मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम इटमा में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं, जहाँ गांव में हाल ही में बनाई गई एक पानी की टंकी निर्माण के कुछ ही दिनों बाद अचानक भरभराकर ढह गई। गनीमत रही कि घटना के समय मौके पर मौजूद लोग समय रहते हट गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पानी की टंकी के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। उनका कहना है कि सीमेंट की जगह चूने की डस्ट और निम्न गुणवत्ता की सामग्री के इस्तेमाल के कारण टंकी मामूली दबाव भी नहीं झेल सकी और अपने आप ढह गई। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्राम पंचायत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत इटमा के सरपंच और जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ कराया गया होता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों का मानना है कि यदि टंकी गिरने के समय वहां अधिक लोग होते तो बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता था। घटना के बाद, ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा निर्माण कार्य में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम इटमा में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं, जहाँ गांव में हाल ही में बनाई गई एक पानी की टंकी निर्माण के कुछ ही दिनों बाद अचानक भरभराकर ढह गई। गनीमत रही कि घटना के समय मौके पर मौजूद लोग समय रहते हट गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पानी की टंकी के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। उनका कहना है कि सीमेंट की जगह चूने की डस्ट और निम्न गुणवत्ता की सामग्री के इस्तेमाल के कारण टंकी मामूली दबाव भी नहीं झेल सकी और अपने आप ढह गई। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्राम पंचायत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत इटमा के सरपंच और जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ कराया गया होता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों का मानना है कि यदि टंकी गिरने के समय वहां अधिक लोग होते तो बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता था। घटना के बाद, ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा निर्माण कार्य में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- जिले के सम्पूर्ण ग्रामीण क्षेत्रों में भाटिया शराब कंपनी के मैनेजर संतोष सिंह के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार तेज़ी से पैर पसार चुका है, जिससे युवा पीढ़ी में नशे की लत लग रही है। यह अवैध धंधा न केवल कानूनी व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है, बल्कि समाज के लिए भी बेहद हानिकारक साबित हो रहा है। आरोप है कि आबकारी विभाग के अधिकारी विजय सिंह की कथित मिलीभगत के कारण इस अवैध कार्य को बढ़ावा मिल रहा है। मा शारदा की धार्मिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध मैहर में, यह अवैध शराब का व्यापार शासन के लिए चिंता का विषय बन गया है, खासकर तब जब प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने अवैध शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मैहर के नेताओं का आना-जाना उसी रास्ते से होता है जहाँ संतोष सिंह द्वारा अवैध टीन शेड के नीचे शराब बेची जाती है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस अवैध धंधे में नेताओं या प्रशासन की भी सहमति है? अब सभी की निगाहें नवागत जिला कलेक्टर पर टिकी हैं कि वे इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं। ऐसे में, जिला प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह इस अवैध व्यापार को जड़ से खत्म करने के लिए त्वरित और कठोर कार्यवाही करे।1
- भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने 21 जून को सतना जिले के मैहर स्थित बड़ा अखाड़ा परिसर में अपना स्थापना दिवस समारोह मनाया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर जितेंद्र वशिष्ठ रहे, जबकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एस.के. त्रिपाठी ने इसकी अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथियों में संस्थापक गंगा विश्वकर्मा, इंद्रभान सिंह बघेल और भूपेंद्र सिंह परिहार शामिल थे, और कार्यक्रम का संचालन मंजू सर ने किया। समारोह को संबोधित करते हुए, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जितेंद्र राय ने अपनी पार्टी को एक विशुद्ध हिंदूवादी पार्टी बताया, जो देश की अन्य पार्टियों से अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जन मोर्चा पार्टी में कोई भी गैर-हिंदू सदस्य नहीं रहेगा, जिसे उन्होंने पार्टी की सबसे बड़ी विशेषता करार दिया। राय ने संगठन की विचारधारा और विस्तार योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर दिलीप बुनकर, रविशंकर यादव, शैलेश सिंह, सोनू, ऋषु श्रीवास्तव, विष्णु सोनी, विष्णु गुप्ता, संजीव शर्मा और अनूप श्रीवास्तव सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए। सभी वक्ताओं ने संगठन को मजबूत करने और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। समारोह का समापन संगठन के विस्तार और पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के सर्वसम्मत संकल्प के साथ हुआ।1
- सतना जिले के नागौद-परसमनिया मार्ग पर यात्री सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। इस मार्ग पर संचालित कुछ यात्री वाहन न केवल अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठा रहे हैं, बल्कि वे यात्रियों के साथ-साथ भारी मात्रा में लोहे की सरिया और अन्य निर्माण सामग्री भी ढो रहे हैं। पहाड़ी और घुमावदार रास्ते पर ऐसे ओवरलोड वाहनों का संचालन दुर्घटना की आशंका को कई गुना बढ़ा रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि यात्री वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर उनके बीच लोहे की सरिया जैसी भारी सामग्री रखी जा रही है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उनका कहना है कि विशेष रूप से परसमनिया घाटी के तीखे मोड़ों और ढलानों पर इन वाहनों का चलना सीधे तौर पर हादसों को न्योता देने जैसा है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि इस मार्ग पर चल रहे ओवरलोड वाहनों की तत्काल जांच की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।1
- रीवा के एक नामचीन होटल से शुरू हुआ पारिवारिक और कानूनी विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जो हाई-प्रोफाइल सरकारी अधिकारियों से जुड़ा होने के कारण पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। रीवा के एक होटल के कमरे से शुरू हुआ यह हाई-प्रोफाइल ड्रामा अब कथित मारपीट के सीसीटीवी वीडियो, घरेलू हिंसा के गंभीर आरोपों और पुलिस थाने में चोरी की एफआईआर तक जा पहुंचा है। कांस्टेबल पत्नी भारती उपाध्याय ने अपने पति, जो वन विभाग में रेंजर के पद पर पदस्थ बृजेन्द्र पांडेय हैं, पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारती उपाध्याय का दावा है कि उन्होंने बीते 15 जून को अपने पति को रीवा के एक होटल के कमरे में किसी अन्य युवती के साथ रंगे हाथों पकड़ा था। महिला कांस्टेबल का आरोप है कि जब उन्होंने पति की इस हरकत का विरोध किया, तो रेंजर पति बृजेन्द्र पांडेय ने उनके साथ होटल के कमरे और परिसर में बेरहमी से मारपीट की। इस कथित मारपीट का एक सीसीटीवी फुटेज और वीडियो भी सामने आया है, जिसने इस पूरे मामले को और तूल दे दिया है। होटल के भीतर मचे इस बवाल के बाद मामला पूरी तरह कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है। पीड़ित कांस्टेबल पत्नी की शिकायत और सामने आए वीडियो के आधार पर घरेलू हिंसा के आरोपों के साथ-साथ चोरी की धाराओं में भी एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस फिलहाल इस पूरे मामले और वायरल वीडियो की बारीकी से जांच कर रही है।1
- मैहर के विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने बताया है कि मैहर क्षेत्र शिक्षा, रोजगार और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उनके अनुसार, इन तीनों महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मैहर लगातार प्रगति कर रहा है।1
- टाउन हॉल में रॉयल राजपूत संगठन का एक कार्यक्रम चल रहा था, जब अचानक बिजली चली गई। इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी उपस्थित थे।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले के रामपुर बाघेलान में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहाँ 6 मई को एक 11000 वोल्ट की बिजली लाइन की चपेट में आने से लाइनमेन सहायक राजेश द्विवेदी गंभीर रूप से झुलस गए। यह हादसा तब हुआ जब पड़खुरी ग्राम पंचायत निवासी राजेश द्विवेदी बाधा गाँव में एक डियो बांधने के लिए पोल पर चढ़कर काम कर रहे थे और रवि कुशवाहा द्वारा जानकारी होने के बावजूद लाइन चालू करा दी गई। अचानक एक मिनट के लिए लाइन चालू होने से राजेश द्विवेदी तार से चिपक कर आग की तरह धू-धू कर जलने लगे और लाइन बंद होते ही खंभे से नीचे गिर पड़े। इस भयावह दुर्घटना में राजेश द्विवेदी की रीढ़ की हड्डी टूट गई, उनके दोनों पैर बुरी तरह जल गए और दोनों हाथ करंट की चपेट में आकर झुलस गए। ग्रामीणों ने तुरंत उन्हें रामपुर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ से हालत गंभीर होने पर उन्हें बिड़ला अस्पताल सतना, फिर जबलपुर और अंततः नागपुर रेफर किया गया, जहाँ वे अब खतरे से बाहर हैं। हालांकि, इस दुर्घटना से उनका शरीर अपाहिज हो चुका है और उनके इलाज में लाखों रुपये का खर्च आया है। दुखद रूप से, शासन द्वारा उन्हें सहायता राशि के तौर पर मात्र 10,000 रुपये दिए गए हैं, जबकि परिवार ने उनकी जान बचाने के लिए कर्ज लिया है। राजेश द्विवेदी शासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कह रहे हैं कि 'साहब, मेरा शरीर जनता और शासन की सेवा में झुलस गया, अब मेरा न्याय कर दो।' यह सवाल उठ रहा है कि लाखों के इलाज के लिए वे राशि कहाँ से लाएँगे और अपाहिज होने के बाद उनके बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी कौन उठाएगा। खबर में शासन-प्रशासन पर अंधा होकर बैठने और गरीबों के प्रति गांधी जी के तीन बंदरों वाले 'अनदेखा, अनसुना, अनबोला' नियम अपनाने का आरोप लगाया गया है। अब देखना यह है कि इस गंभीर घटना पर कितने अधिकारियों के कान में जूँ रेंगती है और राजेश द्विवेदी को न्याय मिलता है या सभी मूक-बधिर बने रहते हैं।2