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एक व्यक्ति अत्यधिक शराब के नशे में धुत होकर अपनी ही मस्ती में नाचता हुआ दिखाई दिया। ज्यादा शराब पीने के कारण वह इतना बेसुध था कि उसे इस बात का बिल्कुल भी होश नहीं था कि वह क्या कर रहा है, फिर भी वह लगातार अपनी धुन में नाच रहा था।
Farukh Qureshi
एक व्यक्ति अत्यधिक शराब के नशे में धुत होकर अपनी ही मस्ती में नाचता हुआ दिखाई दिया। ज्यादा शराब पीने के कारण वह इतना बेसुध था कि उसे इस बात का बिल्कुल भी होश नहीं था कि वह क्या कर रहा है, फिर भी वह लगातार अपनी धुन में नाच रहा था।
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- राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र में स्थित खेड़ा धरती घाटा के बरसाला ग्राम पंचायत में पांच डुंगरी और कर्ण घाटी जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो द्वापर युग में महाभारत काल के पांडवों के अज्ञातवास और तपस्या से जुड़े हैं। इन स्थानों का महत्व बताते हुए, प्राइम न्यूज राजस्थान के धर्मेंद्र कुमार सोनी की रिपोर्ट बताती है कि कौरवों द्वारा मामा शकुनि की चाल से छलपूर्वक दिए गए अज्ञातवास के दौरान, पांडवों ने वेश बदलकर बांसवाड़ा के घोटीया आंबा में प्रवेश किया था, जहाँ उनके साथ माता कुंती और पांचाली द्रौपदी भी थीं। बांसवाड़ा को लोड़ी काशी या लघु काशी भी कहा जाता है, और आज भी घोटीया आंबा में पांचों पांडवों की प्रतिमाएं तथा दो छल कुंड मौजूद हैं, जिनसे गोमुख से निर्मल जल बहता है। यहाँ हर साल मेला लगता है और देश भर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। पांडवों ने इसी पवित्र धाम पर जप, तप, यज्ञ, हवन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की थी, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें असत्य पर सत्य की विजय का आशीर्वाद दिया था। किंवदंती के अनुसार, पांडव अपनी माता कुंती और पांचाली द्रौपदी के साथ पांच डुंगरी पर आए और भगवान शिव द्वारा बताई गई विधि से तपस्या में लीन हो गए। जब सूत पुत्र कर्ण को पांडवों की तपस्या का पता चला, तो वह अपनी विशाल सेना लेकर उनके अज्ञातवास को भंग करने आया, लेकिन ईश्वरीय शक्ति के आगे उसे नतमस्तक होना पड़ा। कर्ण दिग्भ्रमित होकर पांडवों को पहचान नहीं पाया और उल्टे पांव वापस लौट गया, जिसे आज कर्ण घाटी के नाम से जाना जाता है। पांडवों, माता कुंती और द्रौपदी द्वारा इन सुनसान डुंगरीयों पर की गई तपस्या से जुड़ी ये पांच डुंगरीयां और माता कुंती व द्रौपदी की दो अलग डुंगरीयां महाभारत काल से ही विद्यमान हैं। जनश्रुति के अनुसार, यह प्राचीन स्थल सरकारी प्रशासन और पुरा संपदा संरक्षण की अनदेखी का शिकार रहा है। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ के संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, जांबुखंड के औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ और बरसाला के वर्तमान सरपंच भुरसिंह खराडी ने बताया कि पांच डुंगरी जन आस्था का केंद्र बिंदु है, जहाँ श्रद्धा, भक्ति और आस्था का संचार होता है और लोगों को महाभारत की यादें ताजा महसूस होती हैं। इस पवित्र स्थल के जीर्णोद्धार के लिए राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ ने एक कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत पांचों पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी की लघु प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी, साथ ही गुरुकुल, गौशाला, साधु-संतों के लिए आश्रम और सुंदर बगीचे का भी निर्माण किया जाएगा। इसी संदर्भ में, संत नरसिंह गिरी महाराज, संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ, राजस्थान मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र कुमार सोनी और संघ के अन्य पदाधिकारी पांच डुंगरी पहुंचे और स्थल का अवलोकन किया, जिससे उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पवित्र स्थल आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।4
- नीट (NEET) परीक्षा से पहले स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इस संबंध में, कलेक्टर और एसपी ने मिलकर परीक्षा की तैयारियों का जायजा लिया और उनकी गहनता से जांच की।1
- कानवन क्षेत्र में एक जमीनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जहाँ दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले। इस घटना के बाद, कानवन पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए मामले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।1
- एक व्यक्ति ने शिकायत की है कि उनके घर के पास बिजली की लाइन में लगातार खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इस लाइन के तार दो-तीन बार टूट चुके हैं, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा और एक बच्चा भी सुरक्षित रहा। इस खतरे को देखते हुए जब उन्होंने लाइन को स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की बात की, तो बिजली विभाग के कर्मचारियों (लाइन पी वालों) ने उनसे 50,000 रुपये की मांग की। पीड़ित व्यक्ति ने अपनी मजबूरी बताते हुए सवाल उठाया है कि एक गरीब इंसान इतनी बड़ी रकम कहाँ से लाएगा।1
- किसी उपयोगकर्ता ने गूगल AI से यह जिज्ञासापूर्ण प्रश्न किया कि बिना कोई प्रयास किए रातोंरात अमीर कैसे बना जा सकता है। इस सवाल पर AI के दिए गए जवाब को लेकर पोस्ट में उत्साह व्यक्त किया गया है, जिसमें कहा गया है कि यह जवाब सुनने में 'मजेदार' होगा।1
- नागणेश्वरी माताजी मंदिर, रावला परिसर कुआं में 15वां पाटोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। मंदिर के संरक्षक महिपाल सिंह राठौर ने बताया कि इस पाटोत्सव के तहत मुख्य यजमान प्रह्लाद सिंह और लोकेंद्र सिंह राठौर द्वारा पंडित जलज दवे एवं राज दवे की देखरेख में विशेष पूजा-अर्चना और हवन कार्य संपन्न किया गया। इसके पश्चात, ठाकुर महिपाल सिंह, प्रह्लाद सिंह, लोकेन्द्रसिंह सहित सभी क्षत्रिय समाजजनों ने मिलकर माताजी की आरती उतारी। कार्यक्रम के मुख्य यजमानों द्वारा महाप्रसाद का भी भव्य आयोजन किया गया। इस पाटोत्सव कार्यक्रम की एक खास विशेषता यह रही कि सभी क्षत्रिय समाज के पुरुषों ने सफेद पजामा-कुर्ता और साफा पहनकर एक समान वेशभूषा धारण की, जबकि क्षत्रिय महिलाएं पारंपरिक राजपूती वेशभूषा में उपस्थित थीं। इस पाटोत्सव में ठाकुर महिपाल सिंह, प्रह्लाद सिंह, हिम्मत सिंह, कुआं थानाधिकारी रघुवीरसिंह, नरपत सिंह, संग्राम सिंह, नागेंद्र सिंह, दिग्विजय सिंह, हनुमान सिंह, त्रिलोकेश्वर सिंह, गुणवंत सिंह, राजेन्द्र सिंह मांडव, जितेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, रविन्द्र सिंह, गजेंद्र सिंह दाड़ोदिया, भारत सिंह मटूवोट, भीम सिंह पाडली, चंद्रवीर सिंह वखतपुरा, प्रदीप सिंह गडा नाथजी, कमल प्रताप सिंह टेकला, महेन्द्र सिंह देवला, उदय सिंह गरीयता, हितेंद्र पाल सिंह, वीरेंद्र पाल सिंह, वीर बहादुर सिंह, निरंजन सिंह, भूपेंद्र पाल सिंह, हेमेंद्र सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, तेज बहादुर सिंह, जयवर्धन सिंह, पोपट सिंह, जयवीर सिंह, लोकेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, हरेंद्र पाल सिंह, दीनदयाल सिंह मेड़ी, वैदिक पाल सिंह, टमर, धर्मवीर सिंह सहित अनेक क्षत्रिय महिलाएं और समाज के अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।3
- सेंधवा शहर के जोगवाड़ा रोड पर एक बार फिर विवाद भड़क उठा है, जिसमें धारदार हथियारों के हमले में तीन लोग घायल हो गए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बीते कल के विवाद के संबंध में पाँच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।1
- डूंगरपुर के गेजी घाटा स्थित टंट्या भील खेल मैदान में आदिवासी प्रतिभा एवं वरिष्ठजन सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जहाँ भंवरलाल परमार ने एक जोरदार संबोधन दिया। अपने भाषण में परमार ने युवाओं, शिक्षा, समाज की एकता और अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी, जिसे एक दमदार भाषण बताया गया।1
- गुजरात के जूनागढ़ स्थित गिरनार में एक अद्भुत मंदिर है, जिसकी कुल 9999 सीढ़ियाँ हैं। इस मंदिर के दर्शन के लिए एक बार अवश्य आने का आग्रह किया गया है, जहाँ इतनी विशाल संख्या में सीढ़ियाँ चढ़कर भक्त पहुँचते हैं। इस जानकारी की पुष्टि के लिए गूगल पर भी खोज की जा सकती है। दर्शक हमारे पेज को फॉलो करने और हमारे यूट्यूब चैनल 'dk Mahesh vlogs 117' को सर्च करने के लिए भी प्रोत्साहित किए गए हैं।2