“फूटी कौड़ी” क्या होती थी? फूटी कौड़ी भारत की पुरानी मुद्रा-व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली बहुत छोटी मूल्य की इकाई थी। यह वास्तव में कौड़ी (Cowrie shell) से जुड़ी थी और छोटे-मोटे लेन-देन में इसका उपयोग होता था। पुरानी भारतीय मुद्रा प्रणाली में कई जगह एक क्रम इस प्रकार बताया जाता है: 1 रुपया = 16 आना = 64 पैसा = 192 पाई वहीं इससे भी पुराने स्थानीय हिसाब-किताब में कौड़ी जैसी छोटी इकाइयों का इस्तेमाल होता था। “फूटी कौड़ी” मुहावरा इसी बेहद कम मूल्य वाली वस्तु/इकाई से जुड़ा है। इसलिए आज जब कोई कहता है— “मेरे पास फूटी कौड़ी भी नहीं है।” तो इसका अर्थ होता है: मेरे पास बिल्कुल भी पैसा नहीं है। अगर आप चाहें तो मैं “कौड़ी → दमड़ी → पाई → पैसा → आना → रुपया” की पूरी पुरानी मुद्रा प्रणाली आसान चार्ट में समझा सकता हूँ। भारतीय रुपया (₹) दुनिया की सबसे पुरानी चलन में रहने वाली मुद्राओं में से एक है। इसका इतिहास प्राचीन भारत से शुरू होकर आज की आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है। 🪙 1. प्राचीन भारत — सिक्कों की शुरुआत भारत में सिक्कों का प्रचलन लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व से माना जाता है। उस समय चांदी के पंच-मार्क्ड सिक्के (आहत सिक्के) चलन में थे। इन पर अलग-अलग प्रतीक अंकित किए जाते थे। 👑 2. शेरशाह सूरी और “रुपिया” 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी ने मुद्रा व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार किए। उन्होंने चांदी का एक मानकीकृत सिक्का जारी किया, जिसे “रुपिया” कहा गया। इसी “रुपिया” को आधुनिक रुपये के ऐतिहासिक पूर्वजों में माना जाता है। 🇬🇧 3. ब्रिटिश काल ईस्ट इंडिया कंपनी और बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान रुपया भारत की प्रमुख मुद्रा बना रहा। लंबे समय तक चांदी का रुपया भारतीय मौद्रिक व्यवस्था का आधार रहा। 1861 में भारत सरकार ने पहली बार कागजी मुद्रा जारी करने का अधिकार केंद्रीकृत किया। इसके बाद सरकारी नोटों का व्यवस्थित प्रचलन बढ़ा। 🏦 4. रिजर्व बैंक और रुपया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई। RBI को भारत की मुद्रा व्यवस्था और बैंक नोट जारी करने की केंद्रीय भूमिका मिली। 🇮🇳 5. आजादी के बाद 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारतीय रुपया भारत की संप्रभु मुद्रा बना रहा। 1950 में गणतंत्र बनने के बाद नए भारतीय प्रतीकों के साथ सिक्कों और नोटों में बदलाव शुरू हुए। 🔢 6. दशमलव प्रणाली एक बड़ा बदलाव 1957 में आया। भारत ने रुपये को दशमलव प्रणाली में बदल दिया: 1 रुपया = 100 पैसे शुरुआत में नए पैसों को “नया पैसा” कहा जाता था, लेकिन 1964 से “नया” शब्द हटा दिया गया। 💵 7. आधुनिक भारतीय रुपया समय के साथ नोटों के डिजाइन और सुरक्षा विशेषताओं में कई बदलाव हुए। महात्मा गांधी श्रृंखला के बाद महात्मा गांधी नई श्रृंखला के नोट जारी किए गए। ₹ चिन्ह (₹) को भारत सरकार ने 2010 में आधिकारिक रूप से अपनाया। इसे डिजाइनर डी. उदय कुमार ने तैयार किया था। 📱 8. डिजिटल रुपया आज रुपया केवल नोट और सिक्कों तक सीमित नहीं है। UPI, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान ने रुपये के इस्तेमाल का तरीका बदल दिया है। RBI ने e₹ (डिजिटल रुपया/CBDC) की पायलट व्यवस्था भी शुरू की है। 📌 एक नजर में वर्ष/काल प्रमुख घटना लगभग 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व आहत सिक्कों का प्रचलन 16वीं शताब्दी शेरशाह सूरी का “रुपिया” ब्रिटिश काल चांदी का रुपया और सरकारी कागजी मुद्रा 1935 RBI की स्थापना 1947 स्वतंत्र भारत में रुपया 1957 दशमलव प्रणाली 2010 ₹ प्रतीक अपनाया गया आधुनिक काल UPI और डिजिटल रुपया दिलचस्प तथ्य: “रुपया” शब्द संस्कृत के “रूप्य” से जुड़ा माना जाता है, जिसका संबंध चांदी/चांदी से बनी वस्तु से है। शेरशाह सूरी का चांदी का “रुपिया” इसी नाम को व्यापक रूप से स्थापित करने वाले महत्वपूर्ण चरणों में से एक था।
“फूटी कौड़ी” क्या होती थी? फूटी कौड़ी भारत की पुरानी मुद्रा-व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली बहुत छोटी मूल्य की इकाई थी। यह वास्तव में कौड़ी (Cowrie shell) से जुड़ी थी और छोटे-मोटे लेन-देन में इसका उपयोग होता था। पुरानी भारतीय मुद्रा प्रणाली में कई जगह एक क्रम इस प्रकार बताया जाता है: 1 रुपया = 16 आना = 64 पैसा = 192 पाई वहीं इससे भी पुराने स्थानीय हिसाब-किताब में कौड़ी जैसी छोटी इकाइयों का इस्तेमाल होता था। “फूटी कौड़ी” मुहावरा इसी बेहद कम मूल्य वाली वस्तु/इकाई से जुड़ा है। इसलिए आज जब कोई कहता है— “मेरे पास फूटी कौड़ी भी नहीं है।” तो इसका अर्थ होता है: मेरे पास बिल्कुल भी पैसा नहीं है। अगर आप चाहें तो मैं “कौड़ी → दमड़ी → पाई → पैसा → आना → रुपया” की पूरी पुरानी मुद्रा प्रणाली आसान चार्ट में समझा सकता हूँ। भारतीय रुपया (₹) दुनिया की सबसे पुरानी चलन
में रहने वाली मुद्राओं में से एक है। इसका इतिहास प्राचीन भारत से शुरू होकर आज की आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है। 🪙 1. प्राचीन भारत — सिक्कों की शुरुआत भारत में सिक्कों का प्रचलन लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व से माना जाता है। उस समय चांदी के पंच-मार्क्ड सिक्के (आहत सिक्के) चलन में थे। इन पर अलग-अलग प्रतीक अंकित किए जाते थे। 👑 2. शेरशाह सूरी और “रुपिया” 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी ने मुद्रा व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार किए। उन्होंने चांदी का एक मानकीकृत सिक्का जारी किया, जिसे “रुपिया” कहा गया। इसी “रुपिया” को आधुनिक रुपये के ऐतिहासिक पूर्वजों में माना जाता है। 🇬🇧 3. ब्रिटिश काल ईस्ट इंडिया कंपनी और बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान रुपया भारत की प्रमुख मुद्रा बना रहा। लंबे समय तक चांदी का रुपया भारतीय मौद्रिक व्यवस्था का आधार रहा। 1861 में भारत सरकार ने पहली बार कागजी मुद्रा जारी
करने का अधिकार केंद्रीकृत किया। इसके बाद सरकारी नोटों का व्यवस्थित प्रचलन बढ़ा। 🏦 4. रिजर्व बैंक और रुपया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई। RBI को भारत की मुद्रा व्यवस्था और बैंक नोट जारी करने की केंद्रीय भूमिका मिली। 🇮🇳 5. आजादी के बाद 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारतीय रुपया भारत की संप्रभु मुद्रा बना रहा। 1950 में गणतंत्र बनने के बाद नए भारतीय प्रतीकों के साथ सिक्कों और नोटों में बदलाव शुरू हुए। 🔢 6. दशमलव प्रणाली एक बड़ा बदलाव 1957 में आया। भारत ने रुपये को दशमलव प्रणाली में बदल दिया: 1 रुपया = 100 पैसे शुरुआत में नए पैसों को “नया पैसा” कहा जाता था, लेकिन 1964 से “नया” शब्द हटा दिया गया। 💵 7. आधुनिक भारतीय रुपया समय के साथ नोटों के डिजाइन और सुरक्षा विशेषताओं में कई बदलाव हुए। महात्मा गांधी श्रृंखला के बाद महात्मा गांधी नई श्रृंखला के नोट
जारी किए गए। ₹ चिन्ह (₹) को भारत सरकार ने 2010 में आधिकारिक रूप से अपनाया। इसे डिजाइनर डी. उदय कुमार ने तैयार किया था। 📱 8. डिजिटल रुपया आज रुपया केवल नोट और सिक्कों तक सीमित नहीं है। UPI, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान ने रुपये के इस्तेमाल का तरीका बदल दिया है। RBI ने e₹ (डिजिटल रुपया/CBDC) की पायलट व्यवस्था भी शुरू की है। 📌 एक नजर में वर्ष/काल प्रमुख घटना लगभग 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व आहत सिक्कों का प्रचलन 16वीं शताब्दी शेरशाह सूरी का “रुपिया” ब्रिटिश काल चांदी का रुपया और सरकारी कागजी मुद्रा 1935 RBI की स्थापना 1947 स्वतंत्र भारत में रुपया 1957 दशमलव प्रणाली 2010 ₹ प्रतीक अपनाया गया आधुनिक काल UPI और डिजिटल रुपया दिलचस्प तथ्य: “रुपया” शब्द संस्कृत के “रूप्य” से जुड़ा माना जाता है, जिसका संबंध चांदी/चांदी से बनी वस्तु से है। शेरशाह सूरी का चांदी का “रुपिया” इसी नाम को व्यापक रूप से स्थापित करने वाले महत्वपूर्ण चरणों में से एक था।
- जनता की आवाज़ ही लोकतंत्र की पहचान है—लेकिन जब सवाल पूछने वाली आवाज़ पर ही सवाल उठने लगें, तो लोकतंत्र कितना मजबूत है?1
- पोस्टमार्टम हाउस के बाहर धरने पर बैठे स्वामी प्रसाद मौर्य पोस्टमार्टम हाउस के बाहर धरने पर बैठे स्वामी प्रसाद मौर्य अयोध्या के कंदैला गोलीकांड में घायल राम लगन मौर्य की मां पार्वती देवी की मंगलवार को लखनऊ के KGMU में इलाज के दौरान मौत हो गई। 25 अगस्त को हुई फायरिंग में घायल पार्वती देवी की हालत गंभीर होने पर उन्हें अयोध्या से लखनऊ रेफर किया गया था। इससे पहले उनके बेटे राम लगन मौर्य की भी मौत हो चुकी है। मां-बेटे की मौत के बाद मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे लखनऊ में मोर्चरी के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुट गए और फरार नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हंगामा किया। इस दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य भी धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा, “अयोध्या पुलिस-प्रशासन दो-तीन और लाशें गिरने का इंतजार कर रहा है। पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।”1
- पिस्टल लहराकर दहशत फैलाने वाले 2 गिर/फ्तार, 2 देशी पिस्टल और 7 कार/तूस बरामद! #पटना_सिटी #पटना #PatnaCity #PatnaNews #BiharNews #BiharPolice #CrimeNews #CrimeInBihar #Pistol #DesiPistol #ArmsRecovered #7Cartridges #PoliceAction #CrimeUpdate #BreakingNews #BigBreaking #BiharCrime #LawAndOrder #SadhanaNews #SadhanaNewsBihar #TrendingNews #ViralNews #LatestNews #BiharNewsUpdate #PatnaCrime #PoliceAction #Trending #Breaking #NewsUpdate1
- BRICS शिखर सम्मेलन में भारत की प्रभावशाली भूमिका और सम्मेलन की सफलतापूर्वक उपलब्धियों पर भाजपा नेता डॉ मनीष पंकज मिश्रा के द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को कोटि -कोटि बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं दी l BRICS ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की प्रभावशाली भूमिका और सम्मेलन की सफलतापूर्वक उपलब्धियों पर भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को गया जी की पावन धरती से कोटि-कोटि बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं दीं।डॉ. मनीष पंकजऔर मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर लगातार अपनीमजबूतऔरप्रभावशाली पहचान बना रहा है। ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में सार्थक चर्चा हुई। विशेष रूप से आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख को व्यापक समर्थन मिलना देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।उन्होंने कहा कि कश्मीर के पहलगाम में हुई आतंकी घटना की ब्रिक्स देशों द्वारा निंदा किया जाना यह दर्शाता है कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल रही है। भारत हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम रहा है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक एवं सशक्त कदम उठा रहा है।भाजपा नेता ने कहा कि ब्रिक्स के मंच पर भारत ने शांति, सहयोग, विकास और वैश्विक स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से प्रस्तुत किया। विभिन्न मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सकारात्मक एवं सौहार्दपूर्ण संवाद भारत की बढ़ती कूटनीतिक क्षमता और वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता हैडॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत की आवाज आज पूरी दुनिया में मजबूती से सुनी जा रही है। उन्होंने गया जी की पावन धरती से प्रधानमंत्री जी को पुनः कोटि-कोटि बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश इसी प्रकार विकास, शांति और विश्व कल्याण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहे ब्रिक्स की शानदार सफलता पर बाधाई सुभकामनाये देने बालो मे भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता श्याम किशोर मिश्रा दीपक पांडे संतोष कुमार गोपाल प्रसाद यादव नवलेश सिंह दीपक मिश्रा यश राज धर्मेंद्र कुमार राणा रणजीत सिंह विजय प्रसाद उर्फ काला नाग दीपक पांडे राजू मिश्रा बबलू रजक मंटू कुमार बबलू गुप्ता आकाश कुमार सुनील मिश्रा सुधीर कुमार बुंदेल चंद्रवंशी संजीव कुमार रविंद्र कुमार कुंदन कुमार सहित1
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की प्रभावशाली भूमिका और सम्मेलन की सफलतापूर्वक उपलब्धियों पर भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गया जी की पावन धरती से कोटि-कोटि बधाई कश्मीर के पहलगाम में हुई आतंकी घटना की ब्रिक्स देशों द्वारा निंदा किया जाना यह दर्शाता है कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल रही है। गया जी।बी आर सी आइ एस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की प्रभावशाली भूमिका और सम्मेलन की सफलतापूर्वक उपलब्धियों पर भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गया जी की पावन धरती से कोटि-कोटि बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं दीं।डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर लगातार अपनी मजबूत और प्रभावशाली पहचान बना रहा है। ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में सार्थक चर्चा हुई। विशेष रूप से आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख को व्यापक समर्थन मिलना देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।उन्होंने कहा कि कश्मीर के पहलगाम में हुई आतंकी घटना की ब्रिक्स देशों द्वारा निंदा किया जाना यह दर्शाता है कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल रही है। भारत हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक एवं सशक्त कदम उठा रहा है।भाजपा नेता ने कहा कि ब्रिक्स के मंच पर भारत ने शांति, सहयोग, विकास और वैश्विक स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से प्रस्तुत किया है।विभिन्न मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सकारात्मक एवं सौहार्दपूर्ण संवाद भारत की बढ़ती कूटनीतिक क्षमता और वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता हैडॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आवाज आज पूरी दुनिया में मजबूती से सुनी जा रही है। उन्होंने गया जी की पावन धरती से प्रधानमंत्री जी को पुनः कोटि-कोटि बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश इसी प्रकार विकास, शांति और विश्व कल्याण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहे ब्रिक्स की शानदार सफलता पर बाधाई सुभकामनाये देने बालो मे भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता श्याम किशोर मिश्रा दीपक पांडे संतोष कुमार गोपाल प्रसाद यादव नवलेश सिंह दीपक मिश्रा यश राज धर्मेंद्र कुमार राणा रणजीत सिंह विजय प्रसाद उर्फ काला नाग दीपक पांडे राजू मिश्रा बबलू रजक मंटू कुमार बबलू गुप्ता आकाश कुमार सुनील मिश्रा सुधीर कुमार बुंदेल चंद्रवंशी संजीव कुमार रविंद्र कुमार कुंदन कुमार सहित1
- Post by हेमन्त कुमार सिंह1
- सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए रखा हरितालिका तीज सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए रखा हरितालिका तीज व्रत संवाद सूत्र, कोंच (गया)। कोंच प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना को लेकर हरितालिका तीज का व्रत श्रद्धा एवं आस्था के साथ रखा। इस दौरान महिलाओं ने निर्जला उपवास कर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। संगीता देवी ने बताया कि हरितालिका तीज सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने से पति की दीर्घायु तथा दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। महिलाओं ने दिनभर उपवास रखकर शाम को पूजा की तैयारी की और तीज व्रत की कथा सुनी। व्रत में मंशा देवी, रानी देवी, सुनैना देवी, गीता देवी, पूनम देवी, सरिता देवी, परी देवी समेत बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। प्रखंड क्षेत्र के सिंघड़ा, तुतुरखी, मुड़ेरा, परसावां, केर, श्रीगांव, गरारी सहित विभिन्न गांवों में हरितालिका तीज को लेकर उत्साह का माहौल रहा। महिलाओं ने पारंपरिक रूप से सोलह शृंगार कर पूजा-अर्चना की और एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं दीं।1
- गयाजी में पितृपक्ष मेला की तैयारी तेज, प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विष्णुपद मंदिर में पूजा कर लिया तैयारियों का जायजा गयाजी में पितृपक्ष मेला की तैयारी तेज, प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विष्णुपद मंदिर में पूजा कर लिया तैयारियों का जायजा पितृपक्ष मेला 2026 को लेकर गयाजी में तैयारियां तेज हो गई हैं। बिहार के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विष्णुपद मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और मेला क्षेत्र की तैयारियों का जायजा लिया। मंत्री ने अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली और श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, साफ-सफाई एवं अन्य तैयारियों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।1