शिव संकल्प किन्ह मन माही, एही तन सतिही भेंट मोहि नाहीं। हंडिया। देवबरा धाम पिपरी में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के दूसरे दिन कथा वाचक राजन जी महराज ने भक्तों को कथा श्रवण कराते हुए कहा कि मां सती की एक गलती के कारण भगवान शिव ने उनका त्याग कर दिया। कहा कि इससे हमे यह ज्ञान मिलता है कि पत्नी को कभी भी पति के ऊपर अविश्वास नहीं करना चाहिए। कथा के दौरान हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। त्रेता युग में एकबार भगवान शंकर मां सती के साथ अगस्त ऋषि के आश्रम में कथा सुनने के लिए गए हुए थे। गोस्वामी तुलसीदास ने कथा का वर्णन करते हुए लिखा कि सती मैया ने कथा नहीं सुनी केवल भगवान शंकर ने कथा सुनी। श्रीराम को देखने के बाद भगवान शंकर जयकार लगाते हुए निकल गए। कहा कि भगवान शंकर ने भगवान श्रीराम का जयकारा लगाया यह बात मां सती को अच्छी नहीं लगी। भगवान श्री राम सीता की खोज कर रहे थे यही बात सती मैया को भ्रम में डाल दिया, क्या भगवान पत्नी के लिए रोते है यह भगवान नहीं हो सकते है। शंकर भगवान के समझाने पर सती मैया नहीं मानी व परीक्षा लेनी गई। कहा कि हमलोग परेशान है कि हमारी बात कभी कभी घरवाली नहीं मानती यहां तो मां सती भगवान की बात भी नहीं मान रही है।भगवान पेड़ के नीचे बैठकर सोचने लगे कि सती से विधाता विमुख हो गए है । श्रेष्ठ की बात यदि सुननी बंद हो जाए तो विनाश निश्चित है। जब हमे पड़ोसी व बाहरी अपना सबकुछ दिखाई दे, तो समझ लेना विनाश की घड़ी आ गई है।सती मैया परीक्षा लेने गई व माता सीता का रूप धर लिया। श्रीराम व लक्ष्मण के आगे आगे चलने लगी। लक्ष्मण समझ गए कि नकली भाभी है क्योंकि यह भैया के आगे चल रही है। ध्यान से देखा तो वह सती थी। भगवान श्रीराम ने हाथ जोड़कर कहा कि आप अकेले है बाबा कहा है। सती ने सोचा कि मैं अज्ञान के कारण पति की बात नहीं मानी। शंकर ने पूछा कि किस तरह अपने परीक्षा ली।शिवजी ने सती को माता सीता का रूप धारण करने के कारण माँ के रूप में देखा और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार न करने का निश्चय किया, क्योंकि यह मर्यादा के विरुद्ध था।भगवान शिव ने मन में यह दृढ़ संकल्प लिया कि अब इस शरीर (सती रूप) से मेरी पत्नी के रूप में भेंट नहीं हो सकता। इस मौके पर राजेंद्र शुक्ला उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश, उदयभान करवरिया, सुरेन्द्र चौधरी,ज्योति यादव ब्लॉक प्रमुख, दिनेश मिश्र खदरहा, रामचंद्र, महेश पांडेय, श्रवण यादव, नकुल मौर्य,एसीपी शेषधर पांडेय, कोतवाल हंडिया नितिन शुक्ला, थानाध्यक्ष सरायममरेज अतुल मिश्रा रूप सिंह यादव , पंकज कुमार मिश्रा सहित तमाम लोग मौजूद रहे। आयोजक राधे मोहन पांडेय ने आए हुए आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
शिव संकल्प किन्ह मन माही, एही तन सतिही भेंट मोहि नाहीं। हंडिया। देवबरा धाम पिपरी में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के दूसरे दिन कथा वाचक राजन जी महराज ने भक्तों को कथा श्रवण कराते हुए कहा कि मां सती की एक गलती के कारण भगवान शिव ने उनका त्याग कर दिया। कहा कि इससे हमे यह ज्ञान मिलता है कि पत्नी को कभी भी पति के ऊपर अविश्वास नहीं करना चाहिए। कथा के दौरान हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। त्रेता युग में एकबार भगवान शंकर मां सती के साथ अगस्त ऋषि के आश्रम में कथा सुनने के लिए गए हुए थे। गोस्वामी तुलसीदास ने कथा का वर्णन करते हुए लिखा कि सती मैया ने कथा नहीं सुनी केवल भगवान शंकर ने कथा सुनी। श्रीराम को देखने के बाद भगवान शंकर जयकार लगाते हुए निकल गए। कहा कि भगवान शंकर ने भगवान श्रीराम का जयकारा लगाया यह बात मां सती को अच्छी नहीं लगी। भगवान श्री राम सीता की खोज कर रहे थे यही बात सती मैया को भ्रम में डाल दिया, क्या भगवान पत्नी के लिए रोते है यह भगवान नहीं हो सकते है। शंकर भगवान के समझाने पर सती मैया नहीं मानी व परीक्षा लेनी गई। कहा कि हमलोग परेशान है कि हमारी बात कभी कभी घरवाली नहीं मानती यहां तो मां सती भगवान की बात भी नहीं मान रही है।भगवान पेड़ के नीचे बैठकर सोचने लगे कि सती से
विधाता विमुख हो गए है । श्रेष्ठ की बात यदि सुननी बंद हो जाए तो विनाश निश्चित है। जब हमे पड़ोसी व बाहरी अपना सबकुछ दिखाई दे, तो समझ लेना विनाश की घड़ी आ गई है।सती मैया परीक्षा लेने गई व माता सीता का रूप धर लिया। श्रीराम व लक्ष्मण के आगे आगे चलने लगी। लक्ष्मण समझ गए कि नकली भाभी है क्योंकि यह भैया के आगे चल रही है। ध्यान से देखा तो वह सती थी। भगवान श्रीराम ने हाथ जोड़कर कहा कि आप अकेले है बाबा कहा है। सती ने सोचा कि मैं अज्ञान के कारण पति की बात नहीं मानी। शंकर ने पूछा कि किस तरह अपने परीक्षा ली।शिवजी ने सती को माता सीता का रूप धारण करने के कारण माँ के रूप में देखा और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार न करने का निश्चय किया, क्योंकि यह मर्यादा के विरुद्ध था।भगवान शिव ने मन में यह दृढ़ संकल्प लिया कि अब इस शरीर (सती रूप) से मेरी पत्नी के रूप में भेंट नहीं हो सकता। इस मौके पर राजेंद्र शुक्ला उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश, उदयभान करवरिया, सुरेन्द्र चौधरी,ज्योति यादव ब्लॉक प्रमुख, दिनेश मिश्र खदरहा, रामचंद्र, महेश पांडेय, श्रवण यादव, नकुल मौर्य,एसीपी शेषधर पांडेय, कोतवाल हंडिया नितिन शुक्ला, थानाध्यक्ष सरायममरेज अतुल मिश्रा रूप सिंह यादव , पंकज कुमार मिश्रा सहित तमाम लोग मौजूद रहे। आयोजक राधे मोहन पांडेय ने आए हुए आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
- Post by VB News Prayagraj1
- Post by Raju Yadav1
- कानपुर नगर जर्जर मकान ढहने से इलाके में मचा हड़कंप *जिलानी लियाकती*1
- Post by Ptrkar deepak Shukla meja1
- टोल प्लाजा पर बेहोशी हालत में मिला युवक, जहरखुरानी की आशंका गोपीगंज थाना क्षेत्र के लाला नगर टोल प्लाजा पर एक युवक संदिग्ध परिस्थितियों में बेहोशी की हालत में मिला। उसकी पहचान वाजिद (पुत्र मोहम्मद सिद्दीक), निवासी रेहथु कटहरा हंडिया, प्रयागराज के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार वाजिद दुबई से मुंबई हवाई मार्ग से पहुंचे थे और वहां से ट्रेन द्वारा प्रयागराज आए। प्रयागराज से वह बस के जरिए हंडिया के लिए रवाना हुए थे। इसी दौरान अज्ञात परिस्थितियों में उन्हें लाल नगर टोल प्लाजा पर बेहोशी की हालत में उतार दिया गया। बस और उससे जुड़े लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और युवक को गोपीगंज के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि युवक के पास तीन बैग थे, जो मौके पर नहीं मिले हैं। घटना की सूचना पर डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल में जुट गई। पीड़ित के परिजनों ने कोतवाली में प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने आशंका जताई है कि युवक जहरखुरानी का शिकार हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।3
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- Post by Kumar Vikas1
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