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कांग्रेस नेता अलका लांबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और राजनीतिक शैली को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों के समाधान पर ध्यान देने के बजाय भाषणों और प्रचार को अधिक महत्व देती है। लांबा के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर तेज हो गया है।
Md Mursaleen
कांग्रेस नेता अलका लांबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और राजनीतिक शैली को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों के समाधान पर ध्यान देने के बजाय भाषणों और प्रचार को अधिक महत्व देती है। लांबा के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर तेज हो गया है।
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- किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ में फुलवरिया ब्रिज एप्रोच एक बड़े खतरे का कारण बन गया है, जिससे कभी भी कोई गंभीर हादसा हो सकता है। इस स्थिति को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्यों मौन है।1
- वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है। यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।1
- शनिवार को टेढ़ागाछ अंचल कार्यालय में एक जनता दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें भूमि, रास्ता और राजस्व से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई। अंचल अधिकारी शशि कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस दरबार में कई मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया, जबकि जांच और आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण कुछ मामलों को लंबित रखा गया। इस दौरान नए आवेदन भी प्राप्त हुए। अधिकारियों ने लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और भूमि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर विशेष जोर दिया। अपनी समस्याओं को लेकर विभिन्न पंचायतों से ग्रामीण इस जनता दरबार में पहुँचे।1
- आज एक व्यक्ति बाढ़ का जायजा लेने के लिए गया, जहाँ उसने देखा कि उसके अपने आदमियों ने भारी मात्रा में तांबा तोड़ दिया है। इस घटना से उसे बहुत दुख हुआ और इसी कारण उसे उदास होकर घर वापस लौटना पड़ा।1
- एक महिला ने गहरे दुख और सदमे के साथ अपनी आपबीती साझा की है, जिसमें उसने बताया कि जिसे उसने स्वयं पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी के पति ने उसका सुहाग उजाड़ दिया। महिला के इस बयान से स्पष्ट होता है कि वह इस अकल्पनीय विश्वासघात से स्तब्ध है, जहाँ उसके द्वारा पाले गए व्यक्ति के पति ने ही उसे ऐसा गहरा आघात दिया जिससे उसके विवाहित जीवन पर संकट आ गया है।1
- मनीष एसके झा की ओर से 'पोंडती खान सर' को बिहार से बाहर भगाने की इच्छा व्यक्त किए जाने के चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। इन दावों पर, खान सर की टीम ने तत्काल और करारा जवाब दिया है।1
- किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ में आयोजित जनता दरबार में फरियादियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान, मौके पर ही कई शिकायतों का त्वरित निष्पादन किया गया।1
- आरा में एक कथित फेक एनकाउंटर की घटना पर भारी बवाल छिड़ गया है। इस घटना में भरत तिवारी का कथित तौर पर फेक एनकाउंटर हुआ है, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। इस मामले पर आरा के सांसद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सम्राट चौधरी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'गलत किया'। इस पूरे प्रकरण के बाद, लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं।1