आज के दौर में जहां लोग अपनी सेहत के लिए जिम और डाइट पर हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं मेडिकल साइंस और स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक बेहतरीन और बिल्कुल मुफ्त उपाय बता रहे हैं: खुलकर हंसना। उनके मुताबिक, "हंसना ही सबसे बेहतरीन दवा है" और मुस्कुराहट व ठहाके सबसे प्रभावी इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में उभरे हैं, जिससे सुबह-शाम गोलियां खाने की ज़रूरत कम हो सकती है। हंसने के कई वैज्ञानिक लाभ बताए गए हैं। यह तनाव को दूर करने में मदद करता है, क्योंकि खुलकर हंसने से शरीर में कोर्टिसोल (तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन) का स्तर तेजी से गिरता है और एंडोर्फिन (हैप्पी हार्मोन) का स्राव होता है। दिल की सेहत के लिए भी यह एक सुरक्षा कवच है, क्योंकि हंसने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। इसके अलावा, हंसी एक प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में भी काम करती है; एक जोरदार ठहाका शरीर के प्राकृतिक दर्द निवारक तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे हल्के-फुल्के बदन दर्द में तत्काल राहत मिल सकती है। हंसने से चेहरे की मांसपेशियों का भी अच्छा व्यायाम होता है, जिससे बिना किसी महंगी क्रीम के चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। देशभर के पार्कों में अब लाफ्टर क्लब का क्रेज बढ़ रहा है, जहां लोग योग के साथ-साथ ग्रुप बनाकर बिना किसी खास वजह के भी हंसने का अभ्यास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बनावटी हंसी भी शरीर को असली हंसी जैसे ही फायदे पहुंचाती है, क्योंकि दिमाग दोनों में फर्क नहीं कर पाता। एक महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है कि "जिंदगी में मुश्किलें चाहे जितनी हों, उनके मुंह पर एक करारा ठहाका मारिए। हंसने से मुश्किलें आसान तो नहीं होंगी, लेकिन उन्हें झेलने की ताकत दोगुनी जरूर हो जाएगी।" यह संदेश लोगों को कंजूसी छोड़कर खुद भी हंसने और दूसरों को भी हंसाने के लिए प्रेरित करता है, यह याद दिलाते हुए कि तंदुरुस्ती का रास्ता महंगी जिम मशीनों से नहीं, बल्कि होंठों की मुस्कान से होकर गुजरता है। इस पर एक व्यंगात्मक टिप्पणी भी है कि हंसने पर कोई जीएसटी नहीं लगता, इसलिए बेझिझक मुस्कुराएं और दवाइयां घटाएं।
आज के दौर में जहां लोग अपनी सेहत के लिए जिम और डाइट पर हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं मेडिकल साइंस और स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक बेहतरीन और बिल्कुल मुफ्त उपाय बता रहे हैं: खुलकर हंसना। उनके मुताबिक, "हंसना ही सबसे बेहतरीन दवा है" और मुस्कुराहट व ठहाके सबसे प्रभावी इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में उभरे हैं, जिससे सुबह-शाम गोलियां खाने की ज़रूरत कम हो सकती है। हंसने के कई वैज्ञानिक लाभ बताए गए हैं। यह तनाव को दूर करने में मदद करता है, क्योंकि खुलकर हंसने से शरीर में कोर्टिसोल (तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन) का स्तर तेजी से गिरता है और एंडोर्फिन (हैप्पी हार्मोन) का स्राव होता है। दिल की सेहत के लिए भी यह एक सुरक्षा कवच है, क्योंकि हंसने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। इसके अलावा, हंसी एक प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में भी काम करती है; एक जोरदार ठहाका शरीर के प्राकृतिक दर्द निवारक तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे हल्के-फुल्के बदन दर्द में तत्काल राहत मिल सकती है। हंसने से चेहरे की मांसपेशियों का भी अच्छा व्यायाम होता है, जिससे बिना किसी महंगी क्रीम के चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। देशभर के पार्कों में अब लाफ्टर क्लब का क्रेज बढ़ रहा है, जहां लोग योग के साथ-साथ ग्रुप बनाकर बिना किसी खास वजह के भी हंसने का अभ्यास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बनावटी हंसी भी शरीर को असली हंसी जैसे ही फायदे पहुंचाती है, क्योंकि दिमाग दोनों में फर्क नहीं कर पाता। एक महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है कि "जिंदगी में मुश्किलें चाहे जितनी हों, उनके मुंह पर एक करारा ठहाका मारिए। हंसने से मुश्किलें आसान तो नहीं होंगी, लेकिन उन्हें झेलने की ताकत दोगुनी जरूर हो जाएगी।" यह संदेश लोगों को कंजूसी छोड़कर खुद भी हंसने और दूसरों को भी हंसाने के लिए प्रेरित करता है, यह याद दिलाते हुए कि तंदुरुस्ती का रास्ता महंगी जिम मशीनों से नहीं, बल्कि होंठों की मुस्कान से होकर गुजरता है। इस पर एक व्यंगात्मक टिप्पणी भी है कि हंसने पर कोई जीएसटी नहीं लगता, इसलिए बेझिझक मुस्कुराएं और दवाइयां घटाएं।
- लंभुआ विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मतदाताओं के गोपनीय निर्वाचन संबंधी अभिलेख, जिनमें फॉर्म 6 जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ शामिल हैं, सड़क किनारे पाए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। इस घटना को लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक बताया जा रहा है। इस मामले पर समाजवादी नेता और शिक्षक श्यामलाल निषाद ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने घोषणा की है कि वे लोकतंत्र को बचाने के लिए सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। लंभुआ में श्यामलाल निषाद की इस बाइट को ब्रेकिंग न्यूज़ के तौर पर दिखाया जा रहा है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।1
- कटका क्लब सामाजिक संस्था ने गुप्तारगंज स्थित गायत्री मंदिर परिसर में बिहार के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी की स्मृति में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने भाग लेकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की, साथ ही दो मिनट का मौन रखकर सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर कटका क्लब के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ऋषभदेव शुक्ला, अध्यक्ष डॉ. सौरभ मिश्र 'विनम्र', ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि त्रिनेत्र पांडेय, और भाजपा नेता प्रदीप मिश्र 'सरकार' सहित अनेक लोगों ने भरत तिवारी के सामाजिक योगदान को याद किया। सभी उपस्थित जनों ने उनके आदर्शों पर चलने का दृढ़ संकल्प भी लिया।1
- बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के योग अभ्यास के दौरान एक मज़ेदार वाकया सामने आया है। योग करते समय निशांत कुमार दाएँ-बाएँ की क्रियाओं के चक्कर में पूरी तरह उलझ गए, जिसके परिणामस्वरूप उनका पूरा योग सत्र गड़बड़ा गया और वह सही से अभ्यास नहीं कर पाए।1
- लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र-190 में रविवार को विधायक सीताराम वर्मा ने हनुमानगंज से शम्भूगंज जाने वाले संपर्क मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का विधिवत शुभारंभ किया। मुरारपुर स्थित धर्मशाला शिव मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में इस परियोजना का शिलान्यास किया गया। लोक निर्माण विभाग खंड-3 द्वारा कराए जाने वाले इस कार्य के तहत, हनुमानगंज से शम्भूगंज तक लगभग 6.80 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन संस्था द्वारा ₹13.63 करोड़ (1363.33 लाख रुपये) की कुल लागत से किया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने के लिए पांच से छह माह का समय निर्धारित किया गया है। इस सड़क के निर्माण से क्षेत्र के हजारों लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पहले जहां शम्भूगंज से राष्ट्रीय राजमार्ग-731 तक पहुंचने में लगभग आधा घंटा लगता था, वहीं अब यह दूरी महज आठ मिनट में तय की जा सकेगी, जिससे लखनऊ सहित अन्य प्रमुख स्थानों के लिए यात्रा और अधिक सुगम हो जाएगी। निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी जूनियर इंजीनियर राकेश यादव और रामजी द्वारा की जाएगी। इस उद्घाटन कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने सड़क निर्माण कार्य शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।3
- अयोध्या जिले के बीकापुर तहसील अंतर्गत ग्राम सभा जोहन मिश्रा का पुरवा के निवासी राजेश की पत्नी के साथ 'दबंग आनंद मिश्रा' के बेटे दिनेश मिश्रा ने मोबाइल छीनने का प्रयास किया। इसी दौरान दिनेश मिश्रा ने राजेश के बेटे अभिनंदन का पैर तोड़ने की धमकी भी दी, जो एक वीडियो में साफ तौर पर सुनाई दे रही है।1
- अयोध्या के जाना बाजार खजूरीपुर गाँव में हैदरगंज केलालाल खां स्थित 33/11 केवीए उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले तारुन फीडर की घोर लापरवाही सामने आई है। यहाँ घरों के दरवाजों पर पिछले कई दिनों से लटक रहे हाई वोल्टेज बिजली के तार किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे रहे थे, और रविवार को यह लापरवाही उस समय बड़े हादसे में बदल जाती जब एक मासूम बच्चा इन तारों की चपेट में आ गया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद एक पड़ोसी ने तत्परता और सूझबूझ दिखाते हुए बच्चे की जान बचा ली। गौरतलब है कि इन्हीं जर्जर तारों की चपेट में आकर इससे पहले दो बेजुबान पशुओं की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है, जिसके बाद से स्थानीय उपभोक्ताओं और ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। स्थानीय ग्रामीणों और मीडिया कर्मी दुर्गा सिंह ने इस जानलेवा समस्या को लेकर दुर्घटना से पूर्व ही संबंधित उपकेंद्र के अधिशाषी अभियंता डी. सी. भारती से सीधे बात की थी। बातचीत के दौरान उनसे जर्जर केबल बदलने और विद्युत लाइन को तुरंत दुरुस्त करने की मांग की गई थी, और अधिकारी को यह भी अवगत कराया गया था कि इन्हीं टूटे व लटकते तारों में उतरे करंट की चपेट में आने से दो कुत्तों की मौत हो चुकी है। शिकायत किए जाने पर अधिशाषी अभियंता डी. सी. भारती ने आश्वासन दिया था कि वे संविदा कर्मियों से बात कर तुरंत समस्या का समाधान करवाएंगे और इसकी जानकारी वापस देंगे। हालाँकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर न तो कोई जवाब मिला और न ही धरातल पर कोई टीम काम करने पहुँची। अधिकारियों की इस टालमटोल वाली नीति के कारण आज एक मासूम की जान जाते-जाते बची है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन जानलेवा तारों को नहीं बदला गया, तो वे उपकेंद्र का घेराव कर उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।1
- देशभर में गर्मी से राहत दिलाने वाला मानसून इस बार खुद ही 'बीमार' दिख रहा है, जिसने मौसम वैज्ञानिकों और किसानों की चिंता को बहुत बढ़ा दिया है। केरल में 4 जून को तीन दिन की देरी से दस्तक देने के बाद से मानसून की रफ्तार पर ऐसा ब्रेक लगा है कि अब पूरे देश में सूखे का संकट गहराने लगा है। पिछले तेरह दिनों से मानसून बेहद कमजोर बना हुआ है और आगे नहीं बढ़ पा रहा है, जिससे हाहाकार की स्थिति है। आंकड़ों के अनुसार, 1 से 17 जून के बीच देश में सामान्य से 38% कम बारिश दर्ज की गई है। आमतौर पर 15 जून तक देश के आधे हिस्से में अच्छी बारिश शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उलट है, जिससे जमीन सूखी पड़ रही है और जलाशय खाली हो रहे हैं, जो एक बड़े संकट का संकेत है। मानसून के इस तरह अटकने और कमजोर पड़ने के पीछे मौसम के पाँच बड़े सिस्टमों को जिम्मेदार माना जा रहा है। इन प्रणालियों के सक्रिय न होने या कमजोर पड़ने की वजह से मानसूनी हवाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, जिससे देश के बड़े हिस्से में उमस और सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस भीषण गर्मी और सूखे से कब राहत मिलेगी, और क्या ये पाँच सिस्टम दोबारा सक्रिय होकर देश को भिगोएंगे या किसानों को इस बार सूखे की मार झेलनी पड़ेगी।1
- लम्भुआ, सुल्तानपुर में भारत निर्वाचन आयोग के मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 की भारी लापरवाही का मामला सामने आया है। लम्भुआ कस्बे के दियरा रोड स्थित हाइवे किनारे झाड़ियों में बड़ी संख्या में भरे हुए फॉर्म-6, जिनमें आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की छायाप्रति भी लगी थी, फेंके हुए मिले। स्थानीय लोगों ने बताया कि ये बरामद फॉर्म लम्भुआ कस्बे के गोसाईं का पूरा (गांधी नगर) क्षेत्र के मतदाताओं के आवेदन थे। सूचना मिलने पर पुलिस और राजस्व विभाग की टीम, जिसमें लेखपाल ब्रजेश उपाध्याय, बलराम सिंह और रिंकू पाल शामिल थे, मौके पर पहुँची और कागज़ातों को अपने कब्जे में लिया। इसी बीच मौके पर पहुँचे समाजवादी पार्टी के नेता वंशराज यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि फेंके गए फॉर्म-6 में अधिकतर एससी, एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी समुदाय के मतदाताओं के आवेदन शामिल हैं। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इन फॉर्मों में नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर जैसे संवेदनशील डेटा होते हैं, और इस तरह खुले में इनके फेंके जाने से डेटा के दुरुपयोग का खतरा काफी बढ़ गया है। निर्वाचन आयोग के प्रोटोकॉल के अनुसार, मतदाता संबंधी दस्तावेजों का निस्तारण एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। खबर लिखे जाने तक तहसील या निर्वाचन कार्यालय से कोई आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हो सका था। हालांकि, सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि विभाग ने इस मामले का संज्ञान लिया है और जांच शुरू कर दी है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि क्या इस संवेदनशील मामले पर वाकई दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, या इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।2
- सामाजिक कार्यकर्ता जज सिंह अन्ना ने जौनपुर के जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर बरसठी स्थित जयरामपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को तत्काल पूर्ण रूप से संचालित करने की मांग उठाई है। उन्होंने बताया कि यह अस्पताल लगभग 20 वर्षों से उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार रहा है, जिसे उनके लगातार प्रयासों से मरम्मत कराकर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पुनः तैयार किया गया है। हालांकि, आवश्यक स्टाफ और उपकरणों की कमी के कारण अभी तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। अन्ना ने जिलाधिकारी से अस्पताल में तत्काल एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्नीशियन (एलटी), एक वार्ड बॉय, एक चपरासी और एक चौकीदार की नियुक्ति करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने आवश्यक चिकित्सा उपकरण, बेड और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराकर अस्पताल को जनता के लिए जल्द से जल्द शुरू करने पर जोर दिया। यह भी बताया गया कि जयरामपुर पीएचसी बरसठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के अंतर्गत आता है और यहां हर रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेला भी आयोजित होता है। अस्पताल परिसर में आवासीय सुविधा होने के कारण चिकित्सकीय स्टाफ की तैनाती में कोई कठिनाई नहीं होगी। ज्ञापन में अन्ना ने यह भी उल्लेख किया कि जयरामपुर पीएचसी पहले एक छोटे से 10x10 फुट के कमरे में संचालित की जा रही थी, जिसे अब बंद कर दिया गया है और वहां कार्यरत कर्मचारियों का स्थानांतरण हो चुका है। उन्होंने संबंधित व्यवस्थाओं में हुई अनियमितताओं और दवा वितरण से जुड़े कथित घोटाले की जांच कराने की भी मांग की है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को फोन पर आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित पत्र भेजा जा रहा है और जयरामपुर पीएचसी को जल्द से जल्द संचालित करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त, जज सिंह अन्ना ने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर, सीएमओ की अनुपस्थिति में डिप्टी सीएमओ डॉ. प्रभात को भी ज्ञापन सौंपा और अस्पताल के शीघ्र संचालन की मांग दोहराई। अन्ना ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर जयरामपुर पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं की जाती हैं, तो वे क्षेत्रीय जनता के साथ अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी इस अस्पताल के संचालन की प्रतीक्षा कर रही है और स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही देरी जनहित के साथ अन्याय है। उन्होंने प्रशासन से जनहित को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द अस्पताल को पूर्ण सुविधाओं के साथ शुरू कराने की अपील की है।1