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अखिलेश यादव की PDA यात्रा पर बीजेपी का पलटवार | संजय सरावगी ने किया जीत का दावा

16 hrs ago
user_Niraj Raj
Niraj Raj
बैरिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
16 hrs ago

अखिलेश यादव की PDA यात्रा पर बीजेपी का पलटवार | संजय सरावगी ने किया जीत का दावा

More news from Pashchim Champaran and nearby areas
  • 26 सितंबर को बेतिया समाहरणालय पर ईख उत्पादकों का विशाल धरना नौतन। बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ की नौतन अंचल कमिटी की विस्तारित बैठक श्यामपुर कोतराहा पंचायत में जिला अध्यक्ष लालबाबू यादव के आवास पर हुई। बैठक में अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ के राष्ट्रीय वित्त सचिव प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर अब संघर्ष तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 21 सितंबर को सासामुसा चीनी मिल को कबाड़ी के हाथों बेचे जाने के विरोध में सासामुसा स्टेशन चौक पर सभा होगी। साथ ही 26 सितंबर को सुबह 11 बजे बेतिया समाहरणालय पर पश्चिम चंपारण के ईख उत्पादक किसान विशाल धरना देंगे। धरने के माध्यम से गन्ने का समर्थन मूल्य 650 रुपये प्रति क्विंटल करने, चीनी मिलों की घटतौली पर रोक लगाने, सभी किस्म के गन्ने का समान चालान जारी करने तथा इथेनॉल, बिजली व अन्य बायो-प्रोडक्ट से होने वाले लाभ में किसानों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी। बैठक की अध्यक्षता मुखिया अंबिका यादव ने की।
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    26 सितंबर को बेतिया समाहरणालय पर ईख उत्पादकों का विशाल धरना

नौतन। बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ की नौतन अंचल कमिटी की विस्तारित बैठक श्यामपुर कोतराहा पंचायत में जिला अध्यक्ष लालबाबू यादव के आवास पर हुई। बैठक में अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ के राष्ट्रीय वित्त सचिव प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर अब संघर्ष तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 21 सितंबर को सासामुसा चीनी मिल को कबाड़ी के हाथों बेचे जाने के विरोध में सासामुसा स्टेशन चौक पर सभा होगी। साथ ही 26 सितंबर को सुबह 11 बजे बेतिया समाहरणालय पर पश्चिम चंपारण के ईख उत्पादक किसान विशाल धरना देंगे। धरने के माध्यम से गन्ने का समर्थन मूल्य 650 रुपये प्रति क्विंटल करने, चीनी मिलों की घटतौली पर रोक लगाने, सभी किस्म के गन्ने का समान चालान जारी करने तथा इथेनॉल, बिजली व अन्य बायो-प्रोडक्ट से होने वाले लाभ में किसानों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी। बैठक की अध्यक्षता मुखिया अंबिका यादव ने की।
    user_Makhan Kumar
    Makhan Kumar
    Bettiah, Pashchim Champaran•
    4 hrs ago
  • कश्मीर नहीं, बिहार में लहलहा रहे सेब के बागान, 45 डिग्री की गर्मी में भी फलन, किसानों की आमदनी डबल पश्चिम चंपारण. जिस सेब की खेती को अब तक कश्मीर और हिमाचल जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों का समझा जाता था, वह अब बिहार जैसे गर्म प्रदेश की पहचान बन चुकी है.बड़ी बात यह है कि जिले के दर्जनों किसानों ने सीमित संसाधनों के बावजूद भी इसकी बागवानी बड़ी खूबसूरती से की है, जिससे उन्हें शानदार फलन की प्राप्ति भी हुई है. बताते चलें कि ज़िले में इसकी शुरुआत मझौलिया प्रखंड निवासी रविकांत पांडे ने वर्ष 2019 में ही की थी.रविकांत एक कृषि विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने गर्म प्रदेश में होने वाले सेव की HRMN 99 किस्म को सबसे पहले सफलता पूर्वक उपजाया था. बकौल रविकांत, HRMN के अलावे सेव की अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों को भी बिहार सहित कुछ अन्य गर्म राज्यों में उपजाया जा सकता है. सेब के पौधे तैयार करने में M7 और M9 रूटस्टॉक का इस्तेमाल किया जाता है. रूटस्टॉक के ऊपर इच्छित सेब की प्रजाति की ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधी जाती है. इसके लिए अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है.पौधे की ग्राफ्टिंग के बाद उचित समय और तापमान में उसकी देखभाल की जाती है. ध्यान रहे कि ग्राफ्टिंग वाले स्थान के ऊपर निकलने वाली शाखाओं को विकसित किया जाता है, जबकि रूटस्टॉक के नीचे से निकलने वाली अनावश्यक शाखाओं को हटा दिया जाता है. सेब के पेड़ में विकसित होने वाली फलदार छोटी शाखाएं ही आगे चलकर फल देने का आधार बनती हैं. इन्हीं शाखाओं पर फूल आते हैं और बाद में सेब के फल विकसित होते हैं. मजे की बात है कि HRMN को सिर्फ खेत में ही नहीं, बल्कि सीमित मिट्टी वाले कंटेनर में भी लगाया जा सकता है.बड़ी बात यह है कि रवीकांत ने इन्हीं कैरेट और गमलों में सेब की सफल उपज करके दिखाई है. बताते चलें कि सेब के पौधों के लिए करीब 8 फीट प्लांट-टू-प्लांट और 10 फीट लाइन-टू-लाइन दूरी रखने पर एक एकड़ में 500 से अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। कुछ किस्में शुरुआती वर्षों में ही फल देना शुरू कर देती हैं, लेकिन कुछ को एक वर्ष से भी अधिक समय लगता है. मैदानी इलाकों में गर्मी पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में पहले आने के कारण यहां सेब का विकास और फल तैयार होने का समय भी पहले हो सकता है। उनका दावा है कि बिहार में तैयार होने वाला सेब कश्मीर के पारंपरिक सीजन से करीब डेढ़ से दो महीने पहले बाजार में आने की संभावना रखता है। रवीकांत पांडेय ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि किसानों को सेब की खेती की पूरी तकनीक समझाना भी है। इसमें पौधारोपण, प्रूनिंग यानी छंटाई, पोषण प्रबंधन, फलदार शाखाओं की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने की तकनीक शामिल है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में सेब के पौधों की कीमत करीब 1200 रुपये तक थी, लेकिन अब अपने उत्पादन के कारण अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौधे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इच्छुक किसान स्क्रीन पर जारी संपर्क नंबर के माध्यम से पौधों के लिए संपर्क कर सकते हैं।
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    कश्मीर नहीं, बिहार में लहलहा रहे सेब के बागान, 45 डिग्री की गर्मी में भी फलन, किसानों की आमदनी डबल
पश्चिम चंपारण. जिस सेब की खेती को अब तक कश्मीर और हिमाचल जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों का समझा जाता था, वह अब बिहार जैसे गर्म प्रदेश की पहचान बन चुकी है.बड़ी बात यह है कि जिले के दर्जनों किसानों ने सीमित संसाधनों के बावजूद भी इसकी बागवानी बड़ी खूबसूरती से की है, जिससे उन्हें शानदार फलन की प्राप्ति भी हुई है.
बताते चलें कि ज़िले में इसकी शुरुआत मझौलिया प्रखंड निवासी रविकांत पांडे ने वर्ष 2019 में ही की थी.रविकांत एक  कृषि विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने गर्म प्रदेश में होने वाले सेव की HRMN 99 किस्म को सबसे पहले सफलता पूर्वक उपजाया था.
बकौल रविकांत, HRMN के अलावे सेव की अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों को भी बिहार सहित कुछ अन्य गर्म राज्यों में उपजाया जा सकता है.
सेब के पौधे तैयार करने में M7 और M9 रूटस्टॉक का इस्तेमाल किया जाता है. रूटस्टॉक के ऊपर इच्छित सेब की प्रजाति की ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधी जाती है. इसके लिए अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है.पौधे की ग्राफ्टिंग के बाद उचित समय और तापमान में उसकी देखभाल की जाती है. 
ध्यान रहे कि ग्राफ्टिंग वाले स्थान के ऊपर निकलने वाली शाखाओं को विकसित किया जाता है, जबकि रूटस्टॉक के नीचे से निकलने वाली अनावश्यक शाखाओं को हटा दिया जाता है. सेब के पेड़ में विकसित होने वाली फलदार छोटी शाखाएं ही आगे चलकर फल देने का आधार बनती हैं. इन्हीं शाखाओं पर फूल आते हैं और बाद में सेब के फल विकसित होते हैं.
मजे की बात है कि HRMN को सिर्फ खेत में ही नहीं, बल्कि सीमित मिट्टी वाले कंटेनर में भी लगाया जा सकता है.बड़ी बात यह है कि रवीकांत ने इन्हीं कैरेट और गमलों में सेब की सफल उपज करके दिखाई है.
बताते चलें कि सेब के पौधों के लिए करीब 8 फीट प्लांट-टू-प्लांट और 10 फीट लाइन-टू-लाइन दूरी रखने पर एक एकड़ में 500 से अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। कुछ किस्में शुरुआती वर्षों में ही फल देना शुरू कर देती हैं, लेकिन कुछ को एक वर्ष से भी अधिक समय लगता है.
मैदानी इलाकों में गर्मी पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में पहले आने के कारण यहां सेब का विकास और फल तैयार होने का समय भी पहले हो सकता है। उनका दावा है कि बिहार में तैयार होने वाला सेब कश्मीर के पारंपरिक सीजन से करीब डेढ़ से दो महीने पहले बाजार में आने की संभावना रखता है।
रवीकांत पांडेय ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि किसानों को सेब की खेती की पूरी तकनीक समझाना भी है। इसमें पौधारोपण, प्रूनिंग यानी छंटाई, पोषण प्रबंधन, फलदार शाखाओं की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने की तकनीक शामिल है।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में सेब के पौधों की कीमत करीब 1200 रुपये तक थी, लेकिन अब अपने उत्पादन के कारण अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौधे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इच्छुक किसान स्क्रीन पर जारी संपर्क नंबर के माध्यम से पौधों के लिए संपर्क कर सकते हैं।
    user_S9 Bihar
    S9 Bihar
    News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    9 hrs ago
  • कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्वच्छता अभियान का आयोजन।। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत आज कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर, पश्चिमी चम्पारण द्वारा सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, माधोपुर में एक विशेष स्वच्छता जागरूकता एवं स्वच्छता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि यह स्वच्छता अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे जिले में चलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य जन-जन तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाना है। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों को संबोधित करते हुए बताया गया कि स्वच्छता केवल विद्यालय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल से घर तक और घर से समाज तक स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने के महत्व और कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया। इसके उपरांत सभी छात्रों, शिक्षकों एवं केवीके कर्मियों ने मिलकर विद्यालय परिसर में झाड़ू लगाकर श्रमदान किया और पूरे परिसर को साफ किया। इस अभियान के नोडल अधिकारी एवं वैज्ञानिक (फसल उत्पादन) डॉ. हर्षा बी.आर. द्वारा बच्चों को पोषण वाटिका के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के साथ-साथ पोषण भी स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। प्रत्येक घर में पोषण वाटिका लगाकर कुपोषण को दूर किया जा सकता है और मौसमी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। डॉ चेलपुरी रामलू वैज्ञानिक कृषि अभियंत्रण द्वारा उपस्थित बच्चों को कृषि शिक्षा के बारे मे विस्तार पूर्वक जानकारी दिया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षकगण एवं सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से श्री कमलेश कुमार, श्री मनोज कुमार, श्री शंभू कुमार एवं श्री शैलेंद्र कुमार का सराहनीय सहयोग रहा।
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    कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्वच्छता अभियान का आयोजन।।
भारत सरकार द्वारा प्रायोजित स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत आज कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर, पश्चिमी चम्पारण द्वारा सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, माधोपुर में एक विशेष स्वच्छता जागरूकता एवं स्वच्छता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि यह स्वच्छता अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे जिले में चलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य जन-जन तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाना है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों को संबोधित करते हुए बताया गया कि स्वच्छता केवल विद्यालय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल से घर तक और घर से समाज तक स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने के महत्व और कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया। इसके उपरांत सभी छात्रों, शिक्षकों एवं केवीके कर्मियों ने मिलकर विद्यालय परिसर में झाड़ू लगाकर श्रमदान किया और पूरे परिसर को साफ किया।
इस अभियान के नोडल अधिकारी एवं वैज्ञानिक (फसल उत्पादन) डॉ. हर्षा बी.आर. द्वारा बच्चों को पोषण वाटिका के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के साथ-साथ पोषण भी स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। प्रत्येक घर में पोषण वाटिका लगाकर कुपोषण को दूर किया जा सकता है और मौसमी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। डॉ चेलपुरी रामलू वैज्ञानिक कृषि अभियंत्रण द्वारा उपस्थित बच्चों को कृषि शिक्षा के बारे मे विस्तार पूर्वक जानकारी दिया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षकगण एवं सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से श्री कमलेश कुमार, श्री मनोज कुमार, श्री शंभू कुमार एवं श्री शैलेंद्र कुमार का सराहनीय सहयोग रहा।
    user_RAVI PANDEY
    RAVI PANDEY
    Media and information sciences faculty मझौलिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    19 hrs ago
  • विधायक हूं माननीय विधायक विनय बिहारी लौरिया विधायक स्वरांजलि सेवा संस्थान MLA 2025
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    विधायक हूं माननीय विधायक विनय बिहारी लौरिया विधायक  स्वरांजलि सेवा संस्थान
MLA 2025
    user_D Anand
    D Anand
    Singer बगहा, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    5 hrs ago
  • Hamirpur Me Live Firing Ka Sansanikhez Video Viral! Aapsi vivad itna badha ki karobari ne nikal li licensy gun aur kar di tabartod firing! Sadak par machi afra-tafri, yuvakon ne bhagkar bachayi apni jaan. Sadar Kotwali kshetra ki ye khaufnaak vardaat ab social media par chha gayi hai. ​#Hamirpur #HamirpurNews #UPNews #BreakingNews #LiveFiring
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    Hamirpur Me Live Firing Ka Sansanikhez Video Viral!

Aapsi vivad itna badha ki karobari ne nikal li licensy gun aur kar di tabartod firing! Sadak par machi afra-tafri, yuvakon ne bhagkar bachayi apni jaan. Sadar Kotwali kshetra ki ye khaufnaak vardaat ab social media par chha gayi hai.

​#Hamirpur #HamirpurNews #UPNews #BreakingNews #LiveFiring
    user_Desi Dispatch News
    Desi Dispatch News
    Commercial property estate agent तमकुही राज, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित अधिवक्ता सम्मान समारोह में वरिष्ठ अधिवक्ताओं को किया गया सम्मानित अधिवक्ता समाज के हित में निरंतर कार्य कर रही सरकार: कृषि मंत्री आज कलेक्ट्रेट परिसर में अधिवक्ता सम्मान समारोह आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही एवं सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ अधिवक्ता परशुराम मिश्रा द्वारा किया गया। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने संबोधन में कहा कि यह सरकार अधिवक्ताओं के हित के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उनके इलाज के लिए पांच लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही अन्य आवश्यक संसाधन एवं सुविधाएं तथा न्यायालय परिसरों में बैठने की समुचित व्यवस्था करने के लिए भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज के हित के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। शोषित एवं पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा लगाने के साथ ही मनोयोग से कार्य करते हुए निष्पक्ष एवं पारदर्शी न्याय दिलाने में अपनी अग्रणी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शासकीय अधिवक्ताओं का वेतन/मानदेय बढ़ाने का कार्य भी इस सरकार ने किया है। सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि अधिवक्ता सदैव समाज को दिशा दिखाने का कार्य करते आए हैं। साथ ही न्यायिक पीठासीन अधिकारियों के समक्ष वास्तविक तर्क एवं तथ्य रखते हुए पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। उनके इस पहल एवं प्रयास से पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलता है। आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री एवं सदर विधायक ने अधिवक्ताओं एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं तथा कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर उर्फ प्रीतम मिश्रा, जयप्रकाश मिश्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय गुप्ता को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ताओं में रामानुज शुक्ला, उमेश नारायण श्रीवास्तव, चंद्रबली शुक्ल, इष्टदेव तिवारी, ओमप्रकाश मिश्रा, गिरीश शुक्ला, संदीप कुमार मिश्रा, सिंहासन गिरी, सिविल कोर्ट के अध्यक्ष मनोज मिश्रा, सतीश चंद्र पति त्रिपाठी, पंचानन शुक्ला, मारकंडेय लाल श्रीवास्तव, राजेश कुमार पांडेय, श्रीराम त्रिपाठी पूर्व अध्यक्ष सिविल कोर्ट, एडवोकेट केसरी नाथ पांडेय, मोहन दूबे, आशुतोष सिंह, के. के. सिंह, इलियास अहमद एवं राघव पांडेय को अतिथियों ने शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। अंत में कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित अन्य अतिथियों के प्रति आभार जताया तथा धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व पंकज प्रसाद राठौर, नगर पालिका अध्यक्ष अलका सिंह, ब्लॉक प्रमुख पथरदेवा सुब्रत शाही, जिला अध्यक्ष भाजपा काली प्रसाद, पूर्व जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह तथा अन्य अधिवक्तागण, अधिकारीगण आदि उपस्थित रहे।
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    कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित अधिवक्ता सम्मान समारोह में वरिष्ठ अधिवक्ताओं को किया गया सम्मानित
अधिवक्ता समाज के हित में निरंतर कार्य कर रही सरकार: कृषि मंत्री
आज कलेक्ट्रेट परिसर में अधिवक्ता सम्मान समारोह आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही एवं सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी  रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण  के साथ अधिवक्ता परशुराम मिश्रा द्वारा किया गया।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने संबोधन में कहा कि यह सरकार अधिवक्ताओं के हित के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उनके इलाज के लिए पांच लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही अन्य आवश्यक संसाधन एवं सुविधाएं तथा न्यायालय परिसरों में बैठने की समुचित व्यवस्था करने के लिए भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज के हित के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। शोषित एवं पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा लगाने के साथ ही मनोयोग से कार्य करते हुए निष्पक्ष एवं पारदर्शी न्याय दिलाने में अपनी अग्रणी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शासकीय अधिवक्ताओं का वेतन/मानदेय बढ़ाने का कार्य भी इस सरकार ने किया है।
सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि अधिवक्ता सदैव समाज को दिशा दिखाने का कार्य करते आए हैं। साथ ही न्यायिक पीठासीन अधिकारियों के समक्ष वास्तविक तर्क एवं तथ्य रखते हुए पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। उनके इस पहल एवं प्रयास से पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलता है।
आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री एवं सदर विधायक ने अधिवक्ताओं एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं तथा कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर उर्फ प्रीतम मिश्रा, जयप्रकाश मिश्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय गुप्ता को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ताओं में रामानुज शुक्ला, उमेश नारायण श्रीवास्तव, चंद्रबली शुक्ल, इष्टदेव तिवारी, ओमप्रकाश मिश्रा, गिरीश शुक्ला, संदीप कुमार मिश्रा, सिंहासन गिरी, सिविल कोर्ट के अध्यक्ष मनोज मिश्रा, सतीश चंद्र पति त्रिपाठी, पंचानन शुक्ला, मारकंडेय लाल श्रीवास्तव, राजेश कुमार पांडेय, श्रीराम त्रिपाठी पूर्व अध्यक्ष सिविल कोर्ट, एडवोकेट केसरी नाथ पांडेय, मोहन दूबे, आशुतोष सिंह, के. के. सिंह, इलियास अहमद एवं राघव पांडेय को अतिथियों ने शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
अंत में कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित अन्य अतिथियों के प्रति आभार जताया तथा धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व पंकज प्रसाद राठौर, नगर पालिका अध्यक्ष अलका सिंह,  ब्लॉक प्रमुख पथरदेवा सुब्रत शाही, जिला अध्यक्ष भाजपा काली प्रसाद, पूर्व जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह तथा अन्य अधिवक्तागण, अधिकारीगण आदि उपस्थित रहे।
    user_Shrikrishn
    Shrikrishn
    पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
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    user_M.A.P NETWORK
    M.A.P NETWORK
    Local News Reporter पश्चिम चंपारण, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    18 hrs ago
  • समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन, ग्रामीण विकास पर जोर मझौलिया। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अमवा मझार में एसएसवीएस (समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान), बेतिया के तत्वावधान में आयोजित समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। सम्मेलन में कृषि और आजीविका के नए अवसरों पर चर्चा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को आधुनिक खेती, स्वरोजगार, आय बढ़ाने के उपाय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कृषि मेले में आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, जैविक खेती और आजीविका से जुड़े विभिन्न मॉडल भी प्रदर्शित किए गए, जिन्हें किसानों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक देखा। आयोजकों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ सतत और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।
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    समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन, ग्रामीण विकास पर जोर
मझौलिया। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अमवा मझार में एसएसवीएस (समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान), बेतिया के तत्वावधान में आयोजित समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। सम्मेलन में कृषि और आजीविका के नए अवसरों पर चर्चा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को आधुनिक खेती, स्वरोजगार, आय बढ़ाने के उपाय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कृषि मेले में आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, जैविक खेती और आजीविका से जुड़े विभिन्न मॉडल भी प्रदर्शित किए गए, जिन्हें किसानों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक देखा। आयोजकों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ सतत और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।
    user_Makhan Kumar
    Makhan Kumar
    Bettiah, Pashchim Champaran•
    4 hrs ago
  • मशरूम उत्पादन से स्वरोजगार की राह, 55 लोगों ने लिया प्रशिक्षण पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित चार दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों, ग्रामीण युवाओं और अन्य इच्छुक लोगों को कम लागत में स्वरोजगार से जोड़ना और मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी देना था। प्रशिक्षण में करीब 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। चार दिनों तक चले प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री, उत्पादन की पूरी प्रक्रिया, रखरखाव, तापमान और नमी का प्रबंधन, फसल की देखभाल समेत कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के समापन पर कृषि विज्ञान केंद्र के अभिषेक प्रताप सिंह ने प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए। इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों को मशरूम के बीज भी उपलब्ध कराए गए, ताकि प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीक का इस्तेमाल कर वे अपने स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाने और उसकी बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी गई। बताया गया कि मशरूम उत्पादन कम जगह और अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसे स्वरोजगार के विकल्प के रूप में अपना सकते हैं। अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि इच्छुक लोग घर या छोटे स्तर से भी मशरूम उत्पादन की शुरुआत कर सकते हैं। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ आगे चलकर दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, किसानों और अन्य इच्छुक लोगों को खेती आधारित स्वरोजगार से जोड़ना और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रमाण पत्र और मशरूम के बीज मिलने से प्रतिभागियों में भी उत्साह देखने को मिला। अब प्रशिक्षण लेने वाले लोग सीखी गई तकनीक के जरिए अपने घर और छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करने की तैयारी में हैं।
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    मशरूम उत्पादन से स्वरोजगार की राह, 55 लोगों ने लिया प्रशिक्षण
पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित चार दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों, ग्रामीण युवाओं और अन्य इच्छुक लोगों को कम लागत में स्वरोजगार से जोड़ना और मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी देना था।
प्रशिक्षण में करीब 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। चार दिनों तक चले प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री, उत्पादन की पूरी प्रक्रिया, रखरखाव, तापमान और नमी का प्रबंधन, फसल की देखभाल समेत कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के समापन पर कृषि विज्ञान केंद्र के अभिषेक प्रताप सिंह ने प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए। इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों को मशरूम के बीज भी उपलब्ध कराए गए, ताकि प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीक का इस्तेमाल कर वे अपने स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाने और उसकी बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी गई। बताया गया कि मशरूम उत्पादन कम जगह और अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसे स्वरोजगार के विकल्प के रूप में अपना सकते हैं।
अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि इच्छुक लोग घर या छोटे स्तर से भी मशरूम उत्पादन की शुरुआत कर सकते हैं। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ आगे चलकर दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, किसानों और अन्य इच्छुक लोगों को खेती आधारित स्वरोजगार से जोड़ना और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रमाण पत्र और मशरूम के बीज मिलने से प्रतिभागियों में भी उत्साह देखने को मिला। अब प्रशिक्षण लेने वाले लोग सीखी गई तकनीक के जरिए अपने घर और छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करने की तैयारी में हैं।
    user_S9 Bihar
    S9 Bihar
    News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    10 hrs ago
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