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- चित्तौड़गढ़। शहर में बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था, बढ़ते सड़क हादसों और अपराधों की रोकथाम को लेकर जिला पुलिस ने सख्त अभियान चलाया है। जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी के निर्देशन में चल रही इस कार्रवाई के तहत अवैध पार्किंग, काली फिल्म लगी गाड़ियां, बिना नंबर प्लेट के वाहन और सीट बेल्ट नहीं लगाने वाले चालकों के खिलाफ व्यापक स्तर पर चालान बनाए गए। जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर में बिना किसी शासकीय कार्य के खड़े किए गए वाहनों पर विशेष कार्रवाई की गई। ऐसे वाहन चालक, जो परिसर को अनधिकृत पार्किंग स्थल मानकर निजी कार्यों या दैनिक आवागमन के लिए उपयोग कर रहे थे, उनके खिलाफ चालान काटे गए। पुलिस ने स्पष्ट किया कि शासकीय परिसरों का इस प्रकार उपयोग सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिहाज से गंभीर उल्लंघन है। अभियान के दौरान काली फिल्म लगी गाड़ियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई। मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों से अधिक गहरे शीशों का उपयोग प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे वाहन में बैठे व्यक्तियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है, जो अपराध की दृष्टि से जोखिमपूर्ण है। बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को जब्त कर 2000 रुपए का चालान बनाया गया और नियमानुसार नंबर प्लेट लगवाने के बाद ही वाहन छोड़े गए। वहीं, कलक्टर चौराहे सहित प्रमुख स्थानों पर सीट बेल्ट नहीं लगाने वाले चालकों के खिलाफ भी दिनभर कार्रवाई जारी रही। ट्रैफिक इंचार्ज आषुतोष सिंह ने दी सख्त चेतावनी ट्रैफिक इंचार्ज आषुतोष सिंह ने बताया कि शहर में लगातार बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था और अवैध पार्किंग से आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिना नंबर प्लेट, काली फिल्म और नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन अक्सर आपराधिक गतिविधियों में भी उपयोग किए जाते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत ऐसे सभी उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अवैध पार्किंग, सीट बेल्ट का उपयोग न करना, बिना नंबर वाहन चलाना और काली फिल्म लगाना दंडनीय अपराध हैं, जिन पर जुर्माना, वाहन जब्ती और अन्य कानूनी प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। निरंतर जारी रहेगा अभियान पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। आमजन से अपील की गई है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें, निर्धारित स्थानों पर ही वाहन पार्क करें और अपनी तथा दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। नियमों का पालन कर ही शहर में सुगम और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।2
- -कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भंडारा प्रसाद किया अर्पित भीलवाड़ा। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर श्री हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में चल रहे नवचंडी दुर्गा पाठ के अनुष्ठान ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया है। प्रतिदिन प्रातःकाल मण्डल पूजन, गणपति पूजन एवं माँ भगवती दुर्गा का विधिवत अभिषेक कर हवन-यज्ञ किए गए। वैदिक ब्राह्मण पंडित सत्यनारायण शर्मा, मनमोहन शर्मा एवं वासुदेव शर्मा द्वारा श्रद्धापूर्वक दुर्गा सप्तशती का पाठ संपन्न कराया गया, जिससे श्रद्धालुओं में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का संचार हो रहा है। दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर विशेष सामग्री से दुर्गा हवन का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। हवन से वातावरण शुद्ध होने के साथ ही नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होता है और मन में शांति का संचार होता है। आज शुक्रवार को रामनवमी के शुभ दिन भगवान श्रीराम के पूजन के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व रहा। कन्याओं के चरण धुलवाकर उन्हें तिलक लगाकर श्रद्धापूर्वक भंडारा प्रसाद अर्पित किया गया। स्वामी जी ने बताया कि रामनवमी सनातन धर्म का प्रमुख त्योहार है जो चैत्र मास शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, यह दिन बुराई पर अच्छाई, धर्म की स्थापना और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श जीवन का प्रतीक माना गया है, यह पावन दिन चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन मनाया जाता है जो देवी दुर्गा पुजा के साथ श्री राम की भक्ति का भी संगम है। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और भक्तों की उपस्थिति ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया, जिससे हर कोई भक्ति रस में सराबोर नजर आया। वहीं स्वामी जी का सम्पूर्ण चैत्र नवरात्री में मौन संकल्प लिया गया था जो आज राम नवमी पर पूर्ण हुआ। इस अवसर पर सभी सनातन धर्मियो से आव्हान किया कि अपने राष्ट्र और अपने सनातन के लिए सनातन संस्कृति के धार्मिक महत्व वाले उत्सव अपनी परंपरा रीति-रिवाज अनुसार मनाए। पंथों और सूफी वाद में भटकते जा रहे है। पिछले दिनों अजमेर में एक कार्यक्रम के दौरान माता के मंच पर कव्वाली का प्रोग्राम हुआ व शखी शहबाद कलंदर, दमादम मस्त कलंदर जैसे सूफ़ी गानों ओर इस तरह के आयोजनों से बचना चाहिए। अपनी मूल जड़ो को कभी नहीं भूलना चाहिए। इस दौरान संत मायाराम, राजाराम, गोविन्द राम, केशव राम, ब्रह्मचारी मिहिर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण उपस्थित रहे।3
- गोठड़ा माताजी की भविष्यवाणी 2026 फसल भाव, सोना चांदी व्यापार और राजनीति का पूरे वर्ष का लेखा जोखा🙏🌾👳 gothda mataji ki bhavishyvani gothda mataji ki bhavishyvani 2026 bhavishyvani gothda mataji कोटडा माताजी की भविष्यवाणी 2026 गोठड़ा माताजी की भविष्यवाणी 2026 वैष्णो माता जी गोठड़ा माताजी गोठड़ा माताजी की भविष्यवाणी #desh_ki_saan_hamare_kisan#gothda #bhavishyavani #गोठडा #गोठड_माताजी #भविष्यवाणी1
- छोटी सादादी धर्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में अष्टमी के दिन नौ कन्याओं का भोजन कर कर अष्टमी का पर्व मनाया जाने का महत्व धार्मिक ग्रन्थ में बताया है इसे मान्यताओं के अनुसार कई घरों में कन्या पूजन करवाई जाती है4
- उदयपुर जिले के भटेवर में खालातोड़ जाने वाले रास्ते के पास स्थित प्राचीन मालिया वाला श्याम हनुमान मंदिर में हवन अनुष्ठान के साथ शुक्रवार को चैत्र नवरात्रि महोत्सव का समापन हुआ। इस अवसर पर मालिया वाला श्याम हनुमानजी को अद्भुत श्रृंगार धारण करवाया गया। हवन अनुष्ठान के दौरान बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। मंदिर पर श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना करके हनुमानजी का आशीर्वाद लिया।1
- Ise Kahate Hain shaadi mein pikar naachne wale log1
- Sadas Live News1
- Jaipur, March 26, 2026 — A major controversy erupted during the convocation ceremony of Haridev Joshi University of Journalism and Mass Communication in Jaipur, exposing serious gaps in event management, communication, and accountability within the state’s higher education system. The ceremony, held at Rajasthan International Centre, was organized to confer degrees upon approximately 275 graduating students. The university had invited students along with their families and mandated traditional attire for the occasion. However, in a surprising turn of events, only about 10 meritorious students were called on stage to receive their degrees, while the rest were neither invited to the stage nor informed beforehand about this arrangement. Students Express Outrage: “A Day of Honor Turned into Humiliation” Students present at the ceremony described the experience as deeply disappointing, calling it “an insult on a day meant for honor.” They questioned the rationale behind inviting families and enforcing a dress code if all students were not to be formally recognized on stage. The situation escalated soon after the event concluded, with students raising slogans in protest. Tensions further intensified when a video of a female student expressing her frustration on stage went viral on social media, symbolizing the emotional distress and perceived lack of sensitivity on the part of the administration. Administrative Lapses Despite VIP Presence The event was attended by high-profile dignitaries, including Governor Haribhau Bagde and Deputy Chief Minister Prem Chand Bairwa. Despite their presence, the ceremony suffered from poor coordination. Lengthy speeches followed by an abrupt conclusion added to the dissatisfaction among students. Decision Reversed After Protests Amid growing protests, the administration was compelled to revise its decision. The Deputy Chief Minister was called back to the stage, and subsequently, all students were awarded their degrees one by one. However, by then, the credibility of the event had already been compromised, and students’ trust had been significantly affected. Broader Questions on the Education System This incident goes beyond a single university, highlighting systemic issues in Rajasthan’s higher education framework, including lack of planning, transparency, and accountability. Key concerns include: Absence of clear protocols for large-scale events Inadequate communication and expectation management with students Increasing tendency of VIP-centric programs overshadowing student interests Need for Accountability and Reform Experts believe such incidents not only damage institutional reputation but also adversely impact student morale. There is a pressing need for both the state government and university authorities to take corrective measures, including: Establishing clear event management policies Ensuring transparent communication with students in advance Fixing accountability of responsible officials A convocation is a milestone event in a student’s life, symbolizing achievement and recognition. Mismanagement of such an important occasion undermines its dignity and raises serious concerns about the sensitivity and responsibility of the education system. This episode serves as a warning that beyond formalities, empathy and accountability must be integral to the functioning of academic institutions.1
- Post by फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान4