जिला प्रशासन के साथ मानव अधिकारों से जुड़े विषयों पर विस्तृत समीक्षा हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता में आयोग की टीम ने जींद का दौरा कर जिला प्रशासन के साथ मानव अधिकारों से जुड़े विषयों पर विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिला में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए। सरकारी विभागों के साथ-साथ आम नागरिक का कर्तव्य है कि वे मानव अधिकारों के संरक्षण में सहयोग करें। बैठक में जिले में मानव अधिकारों की स्थिति, कानून व्यवस्था, महिला एवं बाल संरक्षण, अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण, बंदियों के अधिकार तथा आमजन की शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। इस पर डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने आयोग की टीम को आश्वस्त किया कि मानव अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और आयोग द्वारा दिए गए सुझावों का अक्षरशः पालन की जाएगी। स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में आयोजित इस बैठक में उनके साथ आयोग के सदस्य कुलदीप जैन, दीप भाटिया, रजिस्ट्रार संजय कुमार खंडूजा, सहायक रजिस्ट्रार डॉ पुनीत अरोड़ा तथा पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह, डीडीपीओ संदीप शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक उपरांत आयोग की टीम ने जिला कारागार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बंदियों को उपलब्ध करवाई जा रही मूलभूत सुविधाओं जैसे स्वच्छ पेयजल, भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता व्यवस्था, आवासीय बैरकों की स्थिति, कानूनी सहायता एवं परामर्श सेवाओं की बारीकी से जांच की गई। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बंदियों के मानव अधिकारों की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि मानव अधिकारों की रक्षा एवं संवर्धन राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कारागार अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि बंदियों की शिकायतों का त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित करें तथा संवेदनशील मामलों में विशेष सतर्कता बरती जाए। आयोग के अध्यक्ष ललीत बत्रा ने स्पष्ट किया है कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार का केंद्र होता है। बंदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है। बंदी होने के बावजूद व्यक्ति अपने मूल मानवाधिकारों से वंचित नहीं होता और उसके साथ मानवीय व्यवहार अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना उसके साथ नही होनी चाहिए। जेल स्टाफ द्वारा मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था और नियमित निरीक्षण होना जरूरी है। आयोग की टीम ने कारागार में पंहुचकर महिला बंदियों से बातचीत करते हुए उनके अधिकारों के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने जेल प्रशासन के अधिकारियों को हिदायत दी कि इच्छुक महिला बंदी से उसकी शारिरीक अक्षमता अनुसार कार्य लिया जाए, ताकि उसके परिश्रम से मिलने वाली राशि का वह उपयोग कर सके। उन्होंने कारागार में बंद महिला व पुरूषों को राज्य सरकार की हिदायत अनुसार स्पेशल शिविर लगाकर पेंशन बनाने के लिए भी समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए, ताकि पात्र लोगों की पेंशन से उनके व उनके परिजनों को लाभ मिल सके। उन्होंने कारागार में महिलाओं को मिलने वाली ड्रेस पर संज्ञान लेते हुए जानकारी ली,इस पर जेल प्रशासन ने कहा कि वर्दी के लिए डिमांड मुख्यालय भेजी गई है। आयोग की टीम ने कहा कि महिला बंदियों के स्वास्थ्य की जांच महिला डाॅक्टरों द्वारा नियमित रूप से की जानी चाहिए। इसके अलावा भोजन की व्यवस्था, शौचालयों की साफ-सफाई, बिजली, पीने का पानी और महिलाओं को दी जाने वाली अन्य मूलभुत सुविधाओं बारे जानकारी ली। इसके बाद उन्होनंे महिलाओं के साथ वहां रह रहे छोटे बच्चों के लिए दी जाने वाले खिलोने, दूध तथा उनके रख-रखाव,पढाई लिखाई के बारे में जानकारी ली । इस पर डयूटी पर कार्यरत महिला कांउसर ने कहा कि बच्चों की नियमित रूप से देखभाल की जा रही हैं खेल-खेल में बच्चांे को पढाई भी करवाई जा रही है। मौके पर ही छोटे बच्चों ने हिन्दी व अंगे्रजी में कविता, गिनती का अध्यन कर अपनी काबिलियत का परिचय दिया। आयोग की टीम द्वारा रशोई घर, स्टोर,साफ-सफाई व्यवस्था,वीडियो क्रांफेंसिंग रूम, मंनोरंजन के लिए रेडियों म्युजिक की सुविधा,संगीत कक्ष, मेडिटेशन कक्ष,लाईब्रेरी ,वर्कशाॅप जैसी तमाम सुविधाओं की बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक बंदियों को उनकी इच्छा अनुसार कारपेंटर, वैल्डींग,बिजली मकैनिक व अन्य प्रकार की हाथ दस्तकारी का कार्य सिखाना चाहिए, ताकि उनका मन कार्य में लगने के साथ-साथ कारागार से निकलने के बाद वह आपनी आजिविका के लिए काम-धंधा शुरू कर सके। दौरे के दौरान टीम द्वारा वर्कशाप का निरीक्षण किया और बंदियों द्वारा बनाए गए लकडी व लोहे के फर्निचर व अन्य उपकरणों को भी देखा। इस पर टीम द्वारा उनकी सराहना करते हुए इस कार्य में और मन लगाकर कार्य करने की हिदायत दी। उन्होनंे डीएलएसए और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को हिदायत दी की कारागार में बंदियों के लिए फलैक्स चस्पा करें जिस पर उनके पूर्ण अधिकारों की जानकारी लिखी हो। इस दौरान उन्होंने कारागार के वार्ड में बंदियों की क्षमता अनुसार कमरों की संख्या की जांच की। उन्होंने जेल प्रशासन के अधिकारियों को कहा कि जितनी भी पैरोल पेंडिंग है उन सब के लिए नियमानुसार रिमांडर भिजवाएं। इस दौरान उनके साथ जेल अधीक्षक दीपक शर्मा,जींद के एसडीएम सत्यवान मान, डीडीपीओ संदीप भारद्वाज, समाज कल्याण विभाग के कर्मी मौजूद रहे। बाॅक्सः पिल्लूखेड़ा में सौरभ गर्ग की प्रतिमा पर की पुष्पांजलि अर्पित आयोग की टीम द्वारा शहीद सौरभ गर्ग के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके उन्हें नमन किया । टीम ने बताया कि जिला जेल के निरीक्षण के लिए आज वो यहाँ आए थे। निरीक्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण विषय भी सामने आया,सौरभ के परिजनों द्वारा स्वर्गीय सौरभ गर्ग को मरणोपरांत पुरस्कार प्रदान किये जाने की लगातार मंाग रखी गई है, जिस पर कमेटी द्वारा इसकी जांच के लिए संज्ञान लिया गया है। उन्होंने बताया कि 8 दिसंबर 2012 को उन्होंने अपने अद्वितीय साहस और त्याग का परिचय देते हुए 11 लोगों की जान बचाई थी। उनके इस बलिदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए। उनके परिवार द्वारा भी इस विषय में निरंतर प्रयास किए गए हैं। सरकार द्वारा उन्हें अनुदान राशि प्रदान की गई है तथा उनकी स्मृति में 5 लाख की लागत से सरकार द्वारा स्मारक का निर्माण भी करवाया गया है। विधानसभा में भी उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया था, जिससे स्पष्ट है कि उनके योगदान को मान्यता मिली है। परिवार की ओर से किसी प्रकार की देरी नहीं हुई। उन्होंने समय पर आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसे तत्कालीन उपायुक्त द्वारा उसी समय अनुशंसित भी कर दिया गया था। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर कुछ विलंब अवश्य हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनकी मरणोपरांत सम्मान की जो आवेदन प्रक्रिया है, उस पर कार्यवाही जारी है। हम प्रयासरत हैं कि उनके साहस और त्याग को पूर्ण और उचित पहचान मिल सके।
जिला प्रशासन के साथ मानव अधिकारों से जुड़े विषयों पर विस्तृत समीक्षा हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता में आयोग की टीम ने जींद का दौरा कर जिला प्रशासन के साथ मानव अधिकारों से जुड़े विषयों पर विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिला में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए। सरकारी विभागों के साथ-साथ आम नागरिक का कर्तव्य है कि वे मानव अधिकारों के संरक्षण में सहयोग करें। बैठक में जिले में मानव अधिकारों की स्थिति, कानून व्यवस्था, महिला एवं बाल संरक्षण, अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण, बंदियों के अधिकार तथा आमजन की शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। इस पर डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने आयोग की टीम को आश्वस्त किया कि मानव अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और आयोग द्वारा दिए गए सुझावों का अक्षरशः पालन की जाएगी। स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में आयोजित इस बैठक में उनके साथ आयोग के सदस्य कुलदीप जैन, दीप भाटिया, रजिस्ट्रार संजय कुमार खंडूजा, सहायक रजिस्ट्रार डॉ पुनीत अरोड़ा तथा पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह, डीडीपीओ संदीप शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक उपरांत आयोग की टीम ने जिला कारागार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बंदियों को उपलब्ध करवाई जा रही मूलभूत सुविधाओं जैसे स्वच्छ पेयजल, भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता व्यवस्था, आवासीय बैरकों की स्थिति, कानूनी सहायता एवं परामर्श सेवाओं की बारीकी से जांच की गई। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बंदियों के मानव अधिकारों की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि मानव अधिकारों की रक्षा एवं संवर्धन राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कारागार अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि बंदियों की शिकायतों का त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित करें तथा संवेदनशील मामलों में विशेष सतर्कता बरती जाए। आयोग के अध्यक्ष ललीत बत्रा ने स्पष्ट किया है कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार का केंद्र होता है। बंदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है। बंदी होने के बावजूद व्यक्ति अपने मूल मानवाधिकारों से वंचित नहीं
होता और उसके साथ मानवीय व्यवहार अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना उसके साथ नही होनी चाहिए। जेल स्टाफ द्वारा मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था और नियमित निरीक्षण होना जरूरी है। आयोग की टीम ने कारागार में पंहुचकर महिला बंदियों से बातचीत करते हुए उनके अधिकारों के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने जेल प्रशासन के अधिकारियों को हिदायत दी कि इच्छुक महिला बंदी से उसकी शारिरीक अक्षमता अनुसार कार्य लिया जाए, ताकि उसके परिश्रम से मिलने वाली राशि का वह उपयोग कर सके। उन्होंने कारागार में बंद महिला व पुरूषों को राज्य सरकार की हिदायत अनुसार स्पेशल शिविर लगाकर पेंशन बनाने के लिए भी समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए, ताकि पात्र लोगों की पेंशन से उनके व उनके परिजनों को लाभ मिल सके। उन्होंने कारागार में महिलाओं को मिलने वाली ड्रेस पर संज्ञान लेते हुए जानकारी ली,इस पर जेल प्रशासन ने कहा कि वर्दी के लिए डिमांड मुख्यालय भेजी गई है। आयोग की टीम ने कहा कि महिला बंदियों के स्वास्थ्य की जांच महिला डाॅक्टरों द्वारा नियमित रूप से की जानी चाहिए। इसके अलावा भोजन की व्यवस्था, शौचालयों की साफ-सफाई, बिजली, पीने का पानी और महिलाओं को दी जाने वाली अन्य मूलभुत सुविधाओं बारे जानकारी ली। इसके बाद उन्होनंे महिलाओं के साथ वहां रह रहे छोटे बच्चों के लिए दी जाने वाले खिलोने, दूध तथा उनके रख-रखाव,पढाई लिखाई के बारे में जानकारी ली । इस पर डयूटी पर कार्यरत महिला कांउसर ने कहा कि बच्चों की नियमित रूप से देखभाल की जा रही हैं खेल-खेल में बच्चांे को पढाई भी करवाई जा रही है। मौके पर ही छोटे बच्चों ने हिन्दी व अंगे्रजी में कविता, गिनती का अध्यन कर अपनी काबिलियत का परिचय दिया। आयोग की टीम द्वारा रशोई घर, स्टोर,साफ-सफाई व्यवस्था,वीडियो क्रांफेंसिंग रूम, मंनोरंजन के लिए रेडियों म्युजिक की सुविधा,संगीत कक्ष, मेडिटेशन कक्ष,लाईब्रेरी ,वर्कशाॅप जैसी तमाम सुविधाओं की बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक बंदियों को उनकी इच्छा अनुसार कारपेंटर, वैल्डींग,बिजली मकैनिक व अन्य प्रकार की हाथ दस्तकारी का कार्य सिखाना चाहिए, ताकि उनका मन कार्य में लगने के साथ-साथ कारागार से निकलने के बाद वह आपनी आजिविका के लिए काम-धंधा शुरू कर सके। दौरे के दौरान टीम द्वारा वर्कशाप का निरीक्षण किया
और बंदियों द्वारा बनाए गए लकडी व लोहे के फर्निचर व अन्य उपकरणों को भी देखा। इस पर टीम द्वारा उनकी सराहना करते हुए इस कार्य में और मन लगाकर कार्य करने की हिदायत दी। उन्होनंे डीएलएसए और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को हिदायत दी की कारागार में बंदियों के लिए फलैक्स चस्पा करें जिस पर उनके पूर्ण अधिकारों की जानकारी लिखी हो। इस दौरान उन्होंने कारागार के वार्ड में बंदियों की क्षमता अनुसार कमरों की संख्या की जांच की। उन्होंने जेल प्रशासन के अधिकारियों को कहा कि जितनी भी पैरोल पेंडिंग है उन सब के लिए नियमानुसार रिमांडर भिजवाएं। इस दौरान उनके साथ जेल अधीक्षक दीपक शर्मा,जींद के एसडीएम सत्यवान मान, डीडीपीओ संदीप भारद्वाज, समाज कल्याण विभाग के कर्मी मौजूद रहे। बाॅक्सः पिल्लूखेड़ा में सौरभ गर्ग की प्रतिमा पर की पुष्पांजलि अर्पित आयोग की टीम द्वारा शहीद सौरभ गर्ग के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके उन्हें नमन किया । टीम ने बताया कि जिला जेल के निरीक्षण के लिए आज वो यहाँ आए थे। निरीक्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण विषय भी सामने आया,सौरभ के परिजनों द्वारा स्वर्गीय सौरभ गर्ग को मरणोपरांत पुरस्कार प्रदान किये जाने की लगातार मंाग रखी गई है, जिस पर कमेटी द्वारा इसकी जांच के लिए संज्ञान लिया गया है। उन्होंने बताया कि 8 दिसंबर 2012 को उन्होंने अपने अद्वितीय साहस और त्याग का परिचय देते हुए 11 लोगों की जान बचाई थी। उनके इस बलिदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए। उनके परिवार द्वारा भी इस विषय में निरंतर प्रयास किए गए हैं। सरकार द्वारा उन्हें अनुदान राशि प्रदान की गई है तथा उनकी स्मृति में 5 लाख की लागत से सरकार द्वारा स्मारक का निर्माण भी करवाया गया है। विधानसभा में भी उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया था, जिससे स्पष्ट है कि उनके योगदान को मान्यता मिली है। परिवार की ओर से किसी प्रकार की देरी नहीं हुई। उन्होंने समय पर आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसे तत्कालीन उपायुक्त द्वारा उसी समय अनुशंसित भी कर दिया गया था। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर कुछ विलंब अवश्य हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनकी मरणोपरांत सम्मान की जो आवेदन प्रक्रिया है, उस पर कार्यवाही जारी है। हम प्रयासरत हैं कि उनके साहस और त्याग को पूर्ण और उचित पहचान मिल सके।
- बांगर की धरती पर सीएम नायब सिंह सैनी पहली बार राजनीति सभा को संबोधित करने आ रहे है। हाइवे स्थिति अतिरिक्त अनाज मंडी में विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री की अगुवाई में होने वाली धन्यवाद एवं उचाना विकास रैली में वो पहुंचेंगे। सीएम हेलिकॉप्टर से आएंगे जो सभा स्थल से कुछ दूरी पर उतरेगा। अतिरिक्त अनाज मंडी का जो शैड है वो सबसे बड़ा शैड है। यहां पर आने वालों के बैठने के लिए कुर्सियां अलग-अलग सेक्टर बना कर लगाई गई है। महिलाओंं, पुरूषों के बैठने के लिए अलग-अलग सेक्टर बनाए गए है। सभा स्थल पर बनाई तीन स्टेज मेन वीवीआईपी स्टेज होगी जहां सीएम नायब सिंह सैनी सहित प्रमुख लोग मौजूद रहेंगे। वीवीआई लोगों के लिए कुछ दूरी पर स्टेज बनाई गई है तो सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों के लिए अलग स्टेज बनाई गई है। सभा स्थल पर आने के लिए अलग-अलग बेरीगेटसों से लोगों को गुजरना होगा। मंडी के दो गेटों से एंटी होगी। वाहनों के लिए पार्किंग सभा स्थल के आस-पास बनाया गया है। सीएम को विभिन्न समाजों के लोग सम्मानित करेंगे। इस दिन अनेकों उद्घाटन एवं शिलान्यास भी होंगे। जनसभा के बाद सीएम आढ़तियों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भी गीता विद्या मंदिर स्कूल उचाना मंडी में आएंगे। पुलिस प्रशासन द्वारा हर जगह सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए है।1
- हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष ललित बत्रा ने शहीद सौरभ गर्ग की प्रतिमा पर अर्पित की पुष्पांजलि; मरणोपरांत सम्मान के लिए प्रक्रिया जारी पिल्लूखेड़ा (जींद), 17 फरवरी 2026: हरियाणा मानव अधिकार आयोग की टीम ने आज पिल्लूखेड़ा में शहीद सौरभ गर्ग के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और नमन किया। आयोग के अध्यक्ष ललित बत्रा ने इस मौके पर बताया कि शहीद सौरभ गर्ग के परिजनों की ओर से मरणोपरांत उचित पुरस्कार प्रदान करने की लगातार मांग की जा रही थी। आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया और जांच की।तत्कालीन उपायुक्त द्वारा इसकी अनुशंसा पहले ही की जा चुकी थी, जिसे केस बनाकर चंडीगढ़ भेजा गया था। प्रक्रिया के अनुसार यह मामला केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से अनुमति मिलने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कुछ विलंब हुआ, जिसके चलते सौरभ गर्ग के पिता ने मानव अधिकार आयोग में आवेदन दिया। आयोग की हिदायत पर स्मारक के रखरखाव के लिए माली, स्वीपर सहित आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति सरकार द्वारा की गई है।उल्लेखनीय है कि 8 दिसंबर 2012 को पिल्लूखेड़ा में गैस सिलेंडर रिसाव से लगी भीषण आग में फंसे 11 लोगों की जान बचाने के लिए सौरभ गर्ग ने अद्वितीय साहस और त्याग का परिचय दिया था। इस दौरान वे स्वयं शहीद हो गए। उनके इस बलिदान को सम्मान मिलना चाहिए। परिवार की ओर से निरंतर प्रयास किए गए हैं।सरकार द्वारा उनके परिवार को अनुदान राशि प्रदान की गई है और 5 लाख रुपये की लागत से स्मारक का निर्माण भी करवाया गया। विधानसभा में उनके सम्मान में दो मिनट का मौन भी रखा गया था, जो उनके योगदान की मान्यता दर्शाता है।आयोग के अध्यक्ष ललित बत्रा ने कहा कि मरणोपरांत सम्मान की वर्तमान आवेदन प्रक्रिया पर कार्यवाही जारी है। आयोग का प्रयास है कि सौरभ गर्ग के साहस और त्याग को पूर्ण एवं उचित पहचान मिल सके।1
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- जींद में आज से शुरू हुईं सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं जींद, 17 फरवरी 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं आज से पूरे देश में शुरू हो गई हैं। जींद शहर में भी इन परीक्षाओं की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रशासन ने नकल रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। जींद में कुल 16 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां लगभग 9 हजार छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं। परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक चलेंगी। प्रशासन की पैनी नजर परीक्षा पर बनी हुई है। सभी परीक्षा केंद्रों के बाहर धारा 163 (पूर्व में धारा 144 जैसी प्रतिबंधात्मक धारा) लागू कर दी गई है। केंद्रों के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि पर रोक लगाई जा सके। नकल और अनुचित साधनों को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों के आसपास सभी फोटोस्टेट की दुकानें बंद करवा दी गई हैं। इससे छात्रों को बाहर से कोई सामग्री लाने में मुश्किल हो और नकल की संभावना कम हो। सीबीएसई की ओर से पूरे देश में करीब 43 लाख से अधिक छात्र इन परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं, जिसमें जींद के छात्र भी शामिल हैं। छात्रों से अपील की गई है कि वे समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचें, एडमिट कार्ड साथ रखें और बोर्ड के दिशा-निर्देशों का पालन करें। सभी छात्रों को शुभकामनाएं! मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा दें, सफलता जरूर मिलेगी।1