नदी में बन रही फोरलेन सड़क, राजिम में विकास या नदी के अस्तित्व पर संकट..! नदी में बन रही फोरलेन सड़क, राजिम में विकास या नदी के अस्तित्व पर संकट? राजिम। धार्मिक नगरी राजिम में इन दिनों नदी के किनारे बनाई जा रही फोरलेन सड़क चर्चा और बहस का विषय बनी हुई है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार की जा रही यह सड़क मुख्य रूप से मेले के दौरान वीआईपी और आम लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। लेकिन इस निर्माण कार्य ने पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों और नदी संरक्षण से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अंचल के प्रसिद्ध श्री राजीव लोचन मंदिर व त्रिवेणी संगम के मध्य में विराजमान भगवान श्री कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन के लिए पहुंचे दर्शनार्थी सुरेश कुमार रामलाल साहू मनबोध व कन्हैयालाल कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर नदी के प्राकृतिक स्वरूप को समाप्त किया जा रहा है। निर्माण कार्य के तहत नदी के भीतर भारी मात्रा में मिट्टी और मुरुम डाला जा रहा है। बड़ी-बड़ी मशीनों के माध्यम से लगातार भराव कार्य जारी है। इससे नदी की धारा प्रभावित हो रही है और उसका मूल स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। श्रद्धालुओ का कहना है कि उन्होंने अब तक नदी पर पुल, पुलिया और एनीकट बनते हुए देखे थे, लेकिन नदी के भीतर ही फोरलेन सड़क का निर्माण पहली बार देखा जा रहा है। इसे लोग आश्चर्यजनक और चिंताजनक दोनों मान रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यह सड़क स्थायी समाधान कम और अस्थायी सुविधा अधिक प्रतीत होती है। हर वर्ष बारिश के मौसम में महानदी और पैरी नदी में तेज बहाव के साथ बाढ़ की स्थिति बनती है। ऐसे में नदी के भीतर बनाई जा रही यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो सकती है। तेज बहाव और कटाव के कारण सड़क को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है। लोगों का सवाल है कि जब बारिश में सड़क डूब जाएगी तो करोड़ों रुपए खर्च करने का औचित्य क्या रह जाएगा? पर्यावरण से जुड़े जानकारों का मानना है कि नदी केवल जलधारा नहीं होती, बल्कि उसका अपना पारिस्थितिक तंत्र होता है। नदी में बड़े पैमाने पर मिट्टी डालने और निर्माण कार्य करने से जल प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे भविष्य में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा जलीय जीवों और आसपास के पर्यावरण पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी और पर्यावरणीय जांच सार्वजनिक की जाए। लोगों का कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ उचित नहीं कहा जा सकता। यदि भविष्य में सड़क को नुकसान होता है या बाढ़ की स्थिति गंभीर बनती है तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। राजिम अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में नदी के स्वरूप से छेड़छाड़ को लेकर लोगों में असंतोष दिखाई दे रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों और चिंताओं का क्या जवाब देता है।
नदी में बन रही फोरलेन सड़क, राजिम में विकास या नदी के अस्तित्व पर संकट..! नदी में बन रही फोरलेन सड़क, राजिम में विकास या नदी के अस्तित्व पर संकट? राजिम। धार्मिक नगरी राजिम में इन दिनों नदी के किनारे बनाई जा रही फोरलेन सड़क चर्चा और बहस का विषय बनी हुई है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार की जा रही यह सड़क मुख्य रूप से मेले के दौरान वीआईपी और आम लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। लेकिन इस निर्माण कार्य ने पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों और नदी संरक्षण से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अंचल के प्रसिद्ध श्री राजीव लोचन मंदिर व त्रिवेणी संगम के मध्य में विराजमान भगवान श्री कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन
के लिए पहुंचे दर्शनार्थी सुरेश कुमार रामलाल साहू मनबोध व कन्हैयालाल कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर नदी के प्राकृतिक स्वरूप को समाप्त किया जा रहा है। निर्माण कार्य के तहत नदी के भीतर भारी मात्रा में मिट्टी और मुरुम डाला जा रहा है। बड़ी-बड़ी मशीनों के माध्यम से लगातार भराव कार्य जारी है। इससे नदी की धारा प्रभावित हो रही है और उसका मूल स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। श्रद्धालुओ का कहना है कि उन्होंने अब तक नदी पर पुल, पुलिया और एनीकट बनते हुए देखे थे, लेकिन नदी के भीतर ही फोरलेन सड़क का निर्माण पहली बार देखा जा रहा है। इसे लोग आश्चर्यजनक और चिंताजनक दोनों मान रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यह सड़क स्थायी समाधान कम और अस्थायी
सुविधा अधिक प्रतीत होती है। हर वर्ष बारिश के मौसम में महानदी और पैरी नदी में तेज बहाव के साथ बाढ़ की स्थिति बनती है। ऐसे में नदी के भीतर बनाई जा रही यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो सकती है। तेज बहाव और कटाव के कारण सड़क को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है। लोगों का सवाल है कि जब बारिश में सड़क डूब जाएगी तो करोड़ों रुपए खर्च करने का औचित्य क्या रह जाएगा? पर्यावरण से जुड़े जानकारों का मानना है कि नदी केवल जलधारा नहीं होती, बल्कि उसका अपना पारिस्थितिक तंत्र होता है। नदी में बड़े पैमाने पर मिट्टी डालने और निर्माण कार्य करने से जल प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे भविष्य में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा जलीय जीवों और आसपास के पर्यावरण पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी और पर्यावरणीय जांच सार्वजनिक की जाए। लोगों का कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ उचित नहीं कहा जा सकता। यदि भविष्य में सड़क को नुकसान होता है या बाढ़ की स्थिति गंभीर बनती है तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। राजिम अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में नदी के स्वरूप से छेड़छाड़ को लेकर लोगों में असंतोष दिखाई दे रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों और चिंताओं का क्या जवाब देता है।
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- रायपुर में अभिभावकों को बच्चों के लिए कुरकुरी से सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। संदेश में कहा गया है कि बच्चों को बचत के लिए लालच न दें, बल्कि सही सीख दें।1
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- रायपुर में एक पति ने घरेलू विवाद के चलते अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या कर दी। घटना के बाद फरार हुए आरोपी ललित साहू उर्फ विक्की को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने मृतका का मोबाइल भी जब्त किया है और आगे की कार्रवाई जारी है।1