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*🖤 ज़िंदगी का कड़वा सच 🖤* *आत्मा* उस दिन मर जाती है… जब *₹80,000* कमाने वाला सरकारी कर्मचारी रोज़ *₹300* कमाने वाले मज़दूर से *रिश्वत* माँगता है। *💔 जहाँ ज़रूरत को लूटा जाए,* वहाँ कानून नहीं, इंसानियत हार जाती है। ⚖️ पद बड़ा हो सकता है, *लेकिन चरित्र छोटा हो जाए* तो सम्मान शून्य हो जाता है। *📌 सच अक्सर कड़वा होता है,* *पर ज़रूरी होता है…* *--------------------------------* *❤️ Agree 🙅 Disagree*
Ehsan Raja
*🖤 ज़िंदगी का कड़वा सच 🖤* *आत्मा* उस दिन मर जाती है… जब *₹80,000* कमाने वाला सरकारी कर्मचारी रोज़ *₹300* कमाने वाले मज़दूर से *रिश्वत* माँगता है। *💔 जहाँ ज़रूरत को लूटा जाए,* वहाँ कानून नहीं, इंसानियत हार जाती है। ⚖️ पद बड़ा हो सकता है, *लेकिन चरित्र छोटा हो जाए* तो सम्मान शून्य हो जाता है। *📌 सच अक्सर कड़वा होता है,* *पर ज़रूरी होता है…* *--------------------------------* *❤️ Agree 🙅 Disagree*
- Ehsan Rajaओरमांझी, रांची, झारखंडhii7 hrs ago
- Ehsan Rajaओरमांझी, रांची, झारखंड👏7 hrs ago
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- अंबा प्रसाद के अडिग रुख के आगे झुका प्रशासन, जनसुनवाई रद्द रोशन लाल चौधरी और उनके नेता अडानी के पक्ष में, ग्रामीणों का संघर्ष खत्म होने के बाद 'बेचारे' बनकर क्रेडिट लूटने पहुँचे रोशन लाल - अंबा प्रसाद अडानी के छल और गुंडागर्दी पर भारी पड़ी गोंदलपुरा के जनता की एकजुटता - अंबा प्रसाद हजारीबाग (बड़कागांव) | बड़कागांव के गोंदलपुरा में मंगलवार को लोकतंत्र की जीत हुई और कॉर्पोरेट ताकतों को पीछे हटना पड़ा। पूर्व विधायक और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने इस जीत को बड़कागांव के रैयतों के स्वाभिमान की जीत बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अडानी कंपनी ने भाड़े के लोगों और गुंडों के दम पर जनसुनवाई को हाईजैक करने की कोशिश की थी, जिसे जनता ने खुद एकजुट होकर नाकाम कर दिया। "जब तक जनसुनवाई रद्द की चिट्ठी नहीं, तब तक अंबा यहाँ से हटेगी नहीं" जनसुनवाई स्थल पर रैयतों के स्वतः स्फूर्त विरोध को समर्थन देने पहुँचीं अंबा प्रसाद ने मोर्चा संभालते हुए प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने ग्रामीणों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि "सिर्फ विरोध दर्ज करना काफी नहीं है, हमें ठोस परिणाम चाहिए।" अंबा प्रसाद विरोध स्थल पर ही डट गईं और तमाम आला अधिकारियों से संपर्क कर स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी— "जब तक इस जनसुनवाई को रद्द करने की आधिकारिक चिट्ठी जारी नहीं होगी, मैं और मेरे लोग यहाँ से नहीं हटेंगे।" अंबा प्रसाद के इस अडिग रुख और जनता के भारी दबाव के कारण प्रशासन को अंततः घुटने टेकने पड़े और कुछ ही घंटों के भीतर जनसुनवाई रद्द करने का लिखित आदेश जारी किया गया। अडानी की गोद में बैठी पूरी बीजेपी अंबा प्रसाद का तीखा प्रहार अंबा प्रसाद ने भाजपा के दोहरे चरित्र और उनके नेताओं की मिलीभगत पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने उजागर किया कि कैसे भाजपा के तमाम बड़े नेता एक सुर में अडानी का बचाव कर रहे हैं। अंबा प्रसाद ने कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि— "आज भाजपा का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। एक तरफ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और बाबूलाल मरांडी बड़कागांव के रैयतों के खिलाफ और अडानी के पक्ष में सोशल मीडिया पर बयानबाजी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय विधायक रोशन लाल चौधरी भी उन्हीं के सुर में सुर मिलाते हुए अडानी के पक्षधर बने हुए हैं। इससे साफ है कि पूरी भाजपा अडानी की गोद में बैठी है।" अंबा प्रसाद ने तंज कसते हुए आगे कहा कि विचित्र बात तो यह है कि जो रोशन लाल चौधरी और उनके नेता अडानी के पक्ष में पोस्ट कर रहे हैं, वही संघर्ष खत्म होने के बाद 'बेचारे' बनकर क्रेडिट लूटने पहुँच गए। रोशन लाल जी, आपके नेता दिल्ली और रांची में बैठकर अडानी के लिए जमीन बिछा रहे हैं और आप यहाँ फोटो खिंचवाकर क्रेडिट लेने का नाटक कर रहे हैं। जनता सब जानती है कि कौन 'सेटिंग' में लगा है और कौन उनके हक के लिए लाठियां खाने को तैयार खड़ा है।" फर्जीवाड़े और हिंसा का पर्दाफाश अंबा प्रसाद ने खुलासा किया कि अडानी कंपनी ने दूसरे जिलों से लोगों को 2000-2000 रुपये देकर बुलाया था और नकाबपोश गुंडों से तोड़-फोड़ कराई ताकि रैयतों पर फर्जी केस दर्ज कराए जा सकें। लेकिन गोंडलपुरा की जागरूक जनता ने न सिर्फ उन फर्जी लोगों को खदेड़ा, बल्कि कंपनी के दलालों को भी आइना दिखा दिया। अंबा प्रसाद ने अंत में संकल्प दोहराया कि बड़कागांव की एक इंच जमीन भी किसी पूंजीपति को छल से लेने नहीं दी जाएगी। यह जीत उन हजारों ग्रामीणों के अटूट संघर्ष की है जिन्होंने अपनी मिट्टी के लिए आवाज बुलंद की।1
- 9 साल की बच्ची ने बच्चे को जन्म दिया है ! विज्ञान के हिसाब से तो पॉसिबल नहीं है। लेकिन अगर ये सच्ची बात है तो बहुत ही दर्दनाक और खौफनाक बात है। बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। अपना समाज और कितना विकृत होगा। क्या क्या देखना पड़ेगा। घर में उसके भाई जो की 11 साल का बताया जा रहा है उसने अपनी ही बहन जो की 9 साल की बताई जा रही उसे प्रेग्नेंट कर दिया। ये सब बच्चों में आ कहां से रहा है। आपको अपने बच्चों को संभालने की जरूरत है। जो पेरेंट्स अपने बच्चों को मोबाइल हाथ में देकर छोड़ देते हैं। और फोन में क्या नहीं आता है। इतनी अश्लीलता परोसी जा रही है। अब तो सोशल मीडिया ले अपने लोकल लोग भी व्यूज पर फॉलोअर्स के चक्कर में ये अश्लीलता परोस रहे हैं। बचा लिए सब अपने समाज को।1
- Post by Anisha Parveen1
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- *अंबा प्रसाद के अडिग रुख के आगे झुका प्रशासन, जनसुनवाई रद्द* *रोशन लाल चौधरी और उनके नेता अडानी के पक्ष में, ग्रामीणों का संघर्ष खत्म होने के बाद 'बेचारे' बनकर क्रेडिट लूटने पहुँचे रोशन लाल-अंबा* *अडानी के छल और गुंडागर्दी पर भारी पड़ी गोंदलपुरा के जनता की एकजुटता-अंबा प्रसाद* हजारीबाग (बड़कागांव): बड़कागांव के गोंदलपुरा में मंगलवार को लोकतंत्र की जीत हुई और कॉर्पोरेट ताकतों को पीछे हटना पड़ा। पूर्व विधायक और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने इस जीत को बड़कागांव के रैयतों के स्वाभिमान की जीत बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अडानी कंपनी ने भाड़े के लोगों और गुंडों के दम पर जनसुनवाई को हाईजैक करने की कोशिश की थी, जिसे जनता ने खुद एकजुट होकर नाकाम कर दिया। *"जब तक जनसुनवाई रद्द की चिट्ठी नहीं, तब तक अंबा यहाँ से हटेगी नहीं"* जनसुनवाई स्थल पर रैयतों के स्वतः स्फूर्त विरोध को समर्थन देने पहुँचीं अंबा प्रसाद ने मोर्चा संभालते हुए प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने ग्रामीणों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि "सिर्फ विरोध दर्ज करना काफी नहीं है, हमें ठोस परिणाम चाहिए।" अंबा प्रसाद विरोध स्थल पर ही डट गईं और तमाम आला अधिकारियों से संपर्क कर स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी— "जब तक इस जनसुनवाई को रद्द करने की आधिकारिक चिट्ठी जारी नहीं होगी, मैं और मेरे लोग यहाँ से नहीं हटेंगे।" अंबा प्रसाद के इस अडिग रुख और जनता के भारी दबाव के कारण प्रशासन को अंततः घुटने टेकने पड़े और कुछ ही घंटों के भीतर जनसुनवाई रद्द करने का लिखित आदेश जारी किया गया। *अडानी की गोद में बैठी पूरी BJP* अंबा प्रसाद का तीखा प्रहार अंबा प्रसाद ने भाजपा के दोहरे चरित्र और उनके नेताओं की मिलीभगत पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने उजागर किया कि कैसे भाजपा के तमाम बड़े नेता एक सुर में अडानी का बचाव कर रहे हैं। अंबा प्रसाद ने कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि— "आज भाजपा का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। एक तरफ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और बाबूलाल मरांडी बड़कागांव के रैयतों के खिलाफ और अडानी के पक्ष में सोशल मीडिया पर बयानबाजी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय विधायक रोशन लाल चौधरी भी उन्हीं के सुर में सुर मिलाते हुए अडानी के पक्षधर बने हुए हैं। इससे साफ है कि पूरी भाजपा अडानी की गोद में बैठी है।" अंबा प्रसाद ने तंज कसते हुए आगे कहा कि विचित्र बात तो यह है कि जो रोशन लाल चौधरी और उनके नेता अडानी के पक्ष में पोस्ट कर रहे हैं, वही संघर्ष खत्म होने के बाद 'बेचारे' बनकर क्रेडिट लूटने पहुँच गए। रोशन लाल जी, आपके नेता दिल्ली और रांची में बैठकर अडानी के लिए जमीन बिछा रहे हैं और आप यहाँ फोटो खिंचवाकर क्रेडिट लेने का नाटक कर रहे हैं। जनता सब जानती है कि कौन 'सेटिंग' में लगा है और कौन उनके हक के लिए लाठियां खाने को तैयार खड़ा है।" फर्जीवाड़े और हिंसा का पर्दाफाश अंबा प्रसाद ने खुलासा किया कि अडानी कंपनी ने दूसरे जिलों से लोगों को 2000-2000 रुपये देकर बुलाया था और नकाबपोश गुंडों से तोड़-फोड़ कराई ताकि रैयतों पर फर्जी केस दर्ज कराए जा सकें। लेकिन गोंडलपुरा की जागरूक जनता ने न सिर्फ उन फर्जी लोगों को खदेड़ा, बल्कि कंपनी के दलालों को भी आइना दिखा दिया। अंबा प्रसाद ने अंत में संकल्प दोहराया कि बड़कागांव की एक इंच जमीन भी किसी पूंजीपति को छल से लेने नहीं दी जाएगी। यह जीत उन हजारों ग्रामीणों के अटूट संघर्ष की है जिन्होंने अपनी मिट्टी के लिए आवाज बुलंद की।1