लंभुआ में श्रमिक पंजीकरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।...... ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया है कि विकासखंड कार्यालय में श्रमिक पंजीकरण के नाम पर शुल्क वसूला जा रहा है। मामला सुल्तानपुर जिले के लंभुआ विकासखंड का है, जहां ग्राम प्रधानों की सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रमिक पंजीकरण कराने पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद कर्मियों द्वारा पंजीकरण के लिए शुल्क मांगा गया। इतना ही नहीं, जो लोग शुल्क देने में असमर्थ रहे, उन्हें बिना पंजीकरण के वापस लौटा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से किसी भी प्रकार के शुल्क की सूचना नहीं दी गई थी। यदि शुल्क लिया जाना था तो इसकी जानकारी पहले दे दी जाती, ताकि लोग तैयारी के साथ आते। कई मजदूर अपनी दिहाड़ी छोड़कर और किराया-भाड़ा खर्च कर विकासखंड पहुंचे थे, लेकिन शुल्क की मांग से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। केशवपुर के ग्राम प्रधान सुनील गुप्ता ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि गरीब और मजदूर वर्ग पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। ऐसे में श्रमिक पंजीकरण जैसे सरकारी कार्य के लिए उनसे शुल्क वसूलना अनुचित है। उन्होंने मांग की है कि श्रमिकों का पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क किया जाए और यदि कहीं अवैध वसूली हो रही है तो इसकी जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस मामले को लेकर ग्रामीणों में रोष बना हुआ है और प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
लंभुआ में श्रमिक पंजीकरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।...... ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया है कि विकासखंड कार्यालय में श्रमिक पंजीकरण के नाम पर शुल्क वसूला जा रहा है। मामला सुल्तानपुर जिले के लंभुआ विकासखंड का है, जहां ग्राम प्रधानों की सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रमिक पंजीकरण कराने पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद कर्मियों
द्वारा पंजीकरण के लिए शुल्क मांगा गया। इतना ही नहीं, जो लोग शुल्क देने में असमर्थ रहे, उन्हें बिना पंजीकरण के वापस लौटा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से किसी भी प्रकार के शुल्क की सूचना नहीं दी गई थी। यदि शुल्क लिया जाना था तो इसकी जानकारी पहले दे दी जाती, ताकि लोग तैयारी के साथ आते।
कई मजदूर अपनी दिहाड़ी छोड़कर और किराया-भाड़ा खर्च कर विकासखंड पहुंचे थे, लेकिन शुल्क की मांग से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। केशवपुर के ग्राम प्रधान सुनील गुप्ता ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि गरीब और मजदूर वर्ग पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। ऐसे में श्रमिक पंजीकरण जैसे सरकारी कार्य के लिए उनसे
शुल्क वसूलना अनुचित है। उन्होंने मांग की है कि श्रमिकों का पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क किया जाए और यदि कहीं अवैध वसूली हो रही है तो इसकी जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस मामले को लेकर ग्रामीणों में रोष बना हुआ है और प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
- लंभुआ में पत्रकार से कथित अभद्रता के मामले को लेकर विरोध तेज हो गया है। मदनपुर में हुए अमित सिंह हत्याकांड की कवरेज के दौरान एक पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को तहसील परिसर में प्रदर्शन किया गया। अखण्ड पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पत्रकारों के साथ किसान यूनियन और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने घटना की निंदा करते हुए लम्भुआ कोतवाली प्रभारी निरीक्षक धीरज कुमार को पद से हटाने की मांग की। इसके बाद जिलाधिकारी Sultanpur को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। उपजिलाधिकारी की अनुपस्थिति में नायब तहसीलदार अभयराज पाल ने ज्ञापन लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पत्रकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके साथ इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है। वहीं उपजिलाधिकारी गामिनी सिंगला (आईएएस) ने आश्वासन दिया कि मामले की जानकारी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को दी जाएगी तथा जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने साफ किया है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आगे भी आंदोलन जारी4
- *विवाह समारोह में शामिल होने गए युवक के घर में हुई चोरी, पीड़ित ने थाने में तहरीर* *पुलिस का असंवेदनशील बयान,पुलिस एग्जाम में व्यस्त दो तीन दिन बाद देख लेंगे* अशोक कुमार वर्मा लम्भुआ कोतवाली क्षेत्र के लोटिया (चांद चौरा) गांव में एक युवक के घर में चोरी का मामला सामने आया है। पीड़ित प्रवेश धुरिया ने थाने में तहरीर देकर बताया कि 18 फरवरी को परिवार के लोग विवाह समारोह में शामिल होने गए थे, इसी बीच शाम के समय चोरों ने घर का गेट और बक्शे का ताला तोड़कर 25 हजार रुपए, मां के गहने और बर्तन चुरा लिए। पीड़ित ने डायल 112 पर सूचना देकर कार्रवाई की मांग की,कार्रवाई न होते देख पीड़ित थाने पर तहरीर दी,लेकिन पुलिस ने असंवेदनशील बयान देते हुए कहा कि "जाओ पुलिस अभी एग्जाम में व्यस्त है, दो-तीन दिन बाद देख लिया जाएगा। इस बयान से पीड़ित और उसके परिवार के लोग काफी परेशान हैं।1
- उत्तर प्रदेश में बोर्ड परीक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट सीसीटीवी कैमरे से हो रही निगरानी1
- भावविभोर हुए श्रोता1
- Post by Vishal Nishad1
- भारत का स्टील सेक्टर 160 मिलियन टन के पार 2030 तक 300 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य देश के भविष्य का आकलन करने के लिए किया गया सम्मेलन भारत का स्टील सेक्टर 160 मिलियन टन के पार 2030 तक 300 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य और इस तेजी से बढ़ती मांग के बीच एक बड़ा सवाल- क्या देश का डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क तैयार है इस बदलाव के लिए? नई दिल्ली से आई खबर सिर्फ एक इवेंट की नहीं… यह है भारत के स्टील और कंस्ट्रक्शन इकोसिस्टम के भविष्य की कहानी। 19 और 20 फरवरी 2026 को यशोभूमि, नई दिल्ली में आयोजित बिल्ड कनेक्ट 2026 ने उद्योग जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। देश के स्टील उत्पादन ने सीवाई25 में 160 मिलियन टन का आंकड़ा पार किया है, जबकि 2030 तक स्थापित क्षमता 280 से 300 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। फाइनल स्टील की खपत भी 210 मिलियन टन की ओर बढ़ रही है। इसी पृष्ठभूमि में बिगमिंट और अखिल भारतीय लोहा व्यापार संघ द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय मंच, स्टील और निर्माण वितरण तंत्र को मजबूत करने के लक्ष्य के साथ सामने आया। इसमें 1000 से अधिक उद्योग प्रतिभागी▪ 40 से ज्यादा प्रदर्शन▪ 40 से अधिक वक्ता▪ 12 से ज्यादा फोकस सेशन का आयोजन किया गया। डीलर, डिस्ट्रीब्यूटर, निर्माता, फाइनेंसर, ईपीसी प्लेयर और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर एक ही मंच पर नजर आए। इस सम्मेलन में चैनल विस्तार, पूंजी तक पहुंच, डिजिटल परिवर्तन और व्यापार-नेतृत्व वाले वितरण मॉडल के भविष्य पर गहन मंथन हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क को तकनीकी और वित्तीय रूप से मजबूत नहीं किया गया, तो उत्पादन वृद्धि का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाएगा। बिल्ड कनेक्ट 2026 ने साफ संकेत दिया है कि भारत का स्टील उद्योग अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सप्लाई चेन, वितरण और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को भी नई दिशा देगा। यह इवेंट सिर्फ नेटवर्किंग का मंच नहीं था… यह था भारत के निर्माण और स्टील सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की रणनीति का ब्लूप्रिंट।1
- लम्भुआ (सुल्तानपुर)। पत्रकार के साथ हुई अभद्रता के विरोध में आज अखण्ड पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले लम्भुआ में पत्रकारों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने एकत्र होकर जोरदार प्रदर्शन किया प्रदर्शन के उपरांत जिलाधिकारी सुल्तानपुर को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी लम्भुआ को सौंपा गया उपजिलाधिकारी की व्यस्तता के कारण नायब तहसीलदार अभयराज पाल ने ज्ञापन प्राप्त किया। इस दौरान पत्रकारों के समर्थन में कई संगठनों ने एकजुटता दिखाई समर्थन में प्रमुख रूप से भारतीय किसान यूनियन (हिन्द गुट), मानवाधिकार सुरक्षा संगठन,ऑर्गेनाइजेशन सुल्तानपुर तथा भारतीय किसान यूनियन अंबावता के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में पत्रकार के साथ हुई अभद्रता की कड़ी निंदा करते हुए संबंधित कोतवाली प्रभारी को तत्काल हटाने की मांग की ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता या दमनात्मक व्यवहार न केवल अस्वीकार्य है,बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे इस मौके पर उपजिलाधिकारी लम्भुआ गामिनी सिंगला (आईएएस) ने पत्रकारों से सीधे संवाद करते हुए आश्वासन दिया कि उनकी बात जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर तक पहुंचाई जाएगी तथा जांचोपरांत दोषियों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी पत्रकारों और संगठनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच एवं त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा मौके पर बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।4
- सुल्तानपुर में आज मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एमपी-एमएलए कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। करीब आधे घंटे तक अदालत कक्ष का दरवाजा बंद कर धारा 313 के तहत बयान की कार्यवाही चली। राहुल गांधी ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खुद को बेगुनाह बताया। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि वे अपने पक्ष में सफाई साक्ष्य पेश करेंगे। अदालत ने सफाई साक्ष्य के लिए 9 मार्च की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में समर्थकों की भारी भीड़ देखने को मिली। कोर्ट कक्ष के भीतर और बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने में सुरक्षा कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी और कई बार हालात संभालने में पसीने छूटते नजर आए। फिलहाल अब सबकी निगाहें 9 मार्च पर टिकी हैं, जब इस मामले में राहुल गांधी की ओर से सफाई साक्ष्य पेश किए जाएंगे।4