दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने 9 साल बाद फरार घोषित अपराधी को किया गिरफ्तार दिल्ली क्राइम ब्रांच को एक बड़ी कामयाबी मिली है। वर्ष 2017 के 52.5 लाख रुपये की सशस्त्र डकैती मामले में वांछित एक घोषित अपराधी को करीब 9 साल बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से गिरफ्तारी से बचने के लिए जहांगीरपुरी इलाके में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। यह आरोपी थाना मालवीय नगर में दर्ज सनसनीखेज डकैती मामले में वांछित था और पुलिस को उसकी काफी समय से तलाश थी। क्राइम ब्रांच की टीम ने मानव स्रोतों और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी का सटीक पता लगाकर उसे दबोच लिया। यह सफल कार्रवाई इंस्पेक्टर यशेंद्र सिंह के नेतृत्व में, एसीपी सतेंद्र मोहन के निर्देशन और डीसीपी संजीव कुमार यादव के समग्र पर्यवेक्षण में अंजाम दी गई। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की जांच की जा रही है।
दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने 9 साल बाद फरार घोषित अपराधी को किया गिरफ्तार दिल्ली क्राइम ब्रांच को एक बड़ी कामयाबी मिली है। वर्ष 2017 के 52.5 लाख रुपये की सशस्त्र डकैती मामले में वांछित एक घोषित अपराधी को करीब 9 साल बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से गिरफ्तारी से बचने के लिए जहांगीरपुरी इलाके में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। यह आरोपी थाना मालवीय नगर में दर्ज सनसनीखेज डकैती मामले में वांछित था और पुलिस को उसकी काफी समय से तलाश थी। क्राइम ब्रांच की टीम ने मानव स्रोतों और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी का सटीक पता लगाकर उसे दबोच लिया। यह सफल कार्रवाई इंस्पेक्टर यशेंद्र सिंह के नेतृत्व में, एसीपी सतेंद्र मोहन के निर्देशन और डीसीपी संजीव कुमार यादव के समग्र पर्यवेक्षण में अंजाम दी गई। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की जांच की जा रही है।
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- ताजा घटनाक्रम में, जांच के आधार पर CBI के सिटिंग डायरेक्टर रामनीश गीर तथा Delhi Police के रिटायर्ड ACP वी.के. पांडेय को दोषी ठहराया गया है। यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम चरण में है, जहां तीस हजारी कोर्ट द्वारा दोषियों को सजा सुनाई जाएगी।1
- दिल्ली क्राइम ब्रांच की एजीएस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय ड्रग कूरियर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन के दौरान कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो कूरियर सेवाओं के जरिए अमेरिका में साइकोट्रोपिक दवाइयों की अवैध सप्लाई कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में Zolpidem, Tramadol और Diazepam जैसी प्रतिबंधित दवाइयां बरामद की हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह फर्जी KYC दस्तावेज़ और नकली इनवॉइस का इस्तेमाल कर कूरियर नेटवर्क के जरिए विदेशों में ड्रग्स भेजता था। डिजिटल जांच में WhatsApp, बैंकिंग और UPI चैनलों के माध्यम से लेन-देन की पूरी ट्रेल भी सामने आई है। यह सफल कार्रवाई इंस्पेक्टर अरविंद के नेतृत्व में, एसीपी भगवती प्रसाद के निर्देशन और डीसीपी हर्ष इंदौरा के समग्र पर्यवेक्षण में अंजाम दी गई। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।1
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- Post by Kishanveer Rajput1
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