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एससी/एसटी अत्याचार के कथित झूठे मामलों का अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ.... दरभंगा केस सामयिक समीक्षा कानून, राजनीति और भारत की न्यायिक साख पर एक आलोचनात्मक दृष्टि अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम भारत के संवैधानिक ढाँचे में ऐतिहासिक अन्याय के विरुद्ध एक आवश्यक सुरक्षा-कवच है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है—सदियों के उत्पीड़न, सामाजिक बहिष्कार और हिंसा से पीड़ित समुदायों को त्वरित न्याय और संरक्षण। लेकिन जब कोई कानून अपने नैतिक उद्देश्य से विचलित होकर राजनीतिक सुविधा, प्रशासनिक जल्दबाज़ी या दुरुपयोग की आशंका का उपकरण बन जाए, तब वह न केवल निर्दोष नागरिकों के अधिकारों को चोट पहुँचाता है, बल्कि भारत की न्यायिक विश्वसनीयता को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रश्नांकित करता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह कहना कि गिरफ्तारी से पहले प्राथमिक जाँच आवश्यक है, इसी संतुलन को साधने का प्रयास था—ताकि पीड़ितों को सुरक्षा मिले और निर्दोषों को मनमानी से बचाया जा सके। लेकिन उस निर्णय को निष्प्रभावी करने के लिए अधिनियम में संशोधन कर दिया गया, जिससे बिना जाँच तत्काल गिरफ्तारी का रास्ता फिर खोल दिया गया। यह संशोधन केवल एक कानूनी बदलाव नहीं था; यह राज्य की प्राथमिकताओं का राजनीतिक उद्घोष था। ## दरभंगा (कुशेश्वर) FIR 22/2026: एक स्थानीय मामला, वैश्विक सवाल बिहार के दरभंगा ज़िले की FIR संख्या 22 (2026) को अगर यहाँ वर्णित तथ्यों/आरोपों के आलोक में देखा जाए, तो यह मामला केवल एक गाँव या थाना-क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसमें उभरते प्रश्न अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की विधि-प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। 1. आपराधिक प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग यदि FIR की उत्पत्ति किसी लंबित भुगतान/धन-उगाही विवाद से जुड़ी बताई जाती है और वह पंचायत में सिद्ध नहीं हो पाती, तो यह क्रिमिनल लॉ को सिविल विवाद सुलझाने के हथियार में बदलने का उदाहरण बनता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विमर्श में इसे abuse of process माना जाता है। 2. जन्म से अपराधीकरण का आरोप यदि अभियुक्तों को केवल ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के आधार पर सूचीबद्ध किया गया—तो यह व्यक्तिगत अपराध की जगह सामूहिक पहचान पर दंड का आरोप बनता है। विडंबना यह है कि जिस कानून का उद्देश्य जाति-आधारित उत्पीड़न से बचाव है, उसी के तहत यदि किसी दूसरी जाति को “सामूहिक अपराधी” की तरह चिह्नित किया जाए, तो यह संवैधानिक समानता के सिद्धांत के विरुद्ध जाता है। 3. सामाजिक यथार्थ बनाम आरोप यदि शिकायतकर्ता स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त बताया जाता है—ढाबा, आधुनिक सुविधाएँ, और गाँव में सामाजिक मेलजोल के प्रमाण—तो “छुआछूत” या “सामूहिक जातिगत हिंसा” के आरोपों की तथ्यात्मक जाँच अनिवार्य हो जाती है। बिना जाँच गिरफ्तारी का प्रावधान यहीं खतरनाक बनता है। 4. पूरे समुदाय को आरोपी बनाने का प्रयास पूरे गाँव/मोहल्ले की एक जाति को घसीट लेना, नामों में त्रुटियाँ (जैसे किसी पुरुष के पिता को महिला दर्शाना) — ये सब FIR की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। अंतरराष्ट्रीय न्याय-मानकों में ऐसी त्रुटियाँ bad faith prosecution के संकेत मानी जाती हैं। 5. विदेशों में रह रहे लोगों पर कार्रवाई और इंटरपोल का प्रश्न यदि अभियुक्तों में ऐसे लोग भी शामिल हों जो अन्य राज्यों या विदेशों में काम कर रहे हों, तो बिना प्राथमिक जाँच के उनकी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल नोटिस की कल्पना ही भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर असहज स्थिति में डाल सकती है। इंटरपोल का दुरुपयोग पहले ही कई देशों में आलोचना का विषय रहा है; भारत के लिए यह कूटनीतिक और कानूनी जोखिम बन सकता है। 6. असंभव कथाएँ और तर्क का अभाव सैकड़ों हथियारबंद लोगों का एक निहत्थे व्यक्ति को नुकसान न पहुँचा पाना—यह विवरण सामान्य विवेक के स्तर पर भी सवाल खड़े करता है। जब ऐसी कथाएँ बिना जाँच कानूनी दस्तावेज़ बन जाती हैं, तो न्याय-प्रणाली की साख कमजोर होती है। 7. मुआवज़ा/प्रोत्साहन और अभियुक्तों की संख्या यदि मुआवज़ा या राहत अभियुक्तों की संख्या से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हो, तो यह प्रोत्साहन-संरचना (incentive structure) खुद दुरुपयोग को जन्म दे सकती है। यह प्रश्न केवल नैतिक नहीं, बल्कि नीति-निर्माण का है। ## अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ: भारत किस छवि के साथ खड़ा होगा? आज भारत स्वयं को rule of law, democracy और human rights का समर्थक बताता है। लेकिन यदि— * बिना जाँच गिरफ्तारी सामान्य प्रक्रिया बन जाए, * जातिगत पहचान के आधार पर सामूहिक अभियोजन के आरोप लगें, * और ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को घसीटा जाए, तो भारत पर यह आरोप लग सकता है कि वह मानवाधिकार कानूनों का चयनात्मक उपयोग कर रहा है। यह केवल विदेशी मीडिया या रिपोर्टों का सवाल नहीं; यह निवेश, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग को भी प्रभावित कर सकता है। सुरक्षा और न्याय के बीच संतुलन अनिवार्य एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम को कमजोर करना समाधान नहीं है—लेकिन उसके कथित दुरुपयोग पर आँख मूँद लेना भी नहीं। पीड़ितों की सुरक्षा और निर्दोषों के अधिकार, दोनों को साथ लेकर चलना ही संविधान की आत्मा है। यदि सरकार और न्यायपालिका इस संतुलन को पुनः स्थापित नहीं करतीं, तो हर ऐसा विवाद—जैसा कि दरभंगा का यह मामला—स्थानीय अन्याय से आगे बढ़कर भारत की वैश्विक न्यायिक साख पर सवाल बनता जाएगा। और तब यह केवल एक FIR नहीं रहेगी, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय चेतावनी बन जाएगी।

3 hrs ago
user_Vinay Kumar Srivastav
Vinay Kumar Srivastav
Court reporter सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

एससी/एसटी अत्याचार के कथित झूठे मामलों का अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ.... दरभंगा केस सामयिक समीक्षा कानून, राजनीति और भारत की न्यायिक साख पर एक आलोचनात्मक दृष्टि अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम भारत के संवैधानिक ढाँचे में ऐतिहासिक अन्याय के विरुद्ध एक आवश्यक सुरक्षा-कवच है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है—सदियों के उत्पीड़न, सामाजिक बहिष्कार और हिंसा से पीड़ित समुदायों को त्वरित न्याय और संरक्षण। लेकिन जब कोई कानून अपने नैतिक उद्देश्य से विचलित होकर राजनीतिक सुविधा, प्रशासनिक जल्दबाज़ी या दुरुपयोग की आशंका का उपकरण बन जाए, तब वह न केवल निर्दोष नागरिकों के अधिकारों को चोट पहुँचाता है, बल्कि भारत की न्यायिक विश्वसनीयता को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रश्नांकित करता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह कहना कि गिरफ्तारी से पहले प्राथमिक जाँच आवश्यक है, इसी संतुलन को साधने का प्रयास था—ताकि पीड़ितों को सुरक्षा मिले और निर्दोषों को मनमानी से बचाया जा सके। लेकिन उस निर्णय को निष्प्रभावी करने के लिए अधिनियम में संशोधन कर दिया गया, जिससे बिना जाँच तत्काल गिरफ्तारी का रास्ता फिर खोल दिया गया। यह संशोधन केवल एक कानूनी बदलाव नहीं था; यह राज्य की प्राथमिकताओं का राजनीतिक उद्घोष था। ## दरभंगा (कुशेश्वर) FIR 22/2026: एक स्थानीय मामला, वैश्विक सवाल बिहार के दरभंगा ज़िले की FIR संख्या 22 (2026) को अगर यहाँ वर्णित तथ्यों/आरोपों के आलोक में देखा जाए, तो यह मामला केवल एक गाँव या थाना-क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसमें उभरते प्रश्न अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की विधि-प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। 1. आपराधिक प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग यदि FIR की उत्पत्ति किसी लंबित भुगतान/धन-उगाही विवाद से जुड़ी बताई जाती है और वह पंचायत में सिद्ध नहीं हो पाती, तो यह क्रिमिनल लॉ को सिविल विवाद सुलझाने के हथियार में बदलने का उदाहरण बनता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विमर्श में इसे abuse of process माना जाता है। 2. जन्म से अपराधीकरण का आरोप यदि अभियुक्तों को केवल ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के आधार पर सूचीबद्ध किया गया—तो यह व्यक्तिगत अपराध की जगह सामूहिक पहचान पर दंड का आरोप बनता है। विडंबना यह है कि जिस कानून का उद्देश्य जाति-आधारित उत्पीड़न से बचाव है, उसी के तहत यदि किसी दूसरी जाति को “सामूहिक अपराधी” की तरह चिह्नित किया जाए, तो यह संवैधानिक समानता के सिद्धांत के विरुद्ध जाता है। 3. सामाजिक यथार्थ बनाम आरोप यदि शिकायतकर्ता स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त बताया जाता है—ढाबा, आधुनिक सुविधाएँ, और गाँव में सामाजिक मेलजोल के प्रमाण—तो “छुआछूत” या “सामूहिक जातिगत हिंसा” के आरोपों की तथ्यात्मक जाँच अनिवार्य हो जाती है। बिना जाँच गिरफ्तारी का प्रावधान यहीं खतरनाक बनता है। 4. पूरे समुदाय को आरोपी बनाने का प्रयास पूरे गाँव/मोहल्ले की एक जाति को घसीट लेना, नामों में त्रुटियाँ (जैसे किसी पुरुष के पिता को महिला दर्शाना) — ये सब FIR की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। अंतरराष्ट्रीय न्याय-मानकों में ऐसी त्रुटियाँ bad faith prosecution के संकेत मानी जाती हैं। 5. विदेशों में रह रहे लोगों पर कार्रवाई और इंटरपोल का प्रश्न यदि अभियुक्तों में ऐसे लोग भी शामिल हों जो अन्य राज्यों या विदेशों में काम कर रहे हों, तो बिना प्राथमिक जाँच के उनकी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल नोटिस की कल्पना ही भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर असहज स्थिति में डाल सकती है। इंटरपोल का दुरुपयोग पहले ही कई देशों में आलोचना का विषय रहा है; भारत के लिए यह कूटनीतिक और कानूनी जोखिम बन सकता है। 6. असंभव कथाएँ और तर्क का अभाव सैकड़ों हथियारबंद लोगों का एक निहत्थे व्यक्ति को नुकसान न पहुँचा पाना—यह विवरण सामान्य विवेक के स्तर पर भी सवाल खड़े करता है। जब ऐसी कथाएँ बिना जाँच कानूनी दस्तावेज़ बन जाती हैं, तो न्याय-प्रणाली की साख कमजोर होती है। 7. मुआवज़ा/प्रोत्साहन और अभियुक्तों की संख्या यदि मुआवज़ा या राहत अभियुक्तों की संख्या से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हो, तो यह प्रोत्साहन-संरचना (incentive structure) खुद दुरुपयोग को जन्म दे सकती है। यह प्रश्न केवल नैतिक नहीं, बल्कि नीति-निर्माण का है। ## अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ: भारत किस छवि के साथ खड़ा होगा? आज भारत स्वयं को rule of law, democracy और human rights का समर्थक बताता है। लेकिन यदि— * बिना जाँच गिरफ्तारी सामान्य प्रक्रिया बन जाए, * जातिगत पहचान के आधार पर सामूहिक अभियोजन के आरोप लगें, * और ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को घसीटा जाए, तो भारत पर यह आरोप लग सकता है कि वह मानवाधिकार कानूनों का चयनात्मक उपयोग कर रहा है। यह केवल विदेशी मीडिया या रिपोर्टों का सवाल नहीं; यह निवेश, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग को भी प्रभावित कर सकता है। सुरक्षा और न्याय के बीच संतुलन अनिवार्य एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम को कमजोर करना समाधान नहीं है—लेकिन उसके कथित दुरुपयोग पर आँख मूँद लेना भी नहीं। पीड़ितों की सुरक्षा और निर्दोषों के अधिकार, दोनों को साथ लेकर चलना ही संविधान की आत्मा है। यदि सरकार और न्यायपालिका इस संतुलन को पुनः स्थापित नहीं करतीं, तो हर ऐसा विवाद—जैसा कि दरभंगा का यह मामला—स्थानीय अन्याय से आगे बढ़कर भारत की वैश्विक न्यायिक साख पर सवाल बनता जाएगा। और तब यह केवल एक FIR नहीं रहेगी, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय चेतावनी बन जाएगी।

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  • रायबरेली सदर में फॉर्म-7 दुरुपयोग: "श्री राम" के नाम पर मुस्लिम मतदाताओं के वोट निशाने पर, 80+ नाम प्रभावित रायबरेली l सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-7 के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का मामला सामने आया है। रायबरेली समाजवादी पार्टी के अनुसार, बूथ 166, मुस्लिम बहुल इलाके में "श्री राम" नाम से दर्ज आपत्तियों के जरिए 99 मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश हुई, जिसमें से करीब 80 वोट प्रभावित हुए हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा, जिसमें फर्जी फॉर्म-7 रद्द करने, नाम बहाल करने और जांच की मांग की गई। सपा का आरोप है कि यह PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) वोटरों को निशाना बनाने की साजिश है।
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    रायबरेली सदर में फॉर्म-7 दुरुपयोग: "श्री राम" के नाम पर मुस्लिम मतदाताओं के वोट निशाने पर, 80+ नाम प्रभावित
रायबरेली l सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-7 के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का मामला सामने आया है। रायबरेली समाजवादी पार्टी के अनुसार, बूथ 166, मुस्लिम बहुल इलाके में "श्री राम" नाम से दर्ज आपत्तियों के जरिए 99 मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश हुई, जिसमें से करीब 80 वोट प्रभावित हुए हैं।
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा, जिसमें फर्जी फॉर्म-7 रद्द करने, नाम बहाल करने और जांच की मांग की गई। सपा का आरोप है कि यह PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) वोटरों को निशाना बनाने की साजिश है।
    user_Ravindra Kumar
    Ravindra Kumar
    पत्रकार Rae Bareli, Uttar Pradesh•
    22 hrs ago
  • व्यापारियों ने एसडीएम सदर प्रफुल्ल शर्मा को ज्ञापन सौंपा। मांग की है कि नगर पालिका परिषद बोर्ड ने 22 जून 2023 को सर्वसम्मति से सुपर मार्केट की मरम्मत का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है। भवन की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय तकनीकी कमेटी गठित कर स्थलीय जांच कराई जाए। उसकी रिपोर्ट के आधार पर तत्काल मरम्मत कार्य शुरू किया जाए। इससे न केवल शासकीय धन की बचत होगी, बल्कि लोगों के रोजगार पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। एसडीएम ने व्यापारियों की मांगों को पूरा कराने का भरोसा दिया। इस मौके पर मीडिया प्रभारी पारुल वाजपेयी, राजीव अग्रवाल, संजय गुप्ता, अमित वाजपेयी, विराट गुप्ता, उज्जवल गोयल, अनंत कपूर, अवतार सिंह मोंगा, संजय त्रिपाठी, सतीश चावला, जसप्रीत सिंह गांधी, निर्मल वाजपेयी, श्याम अग्रवाल, श्यामू गौड़, शिवकुमार गुप्ता, राजेश अग्रवाल, बबलू शुक्ला मौजूद रहे। स्थान -रायबरेली सुपर मार्केट रिपोर्ट -बलवंत कुमार
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    व्यापारियों ने एसडीएम सदर प्रफुल्ल शर्मा को ज्ञापन सौंपा। मांग की है कि नगर पालिका परिषद बोर्ड ने 22 जून 2023 को सर्वसम्मति से सुपर मार्केट की मरम्मत का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है। भवन की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय तकनीकी कमेटी गठित कर स्थलीय जांच कराई जाए।
उसकी रिपोर्ट के आधार पर तत्काल मरम्मत कार्य शुरू किया जाए। इससे न केवल शासकीय धन की बचत होगी, बल्कि लोगों के रोजगार पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। एसडीएम ने व्यापारियों की मांगों को पूरा कराने का भरोसा दिया। इस मौके पर मीडिया प्रभारी पारुल वाजपेयी, राजीव अग्रवाल, संजय गुप्ता, अमित वाजपेयी, विराट गुप्ता, उज्जवल गोयल, अनंत कपूर, अवतार सिंह मोंगा, संजय त्रिपाठी, सतीश चावला, जसप्रीत सिंह गांधी, निर्मल वाजपेयी, श्याम अग्रवाल, श्यामू गौड़, शिवकुमार गुप्ता, राजेश अग्रवाल, बबलू शुक्ला मौजूद रहे।
स्थान -रायबरेली सुपर मार्केट 
रिपोर्ट -बलवंत कुमार
    user_Balvant singh Press
    Balvant singh Press
    डलमऊ, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • रायबरेली सुपरमार्केट को खाली कराने के मामले में दुकानदार और व्यापारी नगरपालिका के द्वारा दी गई नोटिस के विरोध प्रदर्शन में सुपरमार्केट से लेकर जिला अधिकारी के ऑफिस तक विरोध प्रदर्शन, किया
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    रायबरेली सुपरमार्केट को खाली कराने के मामले में दुकानदार और व्यापारी नगरपालिका के द्वारा दी गई नोटिस के विरोध प्रदर्शन में सुपरमार्केट से लेकर जिला अधिकारी के ऑफिस तक विरोध प्रदर्शन, किया
    user_रोहित यादव भारत न्यूज़ 24
    रोहित यादव भारत न्यूज़ 24
    Physiotherapist डलमऊ, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • चोर की तस्वीर देख कर जानकारी दीजिए आप सभी
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    चोर की तस्वीर देख कर जानकारी दीजिए आप सभी
    user_Siddhaur news
    Siddhaur news
    City Star हैदरगढ़, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • फतेहपुर व्यूरो रिपोर्ट उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य आज फतेहगढ़ जिले के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे
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    फतेहपुर व्यूरो रिपोर्ट उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य आज फतेहगढ़ जिले के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Fatehpur, Uttar Pradesh•
    1 hr ago
  • सरकारी कर्मचारियों के साथ इस तरीके का व्यवहार उचित नहीं
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    सरकारी कर्मचारियों के साथ इस तरीके का व्यवहार उचित नहीं
    user_MANAVTA FAMILY
    MANAVTA FAMILY
    Department of Social Services फतेहपुर, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • सतांव। रायबरेली-लालगंज मार्ग पर आठ मील के पास बुधवार शाम अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत हो गई, जबकि साथी घायल हो गया। युवक की मौत से परिजनों में रोना पीटना मचा है।गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र के केसरूवा गांव निवासी सुभाष कुमार (19) पुत्र सुरेश कुमार बाइक से अपने साथी कृष्ण कुमार (16) के साथ किलौली चौराहा जा रहे थे। शाम करीब छह बजे जैसे ही वे रायबरेली-लालगंज मार्ग पर आठ मील के पास पहुंचे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। इससे दोनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए।पुलिस को घटना की जानकारी मिलते ही वह तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को एंबुलेंस की सहायता से सीएचसी जतुआ टप्पा पहुंचाया। सीएचसी जतुआ टप्पा में डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण 19 वर्षीय सुभाष कुमार को बचाया नहीं जा सका।कृष्ण कुमार की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। सुभाष खेती करते थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाइक सवार ने हेलमेट नहीं पहना था। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर भाग निकला। गुरुबख्शगंज थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। स्थान --अटौरा गुरूबक्शगंज रिपोर्ट -बलवंत कुमार
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    सतांव। रायबरेली-लालगंज मार्ग पर आठ मील के पास बुधवार शाम अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत हो गई, जबकि साथी घायल हो गया। युवक की मौत से परिजनों में रोना पीटना मचा है।गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र के केसरूवा गांव निवासी सुभाष कुमार (19) पुत्र सुरेश कुमार बाइक से अपने साथी कृष्ण कुमार (16) के साथ किलौली चौराहा जा रहे थे। शाम करीब छह बजे जैसे ही वे रायबरेली-लालगंज मार्ग पर आठ मील के पास पहुंचे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। इससे दोनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए।पुलिस को घटना की जानकारी मिलते ही वह तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को एंबुलेंस की सहायता से सीएचसी जतुआ टप्पा पहुंचाया। सीएचसी जतुआ टप्पा में डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण 19 वर्षीय सुभाष कुमार को बचाया नहीं जा सका।कृष्ण कुमार की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। सुभाष खेती करते थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाइक सवार ने हेलमेट नहीं पहना था। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर भाग निकला। गुरुबख्शगंज थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
स्थान --अटौरा गुरूबक्शगंज 
रिपोर्ट -बलवंत कुमार
    user_Balvant singh Press
    Balvant singh Press
    डलमऊ, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • 30 लाख की चांदी चोरी अवसानेश्वर महादेव मंदिर हैदरगढ़ में हुई 9 किलो चांदी व दान पत्र से पैसे चोरों ने रात करीब 2 बजे गेट खोल कर दिया अंज़ाम
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    30 लाख की चांदी चोरी अवसानेश्वर महादेव मंदिर हैदरगढ़ में हुई 
9 किलो चांदी व दान पत्र से पैसे चोरों ने रात करीब 2 बजे गेट खोल कर दिया अंज़ाम
    user_Siddhaur news
    Siddhaur news
    City Star हैदरगढ़, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • फतेहपुर व्यूरो रिपोर्ट फतेहपुर की बुक सांसद पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र के वचनीपुर बूथ पर विशेष पुनरीक्षण अभियान की समीक्षा की
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    फतेहपुर व्यूरो रिपोर्ट फतेहपुर की बुक सांसद पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र के वचनीपुर बूथ पर विशेष पुनरीक्षण  अभियान  की समीक्षा की
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Fatehpur, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
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