बटूरा तो अवैध कोयले के काले धंधे का महज एक ट्रेलर था, क्योंकि इस कारोबार की पूरी फिल्म बिछिया, रुंगटा और केशवाही जैसे क्षेत्रों में चल रही है, जहाँ मरखी माता मंदिर का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। जेसीबी और पोकलेन मशीनों का इस्तेमाल कर खुलेआम अवैध कोयले का उत्खनन किया जा रहा है, और यह स्थिति तब सामने आई जब 'सर्वोच्च सत्ता' ने बटूरा में अवैध उत्खनन और 'मौत के कुएं' की खबर प्रकाशित की, जिसके बाद कई लोगों ने प्रमाणित जानकारी और वीडियो साझा किए। अनूपपुर-शहडोल जिले में अमलई और बुढ़ार थाना क्षेत्र को कोयला माफियाओं का स्वर्ग कहा जाता है, जहाँ एक अनुमान के अनुसार लगभग 50 ऐसे बिंदु हैं जिनसे प्रतिदिन खुलेआम अवैध कोयला निकाला जा रहा है। इन स्थानों में सबसे ऊपर कशाचाही पुलिस चौकी के पीछे स्थित मखौं माता मंदिर का क्षेत्र है। यहाँ दिन में जेसीबी और पोकलेन मशीनें लगाकर कोयले का अवैध उत्खनन होता है, जबकि रात 10 बजे के बाद इसका अवैध परिवहन किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन 10 से 15 टन अवैध कोयला निकाला जा रहा है और 15 से 20 ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भरकर आसपास के भट्ठों और दुकानों में बेचा जा रहा है। इस अवैध कारोबार का दैनिक अनुमानित आंकड़ा ₹20 से 25 लाख का है, जिसमें स्थानीय से लेकर बुढ़ार तक के बड़े कोयला माफिया और ट्रांसपोर्टर शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर, बाकोहार कर परिषद से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुका एक दबंग व्यक्ति शहवेल भाना संगठन के एक सनातीय दबंग का रिश्तेदार बताकर इस पूरे गोल को खेल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस काले धंधे से जुड़े दो चेहरों में से एक ने हाल ही में ₹30 लाख का मकान खरीदा है, तो दूसरे ने कोतमा में ₹20 लाख का मकान लिया है, जिससे इनकी प्रतिदिन की अवैध कमाई का अनुमान लगाया जा सकता है। यह बिंदु वर्तमान में पूरे जिले में सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसे भाजपा के एक बड़े नेता का संरक्षण प्राप्त है। कहा जाता है कि जब अपराधी और नेता का गठजोड़ हो जाता है, तो पुलिस और प्रशासन को भी अवैध कार्य की 'हरी झंडी' देने में आसानी हो जाती है, और यही स्थिति यहाँ बनी हुई है। इस काले धंधे के खेल को समझना आसान नहीं है, जिसमें विजय और विनय जैसे प्यादे हर जगह मौजूद हैं, और अशोक जैसे वजीर 50 से अधिक बिंदुओं पर सक्रिय हैं। इस खेल का असली 'राजा' पर्दे के पीछे रहकर सब कुछ नियंत्रित करता है। बुढ़ार और अमलई के साथ-साथ मुहानपुर और अनूपपुर जिले के को और बिनुरी सहित जहाँ भी कोयले के काले धंधे का पता चलता है, वहाँ इस 'राजा' की एंट्री होती है। हालांकि, अब पुलिस विभाग के साथ-साथ प्रदेश सरकार की भी इस 'किंग' पर नज़र पड़ चुकी है। भोपाल में बैठे एक दबंग अधिकारी ने मुख्यमंत्री को सीधे ब्रीफिंग करके इस अवैध कोयले के काले साम्राज्य की एक-एक बारीकी से अवगत करा दिया है, जिससे यह उम्मीद है कि यह व्यक्ति अब बहुत दिनों तक पर्दे के पीछे नहीं रह पाएगा। यह रिपोर्ट शहडोल, ब्यौहारी से दुर्गेश कुमार गुप्ता द्वारा दी गई है।
बटूरा तो अवैध कोयले के काले धंधे का महज एक ट्रेलर था, क्योंकि इस कारोबार की पूरी फिल्म बिछिया, रुंगटा और केशवाही जैसे क्षेत्रों में चल रही है, जहाँ मरखी माता मंदिर का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। जेसीबी और पोकलेन मशीनों का इस्तेमाल कर खुलेआम अवैध कोयले का उत्खनन किया जा रहा है, और यह स्थिति तब सामने आई जब 'सर्वोच्च सत्ता' ने बटूरा में अवैध उत्खनन और 'मौत के कुएं' की खबर प्रकाशित की, जिसके बाद कई लोगों ने प्रमाणित जानकारी और वीडियो साझा किए। अनूपपुर-शहडोल जिले में अमलई और बुढ़ार थाना क्षेत्र को कोयला माफियाओं का स्वर्ग कहा जाता है, जहाँ एक अनुमान के अनुसार लगभग 50 ऐसे बिंदु हैं जिनसे प्रतिदिन खुलेआम अवैध कोयला निकाला जा रहा है। इन स्थानों में सबसे ऊपर कशाचाही पुलिस चौकी के पीछे स्थित मखौं माता मंदिर का क्षेत्र है। यहाँ दिन में जेसीबी और पोकलेन मशीनें लगाकर कोयले का अवैध उत्खनन होता है, जबकि रात 10 बजे के बाद इसका अवैध परिवहन किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन 10 से 15 टन अवैध कोयला निकाला जा रहा है और 15 से 20 ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भरकर आसपास के भट्ठों और दुकानों में बेचा जा रहा है। इस अवैध कारोबार का दैनिक अनुमानित आंकड़ा ₹20 से 25 लाख का है, जिसमें स्थानीय से लेकर बुढ़ार तक के बड़े कोयला माफिया और ट्रांसपोर्टर शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर, बाकोहार कर परिषद से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुका एक दबंग व्यक्ति शहवेल भाना संगठन के एक सनातीय दबंग का रिश्तेदार बताकर इस पूरे गोल को खेल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस काले धंधे से जुड़े दो चेहरों में से एक ने हाल ही में ₹30 लाख का मकान खरीदा है, तो दूसरे ने कोतमा में ₹20 लाख का मकान लिया है, जिससे इनकी प्रतिदिन की अवैध कमाई का अनुमान लगाया जा सकता है। यह बिंदु वर्तमान में पूरे जिले में सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसे भाजपा के एक बड़े नेता का संरक्षण प्राप्त है। कहा जाता है कि जब अपराधी और नेता का गठजोड़ हो जाता है, तो पुलिस और प्रशासन को भी अवैध कार्य की 'हरी झंडी' देने में आसानी हो जाती है, और यही स्थिति यहाँ बनी हुई है। इस काले धंधे के खेल को समझना आसान नहीं है, जिसमें विजय और विनय जैसे प्यादे हर जगह मौजूद हैं, और अशोक जैसे वजीर 50 से अधिक बिंदुओं पर सक्रिय हैं। इस खेल का असली 'राजा' पर्दे के पीछे रहकर सब कुछ नियंत्रित करता है। बुढ़ार और अमलई के साथ-साथ मुहानपुर और अनूपपुर जिले के को और बिनुरी सहित जहाँ भी कोयले के काले धंधे का पता चलता है, वहाँ इस 'राजा' की एंट्री होती है। हालांकि, अब पुलिस विभाग के साथ-साथ प्रदेश सरकार की भी इस 'किंग' पर नज़र पड़ चुकी है। भोपाल में बैठे एक दबंग अधिकारी ने मुख्यमंत्री को सीधे ब्रीफिंग करके इस अवैध कोयले के काले साम्राज्य की एक-एक बारीकी से अवगत करा दिया है, जिससे यह उम्मीद है कि यह व्यक्ति अब बहुत दिनों तक पर्दे के पीछे नहीं रह पाएगा। यह रिपोर्ट शहडोल, ब्यौहारी से दुर्गेश कुमार गुप्ता द्वारा दी गई है।
- शहडोल के ब्यौहारी रेलवे स्टेशन पर नियमों को ताक पर रखकर नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है, जहाँ यात्रियों की जेब पर डाका डालने और बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलने का एक बड़ा खेल चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर संचालित एक खान-पान प्रतिष्ठान द्वारा न केवल रेल प्रशासन के कायदे-कानूनों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के सीधे-साधे नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर बाल श्रम में झोंका जा रहा है। ये मासूम बच्चे प्लेटफॉर्म से लेकर पटरियों के बीच जान जोखिम में डालकर दिन-रात खाद्य सामग्रियां बेचते हैं। यह सब कुछ स्थानीय रेल प्रशासन की जानकारी में हो रहा है, लेकिन उच्च अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी आँखें मूंदे बैठे हैं और पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं। उनकी यह रहस्यमयी चुप्पी इस पूरे अवैध कारोबार को मौन संरक्षण देने की ओर इशारा करती है। इस खान-पान प्रतिष्ठान के संचालक और उसके मुख्य प्रबंधक रेलवे द्वारा जारी किए गए वेंडर पहचान पत्रों का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं, जिनकी आड़ में इस रूट से गुजरने वाली तमाम यात्री ट्रेनों के भीतर अवैध वेंडिंग का एक बड़ा नेटवर्क चलाया जा रहा है। जबकि आधिकारिक साइड पैंट्री का टेंडर स्वीकृत है, जिसके कर्मचारी ही यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत हैं, लेकिन अनधिकृत वेंडर बिना किसी वैध अनुमति के निडर होकर चलती ट्रेनों के भीतर घुस जाते हैं और अवैध रूप से खाद्य सामग्री बेचते हैं। जब ट्रेनों के वैध पैंट्री कर्मचारी इन बाहरी तत्वों को व्यापार करने से रोकते हैं, तो ये वेंडर गुंडागर्दी पर उतारू हो जाते हैं, जिससे स्टेशन और ट्रेनों के भीतर खुलेआम बाद-विवाद, गाली-गलौज और मारपीट की नौबत आ जाती है। ये अवैध वेंडर रेलवे द्वारा जारी किए गए कैंटीन कार्ड को दिखाकर यात्रियों और पैंट्री स्टाफ पर धौंस जमाते हैं, दावा करते हैं कि उन्हें ट्रेनों के अंदर भी सामग्री बेचने का पूरा अधिकार मिला हुआ है। इस दबंगई के पीछे मुख्य रूप से कुछ स्थानीय रसूखदार लोगों का हाथ बताया जा रहा है, जिनके इशारे पर वैध और अवैध वेंडरों की पूरी फौज ट्रेनों को निशाना बना रही है और सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखा रही है। इस अवैध तंत्र का सबसे काला पक्ष यह है कि इसमें मासूम बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें कानूनन बाल श्रम प्रतिबंधित होने के बावजूद गरीबी के कारण मजदूरी के जाल में फंसाया गया है। इन बच्चों से सुबह से देर रात तक समोसा, आलूबोंडा और अन्य सामग्रियां बिकवाई जाती हैं, जिससे चलती ट्रेनों में चढ़ने और उतरने के दौरान कई बार उनकी जान को खतरा होता है, लेकिन प्रबंधन पैसों की हवस में अंधा होकर मासूमों की जिंदगी को खतरे में डालने से बाज नहीं आ रहा है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म एक पर अन्य स्टॉलों की कमी का फायदा उठाकर यात्रियों को दोनों हाथों से लूटा जा रहा है। भीषण गर्मी और मजबूरी का लाभ उठाते हुए, ₹14 की सीलबंद पानी बोतल यात्रियों को ₹30 की मनमानी कीमत पर जबरन बेची जा रही है। यात्रियों की मजबूरी का फायदा सिर्फ पानी की बोतलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्टेशन पर मिलने वाली अन्य खाद्य सामग्रियां भी पूरी तरह गुणवत्ताविहीन और सेहत के लिए हानिकारक होती हैं। यात्रियों को मजबूरी में सड़ा-गला और अस्वच्छ खाना खाने को विवश होना पड़ता है। ब्यौहारी स्टेशन से गुजरने वाले हजारों यात्री हर दिन इस बदइंतजामी और लूटपाट का शिकार हो रहे हैं, जिससे भारतीय रेल की विश्वसनीयता और स्टेशन की छवि दिन-प्रतिदिन धूमिल होती जा रही है। इन तमाम गंभीर समस्याओं, बाल श्रम और अवैध वेंडिंग के काले कारोबार पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।3
- शहडोल में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 'स्वस्थ आयु के लिए योग' थीम के तहत धूमधाम से आयोजित किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में सांसद ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।2
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को उमरिया जिले के जैव विविधता केंद्र ताला-बांधवगढ़ में सामूहिक योग कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम जिला प्रशासन और आयुष विभाग के तत्वावधान में होगा, जिसमें जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और नागरिकों की सहभागिता रहेगी। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसी कड़ी में, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि वे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जबलपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के साथ शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सनातन संस्कृति में योग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के काल से ही यह सर्वस्वीकृत और सार्वभौमिक रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों और वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित किया, जिनके कारण योग आज विश्वभर में करोड़ों लोगों के स्वस्थ जीवन का आधार बन चुका है। डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि योग केवल प्राणायाम और आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासित, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की सर्वोत्तम पद्धति है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और योग दिवस कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लें।1
- महाराष्ट्र में एक निर्माणाधीन हनुमान मंदिर की छत गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया है। इस दुर्घटना में अब तक 7 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है। हादसे के बाद मलबे से लगभग 25 घायल व्यक्तियों को निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। प्रशासन द्वारा घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है।1
- सीधी जिले के मझौली थाना अंतर्गत डेवा गाँव में एक मूर्ति को खंडित कर कचरे में फेंकने की घटना सामने आई थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल पहुंचा दिया है।1
- एक विधवा महिला ने अपने देवर पर उनकी जमीन पर जबरन कब्जा करने और उनके साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला ने दावा किया है कि उनके देवर ने उनकी निजी संपत्ति पर अवैध रूप से अधिकार जमा लिया है और विरोध करने पर उनके साथ शारीरिक हिंसा की है।1
- महाराष्ट्र में निर्माणाधीन हनुमान मंदिर की छत गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना में लगभग 25 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में पहुँचाया गया है। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ गया है।1
- मध्य प्रदेश के अमरपाटन-ताला क्षेत्र में बिजली विभाग के कर्मचारियों के कारण एक युवक की मौत हो गई है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें विस्तार से बताया जा रहा है कि युवक की मौत किस प्रकार हुई।1