।। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ‘सामूहिक विवाह’: आशीर्वाद की जगह बेटियों को मिला सरकारी कुव्यवस्था का दंश।। बस्ती। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जब भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ती हैं, तो उसका मंजर जीआईसी इंटर कॉलेज ग्राउंड में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह जैसा होता है। जहाँ एक ओर गरीब बेटियों के हाथ पीले हो रहे थे, वहीं दूसरी ओर व्यवस्था की सड़ांध ने इस पवित्र आयोजन को बदइंतजामी का अखाड़ा बना दिया। सुरक्षा के दावों की खुली पोल: लुटेरों के हवाले रहा पंडाल आयोजन में सुरक्षा और व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों की हकीकत यह रही कि दर्जनों जोड़ों के मोबाइल और पर्स पार हो गए। हद तो तब हो गई जब बहादुरपुर ब्लॉक से आई एक महिला का पर्स गायब हो गया, जिसमें 4000 रुपये नकद, एटीएम, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज थे। हैरानी की बात यह है कि जहाँ भारी भीड़ और सरकारी तामझाम था, वहाँ लुटेरे बेखौफ होकर अपना काम कर रहे थे। एक जोड़े ने तो यहाँ तक बताया कि सिंदूरदान की रस्म के लिए रखा गया 'सिंघोरा' ही चोरी हो गया। जिस आयोजन में परंपराओं और भावनाओं का सम्मान होना चाहिए था, वहाँ विभागीय उदासीनता के कारण पीड़ित परिवार अपनी खुशियाँ छोड़ अपनी चोरी हुई पूंजी तलाश रहे थे। शाही दावत या कर्मचारियों की लूट? व्यवस्था की सबसे शर्मनाक तस्वीर तब सामने आई जब विभाग के कर्मचारी ही लाभार्थियों के हक पर डाका डालते नजर आए। आयोजन स्थल पर बंटने वाले फल और लड्डू गरीब परिवारों तक पहुंचने के बजाय, विभाग के कर्मचारी सरेआम अपने घरों को ले जाते देखे गए। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और विभाग के छोटे से लेकर बड़े कर्मचारी सरकारी सामान को निजी संपत्ति समझकर घर भरने लगें, तो व्यवस्था में चूक होना कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी लापरवाही है। बोर्ड की बड़ी लापरवाही, कौन लेगा जिम्मेदारी? यह पूरा आयोजन उत्तर प्रदेश अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत किया गया था, जिसकी लापरवाही अब जगजाहिर है। जीआईसी ग्राउंड की बदइंतजामी चीख-चीख कर कह रही है कि आयोजन के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। बजट ठिकाने लगाने के चक्कर में न तो सुरक्षा का ख्याल रखा गया और न ही आयोजन की शुचिता का। अगर सामूहिक विवाह जैसे संवेदनशील और पुनीत कार्य में भी भ्रष्टाचार और चोरी का बोलबाला है, तो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। क्या उच्चाधिकारी इन 'घरखोर' कर्मचारियों और लापरवाह जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जहमत उठाएंगे? रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी) वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज
।। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ‘सामूहिक विवाह’: आशीर्वाद की जगह बेटियों को मिला सरकारी कुव्यवस्था का दंश।। बस्ती। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जब भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ती हैं, तो उसका मंजर जीआईसी इंटर कॉलेज ग्राउंड में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह जैसा होता है। जहाँ एक ओर गरीब बेटियों के हाथ पीले हो रहे थे, वहीं दूसरी ओर व्यवस्था की सड़ांध ने इस पवित्र आयोजन को बदइंतजामी का अखाड़ा बना दिया। सुरक्षा के दावों की खुली पोल: लुटेरों के हवाले रहा पंडाल आयोजन में सुरक्षा और व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों की हकीकत यह रही कि दर्जनों जोड़ों के मोबाइल और पर्स पार हो गए। हद तो तब हो गई जब बहादुरपुर ब्लॉक से आई एक महिला का पर्स गायब हो गया, जिसमें 4000 रुपये नकद, एटीएम, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज थे। हैरानी की बात यह है कि जहाँ भारी भीड़ और सरकारी तामझाम था, वहाँ लुटेरे बेखौफ होकर अपना काम कर रहे थे। एक जोड़े ने तो यहाँ तक बताया कि सिंदूरदान की रस्म के लिए रखा गया 'सिंघोरा' ही चोरी हो गया। जिस आयोजन में परंपराओं और भावनाओं का सम्मान होना चाहिए था, वहाँ विभागीय उदासीनता के कारण पीड़ित परिवार अपनी खुशियाँ छोड़ अपनी चोरी हुई पूंजी तलाश रहे थे। शाही दावत या कर्मचारियों की लूट? व्यवस्था की सबसे शर्मनाक तस्वीर तब सामने आई जब विभाग के कर्मचारी ही लाभार्थियों के हक पर डाका डालते नजर आए। आयोजन स्थल पर बंटने वाले फल और लड्डू गरीब परिवारों तक पहुंचने के बजाय, विभाग के कर्मचारी सरेआम अपने घरों को ले जाते देखे गए। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और विभाग के छोटे से लेकर बड़े कर्मचारी सरकारी सामान को निजी संपत्ति समझकर घर भरने लगें, तो व्यवस्था में चूक होना कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी लापरवाही है। बोर्ड की बड़ी लापरवाही, कौन लेगा जिम्मेदारी? यह पूरा आयोजन उत्तर प्रदेश अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत किया गया था, जिसकी लापरवाही अब जगजाहिर है। जीआईसी ग्राउंड की बदइंतजामी चीख-चीख कर कह रही है कि आयोजन के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। बजट ठिकाने लगाने के चक्कर में न तो सुरक्षा का ख्याल रखा गया और न ही आयोजन की शुचिता का। अगर सामूहिक विवाह जैसे संवेदनशील और पुनीत कार्य में भी भ्रष्टाचार और चोरी का बोलबाला है, तो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। क्या उच्चाधिकारी इन 'घरखोर' कर्मचारियों और लापरवाह जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जहमत उठाएंगे? रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी) वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज
- अजीत मिश्रा (खोजी)बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश🤙9 hrs ago
- आकाशवाणी , 12 3 2026 ई0, ‼️दुर्घटनाओं को आमंत्रण देता रेलवे क्रॉसिंग‼️ 🔻यह क्षेत्र खलीलाबाद है। शहर खलीलाबाद है। नगर पालिका खलीलाबाद है। जैसा की स्पष्ट दिखाई दे रहा है । यह गोरखपुर से खलीलाबाद तथा खलीलाबाद से बस्ती की तरफ जाने वाली रेलवे लाइन है। इस रेलवे लाइन पर मोखलिसपुर की तरफ जाने वाले फ्लावर के नीचे के नीचे रेलवे ट्रैक खुला हुआ है । लाइन खुली हुई है। ओपन प्लेस है। जबकि पब्लिक को आने जाने के लिए अंडरग्राउंड / भुआरी मार्ग बनाया गया है। लेकिन रेलवे लाइन खुला रहने के कारण पब्लिक का आना-जाना हमेशा बना रहताहै। जो आने वाली गाड़ियों से दुर्घटनाओं को आमंत्रण देता है । रेलवे प्रशासन को चाहिए इस प क्रासिंग को बंद कर दें। बाढ़ लगाया जाए। शासन प्रशासन को ध्यान में लेना चाहिए तथा फ्लाईओवर के ऊपर से जाने वाले जो मार्ग है उनके साफ सफाई करवाए। वहां पर गंदगी बहुत है। रेलवे लाइन, रेलवे स्टेशन खलीलाबाद!नगर पालिका खलीलाबाद ! शहर खलीलाबाद ! मोखलिसपुर जाने वाले रोड का क्रॉसिंग मार्ग है। तहसील खलीलाबाद , जनपद संत कबीर नगर उत्तर प्रदेश।1
- धनघटा, संत कबीर नगर। संत कबीर नगर जिले के धनघटा थाना क्षेत्र के ग्राम करिया जोत निवासी किसान बलवंत कुमार पांडे द्वारा की गई मक्के की खेती इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब तीन बीघा खेत में उगाई गई मक्के की फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी है और उसकी गुणवत्ता भी काफी अच्छी बताई जा रही है। खेत में लगी मक्के की बालियां दानों से भरी हुई हैं, जिसे देखकर स्थानीय किसान भी इसकी सराहना कर रहे हैं। किसान बलवंत पांडे का कहना है कि मेहनत और सही समय पर सिंचाई-खाद के प्रयोग से मक्के की अच्छी पैदावार मिल सकती है। उन्होंने बताया कि इस बार फसल काफी अच्छी हुई है और अब यह बिक्री के लिए तैयार है। विशेषज्ञों के अनुसार मक्का न केवल किसानों के लिए लाभकारी फसल है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है। मक्का में फाइबर, विटामिन-बी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। इसके नियमित सेवन से दिल की सेहत बेहतर रहती है और शरीर को जरूरी पोषण भी मिलता है। ग्रामीणों का कहना है कि करिया जोत गांव में इस तरह की अच्छी फसल देखकर अन्य किसान भी मक्के की खेती के प्रति प्रेरित हो रहे हैं। किसान बलवंत पांडे की मेहनत से तैयार यह फसल अब क्षेत्र में किसानों के लिए एक उदाहरण बनती नजर आ रही है।1
- उनका वैवाहिक जीवन खुशियों, प्रेम और समृद्धि से भरा रहे। पूरे परिवार के लिए यह पल बहुत ही आनंददायक और भावुक रहा।1
- Post by APDP NEWS1
- Post by रवि चन्द्र पत्रकार1
- अम्बेडकरनगर जिलाधिकारी ने जनता से की अपील1
- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- Post by India news 37 ( वैभव सिंह ब्यूरो चीफ) अंबेडकर नगर1
- Post by रवि चन्द्र पत्रकार1