*''रिश्तों की दुनिया में अनमोल उपहार है, प्रेम का यह रक्षाबंधन''* *(आलेख: रक्षाबंधन विशेष)* *रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि बहनों के सम्मान की प्रतिज्ञा है : सुश्री सरोज कंसारी* _*''रिश्तों की दुनिया में अनमोल उपहार है, प्रेम का यह रक्षाबंधन''* ========================================== जीवन के हर मोड़ पर यूँ तो विभिन्न रिश्ते बनते हैं। हर रिश्ता अपनी जगह अनमोल होता है जिसे हम मानते हैं और जोड़कर रखने का प्रयास भी करते हैं। कभी आपसी द्वेष, मनमुटाव, गलतफहमी की वजह से कुछ टूट जाते हैं और कई ऐसे भी होते हैं जो अंत तक साथ रहते हैं, जो विषम परिस्थिति में भी दूर नहीं होते। यही तो है दुनिया जहाँ सब अपनी सोच-विचार और समझ के अनुसार एक दूसरे से जुड़कर रहते हैं। भाव जहाँ शुद्ध होते हैं वहीं रिश्ते टिकते हैं, जहाँ नफरत हो वहाँ एक पल भी काटना मुश्किल होता है। घर-परिवार में चहल-पहल, हँसी-ठिठोली और मुस्कुराहट का जरिया होते हैं भाई-बहन। दुनिया का सबसे प्यारा रिश्ता, जो बचपन में साथ खेलते-पलते और बढ़ते हैं। आपस में लड़ते-झगड़ते हैं लेकिन दूसरे ही पल फिर मिल जाते हैं। रूठने-मनाने का यह सिलसिला चलता ही रहता है। एक दूसरे के लिए बहुत परवाह होती है जिनके बिना रह नहीं सकते। यूँ तो पराई होती है बहना लेकिन जीवन भर दिल में रहती है एक दूसरे के। एक पल भी स्मृति से ओझल नहीं होते। चहकते-उछलते, कूदते कब बड़े हो जाते हैं पता ही नहीं चलता। स्वार्थ से ऊपर होता है इनका प्यार। जब बचपन की दहलीज लाँघकर बड़ी होकर ससुराल जाती है तो सबसे ज्यादा चिंता एक भाई को होती है, न जाने कैसे अलग दुनिया में सामंजस्य करेगी, इतने लाड़-प्यार में रहने वाली। फिर भी हर तीज-त्यौहार और खुशी के अवसर पर इंतजार करती है, कब मायके जाए और आ ही जाती है अपने परिवार का हाल-चाल जानने के लिए। एक अजीब विडंबना है इस समाज की, कैसे एक परिवार में पली बेटी अपने ही परिवार से जुदा हो जाती है और पराई कहलाती है? जब वो विवाह के बाद मायके आती है तो अपने ही घर में पराई हो जाती है। खुलकर कहने से संकोच करती है, अपनी परेशानी बताने से डरती है। ज्यादा दिन रहने पर उसे चिंता रहती है। दो परिवारों के बीच उलझ जाती है। वैसे भी वो मायके की किसी चीज का बँटवारा नहीं माँगती, सब कुछ भाई के लिए छोड़ जाती है लेकिन बहुत ही तकलीफ होती है एक बहन को जब नए रिश्ते में बंधने के बाद जीवन साथी पाकर वे बहन को भूल जाते हैं, छोड़ देते हैं। कहती नहीं सिर्फ सहती है, घुटती है और बचपन में भाई के साथ गुजारी मधुर स्मृति को याद करती है कि कैसे भाई उनकी छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रखते थे, आज क्या हो गया? जब विशेष अवसर में भी उनको अपने ही घर में मान-सम्मान, प्यार और दुलार नहीं मिलता, भाई के परिवार बसने से घर की स्थिति बदल जाती है अधिकतर परिवारों में जो कि अनुचित है। चाहे जीवन का कोई भी मोड़ हो कभी भी बहन को पराएपन का एहसास न होने दें, यही भाई-बहन के रिश्तों की सार्थकता है, औपचारिकता न हो, प्रेम के मायने न बदलें। जो आपके लिए हर पल खुशियों की दुआ माँगती है उन्हें आपसे अपनापन भी न मिले तो धिक्कार है। आज समय बदला है, बेटे-बेटी में कोई फर्क नहीं, माता-पिता की संपत्ति में दोनों का बराबर अधिकार है, वे चाहें तो अपना अधिकार पूरा बराबर ले सकती हैं लेकिन हर युग में नारीशक्ति अपने त्याग और तपस्या का परिचय देती है, कभी माँगती नहीं, अपना हिस्सा खुद छोड़ देती है, इससे अधिक और क्या चाहिए? रिश्तों की दुनिया एक अनोखा उपहार है जहाँ हम रहते हैं, सुख-दुःख को सहते हैं और तकलीफ में साथ खड़े होते हैं, भटकने पर राह दिखाते हैं, भले ही राह अलग हो जाती है लेकिन हृदय में वे स्थापित होते हैं। दिल से जुड़े रिश्ते नाजुक होते हैं लेकिन प्रेम की एक बूँद पड़ने से ही मजबूत बन जाते हैं, जो जीवन के हर सफर में साथ रहते हैं, उनके एहसास, करुणा, दया, ममता और आशीर्वाद से एक नई राह मिलती है, निराश नहीं होते, अपनेपन में एक उत्साह होती है जिनके होने से ही जीने की हर पल एक नई वजह मिलती है। रिश्तों के इस महासागर में हर इंसान डुबकी लगाता है और अपने जीवन को धन्य बनाता है, जहाँ मर्यादा, संयम, साहस, शौर्य, सम्मान के गुण सीखते हैं। कई रिश्ते होते हैं, माता-पिता एक कड़ी होते हैं जो सभी को जोड़कर रखते हैं, घर के बड़े बुजुर्ग उसके संरक्षक होते हैं, अच्छी-बुरी बातों का ज्ञान कराते हैं। घर के हर सदस्य आपस में एक दूसरे के रक्षा कवच होते हैं। पहले परिवार को प्राथमिकता देना, जहाँ रहते हैं उनके खुश होने पर ही हम अन्य रिश्तों को निभा पाने की क्षमता विकसित कर पाते हैं। किसी को चोट पहुँचने पर मरहम बन जाते हैं, यही तो है लगाव जो कभी छूटता नहीं, चाहे कितने भी दर्द मिलें और बढ़ता ही है। भाई-बहन के अटूट बंधन का पर्व रक्षाबंधन है। एक डोर में जीवन के सार छुपे होते हैं, सिर्फ नाम के लिए नहीं होते। कोई भी त्यौहार, भारतीय संस्कृति में हर पर्व का पौराणिक और धार्मिक महत्व है, फिर भाई-बहन का रिश्ता तो पवित्रता की असीम पराकाष्ठा का संदेश देता है। हर भाई को समझना होगा कि किसी भी हालत में बहन की आँख में एक बूँद आँसू न आए, आपके किसी व्यवहार से दिल न दुखे, हर मोड़ पर उनका ध्यान रखें, उनकी सुरक्षा के लिए तैयार रहें। रक्षाबंधन एक संकल्प का पर्व है, सिर्फ खून के रिश्ते का ही नहीं, दुनिया के हर कोने में किसी की बहन बेबस, लाचार न हो। जहाँ भी कोई अकेली बेटी, बहन, माँ, बहू मुसीबत में दिखे उनकी सहायता के लिए आगे आएँ। अगर हर भाई पवित्रता के इस पर्व को समझे तो एक ही बात महत्वपूर्ण है, कसम कभी टूटे नहीं। एक कसम लें कि किसी की बेटी को बुरी नजर से न देखें, उन पर टीका-टिप्पणी न करें, छेड़खानी करने वाले वहशी दरिंदों को कड़ी सजा दिलवाएँ। ऐसी व्यवस्था और उपाय ढूँढें कि हर जगह बहन सुरक्षित रहे, हर बहन में अपनी बहन की छवि देखें। हर गली-मोहल्ले, चौक-चौराहे, सड़क, सूनी राह में एक युवाओं का संगठन बने जहाँ किसी भी बेटी से गलत होने पर तुरंत उनकी सुरक्षा हो सके। तभी रक्षाबंधन का यह पर्व सही मायने में भाई के प्रति प्रेम का अटूट बंधन हो पाएगा और भारत की बेटी हर जगह शान से सफलता का परचम लहरा पाएगी। हर बहन भाई का आदर करे, उनकी सही बातों का अनुकरण करे, किसी के बहकावे में आकर गलत कदम न उठाने का संकल्प रक्षाबंधन में अपने भाई को अवश्य दे। बहला-फुसलाकर बहन की पवित्रता को भंग करने वाले हर रावण का विनाश करने के लिए हर भाई को अब राम के गुणों को अपनाना ही चाहिए ताकि कोई सीता लक्ष्मण रेखा न लाँघे। भारतीय संस्कृति की विशेषता है वसुधैव कुटुम्बकम्, इस दृष्टि से पूरा संसार ही एक परिवार है, एक सुरक्षा का कवच बन जाए। जागरूक और सतर्क हो भाई तो कोई बहन बीच सड़क, सूनी राह, जंगल-झाड़ी में लहूलुहान नहीं होगी और हर बहन सोच-समझकर ही घर की दहलीज लाँघे। हर पग पर खड़े हैं जाहिल दरिंदे, पहचान करना मुश्किल है। दामन न छोड़े परिवार का, भाई-बहन का प्यार सदैव से पवित्र है और रहेगा, यूँ ही एक बंधन में रहे, कभी किसी का साथ न छूटे, रक्षाबंधन यही संदेश लेकर आया है। कोई बहन साक्षी न बने और श्रद्धा की तरह किसी दरिंदे के प्यार में अंधी न हो, भाइयों पर विश्वास रखें, उनका साथ दें। *सुश्री सरोज कंसारी* कवयित्री, लेखिका व अध्यापिका रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा-राजिम, रायपुर, (छत्तीसगढ़)
*''रिश्तों की दुनिया में अनमोल उपहार है, प्रेम का यह रक्षाबंधन''* *(आलेख: रक्षाबंधन विशेष)* *रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि बहनों के सम्मान की प्रतिज्ञा है : सुश्री सरोज कंसारी* _*''रिश्तों की दुनिया में अनमोल उपहार है, प्रेम का यह रक्षाबंधन''* ========================================== जीवन के हर मोड़ पर यूँ तो विभिन्न रिश्ते बनते हैं। हर रिश्ता अपनी जगह अनमोल होता है जिसे हम मानते हैं और जोड़कर रखने का प्रयास भी करते हैं। कभी आपसी द्वेष, मनमुटाव, गलतफहमी की वजह से कुछ टूट जाते हैं और कई ऐसे भी होते हैं जो अंत तक साथ रहते हैं, जो विषम परिस्थिति में भी दूर नहीं होते। यही तो है दुनिया जहाँ सब अपनी सोच-विचार और समझ के अनुसार एक दूसरे से जुड़कर रहते हैं। भाव जहाँ शुद्ध होते हैं वहीं रिश्ते टिकते हैं, जहाँ नफरत हो वहाँ एक पल भी काटना मुश्किल होता है। घर-परिवार में चहल-पहल, हँसी-ठिठोली और मुस्कुराहट का जरिया होते हैं भाई-बहन। दुनिया का सबसे प्यारा रिश्ता, जो बचपन में साथ खेलते-पलते और बढ़ते हैं। आपस में लड़ते-झगड़ते हैं लेकिन दूसरे ही पल फिर मिल जाते हैं। रूठने-मनाने का यह सिलसिला चलता ही रहता है। एक दूसरे के लिए बहुत परवाह होती है जिनके बिना रह नहीं सकते। यूँ तो पराई होती है बहना लेकिन जीवन भर दिल में रहती है एक दूसरे के। एक पल भी स्मृति से ओझल नहीं होते। चहकते-उछलते, कूदते कब बड़े हो जाते हैं पता ही नहीं चलता। स्वार्थ से ऊपर होता है इनका प्यार। जब बचपन की दहलीज लाँघकर बड़ी होकर ससुराल जाती है तो सबसे ज्यादा चिंता एक भाई को होती है, न जाने कैसे अलग दुनिया में सामंजस्य करेगी, इतने लाड़-प्यार में रहने वाली। फिर भी हर तीज-त्यौहार और खुशी के अवसर पर इंतजार करती है, कब मायके जाए और आ ही जाती है अपने परिवार का हाल-चाल जानने के लिए। एक अजीब विडंबना है इस समाज की, कैसे एक परिवार में पली बेटी अपने ही परिवार से जुदा हो जाती है और पराई कहलाती है? जब वो विवाह के बाद मायके आती है तो अपने ही घर में पराई हो जाती है। खुलकर कहने से संकोच करती है, अपनी परेशानी बताने से डरती है। ज्यादा दिन रहने पर उसे चिंता रहती है। दो परिवारों के बीच उलझ जाती है। वैसे भी वो मायके की किसी चीज का बँटवारा नहीं माँगती, सब कुछ भाई के लिए छोड़ जाती है लेकिन बहुत ही तकलीफ होती है एक बहन को जब नए रिश्ते में बंधने के बाद जीवन साथी पाकर वे बहन को भूल जाते हैं, छोड़ देते हैं। कहती नहीं सिर्फ सहती है, घुटती है और बचपन में भाई के साथ गुजारी मधुर स्मृति को याद करती है कि कैसे भाई उनकी छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रखते थे, आज क्या हो गया? जब विशेष अवसर में भी उनको अपने ही घर में मान-सम्मान, प्यार और दुलार नहीं मिलता, भाई के परिवार बसने से घर की स्थिति बदल जाती है अधिकतर परिवारों में जो कि अनुचित है। चाहे जीवन का कोई भी मोड़ हो कभी भी बहन को पराएपन का एहसास न होने दें, यही भाई-बहन के रिश्तों की सार्थकता है, औपचारिकता न हो, प्रेम के मायने न बदलें। जो आपके लिए हर पल खुशियों की दुआ माँगती है उन्हें आपसे अपनापन भी न मिले तो धिक्कार है। आज समय बदला है, बेटे-बेटी में कोई फर्क नहीं, माता-पिता की संपत्ति में दोनों का बराबर अधिकार है, वे चाहें तो अपना अधिकार पूरा बराबर ले सकती हैं लेकिन हर युग में नारीशक्ति अपने त्याग और तपस्या का परिचय देती है, कभी माँगती नहीं, अपना हिस्सा खुद छोड़ देती है, इससे अधिक और क्या चाहिए? रिश्तों की दुनिया एक अनोखा उपहार है जहाँ हम रहते हैं, सुख-दुःख को सहते हैं और तकलीफ में साथ खड़े होते हैं, भटकने पर राह दिखाते हैं, भले ही राह अलग हो जाती है लेकिन हृदय में वे स्थापित होते हैं। दिल से जुड़े रिश्ते नाजुक होते हैं लेकिन प्रेम की एक बूँद पड़ने से ही मजबूत बन जाते हैं, जो जीवन के हर सफर में साथ रहते हैं, उनके एहसास, करुणा, दया, ममता और आशीर्वाद से एक नई राह मिलती है, निराश नहीं होते, अपनेपन में एक उत्साह होती है जिनके होने से ही जीने की हर पल एक नई वजह मिलती है। रिश्तों के इस महासागर में हर इंसान डुबकी लगाता है और अपने जीवन को धन्य बनाता है, जहाँ मर्यादा, संयम, साहस, शौर्य, सम्मान के गुण सीखते हैं। कई रिश्ते होते हैं, माता-पिता एक कड़ी होते हैं जो सभी को जोड़कर रखते हैं, घर के बड़े बुजुर्ग उसके संरक्षक होते हैं, अच्छी-बुरी बातों का ज्ञान कराते हैं। घर के हर सदस्य आपस में एक दूसरे के रक्षा कवच होते हैं। पहले परिवार को प्राथमिकता देना, जहाँ रहते हैं उनके खुश होने पर ही हम अन्य रिश्तों को निभा पाने की क्षमता विकसित कर पाते हैं। किसी को चोट पहुँचने पर मरहम बन जाते हैं, यही तो है लगाव जो कभी छूटता नहीं, चाहे कितने भी दर्द मिलें और बढ़ता ही है। भाई-बहन के अटूट बंधन का पर्व रक्षाबंधन है। एक डोर में जीवन के सार छुपे होते हैं, सिर्फ नाम के लिए नहीं होते। कोई भी त्यौहार, भारतीय संस्कृति में हर पर्व का पौराणिक और धार्मिक महत्व है, फिर भाई-बहन का रिश्ता तो पवित्रता की असीम पराकाष्ठा का संदेश देता है। हर भाई को समझना होगा कि किसी भी हालत में बहन की आँख में एक बूँद आँसू न आए, आपके किसी व्यवहार से दिल न दुखे, हर मोड़ पर उनका ध्यान रखें, उनकी सुरक्षा के लिए तैयार रहें। रक्षाबंधन एक संकल्प का पर्व है, सिर्फ खून के रिश्ते का ही नहीं, दुनिया के हर कोने में किसी की बहन बेबस, लाचार न हो। जहाँ भी कोई अकेली बेटी, बहन, माँ, बहू मुसीबत में दिखे उनकी सहायता के लिए आगे आएँ। अगर हर भाई पवित्रता के इस पर्व को समझे तो एक ही बात महत्वपूर्ण है, कसम कभी टूटे नहीं। एक कसम लें कि किसी की बेटी को बुरी नजर से न देखें, उन पर टीका-टिप्पणी न करें, छेड़खानी करने वाले वहशी दरिंदों को कड़ी सजा दिलवाएँ। ऐसी व्यवस्था और उपाय ढूँढें कि हर जगह बहन सुरक्षित रहे, हर बहन में अपनी बहन की छवि देखें। हर गली-मोहल्ले, चौक-चौराहे, सड़क, सूनी राह में एक युवाओं का संगठन बने जहाँ किसी भी बेटी से गलत होने पर तुरंत उनकी सुरक्षा हो सके। तभी रक्षाबंधन का यह पर्व सही मायने में भाई के प्रति प्रेम का अटूट बंधन हो पाएगा और भारत की बेटी हर जगह शान से सफलता का परचम लहरा पाएगी। हर बहन भाई का आदर करे, उनकी सही बातों का अनुकरण करे, किसी के बहकावे में आकर गलत कदम न उठाने का संकल्प रक्षाबंधन में अपने भाई को अवश्य दे। बहला-फुसलाकर बहन की पवित्रता को भंग करने वाले हर रावण का विनाश करने के लिए हर भाई को अब राम के गुणों को अपनाना ही चाहिए ताकि कोई सीता लक्ष्मण रेखा न लाँघे। भारतीय संस्कृति की विशेषता है वसुधैव कुटुम्बकम्, इस दृष्टि से पूरा संसार ही एक परिवार है, एक सुरक्षा का कवच बन जाए। जागरूक और सतर्क हो भाई तो कोई बहन बीच सड़क, सूनी राह, जंगल-झाड़ी में लहूलुहान नहीं होगी और हर बहन सोच-समझकर ही घर की दहलीज लाँघे। हर पग पर खड़े हैं जाहिल दरिंदे, पहचान करना मुश्किल है। दामन न छोड़े परिवार का, भाई-बहन का प्यार सदैव से पवित्र है और रहेगा, यूँ ही एक बंधन में रहे, कभी किसी का साथ न छूटे, रक्षाबंधन यही संदेश लेकर आया है। कोई बहन साक्षी न बने और श्रद्धा की तरह किसी दरिंदे के प्यार में अंधी न हो, भाइयों पर विश्वास रखें, उनका साथ दें। *सुश्री सरोज कंसारी* कवयित्री, लेखिका व अध्यापिका रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा-राजिम, रायपुर, (छत्तीसगढ़)
- युवाओं ने सवालों से घेरा गृह मंत्री विजय शर्मा ...................................... छत्तीसगढ़ में पुलिस भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन कवर्धा में चल रहा है। अभ्यर्थी गृह मंत्री विजय शर्मा के आवास के बाहर धरना दे रहे हैं और उनकी मुख्य मांग दूसरी चयन/वेटिंग लिस्ट जारी करने की है। पुलिस भर्ती में कुल 5,967 पद घोषित किए गए थे, जिनमें अभ्यर्थियों के अनुसार 1,940 पद अभी भी खाली हैं। उनका कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों का अलग-अलग जिलों में एक से अधिक जगह चयन होने और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव के कारण ये पद खाली रह गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे कई महीनों से दूसरी सूची का इंतजार कर रहे हैं और सरकार को बचे हुए पदों पर योग्य उम्मीदवारों को मौका देना चाहिए। भारी बारिश के बावजूद करीब 200-300 अभ्यर्थी धरने पर डटे रहे और उन्होंने कहा है कि दूसरी सूची जारी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं गृह मंत्री विजय शर्मा के अनुसार पहली चयन सूची और पहली वेटिंग लिस्ट पहले ही जारी हो चुकी है; दूसरी वेटिंग लिस्ट पर अंतिम फैसला कैबिनेट को लेना है, और मुख्यम1
- विप्र बहनों ने सीआरपीएफ जवानों की कलाईयों पर बांधा राष्ट्रप्रेम और स्नेह का रक्षा सूत्र रक्षाबंधन से पूर्व 211 वीं वाहिनी में हुआ भावुक एवं गरिमामय आयोजन, जवा सह गनों ने महसूस किया बहनों का अपनापन नवापारा नगर। रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में दिन-रात समर्पित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के प्रति सम्मान और आत्मीयता व्यक्त करते हुए विप्र कुल महिला मंडल, ब्राह्मण समाज नवापारा द्वारा 211वीं वाहिनी सीआरपीएफ में रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विप्र समाज की बहनों ने सैनिक भाइयों की कलाइयों पर प्रेम, स्नेह, विश्वास और राष्ट्रभक्ति का रक्षा सूत्र बांधा। अपने परिवार और प्रियजनों से दूर रहकर देश की सुरक्षा में निरंतर तैनात रहने वाले जवानों की कलाई पर जब बहनों ने राखी बांधी तो पूरा वातावरण भावुकता, आत्मीयता और देशभक्ति से भर उठा। यह राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि देश की रक्षा में समर्पित जवानों के प्रति समाज की कृतज्ञता, सम्मान और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक बनी। कई जवान इस आत्मीय सम्मान से भावुक हो उठे और उनकी आंखों में खुशी व अपनत्व के आंसू छलक आए। कार्यक्रम के दौरान श्रीमती विद्या तिवारी ने ‘बहनों ने भाई की कलाई में प्यार बांधा है’ रक्षाबंधन गीत प्रस्तुत कर सैनिक भाइयों को भाव-विभोर कर दिया। गीत के माध्यम से बहनों ने जवानों के प्रति अपने स्नेह और शुभकामनाओं को अभिव्यक्त किया। विप्र कुल महिला मंडल की अध्यक्ष रेखा तिवारी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि त्याग, कर्तव्य, सुरक्षा और विश्वास की भावना को मजबूत करने वाला पर्व है। देश की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करने वाले जवान वास्तव में पूरे देश के भाई हैं। उनकी कलाई पर राखी बांधना हम सभी के लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम को सफल बनाने में महिला मंडल की उपाध्यक्ष तनु मिश्रा, सचिव सोमा शर्मा, कोषाध्यक्ष सुभाषिनी शर्मा, संरक्षक विद्या तिवारी, नंदनी शर्मा, शकुंतला शर्मा, रमा शर्मा, सविता दुबे, रेखा शुक्ला, डॉ. मधु रानी शुक्ला सहित सदस्य कुमुद पुराणिक, पूनम दीवान, भावना शर्मा, मुक्ति शर्मा, स्वाति शुक्ला, सुषमा शर्मा, स्मृति शर्मा, कुशाली दीवान, कल्याणी शर्मा एवं पुष्पांजलि तिवारी ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में विप्र कुल महिला मंडल की ओर से सभी सैनिक भाइयों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुरक्षित जीवन की कामना की गई। पूनम दीवान ने सभी जवानों, उपस्थित बहनों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। रक्षाबंधन के इस विशेष आयोजन ने यह संदेश दिया कि देश की रक्षा में तैनात जवान अकेले नहीं हैं, पूरा समाज उनके साथ खड़ा है। उनकी कलाई पर बंधा प्रत्येक रक्षा सूत्र राष्ट्र के प्रति सम्मान, विश्वास और अटूट स्नेह का प्रतीक है।1
- गरियाबन्द : - 26/8/2026 को जतमई का छोटा सा जल प्रपात का नजारा बहुत ही सुन्दर है, यह जगह अभी घुमने के लिए अच्छा है, लेकिन इस बात का ध्यान रखे की जाली.के ऊपर ना जाये क्योंकि पानी का बहाव इतना हैं की आपको सिधे निचे गिरा सकता है, जिससे आपको गंभीर. चोट लग सकता है, हमेशा सतर्क रहे !1
- अभूतपूर्व सफलता, आत्मनिर्भर और हरित भविष्य की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने Fast Breeder Test Reactor की गर्मी का इस्तेमाल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में भारत की एक और ऐतिहासिक छलांग! 🇮🇳⚛️ भारत के परमाणु रिएक्टर अब बिजली के साथ-साथ प्रदूषण-मुक्त हाइड्रोजन फ्यूल के उत्पादन में भी मदद करेंगे। तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित IGCAR में भारतीय वैज्ञानिकों ने Fast Breeder Test Reactor की गर्मी का इस्तेमाल कर कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल साइकिल से हाइड्रोजन बनाने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। बिना फॉसिल फ्यूल और अतिरिक्त बिजली के यह नवाचार भारत के ऊर्जा-सुरक्षित, आत्मनिर्भर और हरित भविष्य की दिशा में बड़ा कदम है। 🌿 देखिए, ये विस्तृत रिपोर्ट…1
- गाड़ी से उतरते ही महापौर की इनोवा में लगी भीषण आग, निगम परिसर में मची अफरा-तफरी, गाड़ी से उतरते ही महापौर की इनोवा में लगी भीषण आग, निगम परिसर में मची अफरा-तफरी, नगर निगम दुर्ग में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब महापौर अलका बाघमार की इनोवा गाड़ी में अचानक भीषण आग लग गई। गनीमत रही कि महापौर गाड़ी से उतर चुकी थी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई। घटना पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। फोरेंसिक विभाग भी मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। बता दें कि महापौर अलका बाघमार करीब 12:15 बजे नगर निगम कार्यालय पहुंची। जैसे ही उन्होंने अपनी इनोवा गाड़ी खड़ी कर उससे नीचे कदम रखा, कुछ ही देर बाद गाड़ी में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। निगम परिसर में आग की खबर फैलते ही कर्मचारियों और आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग इतनी तेज थी कि काबू पाना मुश्किल हो गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड के जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक इनोवा पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। किसी साजिश की आशंका नहीं : महापौर महापौर अलका बाघमार ने बताया कि गाड़ी में कुछ महत्वपूर्ण और कीमती दस्तावेज भी रखे थे, जो आग में जल गए। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी साजिश की आशंका नहीं है और शुरुआती तौर पर वायरिंग में खराबी या शॉर्ट सर्किट से आग लगने की संभावना लग रही है। महापौर के मुताबिक महज 8 से 10 मिनट के भीतर पूरी गाड़ी जलकर खाक हो गई। उन्होंने कहा कि समय रहते वे गाड़ी से उतर गईं, वरना घटना और भी गंभीर हो सकती थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। आग लगने की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।3
- मशहूर UP, बिहार के पॉवर स्तर और गायक पवन सिंह को वहां पब्लिक. ने खुब कि पिटाई... UP, BIHAR, ke gayak pawan singh बिहार MLC बन कर गए और शराब के नशे में बाहर सड़क पर आते जाते लोगो को गंदी भदी गालिया देने लगे थे फिर क्या पब्लिक ने मिलकर पवन सिंह को बेदम पिटाई किया गई उनकी सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल और उनकी शिक्योरिटी में लगे ब्लैक कमांडो भी बड़े मुश्किलों से छुड़ाया, पब्लिक ने कम से कम 10 से 15 मिनट बेदम पिटाई किया....1
- NH-130C के गड्ढे में बैठा कांग्रेस का विरोध, सड़क की बदहाली पर नेताओं ने उठाई आवाज NH-130C के गड्ढे में बैठा कांग्रेस का विरोध, सड़क की बदहाली पर नेताओं ने उठाई आवाज मैनपुर। नेशनल हाईवे-130C की जर्जर हालत अब सिर्फ परेशानी का कारण नहीं, बल्कि विरोध का मुद्दा भी बनती जा रही है। सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों को लेकर कांग्रेस नेताओं ने मैनपुर क्षेत्र में अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। नेता खुद सड़क किनारे बने गड्ढे में बैठ गए और शासन-प्रशासन का ध्यान बदहाल सड़क की ओर खींचा। प्रदर्शन का यह तरीका राहगीरों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सड़क से गुजर रहे लोग कुछ देर रुककर नेताओं का विरोध देखते नजर आए। गड्ढे में बैठकर पूछा—आखिर कब सुधरेगी सड़क? कांग्रेस नेताओं का कहना है कि NH-130C क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, लेकिन लंबे समय से सड़क की हालत खराब बनी हुई है। जगह-जगह गहरे गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी और हादसे का खतरा बढ़ा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सड़क की बदहाली को दिखाने के लिए अब सिर्फ ज्ञापन और शिकायत काफी नहीं है, इसलिए जिस गड्ढे से जनता रोज परेशान हो रही है, उसी गड्ढे में बैठकर जिम्मेदारों को स्थिति दिखाई गई। प्रदर्शन में ये नेता रहे मौजूद इस दौरान कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव, महामंत्री गेंदू यादव, आदिवासी ब्लॉक अध्यक्ष दुलेंद्र नेगी, सचिव लीकेश यादव, डोमार साहू, अर्जुन नायक, तीव कुमार सोनी, प्रमोद नेताम, इम्तियाज मेमन और गौवकरण नागेश सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग करते हुए कहा कि खराब सड़क के कारण आम लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश में बढ़ जाता है खतरा बारिश के दौरान सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। भीड़ जुटी तो प्रदर्शन बना चर्चा का विषय गड्ढे में बैठकर किए गए प्रदर्शन को देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुटती रही। राहगीरों के बीच भी सड़क की स्थिति को लेकर चर्चा होती रही। कांग्रेस नेताओं ने सरकार और संबंधित विभाग से सवाल किया कि आखिर NH-130C की बदहाली कब दूर होगी? क्या सड़क की मरम्मत किसी बड़े हादसे के बाद होगी या उससे पहले ही जिम्मेदार विभाग जागेगा? सड़क के गड्ढे से निकला बड़ा सवाल यह प्रदर्शन कुछ देर का था, लेकिन इसके जरिए कांग्रेस नेताओं ने सड़क की बदहाली को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। अब देखना होगा कि इस विरोध के बाद संबंधित विभाग NH-130C की मरम्मत को लेकर क्या कदम उठाता है। जनता का सवाल साफ है—सड़क पर गड्ढे भरेंगे या फिर गड्ढों पर ही विरोध प्रदर्शन का सिलसिला चलता रहेगा?3
- नशे की लत से बाल बाल बच कर वापिस लौटा बाइक सवार युवक सावधानी हटी दुर्घटना घटी1