यह पोस्ट भक्ति, ज्ञानवर्धक विचारों और स्वास्थ्य सुझावों का एक संग्रह प्रस्तुत करती है, जिसकी शुरुआत भगवान कृष्ण के नाम का जाप करने और हमेशा प्रसन्न रहने के आह्वान से होती है, जिसमें सभी कृष्ण भक्तों को प्रणाम किया गया है। इसमें श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी और हे नाथ नारायण वासुदेवाय का स्मरण किया गया है। पोस्ट में दिव्य उपदेश जारी रखते हुए कहा गया है कि सच्ची दिव्यता केवल शक्तिशाली होने में नहीं, बल्कि दूसरों में शक्ति जागृत करने में है। कोई व्यक्ति तब तक शक्तिशाली नहीं हो सकता जब तक वह दूसरों के हित में न हो, और उसकी शक्ति का परिचय दूसरों को दिव्य बनाने में मिलता है। प्रभात चिंतन में बताया गया है कि विनम्रता से सीखने वाला हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का मार्ग पा लेता है। कागज, कपड़े, लकड़ी या लोहे के टुकड़े करना सरल है, लेकिन मन में रहे अहंकार के टुकड़े करना सबसे कठिन है। इसमें यह भी कहा गया है कि जीवन का दूसरा नाम परिवर्तन है, जिसे अपनाना सीखना होगा, चाहे वह परिवर्तन स्वयं में हो, रिश्तों में हो, काम में हो या संसार में हो। साथ ही, वैचारिक मतभेद होने पर भी उम्र का लिहाज और शब्दों की मर्यादा बनाए रखने की सीख दी गई है। इसके बाद "जय श्री राधे कृष्ण" और "शुभ प्रभात" कहकर शुभकामनाएं दी गई हैं। पोस्ट में जीवन की नश्वरता और गोविंद की निरंतर भक्ति पर बल दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि अंग गल जाने, बाल पक जाने, दांत न रहने और बूढ़ा होने पर भी आशा साथ नहीं छोड़ती। इसलिए, निरंतर गोविंद का ही भजन करने की सलाह दी गई है, "हरिःशरणम्!" का कई बार जाप किया गया है। भगवद्गीता ऐप के अध्याय 3, श्लोक 40 का अनुवाद और तात्पर्य भी इसमें शामिल है। श्लोक कहता है कि इंद्रियाँ, मन और बुद्धि काम (कामना) के निवासस्थान हैं, और इनके द्वारा यह काम जीवात्मा के वास्तविक ज्ञान को ढक कर उसे मोहित कर लेता है। तात्पर्य में भगवान कृष्ण द्वारा काम के सामरिक स्थानों का संकेत दिया गया है: मन समस्त इंद्रियों के क्रियाकलापों का केंद्रबिंदु है, और इंद्रिय विषयों के संबंध में सुनने पर यह इंद्रियतृप्ति के भावों का आधार बन जाता है, जिससे मन और इंद्रियाँ काम की शरणस्थली बन जाते हैं। इसके बाद बुद्धि ऐसी कामपूर्ण रुचियों की राजधानी बनती है, जिससे आत्मा प्रभावित होकर अहंकार उत्पन्न करता है और पदार्थ तथा मन-इंद्रियों से अपना तादात्म्य कर लेता है। आत्मा को भौतिक इंद्रियों का भोग करने की लत पड़ जाती है, जिसे वह वास्तविक सुख मान बैठता है। श्रीमद्भागवत (10.84.13) के श्लोक का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें त्रिधातु निर्मित शरीर को आत्मस्वरूप मानने वाले, देह के विकारों को स्वजन समझने वाले, जन्मभूमि को पूज्य मानने वाले और तीर्थयात्रा केवल स्नान के लिए करने वाले व्यक्ति को गधा या बैल के समान बताया गया है। इसके अलावा, "समय का महत्व" शीर्षक से एक प्रेरक कहानी प्रस्तुत की गई है। इसमें एक भारतीय छात्र के अमेरिका में उच्च शिक्षा के दौरान समय की पाबंदी सीखने के अनुभव का वर्णन है। शिक्षक द्वारा बार-बार समय पर न आने के लिए टोकने पर, छात्र ने पहले देर से आना छोड़ा और फिर पंद्रह मिनट पहले ही विद्यालय पहुँच गया। शिक्षक ने तब समझाया कि दो-चार मिनट देर से आना जितना बुरा है, उतना ही पंद्रह मिनट पहले आकर फाटक के बाहर खड़े रहना भी क्योंकि उन मिनटों का उपयोग अध्ययन में किया जा सकता था। इस प्रकार, अमेरिकी अध्यापक ने भारतीय छात्र को समय के सही महत्व का ज्ञान कराया। अंत में, दूध के साथ शहद के गजब के फायदे बताए गए हैं, जो 5 बीमारियों को दूर करने में सहायक हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि यह शारीरिक और मानसिक क्षमताओं को बढ़ाता है, नींद न आने की समस्या में सुधार करता है, पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है, कब्ज से राहत दिलाता है, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, तनाव दूर करता है और प्रजनन क्षमता व शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि करता है। पोस्ट का समापन "प्रेम से बोलो राधे राधे" के साथ होता है।
यह पोस्ट भक्ति, ज्ञानवर्धक विचारों और स्वास्थ्य सुझावों का एक संग्रह प्रस्तुत करती है, जिसकी शुरुआत भगवान कृष्ण के नाम का जाप करने और हमेशा प्रसन्न रहने के आह्वान से होती है, जिसमें सभी कृष्ण भक्तों को प्रणाम किया गया है। इसमें श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी और हे नाथ नारायण वासुदेवाय का स्मरण किया गया है। पोस्ट में दिव्य उपदेश जारी रखते हुए कहा गया है कि सच्ची दिव्यता केवल शक्तिशाली होने में नहीं, बल्कि दूसरों में शक्ति जागृत करने में है। कोई व्यक्ति तब तक शक्तिशाली नहीं हो सकता जब तक वह दूसरों के हित में न हो, और उसकी शक्ति का परिचय दूसरों को दिव्य बनाने में मिलता है। प्रभात चिंतन में बताया गया है कि विनम्रता से सीखने वाला हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का मार्ग पा लेता है। कागज, कपड़े, लकड़ी या लोहे के टुकड़े करना सरल है, लेकिन मन में रहे अहंकार के टुकड़े करना सबसे कठिन है। इसमें यह भी कहा गया है कि जीवन का दूसरा नाम परिवर्तन है, जिसे अपनाना सीखना होगा, चाहे वह परिवर्तन स्वयं में हो, रिश्तों में हो, काम में हो या संसार में हो। साथ ही, वैचारिक मतभेद होने पर भी उम्र का लिहाज और शब्दों की मर्यादा बनाए रखने की सीख दी गई है। इसके बाद "जय श्री राधे कृष्ण" और "शुभ प्रभात" कहकर शुभकामनाएं दी गई हैं। पोस्ट में जीवन की नश्वरता और गोविंद की निरंतर भक्ति पर बल दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि अंग गल जाने, बाल पक जाने, दांत न रहने और बूढ़ा होने पर भी आशा साथ नहीं छोड़ती। इसलिए, निरंतर गोविंद का ही भजन करने की सलाह दी गई है, "हरिःशरणम्!" का कई बार जाप किया गया है। भगवद्गीता ऐप के अध्याय 3, श्लोक 40 का अनुवाद और तात्पर्य भी इसमें शामिल है। श्लोक कहता है कि इंद्रियाँ, मन और बुद्धि काम (कामना) के निवासस्थान हैं, और इनके द्वारा यह काम जीवात्मा के वास्तविक ज्ञान को ढक कर उसे मोहित कर लेता है। तात्पर्य में भगवान कृष्ण द्वारा काम के सामरिक स्थानों का संकेत दिया गया है: मन समस्त इंद्रियों के क्रियाकलापों का केंद्रबिंदु है, और इंद्रिय विषयों के संबंध में सुनने पर यह इंद्रियतृप्ति के भावों का आधार बन जाता है, जिससे मन और इंद्रियाँ काम की शरणस्थली बन जाते हैं। इसके बाद बुद्धि ऐसी कामपूर्ण रुचियों की राजधानी बनती है, जिससे आत्मा प्रभावित होकर अहंकार उत्पन्न करता है और पदार्थ तथा मन-इंद्रियों से अपना तादात्म्य कर लेता है। आत्मा को भौतिक इंद्रियों का भोग करने की लत पड़ जाती है, जिसे वह वास्तविक सुख मान बैठता है। श्रीमद्भागवत (10.84.13) के श्लोक का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें त्रिधातु निर्मित शरीर को आत्मस्वरूप मानने वाले, देह के विकारों को स्वजन समझने वाले, जन्मभूमि को पूज्य मानने वाले और तीर्थयात्रा केवल स्नान के लिए करने वाले व्यक्ति को गधा या बैल के समान बताया गया है। इसके अलावा, "समय का महत्व" शीर्षक से एक प्रेरक कहानी प्रस्तुत की गई है। इसमें एक भारतीय छात्र के अमेरिका में उच्च शिक्षा के दौरान समय की पाबंदी सीखने के अनुभव का वर्णन है। शिक्षक द्वारा बार-बार समय पर न आने के लिए टोकने पर, छात्र ने पहले देर से आना छोड़ा और फिर पंद्रह मिनट पहले ही विद्यालय पहुँच गया। शिक्षक ने तब समझाया कि दो-चार मिनट देर से आना जितना बुरा है, उतना ही पंद्रह मिनट पहले आकर फाटक के बाहर खड़े रहना भी क्योंकि उन मिनटों का उपयोग अध्ययन में किया जा सकता था। इस प्रकार, अमेरिकी अध्यापक ने भारतीय छात्र को समय के सही महत्व का ज्ञान कराया। अंत में, दूध के साथ शहद के गजब के फायदे बताए गए हैं, जो 5 बीमारियों को दूर करने में सहायक हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि यह शारीरिक और मानसिक क्षमताओं को बढ़ाता है, नींद न आने की समस्या में सुधार करता है, पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है, कब्ज से राहत दिलाता है, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, तनाव दूर करता है और प्रजनन क्षमता व शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि करता है। पोस्ट का समापन "प्रेम से बोलो राधे राधे" के साथ होता है।
- क्रांतिकारी टैक्सी यूनियन जयपुर ने सभी टैक्सी, कैब, ऑटो और कमर्शियल वाहन चालकों से आगामी 3 जून को जयपुर के कलेक्ट्रेट सर्किल पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की बड़ी अपील की है। यह आह्वान ड्राइवरों की लगातार बढ़ती समस्याओं, महंगे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, कम किराए, प्लेटफॉर्म शुल्क और बढ़ते खर्चों जैसे विभिन्न मुद्दों के समाधान के लिए किया गया है। यूनियन ने जोर दिया है कि जब तक ड्राइवर एकजुट नहीं होंगे, तब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। सभी ड्राइवरों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी आवाज बुलंद करने और अपने अधिकारों के लिए समय पर पहुंचकर इस अभियान को सफल बनाएं। इसके साथ ही, सभी ड्राइवर भाइयों से इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा साझा करने और अपने साथियों तक पहुंचाने का निवेदन किया गया है।1
- जयपुर स्थित श्री अमरापुर स्थान में सफलतापूर्वक एक बाल संस्कार शिविर का समापन हुआ है।1
- पहलवान विनेश फोगाट ने देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों की संघर्षपूर्ण परिस्थितियों पर अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की है, जहाँ उन्हें खेल के मैदान में उतरने से पहले अदालतों में भी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। उन्होंने कहा कि खेल में हार-जीत तो होती ही रहती है, लेकिन जब कोई खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए अदालती लड़ाई लड़ने के बाद मैदान पर आता है, तो वह केवल एक खेल नहीं रह जाता। फोगाट ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे खिलाड़ी जब गोल्ड मेडल जीतते हैं, तो वे पूरे देश का नाम रोशन करते हैं। उन्होंने तल्ख़ लहजे में कहा कि पहले यह देखा जाना चाहिए कि ये खिलाड़ी किस तरह 'शोषित होकर' अपने खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं। अपनी बात समाप्त करते हुए, उन्होंने 'जय हो लोकतंत्र की' कहकर अपने इरादे साफ किए और आत्मविश्वास के साथ घोषणा की कि 'मैं फिर से आऊंगी और जीत कर जाऊंगी'।1
- जयपुर में एक 11 साल की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि बच्ची जब पड़ोस में खेलने जाती थी, तो 46 साल के एक पड़ोसी ने उसकी नीयत बिगड़ जाने पर उसे डरा-धमका कर इस वारदात को अंजाम दिया। यह घटना अप्रैल-2026 के पहले हफ्ते में हुई बताई जा रही है। पीड़िता के परिजनों की शिकायत के अनुसार, उनकी 11 साल की बच्ची घर के बाहर खेल रही थी और खेलते-खेलते आरोपी पड़ोसी के घर चली गई। घर में बच्ची को अकेला पाकर पड़ोसी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और किसी को भी बताने पर गाली-गलौच कर डराया-धमकाया। इस घटना के बाद बच्ची काफी दिनों तक गुमसुम और डरी-सहमी रही। परिजनों द्वारा दबाव बनाने और पूछने पर, मासूम ने पड़ोसी अंकल द्वारा की गई दरिंदगी के बारे में बताया। नाबालिग बच्ची की बात सुनकर गुस्साए परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे और आरोपी पड़ोसी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नाबालिग पीड़िता का मेडिकल करवाया और उसके बयान दर्ज किए। इसके बाद पुलिस ने 46 साल के आरोपी पड़ोसी को दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया।1
- शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने श्रमिकों के अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलन के संबंध में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने इस आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।1
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- पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने केकड़ी को दोबारा जिला बनाए जाने को लेकर एक भावुक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिस क्षेत्र को जिला बनाया था, उसे बाद में भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया था। अब वे उसे फिर से जिला का दर्जा दिलाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। रघु शर्मा ने बेहद दृढ़ और भावुक लहजे में कहा, "यही मेरी कसम है कि जिसको मैंने जिला बनाया और इन बेईमानों ने हटाया, बीजेपी की सरकार ने हटाया, उसको वापस जिले का दर्जा रघु शर्मा दिला के रहेगा और मेरी सांस रहेगी, तो यह जिला बनेगा।" इस बयान के दौरान रघु शर्मा भावुक नजर आए और उन्होंने केकड़ी की जिला पुनर्स्थापना को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उनके इस संकल्प को केकड़ी के जिला दर्जे की बहाली के लिए चल रहे कांग्रेस के राजनीतिक अभियान और स्थानीय लोगों की लगातार मांग से जोड़कर देखा जा रहा है।1
- नेपाल की अस्मिता तमांग नाम की कक्षा 9 की एक छात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई जारी रख रही है। अपनी माँ के निधन के बाद, अस्मिता को अपने डेढ़ साल के छोटे भाई और अन्य छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। चूंकि उनके पिता काम पर चले जाते हैं और घर पर बच्चों की देखभाल के लिए कोई अन्य व्यक्ति नहीं होता, अस्मिता को अपने छोटे भाई को गोद में लेकर ही स्कूल जाना पड़ता है। इसी वजह से, वह कक्षा में भी अपने छोटे भाई को गोद में बैठाकर पढ़ती है। जब शिक्षक ने उससे इस स्थिति के बारे में पूछा, तो अस्मिता अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कक्षा में ही रो पड़ी। यह वीडियो अस्मिता के इस अनकहे संघर्ष और जुदाई की कहानी को दर्शाता है।1