 बदमाश गिरफ्तार, 2.03 लाख रुपये बरामद। गाजियाबाद :- स्वाट टीम अपराध शाखा और थाना वेव सिटी पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस टीम ने 21 अगस्त 2026 को दिल्ली-मेरठ रोड पर हुई 24.85 लाख रुपये की सनसनीखेज वारदात का सफल अनावरण करते हुए 4 वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट गाजियाबाद द्वारा अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे सशक्त अभियान के तहत 1 सितंबर 2026 को यह संयुक्त कार्रवाई की गई। पकड़े गए अभियुक्त शान, अनस उर्फ चुहिया, सोनू उर्फ अरमान और कामिल के कब्जे से पुलिस ने लूट के 2,03,540 रुपये बरामद किए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि उन्होंने 21 अगस्त की शाम हाईटेक कॉलेज डासना के सामने थार गाड़ी को स्कॉर्पियो से ओवरटेक करके रोका और नकदी लूटी थी। इस वारदात के लिए आरोपियों को मेरठ की कंपनी से कैश दिल्ली जाने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद आस मोहम्मद, आसिफ और ओसामा के साथ मिलकर रेकी व गाड़ियों का इंतजाम कर इस घटना को अंजाम दिया गया था।1