* चार दशक में कमलनाथ ने बनाई छिंदवाड़ा की पहचान, भाजपा राज में बिगड़ती कानून - व्यवस्था ने बढ़ाई चिंता* *छिंदवाड़ा में बढ़ते अपराधों पर उठने लगे सवाल* *कमलनाथ के छिंदवाड़ा मॉडल पर भाजपा शासन में संकट? लगातार अपराधों से बढ़ी चिंता* *हसीब खान मंसूरी, संपादक - HK न्यूज MP* छिंदवाड़ा की पहचान केवल मध्यप्रदेश के एक जिले के रूप में नहीं, बल्कि देश के सामने एक ऐसे क्षेत्र के रूप में बनी है, जहां विकास को लंबे समय तक जनसेवा और दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। इस पहचान के निर्माण में पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद कमलनाथ की चार दशक से अधिक लंबी राजनीतिक यात्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सिंचाई और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों के कारण कमलनाथ ने छिंदवाड़ा को अपनी राजनीति का केंद्र ही नहीं, बल्कि अपनी कर्मभूमि बनाया। यही कारण है कि आज जब छिंदवाड़ा में अपराध की घटनाएं लगातार चर्चा में आती हैं, तो कमलनाथ की चिंता को केवल राजनीतिक बयान के रूप में देखना उचित नहीं होगा। जिस क्षेत्र को उन्होंने वर्षों तक विकास, व्यवस्था और जनविश्वास की मिसाल बनाने का प्रयास किया, वहां महिलाओं और बेटियों के खिलाफ अपराध, हत्या, नशे से जुड़े विवाद और अवैध शराब की शिकायतें सामने आना निश्चित रूप से चिंता का विषय है। *दो वर्षों की घटनाएं बढ़ाती हैं चिंता* पिछले करीब दो वर्षों में छिंदवाड़ा से सामने आई कई घटनाओं ने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मार्च 2024 में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या का मामला सामने आया था। 2025 में भी महिलाओं और परिवारों से जुड़े गंभीर अपराधों की खबरें सामने आती रहीं। जून 2025 में लावाघोघरी थाना क्षेत्र में शराब को लेकर हुए विवाद के बाद एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया। मई 2025 में शराब के नशे में हुए विवाद के दौरान एक बेटे द्वारा अपने पिता की कथित तौर पर हत्या किए जाने की खबर भी सामने आई। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि नशे और अपराध का संबंध केवल अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज की सुरक्षा को भी प्रभावित करता है। *बेटियों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल* छिंदवाड़ा में नाबालिगों और महिलाओं के खिलाफ सामने आई घटनाएं सरकार से जवाब मांगती हैं। मार्च 2025 में डेढ़ साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इसी तरह जुन्नारदेव क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में भी आरोपी को आजीवन कारावास की सजा हुई। ये मामले यह जरूर दिखाते हैं कि पुलिस और न्याय व्यवस्था ने कार्रवाई की, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाते हैं कि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। महिलाओं की सुरक्षा केवल एफआईआर दर्ज करने और आरोपी को गिरफ्तार करने का विषय नहीं है। पुलिस की सक्रियता, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, शिकायतों पर तत्काल प्रतिक्रिया, स्कूल-कॉलेजों के आसपास सुरक्षा और नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण इन सभी को मिलाकर सुरक्षित वातावरण तैयार होता है। *कमलनाथ के दौर की व्यवस्था को याद कर रही जनता* छिंदवाड़ा की राजनीति में कमलनाथ का स्थान इसलिए अलग है क्योंकि उनका रिश्ता इस क्षेत्र से दशकों पुराना है। उन्होंने छिंदवाड़ा को केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं देखा, बल्कि अपने राजनीतिक जीवन का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र के विकास को समर्पित किया। यही वजह है कि छिंदवाड़ा की सड़क से लेकर अस्पताल तक और शिक्षा से लेकर रोजगार तक की चर्चा में कमलनाथ के योगदान का उल्लेख बार-बार होता है। उनके समर्थकों के लिए छिंदवाड़ा का विकास मॉडल केवल इमारतों और सड़कों का मॉडल नहीं था। उसके पीछे एक ऐसी प्रशासनिक सोच भी थी जिसमें नागरिकों को व्यवस्था पर भरोसा दिलाना महत्वपूर्ण माना जाता था। आज भाजपा शासन में जब अपराध की घटनाएं सुर्खियां बनती हैं तो स्वाभाविक रूप से लोग उस पुराने दौर से तुलना करते हैं। यह तुलना केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं से जुड़ा सवाल है। विकास तभी सार्थक है जब नागरिक अपने घर, सड़क, बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस करे। *सांसद बंटी विवेक साहू को भी देना होगा जवाब* वर्तमान सांसद बंटी विवेक साहू को लेकर राजनीतिक स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिले में सक्रिय कुछ अपराधियों और बदमाशों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। ऐसे आरोप गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को अपराधियों का संरक्षक बताना उचित नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि यदि किसी अपराधी को राजनीतिक संरक्षण मिलने की शिकायत जनता या विपक्ष द्वारा की जाती है, तो उसकी जांच क्यों न हो? *छिंदवाड़ा को फिर चाहिए भरोसे का शासन* कमलनाथ ने चार दशक से ज्यादा समय तक इस क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण यहां की उपलब्धियों को उन्होंने अपनी उपलब्धि और यहां की समस्याओं को अपनी समस्या माना। इसलिए आज छिंदवाड़ा में अपराध की घटनाओं को लेकर उनकी चिंता को उस लंबे रिश्ते के संदर्भ में समझना चाहिए। छिंदवाड़ा की जनता ने विकास देखा है। उसने बड़े सपने देखे हैं। उसने यह भी देखा है कि एक पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्र को योजनाबद्ध प्रयासों के जरिए किस तरह राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। अब उसी जनता की अपेक्षा है कि विकास के साथ सुरक्षा और सम्मान का वातावरण भी मजबूत हो। आज आवश्यकता किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध से आगे बढ़कर एक स्पष्ट सवाल पूछने की है। क्या छिंदवाड़ा का नागरिक सुरक्षित है? क्या उसकी बेटी सुरक्षित है? क्या अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश है? क्या अपराधी कानून से डरता है? और क्या किसी राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्ति के कारण कानून की धार कमजोर नहीं पड़ती? कमलनाथ की छिंदवाड़ा के प्रति चिंता इसी व्यापक प्रश्न से जुड़ी है।
* चार दशक में कमलनाथ ने बनाई छिंदवाड़ा की पहचान, भाजपा राज में बिगड़ती कानून - व्यवस्था ने बढ़ाई चिंता* *छिंदवाड़ा में बढ़ते अपराधों पर उठने लगे सवाल* *कमलनाथ के छिंदवाड़ा मॉडल पर भाजपा शासन में संकट? लगातार अपराधों से बढ़ी चिंता* *हसीब खान मंसूरी, संपादक - HK न्यूज MP* छिंदवाड़ा की पहचान केवल मध्यप्रदेश के एक जिले के रूप में नहीं, बल्कि देश के सामने एक ऐसे क्षेत्र के रूप में बनी है, जहां विकास को लंबे समय तक जनसेवा और दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। इस पहचान के निर्माण में पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद कमलनाथ की चार दशक से अधिक लंबी राजनीतिक यात्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सिंचाई और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों के कारण कमलनाथ ने छिंदवाड़ा को अपनी राजनीति का केंद्र ही नहीं, बल्कि अपनी कर्मभूमि बनाया। यही कारण है कि आज जब छिंदवाड़ा में अपराध की घटनाएं लगातार चर्चा में आती हैं, तो कमलनाथ की चिंता को केवल राजनीतिक बयान के रूप में देखना उचित नहीं होगा। जिस क्षेत्र को उन्होंने वर्षों तक विकास, व्यवस्था और जनविश्वास की मिसाल बनाने का प्रयास किया, वहां महिलाओं और बेटियों के खिलाफ अपराध, हत्या, नशे से जुड़े विवाद और अवैध शराब की शिकायतें सामने आना निश्चित रूप से चिंता का विषय है। *दो वर्षों की घटनाएं बढ़ाती हैं चिंता* पिछले करीब दो वर्षों में छिंदवाड़ा से सामने आई कई घटनाओं ने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मार्च 2024 में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या का मामला सामने आया था। 2025 में भी महिलाओं और परिवारों से जुड़े गंभीर अपराधों की खबरें सामने आती रहीं। जून 2025 में लावाघोघरी थाना क्षेत्र में शराब को लेकर हुए विवाद के बाद एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया। मई 2025 में शराब के नशे में हुए विवाद के दौरान एक बेटे द्वारा अपने पिता की कथित तौर पर हत्या किए जाने की खबर भी सामने आई। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि नशे और अपराध का संबंध केवल अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज की सुरक्षा को भी प्रभावित करता है। *बेटियों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल* छिंदवाड़ा में नाबालिगों और महिलाओं के खिलाफ सामने आई घटनाएं सरकार से जवाब मांगती हैं। मार्च 2025 में डेढ़ साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इसी तरह जुन्नारदेव क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में भी आरोपी को आजीवन कारावास की सजा हुई। ये मामले यह जरूर दिखाते हैं कि पुलिस और न्याय व्यवस्था ने कार्रवाई की, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाते हैं कि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। महिलाओं की सुरक्षा केवल एफआईआर दर्ज करने और आरोपी को गिरफ्तार करने का विषय नहीं है। पुलिस की सक्रियता, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, शिकायतों पर तत्काल प्रतिक्रिया, स्कूल-कॉलेजों के आसपास सुरक्षा और नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण इन सभी को मिलाकर सुरक्षित वातावरण तैयार होता है। *कमलनाथ के दौर की व्यवस्था को याद कर रही जनता* छिंदवाड़ा की राजनीति में कमलनाथ का स्थान इसलिए अलग है क्योंकि उनका रिश्ता इस क्षेत्र से दशकों पुराना है। उन्होंने छिंदवाड़ा को केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं देखा, बल्कि अपने राजनीतिक जीवन का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र के विकास को समर्पित किया। यही वजह है कि छिंदवाड़ा की सड़क से लेकर अस्पताल तक और शिक्षा से लेकर रोजगार तक की चर्चा में कमलनाथ के योगदान का उल्लेख बार-बार होता है। उनके समर्थकों के लिए छिंदवाड़ा का विकास मॉडल केवल इमारतों और सड़कों का मॉडल नहीं था। उसके पीछे एक ऐसी प्रशासनिक सोच भी थी जिसमें नागरिकों को व्यवस्था पर भरोसा दिलाना महत्वपूर्ण माना जाता था। आज भाजपा शासन में जब अपराध की घटनाएं सुर्खियां बनती हैं तो स्वाभाविक रूप से लोग उस पुराने दौर से तुलना करते हैं। यह तुलना केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं से जुड़ा सवाल है। विकास तभी सार्थक है जब नागरिक अपने घर, सड़क, बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस करे। *सांसद बंटी विवेक साहू को भी देना होगा जवाब* वर्तमान सांसद बंटी विवेक साहू को लेकर राजनीतिक स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिले में सक्रिय कुछ अपराधियों और बदमाशों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। ऐसे आरोप गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को अपराधियों का संरक्षक बताना उचित नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि यदि किसी अपराधी को राजनीतिक संरक्षण मिलने की शिकायत जनता या विपक्ष द्वारा की जाती है, तो उसकी जांच क्यों न हो? *छिंदवाड़ा को फिर चाहिए भरोसे का शासन* कमलनाथ ने चार दशक से ज्यादा समय तक इस क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण यहां की उपलब्धियों को उन्होंने अपनी उपलब्धि और यहां की समस्याओं को अपनी समस्या माना। इसलिए आज छिंदवाड़ा में अपराध की घटनाओं को लेकर उनकी चिंता को उस लंबे रिश्ते के संदर्भ में समझना चाहिए। छिंदवाड़ा की जनता ने विकास देखा है। उसने बड़े सपने देखे हैं। उसने यह भी देखा है कि एक पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्र को योजनाबद्ध प्रयासों के जरिए किस तरह राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। अब उसी जनता की अपेक्षा है कि विकास के साथ सुरक्षा और सम्मान का वातावरण भी मजबूत हो। आज आवश्यकता किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध से आगे बढ़कर एक स्पष्ट सवाल पूछने की है। क्या छिंदवाड़ा का नागरिक सुरक्षित है? क्या उसकी बेटी सुरक्षित है? क्या अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश है? क्या अपराधी कानून से डरता है? और क्या किसी राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्ति के कारण कानून की धार कमजोर नहीं पड़ती? कमलनाथ की छिंदवाड़ा के प्रति चिंता इसी व्यापक प्रश्न से जुड़ी है।
- बुधनी पुलिस ने थार गाडी से 153 लीटर अवैध शराब की जप्त,गड़रिया नाले पर रोका। हेमन्त त्रिपाठी मो 7067216263 सीहोर बुधनी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 153 लीटर अवैध शराब के साथ महिंद्रा थार जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार पुलिस को 25 अगस्त को मुखबिर से सूचना मिली थी कि भोपाल की ओर से का ले रंग की बिना नंबर की महिंद्रा थार में अवैध शराब का परिवहन किया जा रहा है। सूचना पर पुलिस टीम ने गडरिया नाला के पास घेराबंदी की। संदिग्ध वाहन को पुलिस ने पीछा कर शंकर मंदिर के पास रोका और वाहन में पर सवार दोनों व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। आरोपियों की पहचान शिवम हिंगोले (26), निवासी नर्मदापुरम, और विशाल जाटव (20), निवासी नर्मदापुरम के रूप में हुई। पंचों की मौजूदगी में वाहन की तलाशी लेने पर गाड़ी से 13 पेटी देशी शराब और 3 पेटी बीयर, कुल 153 लीटर अवैध शराब बरामद हुई। बरामद शराब की अनुमानित कीमत 62,080 रुपये है। इसके अलावा करीब 14 लाख रुपये कीमत की महिंद्रा थार भी जब्त की गई। इस तरह कुल जब्ती की अनुमानित कीमत 14 लाख 62 हजार 80 रुपये है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय बुधनी के समक्ष पेश किया गया। कार्रवाई में थाना प्रभारी बुधनी उप निरीक्षक संदीप जाट, सउनि सुमेर सिंह प्रआर 329 अजय, प्रआर 88 नरेंद्र, प्रआर 241 दीपक, वरि.आर. 498 सोनू चौहान, आरक्षक अनुज यादव, आरक्षक 833 अनिरुद्ध एवं आरक्षक 850 लोकेश की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।1
- मध्य प्रदेश के सीहोर के ग्रामीणों की आवाज जनता की शिकायत प्रशासन अधिकारियों से बरसों से कच्चा रास्ता, आज भी विकास की राह देख रहे ग्रामीण स्कूल जाने वाले बच्चों की बढ़ी परेशानी, 1 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर — जिम्मेदार अधिकारियों से ग्रामीणों ने लगाई सड़क पक्की कराने की गुहार सीहोर। जिले के अंतर्गत ग्राम पंचायत दोराहा-मुंगावली एवं पंचायत बरखेड़ा हसन के बाजार गांव काकड़ पेपरट वाला रास्ता आज भी बदहाली की मार झेल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता वर्षों पुराना है, लेकिन लंबे समय बाद भी इसकी हालत नहीं सुधरी और रास्ता आज भी कच्चा पड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में इस कच्चे रास्ते पर आवागमन और भी मुश्किल हो जाता है। कीचड़ और खराब रास्ते के कारण ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूल जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल की गाड़ी इस रास्ते तक नहीं पहुंच पाती, जिसके चलते बच्चों को करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलकर मुख्य रास्ते तक पहुंचना पड़ता है। इससे बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचने में भी परेशानी होती है। बच्चों ने बताई अपनी परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों ने बताया कि कच्चे रास्ते के कारण उन्हें रोजाना परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार समय पर स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। बच्चों का कहना है कि सरकार और प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सड़क का निर्माण कराए, ताकि उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक रास्ता मिल सके। ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब बनेगी सड़क? ग्रामीणों का कहना है कि बरसों पुरानी समस्या होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। ग्रामीण लंबे समय से इस रास्ते को पक्का कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कराकर इस कच्चे रास्ते का जल्द से जल्द पक्की सड़क के रूप में निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों, बुजुर्गों और ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिल सके। रिपोर्टर देवेंद्र सिंह मीना ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों और स्कूल जाने वाले बच्चों से इस कच्चे रास्ते की समस्या को लेकर जानकारी ली। देखिए पूरी खबर और मौके की स्थिति इस वीडियो में।1
- ब्रेकिंग न्यूज़ | गैस कांड से जुड़े अस्पताल में परिजनों से बदतमीजी का आरोप भोपाल: भोपाल गैस कांड की त्रासदी से जुड़े भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल में सगीर खान के इलाज को लेकर परिजन पहले ही परेशान हैं। अब आरोप है कि अस्पताल में परिजनों के साथ बदतमीजी की जा रही है। परिजनों का कहना है कि बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उन्हें दूसरे अस्पताल जाने को कहा गया। मरीज वेंटिलेटर पर, परिजन परेशान—अब गैस कांड से जुड़े अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल। 📞 परिजन संपर्क 93006 136861
- Bhopal मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने भोपाल के ऐतिहासिक जहांगीरिया की वक्फ संपत्ति से जुड़े मामले में अबतक की सबसे बड़ी कार्रवाई मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने भोपाल के ऐतिहासिक इदारा यतीमखाना शाहजहानी वाक़े मुनासिल मदरसा जहांगीरिया की वक्फ संपत्ति से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। बोर्ड की 27 अगस्त 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वित्तीय अनियमितताओं के मामले में ₹28.91 करोड़ की वसूली के बाद अब आपराधिक जांच शुरू हो गई है। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक शाहजहानाबाद थाना भोपाल में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 316(2) के तहत FIR दर्ज की गई है। पूरे मामले में वक्फ संपत्ति के प्रबंधन, रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों को लेकर क्या आरोप हैं और आगे क्या कार्रवाई होगी—जानिए इस वीडियो में।1
- 🚨 ब्रेकिंग | बाड़ी, रायसेन सरकारी अनुबंध की प्राइवेट बोलेरो, रात में ड्राइवर के हाथों दौड़ी—उठे सवाल! जल संसाधन विभाग बाड़ी में अनुबंधित बोलेरो MP 04 TB 2393 को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। वाहन निजी स्वामित्व का बताया जा रहा है, लेकिन उस पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखा है। 27 अगस्त की शाम करीब 7:30 बजे वाहन बाड़ी बस स्टैंड के आसपास ड्राइवर द्वारा चलाते हुए देखा गया। उस समय एसडीओ वाहन में मौजूद नहीं थीं। अब सवाल— ➡️ वाहन किस शासकीय काम से निकला था? ➡️ क्या लॉगबुक में इस यात्रा की एंट्री है? ➡️ किस अधिकारी के निर्देश पर वाहन चलाया गया? ➡️ वाहन पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखने की अनुमति किस आधार पर है? ➡️ अगर वाहन विभाग से हट चुका है, तो सरकारी पहचान क्यों नहीं हटाई गई? ➡️ अनुबंध और वाहन के भुगतान का रिकॉर्ड क्या कहता है? ड्राइवर के कथित जवाब “वो तो हट गई है, ये भी निकालना है” ने भी सवाल बढ़ा दिए हैं। मामले में जल संसाधन विभाग के ईई ने कार्यालय से जानकारी लेकर जवाब देने की बात कही है। अब नजर अनुबंध, लॉगबुक, ड्यूटी रिकॉर्ड और भुगतान विवरण पर है। 🔥 सबसे बड़ा सवाल—अगर गाड़ी विभाग से हट गई है तो ‘मध्य प्रदेश शासन’ क्यों नहीं हटा?3
- भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मध्यप्रदेश कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। कैबिनेट ने प्रदेश में 10 हजार 630 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों को हरी झंडी दी है। इसमें सिवनी-बालाघाट फोरलेन बायपास सहित कई सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। प्रदेश की 12 सड़कों का निर्माण हाइब्रिड मॉडल पर किया जा रहा है। साथ ही नाबार्ड के माध्यम से 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लोन लेने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। बैठक में भोपाल-विदिशा मार्ग, खलघाट-मनावर मार्ग, मंदसौर-सीतामऊ-बसई-सुवासरा मार्ग और पूर्वी भोपाल बायपास को 6 लेन करने सहित अन्य सड़क परियोजनाओं पर भी निर्णय लिए गए। किसानों से जमीन अधिग्रहण के लिए आपसी सहमति के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए तय किया गया कि सहमत किसान को अधिग्रहित जमीन की चार गुना राशि तत्काल दी जाएगी। उज्जैन में धनवंतरी विश्वविद्यालय के लिए पदों की स्वीकृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है। बैठक में किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। 20 अगस्त से फार्मर आईडी बनाने का काम शुरू हो चुका है और अब अधिकारी किसानों के पास जाकर फार्मर आईडी बनाएंगे। खाद वितरण व्यवस्था को आसान बनाने के लिए व्हाट्सऐप के जरिए खाद की बुकिंग की सुविधा भी शुरू करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में असामान्य बारिश की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिक बारिश वाले जिलों में राहत-बचाव कार्य और कम बारिश वाले जिलों के लिए पहले से कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। वहीं, रक्षाबंधन के अवसर पर लाड़ली बहनों के खातों में 250 रुपये अतिरिक्त भेजे जाने की जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री ने एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले मध्यप्रदेश के 32 खिलाड़ियों को बधाई दी। विदिशा के विभोर जैन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात को भी प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया गया।1
- breaking newsमेरा मज़हब, मेरी आज़ादी। UCC का बहिष्कार — अपने मज़हबी और संवैधानिक अधिकारों की हिफ़ाज़त के लिए। मोहसिन अली खान प्रदेश अध्यक्ष, AIMIM मध्य प्रदेश1
- ब्रेकिंग न्यूज़ | गैस कांड से जुड़े अस्पताल में परिजनों से बदतमीजी का आरोप भोपाल: भोपाल गैस कांड की त्रासदी से जुड़े भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल में सगीर खान के इलाज को लेकर परिजन पहले ही परेशान हैं। अब आरोप है कि अस्पताल में परिजनों के साथ बदतमीजी की जा रही है। परिजनों का कहना है कि बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उन्हें दूसरे अस्पताल जाने को कहा गया। मरीज वेंटिलेटर पर, परिजन परेशान—अब गैस कांड से जुड़े अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल।1