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झारखंड के जामताड़ा जिले के मिरगा गांव के पास बारातियों से भरी एक बोलेरो अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में एक युवक की मौत हो गई, वहीं वाहन में सवार तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।
RAMSEWAK SAHU
झारखंड के जामताड़ा जिले के मिरगा गांव के पास बारातियों से भरी एक बोलेरो अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में एक युवक की मौत हो गई, वहीं वाहन में सवार तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।
More news from Ranchi and nearby areas
- पंजाब के धावक गुरिंदरवीर सिंह ने रांची में फेडरेशन कप एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने यह रेस सिर्फ 10.09 सेकंड में पूरी की। गुरिंदरवीर 10.10 सेकंड की बाधा पार करने वाले पहले भारतीय स्प्रिंटर बन गए हैं।1
- भारतीय प्रशासनिक सेवा के मोo जावेद हुसैन ने खूंटी जिले के 16वें उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने बताया कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और जिले के विकास कार्यों को गति देना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।2
- झारखंड राज्य इस समय मौसम के एक अजीब और विपरीत मिजाज का अनुभव कर रहा है। जहाँ राज्य के एक हिस्से में तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने से भीषण गर्मी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में बारिश होने से लोगों को राहत मिली है।1
- झारखंड की राजधानी रांची के सिरम टोली सरना स्थल में एक कार्यक्रम के दौरान ज्योत्सना केरकेट्टा ने आदिवासी पहचान, सरना धर्म, डीलिस्टिंग और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने आदिवासी समाज, धार्मिक पहचान और संविधान से जुड़े कई विषयों पर खुलकर बयान दिया। इस कार्यक्रम में आदिवासी समाज के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।1
- आदिवासी महिलाएँ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली पहुँची हैं।1
- बोकारो को सेवा और संस्कार की धरती के रूप में वर्णित किया गया है, जहाँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संदर्भ में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम हुई है।1
- रातु के गुडू गांव में महान स्वतंत्रता सेनानी ठेबले उराँव की 68वीं पुण्यतिथि मनाने की तैयारी को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। कुरमाली भाषा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने इस दौरान गुडू गांव का भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने ठेबले उराँव के परिवारों से मुलाकात की और जनसंपर्क अभियान चलाया। डॉ. महतो ने 1 जून को होने वाले पुण्यतिथि समारोह की तैयारियों का जायजा लिया और बताया कि गुडू गांव में ठेबले उराँव की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा स्थापना और ठेबले उराँव के पैतृक गांव गुडू के सर्वांगीण विकास की मांग को लेकर उनके वंशजों ने झारखंड के राज्यपाल को एक आवेदन सौंपा है। डॉ. राजाराम महतो ने अपने पत्र में यह भी बताया कि स्वतंत्रता सेनानी ठेबले उराँव स्वतंत्र भारत के प्रथम नामित सांसद थे। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि झारखंड सरकार के निर्णय के अनुरूप ठेबले उराँव के पैतृक गांव गुडू रातू का सर्वांगीण विकास किया जाए और उनकी आदमकद प्रतिमा लगाई जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। पत्र में यह भी जानकारी दी गई है कि रातु अंचल के मौजा गुडू में खाता संख्या 79, प्लॉट संख्या 1, रकबा 21 डिसमिल गैर-मजरूआ जमीन को जिला प्रशासन द्वारा इस कार्य के लिए चिन्हित किया गया है। डॉ. महतो के पत्र में ठेबले उराँव के महत्वपूर्ण योगदानों का भी उल्लेख है; उन्होंने शिक्षक के रूप में अपना जीवन शुरू किया और बाद में समाज व देश सेवा में खुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने वर्ष 1900 में छोटानागपुर उन्नति समाज की स्थापना की और उसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 1908 में उन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए लंबे समय तक प्रयास किए, 1916 में गो-रक्षा के लिए आंदोलन चलाया और 1928 में साइमन कमीशन के समक्ष झारखंड को अलग प्रांत बनाने की मांग रखी। इसके अतिरिक्त, 1931 में उन्होंने छोटानागपुर किसान सभा का गठन कर किसानों को संगठित किया और रांची विश्वविद्यालय की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर डॉ. राजाराम महतो के साथ शिवशंकर नीलकंठ महतो, नरेश महतो, भावेश मिश्रा, जीतराम लोहारा, सोहराय उरांव, टूना उरांव, बसंती उरांव और अन्य ग्रामवासी उपस्थित थे।1
- रांची के कोकर इलाके से 18 महीने की मासूम अदिति पांडे के लापता होने के 18 दिन बीत जाने के बावजूद कोई सुराग न मिलने पर अब लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में आज कोकर से अल्बर्ट एक्का चौक तक एक पैदल मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान अदिति की माँ ने भावुक होकर अपनी पीड़ा साझा की, उनकी आँखों में दर्द साफ झलक रहा था। वहीं, हिंदूवादी नेता भैरव सिंह ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तीखा बयान दिया और पूछा कि "आखिर बच्ची को जमीन खा गई या आसमान निगल गया?" परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों में बच्ची का कोई अता-पता न चलने से भारी नाराज़गी और आक्रोश व्याप्त है।1