गोरखपुर में बड़ा प्रशासनिक फैसला 16 कॉलोनियां नगर निगम को ट्रांसफर, 57.09 करोड़ की धनराशि भी जारी जे.बी.सिंह शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया। गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की गई 16 योजनाएं/कॉलोनियां, जो लंबे समय से हैंडओवर प्रक्रिया में अटकी थीं, अब आधिकारिक रूप से नगर निगम गोरखपुर को सौंप दी गईं। 57.09 करोड़ रुपये का बजट भी ट्रांसफर हैंडओवर के साथ ही प्राधिकरण ने 29 जनवरी 2026 को 57.09 करोड़ रुपये नगर निगम के कोष में जमा करा दिए थे। यह राशि नाली, सैम्पवेल, पेयजल आपूर्ति, नलकूप, वाटर लिफ्टिंग पंप, पथ प्रकाश व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग के वाहनों जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास व संचालन पर खर्च की जाएगी। नगर निगम इन कार्यों की निविदा व प्रगति की सूचना समय-समय पर प्राधिकरण को उपलब्ध कराएगा। गौतम विहार आवासीय योजना लेक व्यू अपार्टमेंट आवासीय योजना शास्त्रीपुरम विस्तार आवासीय योजना गोलघर व्यावसायिक कॉम्पलेक्स वसुंधरा इनक्लेव (प्रथम चरण) वसुंधरा इनक्लेव (द्वितीय चरण) वसुंधरा इनक्लेव (तृतीय चरण) लोहिया इनक्लेव (प्रथम, द्वितीय व तृतीय) वैशाली आवासीय योजना कॉर्पोरेट पार्क (कार्यालय उपयोग) यशोधरा कुंज आवासीय योजना बुद्ध विहार आवासीय योजना (पार्ट ए, बी, सी) आम्रपाली आवासीय योजना अमरावती निकुंज आवासीय योजना सिद्धार्थपुरम विस्तार आवासीय योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (राप्तीनगर विस्तार) नगर निगम के महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव की उपस्थिति में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आनंद वर्धन ने औपचारिक रूप से नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल को हैंडओवर दस्तावेज सौंपे। दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। बताया गया कि ये योजनाएं लंबे समय से हैंडओवर की प्रक्रिया में थीं। उपाध्यक्ष आनंद वर्धन ने संज्ञान लेकर प्रक्रिया को तेज कराया और आखिरकार आज यह प्रक्रिया पूरी हुई। अब इन कॉलोनियों की सफाई व्यवस्था डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन,स्ट्रीट लाइट जलापूर्ति,नालियों की देखरेख सीधे नगर निगम की जिम्मेदारी होगी। इससे नागरिकों को समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शहर के विकास को नई रफ्तार विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही एजेंसी के हाथ में रखरखाव आने से जवाबदेही बढ़ेगी और कामकाज में तेजी आएगी। 57 करोड़ की धनराशि से बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का रास्ता भी साफ हो गया है। गोरखपुर के हजारों परिवारों के लिए यह खबर राहत और उम्मीद दोनों लेकर आई है। अब देखना होगा कि नगर निगम इन योजनाओं में सुविधाओं को कितनी तेजी से जमीनी हकीकत में बदल पाता है।
गोरखपुर में बड़ा प्रशासनिक फैसला 16 कॉलोनियां नगर निगम को ट्रांसफर, 57.09 करोड़ की धनराशि भी जारी जे.बी.सिंह शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया। गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की गई 16 योजनाएं/कॉलोनियां, जो लंबे समय से हैंडओवर प्रक्रिया में अटकी थीं, अब आधिकारिक रूप से नगर निगम गोरखपुर को सौंप दी गईं। 57.09 करोड़ रुपये का बजट भी ट्रांसफर हैंडओवर के साथ ही प्राधिकरण ने 29 जनवरी 2026 को 57.09 करोड़ रुपये नगर निगम के कोष में जमा करा दिए थे। यह राशि नाली, सैम्पवेल, पेयजल आपूर्ति, नलकूप, वाटर लिफ्टिंग पंप, पथ प्रकाश व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग के वाहनों जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास व संचालन पर खर्च की जाएगी। नगर निगम इन कार्यों की निविदा व प्रगति की सूचना समय-समय पर प्राधिकरण को उपलब्ध कराएगा। गौतम विहार आवासीय योजना लेक व्यू अपार्टमेंट आवासीय योजना शास्त्रीपुरम विस्तार आवासीय योजना गोलघर व्यावसायिक कॉम्पलेक्स वसुंधरा इनक्लेव (प्रथम चरण) वसुंधरा इनक्लेव (द्वितीय चरण) वसुंधरा इनक्लेव (तृतीय चरण) लोहिया इनक्लेव (प्रथम, द्वितीय व तृतीय) वैशाली आवासीय योजना कॉर्पोरेट पार्क (कार्यालय उपयोग) यशोधरा कुंज आवासीय योजना बुद्ध विहार आवासीय योजना (पार्ट ए, बी, सी) आम्रपाली आवासीय योजना अमरावती निकुंज आवासीय योजना सिद्धार्थपुरम विस्तार आवासीय योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (राप्तीनगर विस्तार) नगर निगम के महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव की उपस्थिति में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आनंद वर्धन ने औपचारिक रूप से नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल को हैंडओवर दस्तावेज सौंपे। दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। बताया गया कि ये योजनाएं लंबे समय से हैंडओवर की प्रक्रिया में थीं। उपाध्यक्ष आनंद वर्धन ने संज्ञान लेकर प्रक्रिया को तेज कराया और आखिरकार आज यह प्रक्रिया पूरी हुई। अब इन कॉलोनियों की सफाई व्यवस्था डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन,स्ट्रीट लाइट जलापूर्ति,नालियों की देखरेख सीधे नगर निगम की जिम्मेदारी होगी। इससे नागरिकों को समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शहर के विकास को नई रफ्तार विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही एजेंसी के हाथ में रखरखाव आने से जवाबदेही बढ़ेगी और कामकाज में तेजी आएगी। 57 करोड़ की धनराशि से बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का रास्ता भी साफ हो गया है। गोरखपुर के हजारों परिवारों के लिए यह खबर राहत और उम्मीद दोनों लेकर आई है। अब देखना होगा कि नगर निगम इन योजनाओं में सुविधाओं को कितनी तेजी से जमीनी हकीकत में बदल पाता है।
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