असम में बाढ़ की भयानक स्तिथि बनी हुई हैं क्या सरकार के सभी वादे फैल हो रही हैं? 2021 में गृह मंत्री अमित शाह का यह वादा आज 2026 में असम की डूबती हकीकत पर सबसे बड़ा सवाल है। तारीखें बदल गईं, पर असम का दर्द नहीं बदला। आखिर कब तक खोखले वादों की कीमत जनता अपनी जान देकर चुकाएगी?🤔 असम में बाढ़ से हाहाकार मचा है। चराइदेव और शिवसागर समेत कई जिलों में 4.45 लाख से अधिक लोग संकट में हैं और इस सीजन में 68 मौतें हो चुकी हैं। लेकिन सबसे शर्मनाक बात यह है कि खुद मुख्यमंत्री के अनुसार 20% से 25% प्रभावित इलाके आज भी प्रशासनिक पहुँच से पूरी तरह बाहर हैं। करीब 80,000 लोग सुदूर गाँवों में छतों पर भूखे-प्यासे मदद का इंतज़ार कर रहे हैं। कटे हुए इलाकों में खाना गिराने के लिए इस्तेमाल किए गए ड्रोन्स फेल साबित हुए। आपदा प्रबंधन के बड़े-बड़े दावे ज़मीनी स्तर पर दम तोड़ रहे हैं। सरकार हर साल इसे 'प्राकृतिक और भौगोलिक चुनौती' बताकर पल्ला झाड़ लेती है, लेकिन सच यह है कि यह वार्षिक प्रशासनिक विफलता है। फरवरी 2026 की चुनावी रैलियों में इस वादे को अगले 5 साल के लिए फिर आगे बढ़ा दिया गया। असम को अब 'तारीख पर तारीख' वाले चुनावी भाषण नहीं, बल्कि स्थाई समाधान और जवाबदेही चाहिए!
असम में बाढ़ की भयानक स्तिथि बनी हुई हैं क्या सरकार के सभी वादे फैल हो रही हैं? 2021 में गृह मंत्री अमित शाह का यह वादा आज 2026 में असम की डूबती हकीकत पर सबसे बड़ा सवाल है। तारीखें बदल गईं, पर असम का दर्द नहीं बदला। आखिर कब तक खोखले वादों की कीमत जनता अपनी जान देकर चुकाएगी?🤔 असम में बाढ़ से हाहाकार मचा है। चराइदेव और शिवसागर समेत कई जिलों में 4.45 लाख से अधिक लोग संकट में हैं और इस सीजन में 68 मौतें हो चुकी हैं। लेकिन सबसे शर्मनाक बात यह है कि खुद मुख्यमंत्री के अनुसार 20% से 25% प्रभावित इलाके आज भी प्रशासनिक पहुँच से पूरी तरह बाहर हैं। करीब 80,000 लोग सुदूर गाँवों में छतों पर भूखे-प्यासे मदद का इंतज़ार कर रहे हैं। कटे हुए इलाकों में खाना गिराने के लिए इस्तेमाल किए गए ड्रोन्स फेल साबित हुए। आपदा प्रबंधन के बड़े-बड़े दावे ज़मीनी स्तर पर दम तोड़ रहे हैं। सरकार हर साल इसे 'प्राकृतिक और भौगोलिक चुनौती' बताकर पल्ला झाड़ लेती है, लेकिन सच यह है कि यह वार्षिक प्रशासनिक विफलता है। फरवरी 2026 की चुनावी रैलियों में इस वादे को अगले 5 साल के लिए फिर आगे बढ़ा दिया गया। असम को अब 'तारीख पर तारीख' वाले चुनावी भाषण नहीं, बल्कि स्थाई समाधान और जवाबदेही चाहिए!
- पीरपैंती विधानसभा के वर्तमान विधायक मुरारी पासवान के कार्यालय में पहुंचे ग्रामीण जनता1
- कुछ दिन पहले शर्मनाक परिस्थितियों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। लेकिन कल जब वे संसद पहुंचे तो BJP सांसदों ने उनका ऐसा स्वागत किया, मानों कोई सुपरस्टार आया हो। जब ये सब हो रहा था, तो महाराष्ट्र में एक परिवार पेपर लीक पीड़ित बेटी की आत्महत्या का शोक मना रहा था। आखिर सरकार को किस बात का गर्व है? जहां आंखों में शर्म होनी चाहिए, वहां फूल-माला से स्वागत किया जा रहा था। इस सबके बीच- PM मोदी ने एक नया शिक्षा मंत्री चुना, जिसने एक गर्भवती महिला के रेपिस्टों की रिहाई पर सहमति व्यक्त की थी। ऐसा करके PM मोदी ने देश की करोड़ों लड़कियों को क्या संदेश दिया? : *लोकसभा में कांग्रेस महासचिव एवं सांसद श्रीमती प्रियंका गांधी जी*1
- भगवंत मान का विपक्ष पर पलटवार, बोले- पंजाब में पेपर लीक नहीं हुआ1
- बांकीपुर चुनाव प्रचार में भाजपा और राजद का काफिला आमने-सामने, तेजस्वी की शेरनी ने बना दिया माहौल बांकीपुर चुनाव प्रचार में भाजपा और राजद का काफिला आमने-सामने, तेजस्वी की शेरनी ने बना दिया माहौल1
- अंग्रेजों का बनाया हुआ पुल अभी भी खड़ा है और आज का चोरों का बनाया हुआ हाईवे और पुल एकदम से दास जाता है जब इस देश में मुगलों के बाद अंग्रेजों का शासन आया तो उन्होंने बड़े-बड़े कारनामे क्या है जिसमें हावड़ा का ब्रिज आज भी नमूने के तौर पर खड़ा है मगर यह चोरों का सरकार में डेली कहीं ना कहीं ब्रिज गिरता है हाईवेधस्ता होजतहे1
- साहेबगंज एसपी अमीत सिंह ने किया कोटालपोखर थाना का निरिक्षण....1
- तेजस्वी यादव ने फिर छात्रों के लिए आवाज उठाई है जो भी छात्र अभी जैल में बंद हैं परसों तक रिहा नहीं किया तो हल्ला बोल आंदोलन करेंगे? बिहार सरकार ने छात्रों पर केस वापसी की महज़ प्रेस विज्ञप्ति जारी की है लेकिन Executive Order अभी तक जिला अधिकारियों को नहीं भेजा है जिससे उनके छूटने में कानूनी बाधा है। अगर छात्र विरोधी निकम्मी बिहार की एनडीए सरकार कल शाम 7 बजे तक छात्रों को रिहा नहीं करती है तो परसों सुबह हम “हल्ला बोल आंदोलन” कर छात्रों को रिहा करायेंगे।1
- *मुझे सरकार से सिर्फ इतना ही कहना है*👇 अपनी साख बचाइए, नीयत ठीक करिए, अकड़ का इलाज कीजिए और अपने वादों पर अमल कीजिए, क्योंकि हमने इस सरकार में बड़ी-बड़ी चोरियां देखी हैं। • चुनावों में वोट चोरी • राम मंदिर में चंदा चोरी • किसानों की जमीन की चोरी • उद्योगपतियों द्वारा देश की संपत्तियों की चोरी लेकिन सबसे बड़ी चोरी तब हुई, जब देश के युवाओं का भविष्य और उनके सपने चुराए गए। भविष्य और सपनों की चोरी किसी भी चोरी से बड़ी होती है। : *लोकसभा में कांग्रेस महासचिव एवं सांसद श्रीमती प्रियंका गांधी जी*1
- भागलपुर में मचा हड़कंप। ऊर्जा मंत्री के घर के पीछे गंगा का कहर! राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर खतरा, गंगा का कटाव बना आफत1