Suresh Chandra Agrawal: प्रेम से बोलो बाँके बिहारी लाल की जय 🌹🙏 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *।।श्रीकृष्ण।।* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 *🦚🌺 जय श्रीकृष्ण 🌺🦚* > ॥ ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। > प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥ *🙏 अर्थ:* *_"हे वासुदेव के पुत्र श्रीकृष्ण! हे समस्त जगत के पालनहार, परमात्मा और गोविंद! आपको बार-बार प्रणाम है। आपकी शरण में आने वाले भक्तों के सभी दुःख, कष्ट और क्लेश दूर हो जाते हैं।"_* *🌿 संदेश:* *_जो श्रद्धा और विश्वास से श्रीकृष्ण का स्मरण करता है, उसके जीवन में शांति, साहस और सही मार्ग का प्रकाश अवश्य होता है।_* *🦚 राधे-राधे! जय श्रीकृष्ण! 🙏💙* 🌸🦚 राधा-कृष्ण के प्रेरणादायक विचार 🦚🌸 💖 जहाँ प्रेम सच्चा होता है, वहाँ राधा-कृष्ण की कृपा अवश्य होती है। 🙏🌸 🦚 चिंता मत करो, जो तुम्हारे लिए सही है, कृष्ण उसे तुमसे कभी दूर नहीं जाने देंगे। 💫🙏 🌿 कर्म करते रहो, फल की चिंता मत करो—कृष्ण पर विश्वास रखो। 🕉️❤️ 🌸 राधा नाम में प्रेम है, कृष्ण नाम में शांति है। 🦚✨♥️🥰👌🙏 🙏 जब रास्ते कठिन लगें, तब कृष्ण को याद करो; मंज़िल खुद आसान लगने लगेगी। 💖🌺 🦚 जिसके सिर पर श्रीकृष्ण का हाथ हो, उसकी जिंदगी में हार भी एक सीख बन जाती है। 🌟🙏 *भगवान् से निर्मल प्रेम की कथा* *बाल गोपाल* एक गांव में एक निर्धन दम्पत्ति रहता था, सुन्दर और लीला। . दोनों पति-पत्नी अत्यंत परिश्रमी थे। सारा दिन परिश्रम करते सुन्दर-सुन्दर कपड़े बनाते, किन्तु उनको उनके बनाए वस्त्रों की अधिक कीमत नहीं मिल पाती थी। . दोनों ही अत्यन्त संतोषी स्वाभाव के थे जो मिलता उसी से संतुष्ट हो कर एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहकर अपना जीवन-निर्वाह कर लेते थे। . वह दोनों भगवान् श्री कृष्ण के परम भक्त थे, दिन भर के परिश्रम के बाद जो भी समय मिलता उसे दोनों भगवान् के भजन-कीर्तन में व्यतीत करते। . सुन्दर बाबा के पास एक तानपुरा और एक खड़ताल थी, जब दोनों मिलकर भजन गाते तो सुन्दर तानपुरा बजाता और लीला खड़ताल, फिर तो दोनों भगवान् के भजन के ऐसा खो जाते की उनको अपनी भूख-प्यास की चिंता भी नहीं रहती थे। . यूं तो दोनों संतोषी स्वाभाव के थे, अपनी दीन-हीन अवस्था के लिए उन्होंने कभी भगवान् को भी कोई उल्हाना नही दिया और अपने इसी जीवन में प्रसन्न थे किन्तु ... एक दुःख उनको सदा कचोटता रहता था, उनके कोई संतान नहीं थी। इसको लेकर वह सदा चिंतित रहा करते थे, किन्तु रहते थे फिर भी सदा भगवान् में मग्न, . इसको भी उन्होंने भगवान् की लीला समझ कर स्वीकार कर लिया और निष्काम रूप से श्री कृष्ण के प्रेम-भक्ति में डूबे रहते। . जब उनकी आयु अधिक होने लगी तो एक दिन लीला ने सुन्दर से कहा कि हमारी कोई संतान नहीं है, कहते है की संतान के बिना मुक्ति प्राप्त नहीं होती, . अब हमारी आयु भी अधिक को चली है, ना जाने कब बुलावा आ जाए, मरने की बाद कौन हमारी चिता को अग्नि देगा और कौन हमारे लिए तर्पण आदि का कार्य करेगा, कैसे हमारी मुक्ति होगी। . सुन्दर बोला तू क्यों चिंता करती है, ठाकुर जी है ना वही सब देखेंगे। सुन्दर ने यह बात कह तो दी किन्तु वह भी चिंता में डूब गया, . तभी उसके मन में एक विचार आया वह नगर में गया और श्री कृष्ण के बाल गोपाल रूप की एक प्रतिमा ले आया। . घर आ कर बोला अब तुझे चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है मैं यह बाल गोपाल लेकर आया हूँ, . हमारे कोई संतान नहीं तो वह भी इन्ही की तो लीला है, हम इनको ही अपने पुत्र के सामान प्रेम करेंगे, यही हमारे पुत्र का दायित्व पूर्ण करेंगे यही हमारी मुक्ति करेंगे। . सुन्दर की बात सुन कर लीला अत्यंत प्रसन्न हुई, उसने बाल गोपाल को लेकर अपने हृदय से लगा लिया और बोली आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं, आज से यही हमारा लल्ला है। . दोनों पति-पत्नी ने घर में एक कोना साफ़ करके वहां के स्थान बनाया और एक चौंकी लगा कर उसपर बाल गोपाल को विराजित कर दिया। . तब से जुलाहा दंपत्ति का नियम हो गया वह प्रतिदिन बाल गोपाल को स्नान कराते उनको धुले वस्त्र पहनाते अपनी संतान की तरह उनको लाड-लडाते, उन्ही के सामने बैठ कर भजन कीर्तन करते और वहीं सो जाते। . जुलाहा अपने हाथ से बाल गोपाल के लिए सुन्दर वस्त्र बनाता और उनको पहनाता इसमें उसको बड़ा आनंद आता। धीरे-धीरे दोनों बाल गोपाल को अपनी संतान के सामान ही प्रेम करने लगे। . लीला का नियम था की वह प्रति दिन अपने हाथ से अपने लल्ला को भोजन कराती तब स्वयं भोजन करती, लल्ला को भोजन कराते समय उसको ऐसा ही प्रतीत होता मानो अपने पुत्र को ही भोजन करा रही हो। . उन दोनों के निश्चल प्रेम को देख कर करुणा निधान भगवान् अत्यन्त्त प्रसन्न हुए और उन्होंने अदृश्य रूप में आकर स्वयं भोजन खाना आरम्भ कर दिया, . लीला जब प्रेम पूर्वक बाल गोपाल को भोजन कराती तो भगवान् को प्रतीत होता मानो वह अपनी माँ के हाथो से भोजन कर रहें हैं, . उनको लीला के हाथ से प्रेम पूर्वक मिलने वाले हर कौर में माँ का प्रेम प्राप्त होता था, . लीलाधारी भगवान् श्री कृष्ण स्वयं माँ की उस प्रेम लीला के वशीभूत हो गए। किन्तु लीला कभी नहीं जान पाई कि स्वयं बाल-गोपाल उसके हाथ से भोजन करते हैं। . एक दिन कार्य बहुत अधिक होने के कारण लीला बाल गोपाल को भोजन कराना भूल गई। . गर्मी का समय था भरी दोपहरी में दोनों पति-पत्नी कार्य करते-करते थक गए और बिना भोजन किए ही सो गए, . उनको सोए हुए कुछ ही देर हुई थी कि उनको एक आवाज सुनाई दी.. माँ-बाबा मुझको भूख लगी है . दोनों हड़बड़ा कर उठ गए, चारो और देखा आवाज कहाँ से आई है, किन्तु कुछ दिखाई नहीं दिया। . तभी लीला को स्मरण हुआ की उसने अपने लल्ला को भोजन नहीं कराया, वह दौड़ कर लल्ला के पास पहुंची तो देखा की बाल गोपाल का मुख कुम्हलाया हुआ है, . इतना देखते ही दोनों पति-पत्नी वहीं उनके चरणों में गिर पड़े, दोनों की आँखों से आसुओं की धार बह निकली, . लीला तुरंत भोजन लेकर आई और ना जाने कैसा प्रेम उमड़ा की लल्ला को उठा कर अपनी गोद में बैठा लिया और भोजन कराने लगी, . दोनों पति-पत्नी रोते जाते और लल्ला को भोजन कराते जाते, साथ ही बार-बार उनसे अपने अपराध के लिए क्षमा मांगते जाते, . ऐसा प्रगाढ़ प्रेम देख कर भगवान् अत्यंत द्रवित हुए और अन्तर्यामी भगवान् श्रीहरि साक्षात् रूप में प्रकट हो गए। . भगवान् ने अपने हाथों से अपने रोते हुए माता-पिता की आँखों से आंसू पोंछे और बोले.. . प्रिय भक्त में तुम्हारी भक्ति और प्रेम से अत्यंत प्रसन्न हूँ, तुम जो चाहो वर माँग लो मैं तुम्हारी प्रत्येक इच्छा पूर्ण करूँगा. . इतना सुनते ही दोनों भगवान् के चरणों में गिर पड़े और बोले "दया निधान आप हमसे प्रसन्न हैं और स्वयं हमारे सम्मुख उपस्थित है, हमारा जीवन धन्य हो गया, इससे अधिक और क्या चाहिए, . इससे अधिक किसी भी वस्तु का भला क्या महत्त्व हो सकता है, आपकी कृपा हम पर बनी रहें बस इतनी कृपा करें" . श्रीहरि बोले “यदि तुम चाहो तो मैं तुम्हारे जीवन में संतान के आभाव को समाप्त कर के तुम्हे एक सुन्दर संतान प्रदान करूँगा" . यह सुनते ही सुन्दर और लीला एकदम व्याकुल होकर बोले "नही भगवन् हमको संतान नहीं चाहिये" . उनका उत्तर सुनकर भगवान् ने पूछा "किन्तु क्यों ! अपने जीवन में संतान की कमी को पूर्ण करने के लिए ही तो तुम मुझ को अपने घर लेकर आये थे " . यह सुनकर वह दोनों बोले, प्रभु हमको भय है कि यदि हमको संतान प्राप्त हो गई तो हमारा मोह उस संतान के प्रति बढ़ जाएगा और तब हम आपकी सेवा नहीं कर पाएंगे . उनका प्रेम और भक्ति से भरा उत्तर सुनकर करुणा निधान भगवान् करुणा से भर उठे, स्वयं भगवान् की आँखों से आँसू टपक पड़े वह बोले, . हे मैया, बाबा मैं यहाँ आया था आपके ऋण को उतारने के लिए किन्तु आपने तो मुझको सदा-सदा के लिए अपना ऋणी बना लिया, . मैं आपके प्रेम का यह ऋण कभी नहीं उतार पाउँगा, मैं सदा-सदा तुम दोनों का ऋणी रहूँगा, . मैं तुम्हारे प्रेम से अत्यंत प्रसन्न हूँ तुमने अपने निर्मल प्रेम से मुझको भी अपने बंधन में बांध लिया है. . मैं तुमको वचन देता हूँ कि आज से मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में तुम्हारे समस्त कार्य पूर्ण करूँगा तुमको कभी संतान का आभाव नहीं होने दूंगा, . मेरा वचन कभी असत्य नहीं होता" ऐसा कह कर भक्तवत्सल भगवान् बाल गोपाल की प्रतिमा में विलीन हो गए। . उस दिन से सुन्दर और लीला का जीवन बिल्कुल ही बदल गया उन्होंने सारा काम-धंधा छोड़ दिया और सारा दिन बाल गोपाल के भजन-कीर्तन और उनकी सेवा में व्यतीत करने लगे। . उनको ना भूख-सताती थी ना प्यास लगती थी, सभी प्रकार की इच्छाओं का उन्होंने पूर्ण रूप से त्याग कर दिया, . सुन्दर कभी कोई कार्य करता तो केवल अपने बाल गोपाल के लिए सुन्दर-सुन्दर वस्त्र बनाने का। . उनके सामने जब भी कोई परेशानी आती बाल गोपाल तुरंत ही एक बालक के रूप में उपस्तिथ हो जाते और उनके समस्त कार्य पूर्ण करते । . वह दंपत्ति और बालक गांव भर में चर्चा का विषय बन गए, किन्तु गाँव में कोई भी यह नहीं जान पाया की वह बालक कौन है, कहाँ से आता है, और कहाँ चला जाता है। . धीरे-धीरे समय बीतने लगा, जुलाह दंपत्ति बूढ़े हो गए, किन्तु भगवान् की कृपा उन पर बनी रही, . अब दोनों की आयु पूर्ण होने का समय आ चला था भगवत प्रेरणा से उनको यह ज्ञात हो गया की अब उनका समय पूरा होने वाला है, . एक दिन दोनों ने भगवान् को पुकारा, ठाकुर जी तुरंत प्रकट हो गए और उनसे उनकी इच्छा जाननी चाही, दोनों भक्त दम्पत्ति भगवान के चरणो में प्रणाम करके बोले .... . है नाथ हमने अपने पूरे जीवन में आपसे कभी कुछ नहीं माँगा, अब जीवन का अंतिम अमय आ गया है, इसलिए आपसे कुछ मांगना चाहते हैं.. . भगवान् बोले "निःसंकोच अपनी कोई भी इच्छा कहो मैं वचन देता हूँ कि तुम्हारी प्रत्येक इच्छा को पूर्ण करूँगा" . तब बाल गोपाल के अगाध प्रेम में डूबे उस वृद्ध दम्पति बोले "हे नाथ हमने अपने पुत्र के रूप में आपको देखा, और आपकी सेवा की... . आपने भी पुत्र के समान ही हमारी सेवा करी अब वह समय आ गया है जिसके लिए कोई भी माता-पिता पुत्र की कामना करते हैैं, . हे दीनबंधु, हमारी इच्छा है की हम दोनों पति-पत्नी के प्राण एक साथ निकले और हे दया निधान, जिस प्रकार एक पुत्र अपने माता-पिता की अंतिम क्रिया करता है, और उनको मुक्ति प्रदान करता है, . उसी प्रकार हे परमेश्वर, हमारी अंतिम क्रिया आप अपने हाथो से करें और हमको मुक्ति प्रदान करें . श्रीहरि ने दोनों को उनकी इच्छा पूर्ण करने का वचन दिया और बाल गोपाल के विग्रह में विलीन हो गए। . अंत में वह दिन आ पहुंचा जब प्रत्येक जीव को यह शरीर छोड़ना पड़ता है, दोनों वृद्ध दम्पति बीमार पड़ गए, उन दोनों की भक्ति की चर्चा गांव भर में थी इसलिए गांव के लोग उनका हाल जानने उनकी झोपड़ी पर पहुंचे, . किन्तु उन दोनों का ध्यान तो श्रीहरि में रम चुका था उनको नही पता कि कोई आया भी है, . नियत समय पर एक चमत्कार हुआ जुलाहे की झोपड़ी एक तीव्र और अलौकिक प्रकाश से भर उठी, . वहां उपस्थित समस्त लोगो की आँखे बंद हो गई, किसी को कुछ भी दिखाई नहीं पढ़ रहा था, कुछ लोग तो झोपड़ी से बाहर आ गए कुछ वही धरती पर बैठ गए। . श्री हरि आपने दिव्य चतर्भुज रूप में प्रकट हुए, उनकी अप्रितम शोभा समस्त सृष्टि को अलौकिक करने वाली थी, वातावरण में एक दिव्य सुगंध भर गई, . अपनी मंद-मंद मुस्कान से अपने उन भक्त माता-पिता की और देखते रहे, उनका यह दिव्य रूप देख कर दोनों वृद्ध अत्यंत आनंदित हुए, . अपने दिव्य दर्शनों से दोनों को तृप्त करने के बाद करुणा निधान, लीलाधारी, समस्त सृष्टि के पालनहार श्री हरि, वही उन दोनों के निकट धरती पर ही उनके सिरहाने बैठ गए, . भगवान् ने उन दोनों भक्तों का सर अपनी गोद में रखा, उनके शीश पर प्रेम पूर्वक अपना हाथ रखा, तत्पश्चात अपने हाथो से उनके नेत्र बंद कर दिए, . तत्काल ही दोनों के प्राण निकल कर श्री हरि में विलीन हो गए, पंचभूतों से बना शरीर पंच भूतो में विलीन हो गया। . कुछ समय बाद जब वह दिव्य प्रकाश का लोप हुआ तो सभी उपस्थित ग्रामीणो ने देखा की वहां ना तो सुन्दर था, ना ही लीला थी और ना ही बाल गोपाल थे। . शेष थे तो मात्र कुछ पुष्प जो धरती पर पड़े थे और एक दिव्य सुगंध जो वातावरण में चहुं और फैली थी। विस्मित ग्रामीणो ने श्रद्धा से उस धरती को नमन किया, . उन पुष्पों को उठा कर शीश से लगाया तथा सुंदर, लीला की भक्ति और गोविन्द के नाम का गुणगान करते हुए चल दिए उन पुष्पों के श्री गंगा जी में विसर्जित करने के लिए। . मित्रो...भक्त वह है जो एक क्षण के लिए भी विभक्त नहीं होता, अर्थात जिसका चित्त ईश्वर में अखंड बना रहे वह भक्त कहलाता है। सरल शब्दों में भक्ति के अंतिम चरण का अनुभव करने वाले को भक्त कहते हैं। 🌺जय जय श्री राधे......।🙏 कृपया पोस्ट को अपने मित्रों और परिवार के साथ शेयर कीजिए 🙏 *स्वाद ही नहीं फायदों में भी लाजवाब है पनीर, जानिए* 1 दांत और हड्डियों - पनीर का सबसे बेहतरीन लाभ है कि यह आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है साथ ही कैल्सीयम और फास्फोरस का एक बढ़िया स्त्रोत भी है। रोजाना पनीर का सेवन हड्डयिों की समस्या, जोड़ों में दर्द और दांत के रोगों से बचाए रखने में बेहद मददगार है। 2 मेटाबॉलिज्म - पाचन और पाचन तंत्र के लिए मेटाबॉलिज्म का रोल बहुत महत्वपूर्ण है। पनीर में अत्यधिक मात्रा में डायट्री फाइबर होते हैं जो भोजन के पाचन में बेहद मददगार साबित होता है। यह पाचन तंत्र के सुचारू रूप से चलने के लिए बेहद फायदेमंद और महत्वपूर्ण है। 3 कैंसर - पनीर का सबसे बड़ा लाभ यही है, इसमें कोई शक नहीं। हाल ही में हुए एक शोध में यह साबित हुआ है कि पनीर में कैंसर जनित कारणों और खतरों को कम करने की क्षमता है। पेट के कैंसर, कोलोन कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में पनीर बेहद प्रभावी साबित हुआ है। 4 डाइबिटीज - ओमेगा 3 से भरपूर पनीर डाइबिटीज से भी बेहद प्रभावी तरीके से लड़ता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि वे भी अपने डाइबिटीज रोगियों को रोजाना पनीर को डाइट में शा मिल करने की सलाह देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि पनीर दोनों टाइप के डाइबिटीज के लिए प्रभावी साबित होता है। 5 तुरंत एनर्जी - दूध से बनने के कारण पनीर में भी दूध के गुणों का भंडार है, जिनमें ऊर्जा का स्त्रोत भी शामिल है। शरीर में तुरंत ऊर्जा के लिए पनीर का सेवन फायदेमंद है। बॉडी ट्रेनिंग करने वालों के लिए यह और भी फायदे मंद है 🙏🌹 जय श्री राधे राधे 🙏🌹
Suresh Chandra Agrawal: प्रेम से बोलो बाँके बिहारी लाल की जय 🌹🙏 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *।।श्रीकृष्ण।।* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 *🦚🌺 जय श्रीकृष्ण 🌺🦚* > ॥ ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। > प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥ *🙏 अर्थ:* *_"हे वासुदेव के पुत्र श्रीकृष्ण! हे समस्त जगत के पालनहार, परमात्मा और गोविंद! आपको बार-बार प्रणाम है। आपकी शरण में आने वाले भक्तों के सभी दुःख, कष्ट और क्लेश दूर हो जाते हैं।"_* *🌿 संदेश:* *_जो श्रद्धा और विश्वास से श्रीकृष्ण का स्मरण करता है, उसके जीवन में शांति, साहस और सही मार्ग का प्रकाश अवश्य होता है।_* *🦚 राधे-राधे! जय श्रीकृष्ण! 🙏💙* 🌸🦚 राधा-कृष्ण के प्रेरणादायक विचार 🦚🌸 💖 जहाँ प्रेम सच्चा होता है, वहाँ राधा-कृष्ण की कृपा अवश्य होती है। 🙏🌸 🦚 चिंता मत करो, जो तुम्हारे लिए सही है, कृष्ण उसे तुमसे कभी दूर नहीं जाने देंगे। 💫🙏 🌿 कर्म करते रहो, फल की चिंता मत करो—कृष्ण पर विश्वास रखो। 🕉️❤️ 🌸 राधा नाम में प्रेम है, कृष्ण नाम में शांति है। 🦚✨♥️🥰👌🙏 🙏 जब रास्ते कठिन लगें, तब कृष्ण को याद करो; मंज़िल खुद आसान लगने लगेगी। 💖🌺 🦚 जिसके सिर पर श्रीकृष्ण का हाथ हो, उसकी जिंदगी में हार भी एक सीख बन जाती है। 🌟🙏 *भगवान् से निर्मल प्रेम की कथा* *बाल गोपाल* एक गांव में एक निर्धन दम्पत्ति रहता था, सुन्दर और लीला। . दोनों पति-पत्नी अत्यंत परिश्रमी थे। सारा दिन परिश्रम करते सुन्दर-सुन्दर कपड़े बनाते, किन्तु उनको उनके बनाए वस्त्रों की अधिक कीमत नहीं मिल पाती थी। . दोनों ही अत्यन्त संतोषी स्वाभाव के थे जो मिलता उसी से संतुष्ट हो कर एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहकर अपना जीवन-निर्वाह कर लेते थे। . वह दोनों भगवान् श्री कृष्ण के परम भक्त थे, दिन भर के परिश्रम के बाद जो भी समय मिलता उसे दोनों भगवान् के भजन-कीर्तन में व्यतीत करते। . सुन्दर बाबा के पास एक तानपुरा और एक खड़ताल थी, जब दोनों मिलकर भजन गाते तो सुन्दर तानपुरा बजाता और लीला खड़ताल, फिर तो दोनों भगवान् के भजन के ऐसा खो जाते की उनको अपनी भूख-प्यास की चिंता भी नहीं रहती थे। . यूं तो दोनों संतोषी स्वाभाव के थे, अपनी दीन-हीन अवस्था के लिए उन्होंने कभी भगवान् को भी कोई उल्हाना नही दिया और अपने इसी जीवन में प्रसन्न थे किन्तु ... एक दुःख उनको सदा कचोटता रहता था, उनके कोई संतान नहीं थी। इसको लेकर वह सदा चिंतित रहा करते थे, किन्तु रहते थे फिर भी सदा भगवान् में मग्न, . इसको भी उन्होंने भगवान् की लीला समझ कर स्वीकार कर लिया और निष्काम रूप से श्री कृष्ण के प्रेम-भक्ति में डूबे रहते। . जब उनकी आयु अधिक होने लगी तो एक दिन लीला ने सुन्दर से कहा कि हमारी कोई संतान नहीं है, कहते है की संतान के बिना मुक्ति प्राप्त नहीं होती, . अब हमारी आयु भी अधिक को चली है, ना जाने कब बुलावा आ जाए, मरने की बाद कौन हमारी चिता को अग्नि देगा और कौन हमारे लिए तर्पण आदि का कार्य करेगा, कैसे हमारी मुक्ति होगी। . सुन्दर बोला तू क्यों चिंता करती है, ठाकुर जी है ना वही सब देखेंगे। सुन्दर ने यह बात कह तो दी किन्तु वह भी चिंता में डूब गया, . तभी उसके मन में एक विचार आया वह नगर में गया और श्री कृष्ण के बाल गोपाल रूप की एक प्रतिमा ले आया। . घर आ कर बोला अब तुझे चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है मैं यह बाल गोपाल लेकर आया हूँ, . हमारे कोई संतान नहीं तो वह भी इन्ही की तो लीला है, हम इनको ही अपने पुत्र के सामान प्रेम करेंगे, यही हमारे पुत्र का दायित्व पूर्ण करेंगे यही हमारी मुक्ति करेंगे। . सुन्दर की बात सुन कर लीला अत्यंत प्रसन्न हुई, उसने बाल गोपाल को लेकर अपने हृदय से लगा लिया और बोली आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं, आज से यही हमारा लल्ला है। . दोनों पति-पत्नी ने घर में एक कोना साफ़ करके वहां के स्थान बनाया और एक चौंकी लगा कर उसपर बाल गोपाल को विराजित कर दिया। . तब से जुलाहा दंपत्ति का नियम हो गया वह प्रतिदिन बाल गोपाल को स्नान कराते उनको धुले वस्त्र पहनाते अपनी संतान की तरह उनको लाड-लडाते, उन्ही के सामने बैठ कर भजन कीर्तन करते और वहीं सो जाते। . जुलाहा अपने हाथ से बाल गोपाल के लिए सुन्दर वस्त्र बनाता और उनको पहनाता इसमें उसको बड़ा आनंद आता। धीरे-धीरे दोनों बाल गोपाल को अपनी संतान के सामान ही प्रेम करने लगे। . लीला का नियम था की वह प्रति दिन अपने हाथ से अपने लल्ला को भोजन कराती तब स्वयं भोजन करती, लल्ला को भोजन कराते समय उसको ऐसा ही प्रतीत होता मानो अपने पुत्र को ही भोजन करा रही हो। . उन दोनों के निश्चल प्रेम को देख कर करुणा निधान भगवान् अत्यन्त्त प्रसन्न हुए और उन्होंने अदृश्य रूप में आकर स्वयं भोजन खाना आरम्भ कर दिया, . लीला जब प्रेम पूर्वक बाल गोपाल को भोजन कराती तो भगवान् को प्रतीत होता मानो वह अपनी माँ के हाथो से भोजन कर रहें हैं, . उनको लीला के हाथ से प्रेम पूर्वक मिलने वाले हर कौर में माँ का प्रेम प्राप्त होता था, . लीलाधारी भगवान् श्री कृष्ण स्वयं माँ की उस प्रेम लीला के वशीभूत हो गए। किन्तु लीला कभी नहीं जान पाई कि स्वयं बाल-गोपाल उसके हाथ से भोजन करते हैं। . एक दिन कार्य बहुत अधिक होने के कारण लीला बाल गोपाल को भोजन कराना भूल गई। . गर्मी का समय था भरी दोपहरी में दोनों पति-पत्नी कार्य करते-करते थक गए और बिना भोजन किए ही सो गए, . उनको सोए हुए कुछ ही देर हुई थी कि उनको एक आवाज सुनाई दी.. माँ-बाबा मुझको भूख लगी है . दोनों हड़बड़ा कर उठ गए, चारो और देखा आवाज कहाँ से आई है, किन्तु कुछ दिखाई नहीं दिया। . तभी लीला को स्मरण हुआ की उसने अपने लल्ला को भोजन नहीं कराया, वह दौड़ कर लल्ला के पास पहुंची तो देखा की बाल गोपाल का मुख कुम्हलाया हुआ है, . इतना देखते ही दोनों पति-पत्नी वहीं उनके चरणों में गिर पड़े, दोनों की आँखों से आसुओं की धार बह निकली, . लीला तुरंत भोजन लेकर आई और ना जाने कैसा प्रेम उमड़ा की लल्ला को उठा कर अपनी गोद में बैठा लिया और भोजन कराने लगी, . दोनों पति-पत्नी रोते जाते और लल्ला को भोजन कराते जाते, साथ ही बार-बार उनसे अपने अपराध के लिए क्षमा मांगते जाते, . ऐसा प्रगाढ़ प्रेम देख कर भगवान् अत्यंत द्रवित हुए और अन्तर्यामी भगवान् श्रीहरि साक्षात् रूप में प्रकट हो गए। . भगवान् ने अपने हाथों से अपने रोते हुए माता-पिता की आँखों से आंसू पोंछे और बोले.. . प्रिय भक्त में तुम्हारी भक्ति और प्रेम से अत्यंत प्रसन्न हूँ, तुम जो चाहो वर माँग लो मैं तुम्हारी प्रत्येक इच्छा पूर्ण करूँगा. . इतना सुनते ही दोनों भगवान् के चरणों में गिर पड़े और बोले "दया निधान आप हमसे प्रसन्न हैं और स्वयं हमारे सम्मुख उपस्थित है, हमारा जीवन धन्य हो गया, इससे अधिक और क्या चाहिए, . इससे अधिक किसी भी वस्तु का भला क्या महत्त्व हो सकता है, आपकी कृपा हम पर बनी रहें बस इतनी कृपा करें" . श्रीहरि बोले “यदि तुम चाहो तो मैं तुम्हारे जीवन में संतान के आभाव को समाप्त कर के तुम्हे एक सुन्दर संतान प्रदान करूँगा" . यह सुनते ही सुन्दर और लीला एकदम व्याकुल होकर बोले "नही भगवन् हमको संतान नहीं चाहिये" . उनका उत्तर सुनकर भगवान् ने पूछा "किन्तु क्यों ! अपने जीवन में संतान की कमी को पूर्ण करने के लिए ही तो तुम मुझ को अपने घर लेकर आये थे " . यह सुनकर वह दोनों बोले, प्रभु हमको भय है कि यदि हमको संतान प्राप्त हो गई तो हमारा मोह उस संतान के प्रति बढ़ जाएगा और तब हम आपकी सेवा नहीं कर पाएंगे . उनका प्रेम और भक्ति से भरा उत्तर सुनकर करुणा निधान भगवान् करुणा से भर उठे, स्वयं भगवान् की आँखों से आँसू टपक पड़े वह बोले, . हे मैया, बाबा मैं यहाँ आया था आपके ऋण को उतारने के लिए किन्तु आपने तो मुझको सदा-सदा के लिए अपना ऋणी बना लिया, . मैं आपके प्रेम का यह ऋण कभी नहीं उतार पाउँगा, मैं सदा-सदा तुम दोनों का ऋणी रहूँगा, . मैं तुम्हारे प्रेम से अत्यंत प्रसन्न हूँ तुमने अपने निर्मल प्रेम से मुझको भी अपने बंधन में बांध लिया है. . मैं तुमको वचन देता हूँ कि आज से मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में तुम्हारे समस्त कार्य पूर्ण करूँगा तुमको कभी संतान का आभाव नहीं होने दूंगा, . मेरा वचन कभी असत्य नहीं होता" ऐसा कह कर भक्तवत्सल भगवान् बाल गोपाल की प्रतिमा में विलीन हो गए। . उस दिन से सुन्दर और लीला का जीवन बिल्कुल ही बदल गया उन्होंने सारा काम-धंधा छोड़ दिया और सारा दिन बाल गोपाल के भजन-कीर्तन और उनकी सेवा में व्यतीत करने लगे। . उनको ना भूख-सताती थी ना प्यास लगती थी, सभी प्रकार की इच्छाओं का उन्होंने पूर्ण रूप से त्याग कर दिया, . सुन्दर कभी कोई कार्य करता तो केवल अपने बाल गोपाल के लिए सुन्दर-सुन्दर वस्त्र बनाने का। . उनके सामने जब भी कोई परेशानी आती बाल गोपाल तुरंत ही एक बालक के रूप में उपस्तिथ हो जाते और उनके समस्त कार्य पूर्ण करते । . वह दंपत्ति और बालक गांव भर में चर्चा का विषय बन गए, किन्तु गाँव में कोई भी यह नहीं जान पाया की वह बालक कौन है, कहाँ से आता है, और कहाँ चला जाता है। . धीरे-धीरे समय बीतने लगा, जुलाह दंपत्ति बूढ़े हो गए, किन्तु भगवान् की कृपा उन पर बनी रही, . अब दोनों की आयु पूर्ण होने का समय आ चला था भगवत प्रेरणा से उनको यह ज्ञात हो गया की अब उनका समय पूरा होने वाला है, . एक दिन दोनों ने भगवान् को पुकारा, ठाकुर जी तुरंत प्रकट हो गए और उनसे उनकी इच्छा जाननी चाही, दोनों भक्त दम्पत्ति भगवान के चरणो में प्रणाम करके बोले .... . है नाथ हमने अपने पूरे जीवन में आपसे कभी कुछ नहीं माँगा, अब जीवन का अंतिम अमय आ गया है, इसलिए आपसे कुछ मांगना चाहते हैं.. . भगवान् बोले "निःसंकोच अपनी कोई भी इच्छा कहो मैं वचन देता हूँ कि तुम्हारी प्रत्येक इच्छा को पूर्ण करूँगा" . तब बाल गोपाल के अगाध प्रेम में डूबे उस वृद्ध दम्पति बोले "हे नाथ हमने अपने पुत्र के रूप में आपको देखा, और आपकी सेवा की... . आपने भी पुत्र के समान ही हमारी सेवा करी अब वह समय आ गया है जिसके लिए कोई भी माता-पिता पुत्र की कामना करते हैैं, . हे दीनबंधु, हमारी इच्छा है की हम दोनों पति-पत्नी के प्राण एक साथ निकले और हे दया निधान, जिस प्रकार एक पुत्र अपने माता-पिता की अंतिम क्रिया करता है, और उनको मुक्ति प्रदान करता है, . उसी प्रकार हे परमेश्वर, हमारी अंतिम क्रिया आप अपने हाथो से करें और हमको मुक्ति प्रदान करें . श्रीहरि ने दोनों को उनकी इच्छा पूर्ण करने का वचन दिया और बाल गोपाल के विग्रह में विलीन हो गए। . अंत में वह दिन आ पहुंचा जब प्रत्येक जीव को यह शरीर छोड़ना पड़ता है, दोनों वृद्ध दम्पति बीमार पड़ गए, उन दोनों की भक्ति की चर्चा गांव भर में थी इसलिए गांव के लोग उनका हाल जानने उनकी झोपड़ी पर पहुंचे, . किन्तु उन दोनों का ध्यान तो श्रीहरि में रम चुका था उनको नही पता कि कोई आया भी है, . नियत समय पर एक चमत्कार हुआ जुलाहे की झोपड़ी एक तीव्र और अलौकिक प्रकाश से भर उठी, . वहां उपस्थित समस्त लोगो की आँखे बंद हो गई, किसी को कुछ भी दिखाई नहीं पढ़ रहा था, कुछ लोग तो झोपड़ी से बाहर आ गए कुछ वही धरती पर बैठ गए। . श्री हरि आपने दिव्य चतर्भुज रूप में प्रकट हुए, उनकी अप्रितम शोभा समस्त सृष्टि को अलौकिक करने वाली थी, वातावरण में एक दिव्य सुगंध भर गई, . अपनी मंद-मंद मुस्कान से अपने उन भक्त माता-पिता की और देखते रहे, उनका यह दिव्य रूप देख कर दोनों वृद्ध अत्यंत आनंदित हुए, . अपने दिव्य दर्शनों से दोनों को तृप्त करने के बाद करुणा निधान, लीलाधारी, समस्त सृष्टि के पालनहार श्री हरि, वही उन दोनों के निकट धरती पर ही उनके सिरहाने बैठ गए, . भगवान् ने उन दोनों भक्तों का सर अपनी गोद में रखा, उनके शीश पर प्रेम पूर्वक अपना हाथ रखा, तत्पश्चात अपने हाथो से उनके नेत्र बंद कर दिए, . तत्काल ही दोनों के प्राण निकल कर श्री हरि में विलीन हो गए, पंचभूतों से बना शरीर पंच भूतो में विलीन हो गया। . कुछ समय बाद जब वह दिव्य प्रकाश का लोप हुआ तो सभी उपस्थित ग्रामीणो ने देखा की वहां ना तो सुन्दर था, ना ही लीला थी और ना ही बाल गोपाल थे। . शेष थे तो मात्र कुछ पुष्प जो धरती पर पड़े थे और एक दिव्य सुगंध जो वातावरण में चहुं और फैली थी। विस्मित ग्रामीणो ने श्रद्धा से उस धरती को नमन किया, . उन पुष्पों को उठा कर शीश से लगाया तथा सुंदर, लीला की भक्ति और गोविन्द के नाम का गुणगान करते हुए चल दिए उन पुष्पों के श्री गंगा जी में विसर्जित करने के लिए। . मित्रो...भक्त वह है जो एक क्षण के लिए भी विभक्त नहीं होता, अर्थात जिसका चित्त ईश्वर में अखंड बना रहे वह भक्त कहलाता है। सरल शब्दों में भक्ति के अंतिम चरण का अनुभव करने वाले को भक्त कहते हैं। 🌺जय जय श्री राधे......।🙏 कृपया पोस्ट को अपने मित्रों और परिवार के साथ शेयर कीजिए 🙏 *स्वाद ही नहीं फायदों में भी लाजवाब है पनीर, जानिए* 1 दांत और हड्डियों - पनीर का सबसे बेहतरीन लाभ है कि यह आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है साथ ही कैल्सीयम और फास्फोरस का एक बढ़िया स्त्रोत भी है। रोजाना पनीर का सेवन हड्डयिों की समस्या, जोड़ों में दर्द और दांत के रोगों से बचाए रखने में बेहद मददगार है। 2 मेटाबॉलिज्म - पाचन और पाचन तंत्र के लिए मेटाबॉलिज्म का रोल बहुत महत्वपूर्ण है। पनीर में अत्यधिक मात्रा में डायट्री फाइबर होते हैं जो भोजन के पाचन में बेहद मददगार साबित होता है। यह पाचन तंत्र के सुचारू रूप से चलने के लिए बेहद फायदेमंद और महत्वपूर्ण है। 3 कैंसर - पनीर का सबसे बड़ा लाभ यही है, इसमें कोई शक नहीं। हाल ही में हुए एक शोध में यह साबित हुआ है कि पनीर में कैंसर जनित कारणों और खतरों को कम करने की क्षमता है। पेट के कैंसर, कोलोन कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में पनीर बेहद प्रभावी साबित हुआ है। 4 डाइबिटीज - ओमेगा 3 से भरपूर पनीर डाइबिटीज से भी बेहद प्रभावी तरीके से लड़ता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि वे भी अपने डाइबिटीज रोगियों को रोजाना पनीर को डाइट में शा मिल करने की सलाह देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि पनीर दोनों टाइप के डाइबिटीज के लिए प्रभावी साबित होता है। 5 तुरंत एनर्जी - दूध से बनने के कारण पनीर में भी दूध के गुणों का भंडार है, जिनमें ऊर्जा का स्त्रोत भी शामिल है। शरीर में तुरंत ऊर्जा के लिए पनीर का सेवन फायदेमंद है। बॉडी ट्रेनिंग करने वालों के लिए यह और भी फायदे मंद है 🙏🌹 जय श्री राधे राधे 🙏🌹
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | JUST JAIPUR LIVE 24×7 🚨 🛑 ओवरलोडिंग बन सकती है बड़े हादसे की वजह! 🚛 पिकअप वाहन चालकों से विनम्र निवेदन 🙏 सरिया या अन्य सामान को क्षमता से अधिक और असुरक्षित तरीके से लोड करके सड़क पर न चलें। ⚠️ बाहर निकला हुआ या असंतुलित सरिया किसी भी राहगीर, बाइक सवार या दूसरे वाहन चालक के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। एक छोटी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। 👮 पुलिस एवं प्रशासन से भी विनम्र निवेदन है कि ऐसे वाहनों की जांच कर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार तुरंत कार्रवाई की जाए। 📢 सुरक्षित चलें, सुरक्षित पहुंचें। ❤️ ड्राइवर भाइयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता। 🔥 JUST JAIPUR LIVE 24×7 📰 हर खबर सबसे पहले | हर खबर सबसे तेज1
- चोंमू जयपुर नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार पिकअप ने सवारियों से भरे मैजिक टेंपो को मारी टक्कर,हादसे के बाद हाईवे पर मची चीख-पुकार चोंमू जयपुर नेशनल हाईवे पर हरमाड़ा थाना इलाके के मंगल बेला गार्डन के पास तेज रफ्तार पिकअप ने पीछे से सवारियों से भरे मैजिक टेंपो को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। वहीं दुर्घटना में दोनों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और टेंपो में सवार कई लोग घायल हो गए। वहीं घटना की सूचना मिलते ही हरमाड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार कराया गया। वहीं हादसे के बाद हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कड़ी मशक्कत करते हुए क्षतिग्रस्त वाहनों को क्रेन की सहायता से सड़क से हटवाया और यातायात को सुचारू करवाया। पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।1
- UGC रोल 🔙 सवाल से विचलित होकर कुर्सी छोड़ भागी पूर्व सांसद रीती पाठक सहित कई भाजपा नेता? #सिंगरौली1
- ‘पार्षद चुनाव में PM मोदी का शुभकामना संदेश पहली बार देखने को मिला’—महिपाल मकराणा #bhajanlalsharmacm #citycablenewsjaipur #महिपालमकराणा #PMModi #नरेंद्रमोदी #पार्षदचुनाव #नगरनिकायचुनाव #राजस्थानराजनीति #जयपुर #चुनाव20261
- बड़ी खबर | झालावाड़ में भूकंप के झटके, लोगों में दहशत , वीडियो वायरल झालावाड़ः राजस्थान के झालावाड़ जिले में करीब ढाई घंटे के भीतर तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह 7:15 बजे, 8:20 बजे और 9:53 बजे आए झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। डर के कारण लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर आ गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.0 मापी गई। भूकंप का केंद्र झालावाड़ में जमीन के करीब 15 किलोमीटर नीचे बताया गया है। ग्राम पंचायत नोलाई क्षेत्र के नोलाई, बरखेड़ी, खजुरी, नापाखेड़ी और आवर गांवों में भी झटके महसूस किए गए। स्थानीय जानकारी के अनुसार, भूकंप के कारण कुछ मकानों की दीवारों में दरारें आने की बात सामने आई है। वहीं, स्कूलों में बच्चों की छुट्टी कर दी गई। फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।1
- पंजाब में AAP सरकार के खिलाफ कांग्रेस का पहला विरोध प्रदर्शन, सचिन पायलट के नेतृत्व में प्रदर्शन पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने पहला विरोध प्रदर्शन किया। पंजाब प्रभारी सचिन पायलट के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार को घेरते हुए जनहित के मुद्दों पर जवाबदेही की मांग की। सचिन पायलट के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन को पंजाब में कांग्रेस की राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।1
- यात्री अपना सामान साइड में रख करके आराम से सो जाते हैं देखिए खास रिपोर्ट और जुड़े रहिए हमारे साथ चैनल को फॉलो करना ना भूले1
- वार्ड नंबर 82 से भाजपा प्रत्याशी ममता यादव, वाल्मीकि समाज का अपमान करते हुए। ये अपनी भाषा से वाल्मीकि समाज के प्रति औछी मानसिकता का परिचय देते हुए। मता_यादव #वार्ड_82 #वाल्मीकि_समाज #citycablenewsjaipur1