शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में, सुलतानपुर की तहसील जयसिंहपुर सभागार में माह जून के तीसरे शनिवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक चारू निगम और मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह ने जनसामान्य की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरता पूर्वक सुना। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए। जनसुनवाई प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से एक विशेष व्यवस्था भी लागू की गई थी। इसके तहत, प्रत्येक शिकायतकर्ता को पहले संबंधित विभागीय अधिकारी के पास भेजा गया, जहाँ अधिकारी ने शिकायत पत्र पर समस्या के समाधान और आवश्यक कार्यवाही के संबंध में अपनी टिप्पणी अंकित की। इसके बाद, शिकायतकर्ता संबंधित अधिकारी के साथ जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के समक्ष उपस्थित होकर प्रकरण की वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए समाधान की प्रगति प्रस्तुत कर रहे थे। सम्पूर्ण समाधान दिवस में विभिन्न विभागों से कुल 319 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 32 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को हस्तांतरित कर निर्धारित समयावधि में प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सम्पूर्ण समाधान दिवस के समापन के बाद, जिलाधिकारी ने तहसील परिसर में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पौधरोपण भी किया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। इसी प्रकार, जनपद की अन्य सभी तहसीलों में भी सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन कर आमजन की शिकायतें सुनी गईं और उनके निस्तारण हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक शिकायत का निष्पक्ष, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए, जिससे जनता का प्रशासन पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।
शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में, सुलतानपुर की तहसील जयसिंहपुर सभागार में माह जून के तीसरे शनिवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक चारू निगम और मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह ने जनसामान्य की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरता पूर्वक सुना। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए। जनसुनवाई प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से एक विशेष व्यवस्था भी लागू की गई थी। इसके तहत, प्रत्येक शिकायतकर्ता को पहले संबंधित विभागीय अधिकारी के पास भेजा गया, जहाँ अधिकारी ने शिकायत पत्र पर समस्या के समाधान और आवश्यक कार्यवाही के संबंध में अपनी टिप्पणी अंकित की। इसके बाद, शिकायतकर्ता संबंधित अधिकारी के साथ जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के समक्ष उपस्थित होकर प्रकरण की वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए समाधान की प्रगति प्रस्तुत कर रहे थे। सम्पूर्ण समाधान दिवस में विभिन्न विभागों से कुल 319 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 32 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को हस्तांतरित कर निर्धारित समयावधि में प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सम्पूर्ण समाधान दिवस के समापन के बाद, जिलाधिकारी ने तहसील परिसर में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पौधरोपण भी किया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। इसी प्रकार, जनपद की अन्य सभी तहसीलों में भी सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन कर आमजन की शिकायतें सुनी गईं और उनके निस्तारण हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक शिकायत का निष्पक्ष, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए, जिससे जनता का प्रशासन पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।
- बिहार के पूर्व विधायक राजन तिवारी ने भरत तिवारी प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। तिवारी ने यह भी दावा किया कि भरत तिवारी के परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इस दौरान राजन तिवारी ने दृढ़ता से कहा, "किसी माई के लाल में इतना दम नहीं है कि परिवार को आंख दिखा सके।" उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही, उन्होंने ब्राह्मण समाज से एकजुट रहने और अन्याय के खिलाफ मिलकर आवाज उठाने की अपील भी की।1
- उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर किए जा रहे बड़े दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत बेहद खौफनाक बनी हुई है। जनपद सुल्तानपुर के थाना चांदा क्षेत्र से एक ऐसा ही ताजा मामला सामने आया है, जहाँ एक रसूखदार ग्राम प्रधान और उसके भाइयों की दबंगई के आगे स्थानीय पुलिस पूरी तरह घुटने टेक चुकी है। यहाँ एक असहाय परिवार पर घर में घुसकर जानलेवा हमला किया गया और बेटियों से छेड़खानी की गई, लेकिन पुलिस राजनीतिक रसूख के दबाव में पीड़ितों की एफआईआर तक दर्ज नहीं कर रही है। पीड़िता पुष्पा शुक्ला पत्नी हेमन्त कुमार शुक्ला ने इस मामले में सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) को रोते हुए प्रार्थना पत्र सौंपा है। यह पूरा मामला थाना चांदा के ग्राम फरमापुर (पो० कोइरीपुर) का है, जहाँ पीड़िता का आरोप है कि गाँव के वर्तमान प्रधान हृदयनारायण सिंह उर्फ पप्पू सिंह और उनके भाई सर्वेश सिंह ने उनके परिवार का जीना मुहाल कर रखा है। शिकायत के अनुसार, मामूली बात पर विवाद शुरू हुआ जिसके बाद प्रधान के भाई सर्वेश सिंह ने पीड़िता के घर आकर गाली-गलौज की और उनके नाती को जान से मारने की धमकी दी। हैरानी की बात यह है कि जब पीड़िता इस बात की शिकायत करने थाने पहुँची, तो पुलिस ने सुरक्षा देने के बजाय उन्हें वापस भेज दिया। इसके तुरंत बाद, शाम करीब 5 बजे आरोपी सर्वेश सिंह और प्रधान हृदयनारायण सिंह उर्फ पप्पू सिंह अपने साथ 4-5 अज्ञात गुंडों को लेकर पीड़िता के घर में घुस गए। वहाँ मौजूद एक लड़की के साथ सरेआम छेड़खानी की गई और जब पीड़िता के दो मासूम नातियों ने अपनी मां की इज्जत बचाने की कोशिश की, तो दबंगों ने उन पर लाठी-डंडों और चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में एक नाती को गंभीर चोटें आई हैं और दबंगों ने पूरे परिवार को उनके ही घर से बाहर खदेड़ दिया है। पीड़िता पुष्पा शुक्ला ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि आरोपी सर्वेश सिंह एक शातिर और आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है, जिसके खिलाफ थाने में पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं और प्रधान जी भी 203 में जेल जा चुके हैं। इसके बावजूद चांदा थाना पुलिस इस अपराधी और दबंग के आगे नतमस्तक बनी हुई है। आज यह गरीब और असहाय ब्राह्मण परिवार अपने ही घर से बेघर होकर इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। पीड़ित परिवार ने अब सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि दोषियों के खिलाफ सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाए। अब सवाल यह उठता है कि क्या सुल्तानपुर पुलिस इन दबंगों पर शिकंजा कसेगी या फिर सत्ता और रसूख के दबाव में इस असहाय परिवार को न्याय से वंचित रखा जाएगा।1
- अमेठी एसपी सरवणन टी. के निर्देश और एएसपी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में शनिवार को जिले के सभी थाना परिसरों, चौकियों और पुलिस कार्यालयों में एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पुलिस कार्यालयों और परिसरों को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ वातावरण से युक्त बनाना था, साथ ही आमजन के बीच स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश फैलाना भी था। इस दौरान, अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर कार्यालय कक्षों, अभिलेखागार, मेस, शस्त्रागार, महिला हेल्प डेस्क, आगंतुक कक्ष और बैरकों सहित थाना परिसरों तथा आसपास के क्षेत्रों की व्यापक साफ-सफाई की। परिसर में उगी अनावश्यक झाड़ियों को हटाया गया और कूड़ा-कचरा साफ कर स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया गया। इसके अतिरिक्त, अभिलेखों और कार्यालयी सामग्री को व्यवस्थित कर कार्यस्थलों को सुव्यवस्थित बनाया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसे अभियान समय-समय पर जारी रखे जाएंगे, ताकि पुलिस कार्यालयों में एक बेहतर कार्य वातावरण बना रहे और लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित किया जा सके।2
- आज दिनांक 20/6/2026 को अमेठी तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान, एक दिव्यांग व्यक्ति जगन्नाथ मौर्य ने उप जिलाधिकारी को एक शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने अपने भाई राममिलन मौर्य पर सरकारी जमीन पर जबरन कब्जे सहित कई गंभीर आरोप लगाए। जगन्नाथ मौर्य ने शिकायत की कि उनके भाई राममिलन मौर्य ने पिछले 20 वर्षों से सरकारी जमीन गाटा संख्या 244, जिसे 'नवीनी प्रति की जमीन' बताया गया है, पर जबरन कब्जा कर रखा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि उनके घर के सामने लगे हैंडपंप से पानी निकलना बंद हो गया है और पानी निकासी का कोई रास्ता नहीं है, क्योंकि नाली को भी पाट दिया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने इन समस्याओं को उठाया, तो उन्हें मारपीट और जान से मारने की धमकी भी दी गई। जगन्नाथ मौर्य ने बताया कि उपरोक्त संबंध में उन्होंने पहले भी कई बार शिकायती प्रार्थना पत्र दिए हैं, लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। उन्होंने उप जिलाधिकारी से मांग की है कि सरकारी जमीन को खाली कराया जाए और साथ ही शारीरिक रास्ते पर लगे हैंडपंप के पानी निकासी का रास्ता भी खुलवाया जाए।2
- अमेठी में शनिवार को एसपी सरवणन टी. के निर्देशन और एएसपी ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत जिले के सभी थाना परिसरों, चौकियों और पुलिस कार्यालयों में व्यापक स्तर पर साफ-सफाई की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुलिस कार्यालयों और उनके परिसरों को स्वच्छ, सुंदर तथा स्वस्थ वातावरण वाला बनाना था, साथ ही आम जनता के बीच स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश देना भी था। अभियान के दौरान, अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर कार्यालय कक्षों, अभिलेखागार, मेस, शस्त्रागार, महिला हेल्प डेस्क, आगंतुक कक्ष, बैरक तथा थाना परिसरों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों की भी गहन साफ-सफाई की। परिसर में उगी अनावश्यक झाड़ियों को हटाया गया और कूड़ा-कचरा साफ कर स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया गया। इसके अतिरिक्त, अभिलेखों और अन्य कार्यालयी सामग्री को व्यवस्थित कर कार्यस्थलों को सुव्यवस्थित भी बनाया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसे स्वच्छता अभियान भविष्य में भी समय-समय पर आयोजित किए जाते रहेंगे। इसका उद्देश्य पुलिस कार्यालयों में एक बेहतर कार्य वातावरण बनाए रखना और लोगों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करना है।2
- लखनऊ के महानगर कमिश्नरेट के न्यू हैदराबाद पुलिस चौकी क्षेत्र में नशीले पदार्थों की कथित बिक्री को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो के वायरल होने के बाद क्षेत्र में नशे के कारोबार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नशीले पदार्थों की इस कथित बिक्री से स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों और युवाओं पर बुरा असर पड़ सकता है। नागरिकों का कहना है कि इस तरह के अवैध धंधे समाज और नई पीढ़ी के भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा बन सकते हैं, जिससे युवाओं के नशे की ओर आकर्षित होने का जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि, वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है; किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता पुलिस जांच और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही तय की जाएगी। स्थानीय नागरिकों ने कमिश्नरेट पुलिस से इस मामले की निष्पक्ष जांच करने, क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और यदि कोई अवैध गतिविधि पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस जांच के बाद ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।1