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देवीथात का गोठी मेला: जहां सदियों पुरानी आस्था, देव परंपरा और लोक संस्कृति आज भी है जीवंत देवीथात का गोठी मेला: जहां सदियों पुरानी आस्था, देव परंपरा और प्रकृति का होता है अद्भुत संगम ‎ विकासखंड जौनपुर के अंतर्गत तहसील नैनबाग की पट्टी ईडवालस्यूँ स्थित प्राचीन देवस्थल देवीथात में श्रावण मास की 15 गते आयोजित होने वाला गोठी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोकआस्था, सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुरानी देव परंपरा का जीवंत प्रतीक है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को इस वर्ष भी स्थानीय लोगों ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया। क्षेत्र में इस मेले के साथ ही पर्व-त्योहारों के शुभारंभ की मान्यता भी जुड़ी हुई है। ‎ ‎लोकमान्यताओं के अनुसार प्राचीन देवस्थल देवीथात में माँ गौरजा का दिव्य निवास है, जबकि भगवान नागराज अपनी बहन माँ गौरजा से मिलने वर्ष में दो बार—बैसाख मास की द्वितीया तथा भाद्रपद में जन्माष्टमी के उपरांत—अपने सिद्धधाम नागटिब्बा से दिव्य घोड़ी पर सवार होकर यहां पहुंचते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पूर्वकाल में कई लोगों को इस दिव्य मिलन के दर्शन हुए थे। आज भी यह दिव्य परंपरा निरंतर जारी है, लेकिन इसके दर्शन किसी को नहीं हो पाते। यही आस्था इस देवस्थल को क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। ‎ ‎गोठी मेले की सबसे अनूठी परंपरा यह है कि क्षेत्र के ग्वाल-बाल बुग्याल में मिट्टी से भगवान नागदेवता का स्वरूप निर्मित कर उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजते हैं। इसके उपरांत केदार पाती, दही, मक्खन, धूप, दीप, पुष्प एवं प्रसाद अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, उत्तम कृषि, पशुधन की उन्नति और समस्त जनमानस के मंगल की कामना की जाती है। सदियों से चली आ रही यह लोक परंपरा आज भी उसी श्रद्धा, विश्वास और आत्मीयता के साथ निभाई जा रही है, जो इस मेले को उत्तराखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक बनाती है। ‎ ‎पूर्व सैनिक एवं ग्राम प्रधान भटवाड़ी सुनील सेमवाल ने बताया कि इस वर्ष यह मेला 31 जुलाई को गोठी मेले का आयोजन पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। मेले में पट्टी ईडवालस्यूँ, जौनपुर क्षेत्र तथा दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माँ गौरजा और भगवान नागराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि अपनी अनूठी लोक परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता के कारण यह मेला वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बना हुआ है तथा नई पीढ़ी भी बढ़-चढ़कर इसमें भागीदारी निभा रही है। ‎ ‎प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से भी देवीथात का महत्व अत्यंत विशिष्ट है। यहां से भगवान नागराज के सिद्धधाम नागटिब्बा और कोट श्रीकोट के दिव्य दर्शन होते हैं। देवदार, बांज और बुरांश के घने जंगलों से घिरा यह देवस्थल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ हिमालयी प्रकृति की अनुपम छटा का भी साक्षी बनाता है। ‎ ‎बदलते समय के साथ आधुनिकता का प्रभाव भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन देवीथात का गोठी मेला आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, लोकसंस्कृति और देव परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बना हुआ है। यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की उस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज है, जिसे स्थानीय समाज ने सदियों से अपनी आस्था, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता के बल पर आज तक सुरक्षित रखा है। ‎

3 hrs ago
user_Vijaypal Rana
Vijaypal Rana
टिहरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
3 hrs ago
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देवीथात का गोठी मेला: जहां सदियों पुरानी आस्था, देव परंपरा और लोक संस्कृति आज भी है जीवंत देवीथात का गोठी मेला: जहां सदियों पुरानी आस्था, देव परंपरा और प्रकृति का होता है अद्भुत संगम ‎ विकासखंड जौनपुर के अंतर्गत तहसील नैनबाग की पट्टी ईडवालस्यूँ स्थित प्राचीन देवस्थल देवीथात में श्रावण मास की 15 गते आयोजित होने वाला गोठी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोकआस्था, सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुरानी देव परंपरा का जीवंत प्रतीक है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को इस वर्ष भी स्थानीय लोगों ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया। क्षेत्र में इस मेले के साथ ही पर्व-त्योहारों के शुभारंभ की मान्यता भी जुड़ी हुई है। ‎ ‎लोकमान्यताओं के अनुसार प्राचीन देवस्थल देवीथात में माँ गौरजा का दिव्य निवास है, जबकि भगवान नागराज अपनी बहन माँ गौरजा से मिलने वर्ष में दो बार—बैसाख मास की द्वितीया तथा भाद्रपद में जन्माष्टमी के उपरांत—अपने सिद्धधाम नागटिब्बा से दिव्य घोड़ी पर सवार होकर यहां पहुंचते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पूर्वकाल में कई लोगों को इस दिव्य मिलन के दर्शन हुए थे। आज भी यह दिव्य परंपरा निरंतर जारी है, लेकिन इसके दर्शन किसी को नहीं हो पाते। यही आस्था इस देवस्थल को क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। ‎ ‎गोठी मेले की सबसे अनूठी परंपरा यह है कि क्षेत्र के ग्वाल-बाल बुग्याल में मिट्टी से भगवान नागदेवता का स्वरूप निर्मित कर उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजते हैं। इसके उपरांत केदार पाती, दही, मक्खन, धूप, दीप, पुष्प एवं प्रसाद अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, उत्तम कृषि, पशुधन की उन्नति और समस्त जनमानस के मंगल की कामना की जाती है। सदियों से चली आ रही यह लोक परंपरा आज भी उसी श्रद्धा, विश्वास और आत्मीयता के साथ निभाई जा रही है, जो इस मेले को उत्तराखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक बनाती है। ‎ ‎पूर्व सैनिक एवं ग्राम प्रधान भटवाड़ी सुनील सेमवाल ने बताया कि इस वर्ष यह मेला 31 जुलाई को गोठी मेले का आयोजन पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। मेले में पट्टी ईडवालस्यूँ, जौनपुर क्षेत्र तथा दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माँ गौरजा और भगवान नागराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि अपनी अनूठी लोक परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता के कारण यह मेला वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बना हुआ है तथा नई पीढ़ी भी बढ़-चढ़कर इसमें भागीदारी निभा रही है। ‎ ‎प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से भी देवीथात का महत्व अत्यंत विशिष्ट है। यहां से भगवान नागराज के सिद्धधाम नागटिब्बा और कोट श्रीकोट के दिव्य दर्शन होते हैं। देवदार, बांज और बुरांश के घने जंगलों से घिरा यह देवस्थल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ हिमालयी प्रकृति की अनुपम छटा का भी साक्षी बनाता है। ‎ ‎बदलते समय के साथ आधुनिकता का प्रभाव भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन देवीथात का गोठी मेला आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, लोकसंस्कृति और देव परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बना हुआ है। यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की उस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज है, जिसे स्थानीय समाज ने सदियों से अपनी आस्था, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता के बल पर आज तक सुरक्षित रखा है। ‎

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  • मसूरी में 200 साल पुरानी कब्रगाह और अंतिम नमाज स्थल को प्रशासन ने किया ध्वस्त, मुस्लिम समुदाय में भारी आक्रोश, कुछ देर के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग किया जाम। NIU रिपोर्टर - सुनील सोनकर मसूरी के लक्ष्मणपुरी क्षेत्र में शनिवार को एक धार्मिक ढांचे को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़क पर उतर आए और राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि नगर पालिका परिषद की है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर कार्रवाई की गई, वह कोई नई संरचना नहीं थी, बल्कि वर्षों से उनके धार्मिक और सामाजिक उपयोग में रहा स्थल है। उनका दावा है कि यह स्थान करीब 200 वर्ष पुराना है तथा यहां उनके पूर्वज दफन हैं। समुदाय के लोगों ने कहा कि प्रशासन जिस संरचना को मस्जिद बता रहा है, वह नियमित नमाज के लिए उपयोग होने वाली मस्जिद नहीं, बल्कि एक टीनशेड है जहां अंतिम संस्कार के बाद मृतकों की अंतिम नमाज अदा की जाती रही है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बिना उनकी भावनाओं को समझे कार्रवाई की गई। उनका कहना था कि यदि यह भूमि वास्तव में सरकारी थी तो इतने वर्षों तक इस पर किसी प्रकार का विवाद या कार्रवाई क्यों नहीं हुई। समुदाय के लोगों ने कहा कि धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों में सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। कार्रवाई के विरोध में लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। वहीं एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने कहा कि संबंधित भूमि न तो वक्फ बोर्ड की है और न ही किसी निजी व्यक्ति अथवा समुदाय के स्वामित्व में है। संयुक्त जांच में यह भूमि नगर पालिका परिषद मसूरी की पाई गई है। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग, नगर पालिका परिषद, छावनी परिषद और वक्फ बोर्ड से जुड़े अभिलेखों की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि संरचना पालिका की भूमि पर बनी थी और अतिक्रमण की श्रेणी में आती थी। एसडीएम के अनुसार प्रशासन की ओर से संबंधित पक्ष को तीन बार नोटिस जारी कर स्वेच्छा से संरचना हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन नोटिसों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद नियमानुसार पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और कानून से ऊपर कोई नहीं है। घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, जबकि समुदाय के लोगों ने मामले को लेकर आगे भी कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की बात कही है।
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    मसूरी में 200 साल पुरानी कब्रगाह और अंतिम नमाज स्थल को प्रशासन ने किया ध्वस्त, मुस्लिम समुदाय में भारी आक्रोश, कुछ देर के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग किया जाम। NIU 
रिपोर्टर - सुनील सोनकर   
मसूरी के लक्ष्मणपुरी क्षेत्र में शनिवार को एक धार्मिक ढांचे को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़क पर उतर आए और राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि नगर पालिका परिषद की है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर कार्रवाई की गई, वह कोई नई संरचना नहीं थी, बल्कि वर्षों से उनके धार्मिक और सामाजिक उपयोग में रहा स्थल है। उनका दावा है कि यह स्थान करीब 200 वर्ष पुराना है तथा यहां उनके पूर्वज दफन हैं। समुदाय के लोगों ने कहा कि प्रशासन जिस संरचना को मस्जिद बता रहा है, वह नियमित नमाज के लिए उपयोग होने वाली मस्जिद नहीं, बल्कि एक टीनशेड है जहां अंतिम संस्कार के बाद मृतकों की अंतिम नमाज अदा की जाती रही है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बिना उनकी भावनाओं को समझे कार्रवाई की गई। उनका कहना था कि यदि यह भूमि वास्तव में सरकारी थी तो इतने वर्षों तक इस पर किसी प्रकार का विवाद या कार्रवाई क्यों नहीं हुई। समुदाय के लोगों ने कहा कि धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों में सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।
कार्रवाई के विरोध में लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
वहीं एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने कहा कि संबंधित भूमि न तो वक्फ बोर्ड की है और न ही किसी निजी व्यक्ति अथवा समुदाय के स्वामित्व में है। संयुक्त जांच में यह भूमि नगर पालिका परिषद मसूरी की पाई गई है। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग, नगर पालिका परिषद, छावनी परिषद और वक्फ बोर्ड से जुड़े अभिलेखों की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि संरचना पालिका की भूमि पर बनी थी और अतिक्रमण की श्रेणी में आती थी।
एसडीएम के अनुसार प्रशासन की ओर से संबंधित पक्ष को तीन बार नोटिस जारी कर स्वेच्छा से संरचना हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन नोटिसों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद नियमानुसार पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और कानून से ऊपर कोई नहीं है।
घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, जबकि समुदाय के लोगों ने मामले को लेकर आगे भी कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की बात कही है।
    user_Deep Maithani - News India Update NIU Journalist Uttarakhand
    Deep Maithani - News India Update NIU Journalist Uttarakhand
    Graphic designer विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    7 hrs ago
  • हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत ने रोड का किया शिलान्यास हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत ने रोड का किया शिलान्यास लगातार विकास कार्यों में जुटी है हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत
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    हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत ने रोड का किया शिलान्यास 
हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत ने रोड का किया शिलान्यास
लगातार विकास कार्यों में जुटी है हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत
    user_हरिद्वार टुडे
    हरिद्वार टुडे
    हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    10 hrs ago
  • हर पल दिन हो या रात राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट लगातार प्रशासन के कंधे से कंधा मिला कर कर रहा है कार्य राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट द्वारा संचालित कांवड़ सेवा एवं चलित मेडिकल सेवा शिविरों में संगठन के पदाधिकारियों का प्रमुख योगदान रहा। भगीरथ के सम्मान में हम आ गए मैदान में" के संकल्प के साथ की टीम हरिद्वार से रुड़की तक शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटी हुई है। 1. डॉ. सतपाल सैनी जिला संरक्षक, रुड़की 2. डॉ. सुरेश सैनी जिला संरक्षक, हरिद्वार एवं जिला चिकित्सा अधिकारी, हरिद्वार 3. श्री चेतन चौधरी युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष, हरिद्वार 4. श्रीमती अलका सैनी राष्ट्रीय सचिव, 5. श्री प्रदीप शर्मा प्रदेश अध्यक्ष, 6. श्री पंकज सैनी राष्ट्रीय अध्यक्ष, सभी अपनी टीम के साथ चलित कांवड़ सेवा कर रहे हैं। शिविरों में निशुल्क जल, विश्राम, मार्गदर्शन एवं डॉ. दीपमाला के नेतृत्व में 11 डॉक्टरों की मेडिकल टीम द्वारा प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रदीप शर्मा ने कहा कि संगठन के सभी पदाधिकारी तन-मन-धन से सेवा में लगे हैं। रुड़की और हरिद्वार के संरक्षकों व युवा मोर्चा के सहयोग से हजारों कांवड़ियों को राहत मिली है। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पंकज सैनी ने सभी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना की और कहा कि आगे भी इसी तरह मानव सेवा में लगा रहेगा।
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    हर पल दिन हो या रात राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट लगातार प्रशासन के कंधे से कंधा मिला कर कर रहा है कार्य
राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट द्वारा संचालित कांवड़ सेवा एवं चलित मेडिकल सेवा शिविरों में संगठन के पदाधिकारियों का प्रमुख योगदान रहा। भगीरथ के सम्मान में हम आ गए मैदान में" के संकल्प के साथ की टीम हरिद्वार से रुड़की तक शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटी हुई है।
1.  डॉ. सतपाल सैनी  जिला संरक्षक, रुड़की 
2.  डॉ. सुरेश सैनी जिला संरक्षक, हरिद्वार एवं जिला चिकित्सा अधिकारी,  हरिद्वार
3.  श्री चेतन चौधरी युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष, हरिद्वार
4.  श्रीमती अलका सैनी राष्ट्रीय सचिव, 
5.  श्री प्रदीप शर्मा प्रदेश अध्यक्ष, 
6.  श्री पंकज सैनी राष्ट्रीय अध्यक्ष, 
सभी अपनी टीम के साथ चलित कांवड़ सेवा कर रहे हैं। शिविरों में निशुल्क जल, विश्राम, मार्गदर्शन एवं डॉ. दीपमाला के नेतृत्व में 11 डॉक्टरों की मेडिकल टीम द्वारा प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रदीप शर्मा ने कहा कि संगठन के सभी पदाधिकारी तन-मन-धन से सेवा में लगे हैं। रुड़की और हरिद्वार के संरक्षकों व युवा मोर्चा के सहयोग से हजारों कांवड़ियों को राहत मिली है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पंकज सैनी ने सभी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना की और कहा कि  आगे भी इसी तरह मानव सेवा में लगा रहेगा।
    user_ Lavish Saini आचर्य प्राण दास
    Lavish Saini आचर्य प्राण दास
    Social club हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    10 hrs ago
  • मंशादेवी मंदिर प्रबंधन द्वारा पिछले दिनों दावा किया गया था कि मंदिर में चढाए गये फूल, चुनरी, नारियल आदि सामग्री फिर से मंदिर में नहीं चढ़ने के लिए नहीं आएंगे लेकिन यह दावा कोरा दावा ही रहा! मंदिर में चढ़ने वाली यह सामग्री फिर से बिकने के लिए चोर रास्तों से मंदिर मार्ग पर बनी प्रसाद की दुकानों तक पहुंचाई जा रही है। जहां फिर से दुकानदार श्रद्धालुओं को इसे बेच देते हैं और फिर यह सभी सामग्री फिर वहीं पहुंच जाती है जहां पहले चढा़ई गई थी। दरअसल श्रद्धालुओं की आस्था का स्थल मंशादेवी मंदिर कुछ लोगों के लिए मोटी कमाई का स्थान है। चढ़ावे को फिर से चढ़ाने में सौ फीसदी का टर्नओवर है, जिससे इस काम में माफिया टाईप के लोगों का इनवाल्वमेंट है,जिनकी मंदिर प्रबंधन में पैठ है, जिसके कारण मंदिर प्रबंधन के दावे एक तरफ और सच्चाई दूसरी तरफ बनी हुई है। (_कुमार दुष्यंत_)
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    मंशादेवी मंदिर प्रबंधन द्वारा पिछले दिनों दावा किया गया था कि मंदिर में चढाए गये फूल, चुनरी, नारियल आदि सामग्री फिर से मंदिर में नहीं चढ़ने के लिए नहीं आएंगे लेकिन यह दावा कोरा दावा ही रहा! मंदिर में चढ़ने वाली यह सामग्री फिर से बिकने के लिए चोर रास्तों से मंदिर मार्ग पर बनी प्रसाद की दुकानों तक पहुंचाई जा रही है। जहां फिर से दुकानदार श्रद्धालुओं को इसे बेच देते हैं और फिर यह सभी सामग्री फिर वहीं पहुंच जाती है जहां पहले चढा़ई गई थी। दरअसल श्रद्धालुओं की आस्था का स्थल मंशादेवी मंदिर कुछ लोगों के लिए मोटी कमाई का स्थान है। चढ़ावे को फिर से चढ़ाने में सौ फीसदी का टर्नओवर है, जिससे इस काम में माफिया टाईप के लोगों का इनवाल्वमेंट है,जिनकी मंदिर प्रबंधन में पैठ है, जिसके कारण मंदिर प्रबंधन के दावे एक तरफ और सच्चाई दूसरी तरफ बनी हुई है।
(_कुमार दुष्यंत_)
    user_लोकल न्यूज़ हरिद्वार  शहर की खबर शहर को खबर
    लोकल न्यूज़ हरिद्वार शहर की खबर शहर को खबर
    Journalist हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    12 hrs ago
  • निरंतर प्रयास में है राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट के कार्यकर्ता कोई भी चूक न हो कांवड़ मेले में राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट द्वारा संचालित *कांवड़ सेवा एवं चलित मेडिकल सेवा* शिविरों में संगठन के पदाधिकारियों का प्रमुख योगदान रहा। भगीरथ के सम्मान में हम आ गए मैदान में"* के संकल्प के साथ की टीम *हरिद्वार से रुड़की तक* शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटी हुई है। *सेवा में मुख्य योगदानकर्ता:* 1. *डॉ. सतपाल सैनी* - जिला संरक्षक, रुड़की 2. *डॉ. सुरेश सैनी* - जिला संरक्षक, हरिद्वार एवं जिला चिकित्सा अधिकारी, हरिद्वार 3. *श्री चेतन चौधरी* - युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष, हरिद्वार 4. *श्रीमती अलका सैनी* - राष्ट्रीय सचिव, 5. *श्री प्रदीप शर्मा* - प्रदेश अध्यक्ष, 6. *श्री पंकज सैनी* - राष्ट्रीय अध्यक्ष, सभी अपनी टीम के साथ चलित कांवड़ सेवा कर रहे हैं। शिविरों में निशुल्क जल, विश्राम, मार्गदर्शन एवं डॉ. दीपमाला के नेतृत्व में 11 डॉक्टरों की मेडिकल टीम द्वारा प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रदीप शर्मा ने कहा कि संगठन के सभी पदाधिकारी तन-मन-धन से सेवा में लगे हैं। रुड़की और हरिद्वार के संरक्षकों व युवा मोर्चा के सहयोग से हजारों कांवड़ियों को राहत मिली है। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पंकज सैनी ने सभी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना की और कहा कि R.S.T. आगे भी इसी तरह मानव सेवा में लगा रहेगा।
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    निरंतर प्रयास में है राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट के कार्यकर्ता कोई भी चूक न हो कांवड़ मेले में 
राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट द्वारा संचालित *कांवड़ सेवा एवं चलित मेडिकल सेवा* शिविरों में संगठन के पदाधिकारियों का प्रमुख योगदान रहा। भगीरथ के सम्मान में हम आ गए मैदान में"* के संकल्प के साथ की टीम *हरिद्वार से रुड़की तक* शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटी हुई है।
*सेवा में मुख्य योगदानकर्ता:*
1.  *डॉ. सतपाल सैनी* - जिला संरक्षक, रुड़की 
2.  *डॉ. सुरेश सैनी* - जिला संरक्षक, हरिद्वार एवं जिला चिकित्सा अधिकारी,  हरिद्वार
3.  *श्री चेतन चौधरी* - युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष, हरिद्वार
4.  *श्रीमती अलका सैनी* - राष्ट्रीय सचिव, 
5.  *श्री प्रदीप शर्मा* - प्रदेश अध्यक्ष, 
6.  *श्री पंकज सैनी* - राष्ट्रीय अध्यक्ष, 
सभी अपनी टीम के साथ चलित कांवड़ सेवा कर रहे हैं। शिविरों में निशुल्क जल, विश्राम, मार्गदर्शन एवं डॉ. दीपमाला के नेतृत्व में 11 डॉक्टरों की मेडिकल टीम द्वारा प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रदीप शर्मा ने कहा कि संगठन के सभी पदाधिकारी तन-मन-धन से सेवा में लगे हैं। रुड़की और हरिद्वार के संरक्षकों व युवा मोर्चा के सहयोग से हजारों कांवड़ियों को राहत मिली है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पंकज सैनी ने सभी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना की और कहा कि R.S.T. आगे भी इसी तरह मानव सेवा में लगा रहेगा।
    user_ Lavish Saini आचर्य प्राण दास
    Lavish Saini आचर्य प्राण दास
    Social club हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    10 hrs ago
  • म्हारी छोरी किसी छोरो से कम है के नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर में महिलाओं ने शनिवार को दो मनचलों का हाथों हाथ किया ऐसा ईलाज, मुंह पर पोती कालिख, बिच्छू घाससे की सुताई।
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    म्हारी छोरी किसी छोरो से कम है के 
नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर में महिलाओं ने शनिवार को दो मनचलों का हाथों हाथ किया ऐसा ईलाज, मुंह पर पोती कालिख, बिच्छू घाससे की सुताई।
    user_Dpk Chauhan
    Dpk Chauhan
    Farmer हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    5 hrs ago
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