✍️रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय ✍️✍️✍️✍️ रीवा में खाकी पर सवाल सुरक्षा का प्रतीक या डर का चेहरा,,, रीवा,,,जहाँ एक ओर पुलिस की वर्दी आम जनता के लिए सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक मानी जाती है, वहीं रीवा से सामने आया एक मामला इस विश्वास को झकझोरता नजर आ रहा है,,,, आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने अपने पद और वर्दी का इस्तेमाल न केवल दबाव बनाने के लिए किया, बल्कि कथित तौर पर एक रिपोर्टर के साथ मिलकर उगाही जैसे गंभीर कृत्य को अंजाम देते हैं,,, सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम में धमकी और दबाव की भाषा का खुलकर इस्तेमाल किया गया,,,, मैं पुलिस में हूँ, तुम कुछ नहीं कर सकते जैसे शब्दों ने यह संकेत दिया कि कानून के रक्षक ही कानून से ऊपर खुद को समझ बैठे हैं। यह कथित बयान अब पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है,,,, बताया जा रहा है कि मामला धीरे-धीरे एक जाल की तरह फैलता गया, जिसमें सिपाही से लेकर थाना स्तर तक के कुछ नामों के जुड़ने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं हालांकि, आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सवाल कई खड़े हो गए हैं,,, तंज और सच्चाई के बीच खड़ी खाकी वर्दी की आड़ में दबंगई दिखाने वाले अक्सर यह भूल जाते हैं कि आज के दौर में हर गतिविधि पर नजर रखने वाले कैमरे और कानून दोनों ही जागरूक हैं,,,, जिस कुर्सी पर बैठकर नियमों की बात की जाती है, उसी के दायरे में खुद को भी जवाब देना पड़ता है,,, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर अपने ही कर्मियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर विभागीय भाईचारा हावी रहेगा,,,, पूरा जिला इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और न्याय की उम्मीद कर रहा है,,, वर्दी सिर्फ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है। जब रक्षक ही भय का कारण बनने लगें, तो व्यवस्था पर विश्वास डगमगाने लगता है,,,, जरूरत है कि हर स्तर पर जवाबदेही तय हो ताकि खाकी की साख बनी रहे और आम नागरिक का भरोसा टूटने न पाए,,,, ✍️रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय ✍️✍️✍️✍️ रीवा में खाकी पर सवाल सुरक्षा का प्रतीक या डर का चेहरा,,, रीवा,,,जहाँ एक ओर पुलिस की वर्दी आम जनता के लिए सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक मानी जाती है, वहीं रीवा से सामने आया एक मामला इस विश्वास को झकझोरता नजर आ रहा है,,,, आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने अपने पद और वर्दी का इस्तेमाल न केवल दबाव बनाने के लिए किया, बल्कि कथित तौर पर एक रिपोर्टर के साथ मिलकर उगाही जैसे गंभीर कृत्य को अंजाम देते हैं,,, सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम में धमकी और दबाव की भाषा का खुलकर इस्तेमाल किया गया,,,, मैं पुलिस में हूँ, तुम कुछ नहीं कर सकते जैसे शब्दों ने यह संकेत दिया कि कानून के रक्षक ही कानून से ऊपर खुद को समझ बैठे हैं। यह कथित बयान अब पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है,,,, बताया जा रहा है कि मामला धीरे-धीरे एक जाल की तरह फैलता गया, जिसमें सिपाही से लेकर थाना स्तर तक के कुछ नामों के जुड़ने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं हालांकि, आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सवाल कई खड़े हो गए हैं,,, तंज और सच्चाई के बीच खड़ी खाकी वर्दी की आड़ में दबंगई दिखाने वाले अक्सर यह भूल जाते हैं कि आज के दौर में हर गतिविधि पर नजर रखने वाले कैमरे और कानून दोनों ही जागरूक हैं,,,, जिस कुर्सी पर बैठकर नियमों की बात की जाती है, उसी के दायरे में खुद को भी जवाब देना पड़ता है,,, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर अपने ही कर्मियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर विभागीय भाईचारा हावी रहेगा,,,, पूरा जिला इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और न्याय की उम्मीद कर रहा है,,, वर्दी सिर्फ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है। जब रक्षक ही भय का कारण बनने लगें, तो व्यवस्था पर विश्वास डगमगाने लगता है,,,, जरूरत है कि हर स्तर पर जवाबदेही तय हो ताकि खाकी की साख बनी रहे और आम नागरिक का भरोसा टूटने न पाए,,,,
✍️रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय ✍️✍️✍️✍️ रीवा में खाकी पर सवाल सुरक्षा का प्रतीक या डर का चेहरा,,, रीवा,,,जहाँ एक ओर पुलिस की वर्दी आम जनता के लिए सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक मानी जाती है, वहीं रीवा से सामने आया एक मामला इस विश्वास को झकझोरता नजर आ रहा है,,,, आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने अपने पद और वर्दी का इस्तेमाल न केवल दबाव बनाने के लिए किया, बल्कि कथित तौर पर एक रिपोर्टर के साथ मिलकर उगाही जैसे गंभीर कृत्य को अंजाम देते हैं,,, सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम में धमकी और दबाव की भाषा का खुलकर इस्तेमाल किया गया,,,, मैं पुलिस में हूँ, तुम कुछ नहीं कर सकते जैसे शब्दों ने यह संकेत दिया कि कानून के रक्षक ही कानून से ऊपर खुद को समझ बैठे हैं। यह कथित बयान अब पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है,,,, बताया जा रहा है कि मामला धीरे-धीरे एक जाल की तरह फैलता गया, जिसमें सिपाही से लेकर थाना स्तर तक के कुछ नामों के जुड़ने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं हालांकि, आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सवाल कई खड़े हो गए हैं,,, तंज और सच्चाई के बीच खड़ी खाकी वर्दी की आड़ में दबंगई दिखाने वाले अक्सर यह भूल जाते हैं कि आज के दौर में हर गतिविधि पर नजर रखने वाले कैमरे और कानून दोनों ही जागरूक हैं,,,, जिस कुर्सी पर बैठकर नियमों की बात की जाती है, उसी के दायरे में खुद को भी जवाब देना पड़ता है,,, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर अपने ही कर्मियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर विभागीय भाईचारा हावी रहेगा,,,, पूरा जिला इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और न्याय की उम्मीद कर रहा है,,, वर्दी सिर्फ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है। जब रक्षक ही भय का कारण बनने लगें, तो व्यवस्था पर विश्वास डगमगाने लगता है,,,, जरूरत है कि हर स्तर पर जवाबदेही तय हो ताकि खाकी की साख बनी रहे और आम नागरिक का भरोसा टूटने न पाए,,,, ✍️रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय ✍️✍️✍️✍️ रीवा में खाकी पर सवाल सुरक्षा का प्रतीक या डर का चेहरा,,, रीवा,,,जहाँ एक ओर पुलिस की वर्दी आम जनता के लिए सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक मानी जाती है, वहीं रीवा से सामने आया एक मामला इस विश्वास को झकझोरता नजर आ रहा है,,,, आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने अपने पद और वर्दी का इस्तेमाल न केवल दबाव बनाने के लिए किया, बल्कि कथित तौर पर एक रिपोर्टर के साथ मिलकर उगाही जैसे गंभीर कृत्य को अंजाम देते हैं,,, सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम में धमकी और दबाव की भाषा का खुलकर इस्तेमाल किया गया,,,, मैं पुलिस में हूँ, तुम कुछ नहीं कर सकते जैसे शब्दों ने यह संकेत दिया कि कानून के रक्षक ही कानून से ऊपर खुद को समझ बैठे हैं। यह कथित बयान अब पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है,,,, बताया जा रहा है कि मामला धीरे-धीरे एक जाल की तरह फैलता गया, जिसमें सिपाही से लेकर थाना स्तर तक के कुछ नामों के जुड़ने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं हालांकि, आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सवाल कई खड़े हो गए हैं,,, तंज और सच्चाई के बीच खड़ी खाकी वर्दी की आड़ में दबंगई दिखाने वाले अक्सर यह भूल जाते हैं कि आज के दौर में हर गतिविधि पर नजर रखने वाले कैमरे और कानून दोनों ही जागरूक हैं,,,, जिस कुर्सी पर बैठकर नियमों की बात की जाती है, उसी के दायरे में खुद को भी जवाब देना पड़ता है,,, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर अपने ही कर्मियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर विभागीय भाईचारा हावी रहेगा,,,, पूरा जिला इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और न्याय की उम्मीद कर रहा है,,, वर्दी सिर्फ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है। जब रक्षक ही भय का कारण बनने लगें, तो व्यवस्था पर विश्वास डगमगाने लगता है,,,, जरूरत है कि हर स्तर पर जवाबदेही तय हो ताकि खाकी की साख बनी रहे और आम नागरिक का भरोसा टूटने न पाए,,,,
- Post by Bolti Divare1
- Post by Abhishek Pandey1
- Post by Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa1
- ✍️रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय ✍️ रीवा जिला अधिवक्ता संघ के लगातार सातवीं बार अध्यक्ष बने राजेंद्र पांडे.रीवा देश का ऐसा पहला अधिवक्ता संघ, जहां लगातार 14 साल से चुनाव के द्वारा अध्यक्ष के पद पर आसीन हैं,एक ही व्यक्ति, जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव हार 2 साल में होता है.पिछली बार के मुकाबले इस बार 100 वोट ज्यादा मिले हैं, राजेंद्र पांडे को. चुनाव जीतने के बाद जब उनसे एनडीटीवी ने सवाल किया अधिवक्ताओं पर क्या जादू किया तो उनका कहना था, यह तो आप उनसे पूछिए ,जिन पर जादू हुआ है. अधिवक्ताओं की समस्याएं सीमित है, लेकिन जरूरी है ,समय पर उनका निराकरण करना बेहद जरूरी होता है. और मैं यही करता हूं. राजेंद्र पांडे को इस बार 829 वोट मिले हैं, हारने वाले अशोक शुक्ला को 551, इस तरीके से राजेंद्र पांडे 278 वोटो से चुनाव जीत गए. रीवा में बहुचर्चित जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव संपन्न हुआ, जिसमें पिछले लगातार 6चुनाव जीतने वाले राजेंद्र पांडे सातवें बार भी अधिवक्ताओं के संघ के अध्यक्ष का चुनाव जीत गए हैं. रीवा देश का एकमात्र ऐसा अधिवक्ता संघ हो सकता है, जहां पर चुनाव के द्वारा इतने लंबे समय तक कोई अध्यक्ष रहा हो, इस बारे में जब अध्यक्ष का चुनाव जीतने वाले राजेंद्र पांडे से पूछा गया, आपने क्या जादू किया है तो उनका कहना था, जिस पर जादू हुआ है ,जवाब तो वही देगा. मैंने तो अपना काम किया है, लगातार वकीलों की समस्याओं का समाधान, वकीलों की समस्याएं बेहद छोटी होती है, लेकिन बहुत ज्यादा जरूरी होती है. बस समय सीमा पर उनका निराकरण करना मेरा काम है, और मैं यही करता हूं. उपाध्यक्ष पद पर कमलेश्वर तिवारी मानवेंद्र द्विवेदी से 152 वोट से जीते हैं. सचिव पद पर सुलभ पांडे 60 वोट से चुनाव जीते हैं. अनिल तिवारी सहसचिव पर 132 वोट से चुनाव जीते है.नीलम चतुर्वेदी कोषाध्यक्ष पद पर 57 वोट से चुनाव जीती हैं. राममाणी मिश्रा ग्रंथपाल पद पर 118 वोट से चुनाव जीते हैं. बाइट--राजेंद्र पांडे अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ लगातार सातवां चुनाव जीतने के बाद1
- रीवा जिला अधिवक्ता संघ के लगातार सातवीं बार अध्यक्ष बने राजेंद्र पांडे.रीवा देश का ऐसा पहला अधिवक्ता संघ, जहां लगातार 14 साल से चुनाव के द्वारा अध्यक्ष के पद पर आसीन हैं,एक ही व्यक्ति, जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव हार 2 साल में होता है.पिछली बार के मुकाबले इस बार 100 वोट ज्यादा मिले हैं, राजेंद्र पांडे को. चुनाव जीतने के बाद जब उनसे एनडीटीवी ने सवाल किया अधिवक्ताओं पर क्या जादू किया तो उनका कहना था, यह तो आप उनसे पूछिए ,जिन पर जादू हुआ है. अधिवक्ताओं की समस्याएं सीमित है, लेकिन जरूरी है ,समय पर उनका निराकरण करना बेहद जरूरी होता है. और मैं यही करता हूं. राजेंद्र पांडे को इस बार 829 वोट मिले हैं, हारने वाले अशोक शुक्ला को 551, इस तरीके से राजेंद्र पांडे 278 वोटो से चुनाव जीत गए. रीवा में बहुचर्चित जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव संपन्न हुआ, जिसमें पिछले लगातार 6चुनाव जीतने वाले राजेंद्र पांडे सातवें बार भी अधिवक्ताओं के संघ के अध्यक्ष का चुनाव जीत गए हैं. रीवा देश का एकमात्र ऐसा अधिवक्ता संघ हो सकता है, जहां पर चुनाव के द्वारा इतने लंबे समय तक कोई अध्यक्ष रहा हो, इस बारे में जब अध्यक्ष का चुनाव जीतने वाले राजेंद्र पांडे से पूछा गया, आपने क्या जादू किया है तो उनका कहना था, जिस पर जादू हुआ है ,जवाब तो वही देगा. मैंने तो अपना काम किया है, लगातार वकीलों की समस्याओं का समाधान, वकीलों की समस्याएं बेहद छोटी होती है, लेकिन बहुत ज्यादा जरूरी होती है. बस समय सीमा पर उनका निराकरण करना मेरा काम है, और मैं यही करता हूं. उपाध्यक्ष पद पर कमलेश्वर तिवारी मानवेंद्र द्विवेदी से 152 वोट से जीते हैं. सचिव पद पर सुलभ पांडे 60 वोट से चुनाव जीते हैं. अनिल तिवारी सहसचिव पर 132 वोट से चुनाव जीते है.नीलम चतुर्वेदी कोषाध्यक्ष पद पर 57 वोट से चुनाव जीती हैं. राममाणी मिश्रा ग्रंथपाल पद पर 118 वोट से चुनाव जीते हैं. बाइट--राजेंद्र पांडे अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ लगातार सातवां चुनाव जीतने के बाद1
- रामपुर बाघेलान मुख्यालय से सटे ग्राम सिलपरी में लगी भीषण आग, कर्रा, दीनापुर गांव आग की चपेट में1
- super1
- Post by Abhishek Pandey1