उमरिया जिले से गुजर रहे नेशनल हाईवे-43 पर निर्माणाधीन चार ओवरब्रिजों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। तिरुपति बिल्डकॉन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (टीबीसीएल) को निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और तय समय पर काम पूरा न करने के कारण नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया था, लेकिन आज भी कंपनी की मशीनें और वाहन इन निर्माण स्थलों पर काम करते दिख रहे हैं। इस स्थिति ने लोगों के बीच यह चर्चा तेज कर दी है कि यह कार्रवाई थी या केवल जनता के गुस्से को शांत करने के लिए किया गया एक प्रशासनिक प्रदर्शन। एमपी आरडीसी ने कुछ समय पहले सख्ती दिखाते हुए टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया था, यह दावा करते हुए कि कंपनी ने ओवरब्रिजों का निर्माण समय पर पूरा नहीं किया, जिससे परियोजना पिछड़ती रही और आम लोगों को भारी परेशानी हुई। इस कार्रवाई के तहत कंपनी को दो वर्षों तक राज्य और केंद्र सरकार की नई निर्माण परियोजनाओं में भाग लेने से वंचित कर दिया गया था। हालांकि, जमीनी हकीकत विभागीय दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है, क्योंकि निर्माण स्थलों पर आज भी वही मशीनें, संसाधन और व्यवस्था बनी हुई है, और काम की गति भी लगभग वैसी ही है जैसी कार्रवाई से पहले थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इतनी बड़ी कार्रवाई हुई थी तो उसके परिणाम धरातल पर क्यों नहीं दिख रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी घुनघुटी और आसपास के क्षेत्रों में है, जहाँ सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए सफर चुनौती बन गया है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और अधूरे निर्माण कार्य के कारण लोग आए दिन फिसलकर गिर रहे हैं और कई वाहन चालक चोटिल हो चुके हैं, फिर भी हालात में सुधार नहीं हो रहा। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वे ओवरब्रिज निर्माण के नाम पर वर्षों से धूल, गड्ढे और जाम झेल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां सिर्फ आश्वासन देने में व्यस्त हैं। लोगों का कहना है कि जब भी सवाल उठते हैं तो कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति जस की तस बनी रहती है। इस मामले में एमपी आरडीसी शहडोल के संभागीय प्रबंधक अवधेश कुमार स्वर्णकार ने बताया कि मूल ठेका जेवीआर कंपनी के पास था, जिसने कार्य को बैक-टू-बैक व्यवस्था के तहत टीबीसीएल को सौंपा था। कार्य में देरी और असंतोषजनक प्रगति के कारण टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया। हालाँकि, जब उनसे पूछा गया कि नॉन-परफॉर्मर घोषित होने के बावजूद टीबीसीएल की मशीनें और वाहन निर्माण स्थल पर कैसे काम कर रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि कंपनी का नॉन-परफॉर्मर होना एक सरकारी कार्रवाई है, और यदि उसकी मशीनें या संसाधन किराए पर लिए गए हैं तो यह संबंधित कंपनियों के बीच का मामला है। इस जवाब ने कई सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि यदि कार्रवाई के बाद भी वही संसाधन, वही मशीनें और वही व्यवस्था बनी रहती है, तो आम जनता यह कैसे माने कि वास्तव में कोई सख्त कदम उठाया गया है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना भी होता है, लेकिन जब सड़क की हालत खराब हो, निर्माण की गति धीमी हो और जनता की परेशानी बनी रहे, तो कार्रवाई का वास्तविक प्रभाव कहाँ दिखता है। दिलचस्प बात यह है कि विभाग खुद काम की धीमी गति को स्वीकार करता है, हालाँकि अधिकारियों का तर्क है कि कुछ तकनीकी कार्यों की प्रगति तुरंत दिखाई नहीं देती। दूसरी ओर, आम नागरिकों का कहना है कि उन्हें तकनीकी शब्दावली से कोई सरोकार नहीं है, वे केवल इतना जानते हैं कि वर्षों से अधूरे पड़े ओवरब्रिज, खराब सड़कें और रोजाना बढ़ती दुर्घटनाओं का खतरा उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित करना वास्तव में एक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई थी या फिर यह केवल कागजों तक सीमित एक औपचारिकता साबित हो रही है। यदि कार्रवाई के बाद भी मैदान में सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहे, तो जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। एनएच-43 जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है, और इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में अधूरे ओवरब्रिज और बदहाल सड़कें केवल विकास कार्यों की धीमी रफ्तार का उदाहरण नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल भी बन चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार एजेंसियां केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहती हैं या फिर वास्तव में धरातल पर बदलाव दिखाई देता है।
उमरिया जिले से गुजर रहे नेशनल हाईवे-43 पर निर्माणाधीन चार ओवरब्रिजों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। तिरुपति बिल्डकॉन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (टीबीसीएल) को निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और तय समय पर काम पूरा न करने के कारण नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया था, लेकिन आज भी कंपनी की मशीनें और वाहन इन निर्माण स्थलों पर काम करते दिख रहे हैं। इस स्थिति ने लोगों के बीच यह चर्चा तेज कर दी है कि यह कार्रवाई थी या केवल जनता के गुस्से को शांत करने के लिए किया गया एक प्रशासनिक प्रदर्शन। एमपी आरडीसी ने कुछ समय पहले सख्ती दिखाते हुए टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया था, यह दावा करते हुए कि कंपनी ने ओवरब्रिजों का निर्माण समय पर पूरा नहीं किया, जिससे परियोजना पिछड़ती रही और आम लोगों को भारी परेशानी हुई। इस कार्रवाई के तहत कंपनी को दो वर्षों तक राज्य और केंद्र सरकार की नई निर्माण परियोजनाओं में भाग लेने से वंचित कर दिया गया था। हालांकि, जमीनी हकीकत विभागीय दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है, क्योंकि निर्माण स्थलों पर आज भी वही मशीनें, संसाधन और व्यवस्था बनी हुई है, और काम की गति भी लगभग वैसी ही है जैसी कार्रवाई से पहले थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इतनी बड़ी कार्रवाई हुई थी तो उसके परिणाम धरातल पर क्यों नहीं दिख रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी घुनघुटी और आसपास के क्षेत्रों में है, जहाँ सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि दोपहिया वाहन
चालकों के लिए सफर चुनौती बन गया है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और अधूरे निर्माण कार्य के कारण लोग आए दिन फिसलकर गिर रहे हैं और कई वाहन चालक चोटिल हो चुके हैं, फिर भी हालात में सुधार नहीं हो रहा। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वे ओवरब्रिज निर्माण के नाम पर वर्षों से धूल, गड्ढे और जाम झेल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां सिर्फ आश्वासन देने में व्यस्त हैं। लोगों का कहना है कि जब भी सवाल उठते हैं तो कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति जस की तस बनी रहती है। इस मामले में एमपी आरडीसी शहडोल के संभागीय प्रबंधक अवधेश कुमार स्वर्णकार ने बताया कि मूल ठेका जेवीआर कंपनी के पास था, जिसने कार्य को बैक-टू-बैक व्यवस्था के तहत टीबीसीएल को सौंपा था। कार्य में देरी और असंतोषजनक प्रगति के कारण टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया। हालाँकि, जब उनसे पूछा गया कि नॉन-परफॉर्मर घोषित होने के बावजूद टीबीसीएल की मशीनें और वाहन निर्माण स्थल पर कैसे काम कर रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि कंपनी का नॉन-परफॉर्मर होना एक सरकारी कार्रवाई है, और यदि उसकी मशीनें या संसाधन किराए पर लिए गए हैं तो यह संबंधित कंपनियों के बीच का मामला है। इस जवाब ने कई सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि यदि कार्रवाई के बाद भी वही संसाधन, वही मशीनें और वही व्यवस्था बनी रहती है, तो आम जनता यह कैसे माने कि वास्तव में कोई सख्त कदम उठाया गया है। लोगों का कहना है
कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना भी होता है, लेकिन जब सड़क की हालत खराब हो, निर्माण की गति धीमी हो और जनता की परेशानी बनी रहे, तो कार्रवाई का वास्तविक प्रभाव कहाँ दिखता है। दिलचस्प बात यह है कि विभाग खुद काम की धीमी गति को स्वीकार करता है, हालाँकि अधिकारियों का तर्क है कि कुछ तकनीकी कार्यों की प्रगति तुरंत दिखाई नहीं देती। दूसरी ओर, आम नागरिकों का कहना है कि उन्हें तकनीकी शब्दावली से कोई सरोकार नहीं है, वे केवल इतना जानते हैं कि वर्षों से अधूरे पड़े ओवरब्रिज, खराब सड़कें और रोजाना बढ़ती दुर्घटनाओं का खतरा उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित करना वास्तव में एक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई थी या फिर यह केवल कागजों तक सीमित एक औपचारिकता साबित हो रही है। यदि कार्रवाई के बाद भी मैदान में सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहे, तो जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। एनएच-43 जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है, और इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में अधूरे ओवरब्रिज और बदहाल सड़कें केवल विकास कार्यों की धीमी रफ्तार का उदाहरण नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल भी बन चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार एजेंसियां केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहती हैं या फिर वास्तव में धरातल पर बदलाव दिखाई देता है।
- उमरिया जिले के घुलघुली क्षेत्र में आज, 21 जून 2026 को, लगातार दूसरे दिन तेज आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश दर्ज की गई है। इस बारिश के चलते आम जनता को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है, वहीं खेतों में भी रौनक लौट आई है। ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे पूरे क्षेत्र के किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं और उनमें भारी उत्साह की लहर देखी जा रही है।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला है। अपने संदेश में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योग सभी को जोड़ने और साथ लाने का कार्य करता है।1
- नौरोजाबाद नगर परिषद में उस समय माहौल गरमा गया जब जनप्रतिनिधियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यशैली को लेकर खुलकर नाराजगी जताई। पार्षदों ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए। पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ नियमित रूप से समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और कई बार कार्यालय से भी अनुपस्थित रहते हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।3
- सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम के विरुद्ध आपत्तिजनक चित्र और अभद्र टिप्पणी युक्त पोस्ट करने के मामले में प्रबोध पांडे के खिलाफ थाना में एक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं ने बताया है कि इस पोस्ट से करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा समाज में वैमनस्य एवं तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। शिकायत दर्ज कराते समय सिल्लू रजक, अविनाश मिश्रा, धीरू मिश्रा, मुकेश दुवेदी, विकाश जोतवानी, अमन यादव, देव केवट, मोनु सेन, अमित धुर्वे, शनि रिशु पनिका, नितिन सूरी, रज्जन रजक एवं अन्य लोग उपस्थित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी धर्म, देवी-देवता अथवा धार्मिक प्रतीकों का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। इन सभी ने कहा कि सभी धर्मों एवं आस्थाओं का सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।3
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- शहडोल में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 'स्वस्थ आयु के लिए योग' थीम के तहत धूमधाम से आयोजित किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में सांसद ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।2
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को उमरिया जिले के जैव विविधता केंद्र ताला-बांधवगढ़ में सामूहिक योग कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम जिला प्रशासन और आयुष विभाग के तत्वावधान में होगा, जिसमें जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और नागरिकों की सहभागिता रहेगी। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसी कड़ी में, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि वे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जबलपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के साथ शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सनातन संस्कृति में योग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के काल से ही यह सर्वस्वीकृत और सार्वभौमिक रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों और वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित किया, जिनके कारण योग आज विश्वभर में करोड़ों लोगों के स्वस्थ जीवन का आधार बन चुका है। डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि योग केवल प्राणायाम और आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासित, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की सर्वोत्तम पद्धति है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और योग दिवस कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लें।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को उमरिया जिले के जैव विविधता केंद्र ताला-बांधवगढ़ में एक सामूहिक योग कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग के तत्वावधान में किया जा रहा है, जिसमें जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों एवं नागरिकों की सहभागिता रहेगी। कार्यक्रम को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसी क्रम में, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी दी है कि वे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जबलपुर में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के साथ सहभागी बनेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में योग का महत्व भगवान श्रीकृष्ण के काल से ही सर्वस्वीकृत और सार्वभौमिक रहा है। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों और वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित किया, जिनके कारण आज योग विश्वभर में करोड़ों लोगों के स्वस्थ जीवन का आधार बन चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि योग केवल प्राणायाम और आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासित, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की सर्वोत्तम पद्धति है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और योग दिवस कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लें।1