कागजों में 'पहलवानी', जमीन पर 'धोबी पछाड़': रमवापुर दूबे में जिम के नाम पर सरकारी धन का 'खेल' अजीत मिश्रा (खोजी), सिद्धार्थनगर विकास खण्ड: मिठवल मिठवल। उत्तर प्रदेश सरकार गांव के युवाओं को तंदुरुस्त बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन भ्रष्टाचार के 'दीमक' इन योजनाओं को खोखला करने में जुटे हैं। ताजा मामला विकास खंड मिठवल की ग्राम पंचायत रमवापुर दूबे से सामने आया है, जहां कागजों पर तो जिम लहलहा रहा है, लेकिन हकीकत में वहां से सामान 'नदारद' है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पंचायत में जिम निर्माण के लिए भारी-भरकम सरकारी बजट आवंटित किया गया था। अभिलेखों और सरकारी फाइलों में जिम का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया, लोहे के एंगल लगा दिए गए और बड़े ही शातिराना ढंग से शत-प्रतिशत भुगतान भी डकार लिया गया। लेकिन जब ग्रामीण मौके पर जिम का लाभ लेने पहुंचे, तो वहां सन्नाटा पसरा मिला। जिम के नाम पर लगाए गए लोहे के कीमती एंगल और अन्य सामान मौके से गायब हैं। भ्रष्टाचार की 'मौन' सहमति ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुनियोजित बंदरबांट है। हैरानी की बात यह है कि बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान कैसे हो गया? इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। अधिकारियों की यह 'रहस्यमयी चुप्पी' सीधे तौर पर उनकी मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है। ग्रामीणों में भारी आक्रोश स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकारी धन जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है, जिसे चंद रसूखदार लोग मिलकर ठिकाने लगा रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। "जब सामान जमीन पर उतरा ही नहीं, तो सरकारी खजाने से पैसा किसके खाते में गया? यह जांच का विषय है। जिम्मेदारों की चुप्पी भ्रष्टाचार की गवाही दे रही है।" > — आक्रोशित ग्रामीण बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं: बिना सामान लगे भुगतान की फाइल पर हस्ताक्षर किसने किए? क्या तकनीकी सहायकों और सचिवों ने मौके पर जाकर जांच की थी? क्या गायब हुआ सामान वापस आएगा या फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी? अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस 'कागजी जिम' के असली खिलाड़ियों पर क्या कार्रवाई करता है या फिर विकास के नाम पर यह लूट यूं ही जारी रहेगी।
कागजों में 'पहलवानी', जमीन पर 'धोबी पछाड़': रमवापुर दूबे में जिम के नाम पर सरकारी धन का 'खेल' अजीत मिश्रा (खोजी), सिद्धार्थनगर विकास खण्ड: मिठवल मिठवल। उत्तर प्रदेश सरकार गांव के युवाओं को तंदुरुस्त बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन भ्रष्टाचार के 'दीमक' इन योजनाओं को खोखला करने में जुटे हैं। ताजा मामला विकास खंड मिठवल की ग्राम पंचायत रमवापुर दूबे से सामने आया है, जहां कागजों पर तो जिम लहलहा रहा है, लेकिन हकीकत में वहां से सामान 'नदारद' है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पंचायत में जिम निर्माण के लिए भारी-भरकम सरकारी बजट आवंटित किया गया था। अभिलेखों और सरकारी फाइलों में जिम का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया, लोहे के एंगल लगा दिए गए और बड़े ही शातिराना ढंग से शत-प्रतिशत भुगतान भी डकार लिया गया। लेकिन जब ग्रामीण मौके पर जिम का लाभ लेने पहुंचे, तो वहां सन्नाटा पसरा मिला। जिम के नाम पर लगाए गए लोहे के कीमती एंगल और अन्य सामान मौके से गायब हैं। भ्रष्टाचार की 'मौन' सहमति ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुनियोजित बंदरबांट है। हैरानी की बात यह है कि बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान कैसे हो गया? इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। अधिकारियों की यह 'रहस्यमयी चुप्पी' सीधे तौर पर उनकी मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है। ग्रामीणों में भारी आक्रोश स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकारी धन जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है, जिसे चंद रसूखदार लोग मिलकर ठिकाने लगा रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। "जब सामान जमीन पर उतरा ही नहीं, तो सरकारी खजाने से पैसा किसके खाते में गया? यह जांच का विषय है। जिम्मेदारों की चुप्पी भ्रष्टाचार की गवाही दे रही है।" > — आक्रोशित ग्रामीण बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं: बिना सामान लगे भुगतान की फाइल पर हस्ताक्षर किसने किए? क्या तकनीकी सहायकों और सचिवों ने मौके पर जाकर जांच की थी? क्या गायब हुआ सामान वापस आएगा या फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी? अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस 'कागजी जिम' के असली खिलाड़ियों पर क्या कार्रवाई करता है या फिर विकास के नाम पर यह लूट यूं ही जारी रहेगी।
- समाजवादी पार्टी के माननीय सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर देश में बढ़ती महंगाई और आलू किसानों की बदहाली को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। जब जाएंगे भाजपाई, तभी घटेगी महंगाई...1
- पिछले कई सालों से दुनिया में हो रहे लड़ाई झगड़ों से बहुत ही बुरी हालत दुनिया की होने वाली है अब सबको अपील करना चाहिए पूरी दुनिया को कि अब बहुत हो चुका अब शांति चाहिए जय हिंद 🇮🇳1
- भ्रष्टाचार की 'डिजिटल' सेंध: बांसी के फूलपुर में बिना काम किए मोबाइल से लग रही हाजिरी, सरकारी धन की खुली लूट सिद्धार्थनगर (बांसी)। उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन भले ही जीरो टॉलरेंस की नीति का दम भरते हों, लेकिन बांसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत फूलपुर में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ 'डिजिटल इंडिया' का एक ऐसा काला कारनामा सामने आया है, जहाँ मजदूर साइड पर पसीना बहाने के बजाय मोबाइल की स्क्रीन में 'कैद' होकर अपनी हाजिरी दर्ज करा रहे हैं। तकनीक का तमाशा: मोबाइल से मोबाइल की फोटो खींचकर हाजिरी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फूलपुर में सचिव और रोजगार सेवक की जुगलबंदी ने भ्रष्टाचार का नया 'टेक्निकल मॉडल' तैयार किया है। नियमतः मजदूरों को कार्यस्थल पर मौजूद रहकर फेस-कैप्चर (Face Capture) के जरिए उपस्थिति दर्ज करानी होती है, लेकिन यहाँ खेल ही निराला है। मास्टर रोल में दर्ज 49 मजदूरों की हाजिरी कथित तौर पर घर बैठे ही मोबाइल से मोबाइल के फोटो खींचकर लगाई जा रही है। जिओ-टैग (Geo-tag) फोटो में भी इस जालसाजी के निशान साफ देखे जा सकते हैं। बिना फावड़ा चले खातों में जा रहा है पैसा मामला सिर्फ़ हाजिरी तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत फूलपुर में कार्य कोड 3151011/LD/958486255824933467 (एमएसआर संख्या: 6691) के तहत 'वीरेन्द्र सिंह के खेत से भरवाडीह सड़क तक मिट्टी कार्य' के नाम पर सरकारी धन की निकासी की जा रही है। आरोप है कि धरातल पर बिना कोई कार्य किए, मनरेगा का पैसा मजदूरों के खातों में हस्तांतरित किया जाता है और निकासी होते ही इसका बंदरबांट कर लिया जाता है। डीसी मनरेगा की चुप्पी पर सवाल सचिव की 'मेहरबानी' और रोजगार सेवक की इस 'जादुई तकनीक' ने शासन की मंशा पर पानी फेर दिया है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर इतनी बड़ी धांधली डीसी मनरेगा और उच्चाधिकारियों की नजरों से कैसे बच रही है? क्या जिम्मेदारों को इस फर्जीवाड़े की भनक नहीं है, या फिर भ्रष्टाचार की यह जड़ें ऊपर तक जुड़ी हुई हैं? बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले की जांच कराकर दोषी सचिव और रोजगार सेवक पर कठोर कार्यवाही करेगा, या फिर फूलपुर में मनरेगा के धन की इसी तरह 'डिजिटल लूट' जारी रहेगी? रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी) वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज3
- Pramod Kumar Goswami. 09/03/20261
- संतकबीरनगर। पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी धनघटा अभयनाथ मिश्रा के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश पाण्डेय के नेतृत्व में वाद संख्या 711/2021 धारा 376/506 भाद0वि0 में फरार अभियुक्त आकाश पुत्र अशोक निवासी बेलराई थाना महुली जनपद संतकबीरनगर के विरुद्ध न्यायालय द्वारा जारी आदेश के अनुपालन में थाना महुली पुलिस द्वारा न्यायालय द्वारा जारी धारा 82 सीआरपीसी के अंतर्गत उद्घोषणा की कार्यवाही करते हुए पुलिस टीम द्वारा अभियुक्त के घर एवं ग्राम में पहुंचकर सार्वजनिक रूप से मुनादी कराई गई । इस दौरान ग्रामीणों को अवगत कराया गया कि उक्त अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष निर्धारित तिथि पर उपस्थित होना अनिवार्य है । यदि अभियुक्त निर्धारित समयावधि के भीतर न्यायालय में उपस्थित नहीं होता है तो उसके विरुद्ध अग्रिम वैधानिक कार्रवाई (कुर्की आदि) की जाएगी । थाना महुली पुलिस द्वारा यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में विधि सम्मत तरीके से की गई तथा संबंधित कार्यवाही की रिपोर्ट माननीय न्यायालय को प्रेषित की जा रही है ।1
- शिकायत है❗ 10 3.2026 ई0 यह समस्या ग्राम पंचायत भगवानपुर से जुड़ा हुआ है। ➡️ ग्राम पंचायत भगवानपुर ब्लॉक बघौली तहसील खलीलाबाद जनपद संत कबीर नगर उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आता है । 👉🏾 ग्राम पंचायत भगवानपुर के करमयनी गांव के किनारे से रेलवे लाइन का काम चल रहा है । अंबेडकर रोड के क्रॉसिंग पर रेलवे ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। रेलवे ब्रिज के निर्माण कार्य के कारण खुदाई से निकाली गई मिट्टी आजू बाजू में डाली गई है । यहां से रास्ता बनाया गया है। यह मिट्टी पूरा धूल बन गया है। ❌धूल में गड्ढे का पता नहीं चलता है, गाड़ियां आ सकती हैं मोटरसाइकिल की चलती है इस धूल भरे रास्ते के ऊपर हल्का-फुल्का कंक्रीट डालना चाहिए❗ जिससे धूल में गाड़ियां अटकें नहीं ❗मात्र 3 5 सेकंड के 50 सेकंड के रास्ते में पूरे धूल से आदमी भर जाता है । 🔻आदमी की हालत खराब हो जाती है, दमा से पीड़ित लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से लोगों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बनी हुई है। शासन प्रशासन को तत्काल इस पर संज्ञान में लेना चाहिए और इस पर कंक्रीट डाल देना चाहिए। 🔻यह सभी निर्माण कार्य ठेके के ऊपर चल रहे हैं इसके कारण ठेके वाले सुनते ही नहीं है। ठेकेदारों का मानना है कि हमें जितना कहा गया है,,हम उतना ही काम करेंगे ❓1
- Post by आज की आवाज1
- हम तो तमाम इंडिया से बाहर रह रहे भाइयों के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह स्वस्थ रहें और साथ ही भारत सरकार से विनम्र निवेदन है इसके बारे में बहुत ही गंभीरता से देखें और सोचे जय हिंद जय भारत🇮🇳1