उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शनिवार सुबह कर्नलगंज इलाके के लल्ला चुंगी चौराहे पर 70 वर्षीय राम दुलारे कोरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना विश्वविद्यालय पुलिस चौकी से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई है, जिसने 'सुदृढ़ कानून-व्यवस्था' के दावों की पोल खोल दी है और पुलिस के इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब खाकी का कोई खौफ नहीं रहा, क्योंकि पुलिस की नाक के नीचे हुई इस वारदात से पुलिस बेखबर रही। पुलिस की संवेदनहीनता और लापरवाही का आलम यह रहा कि डायल 112 को सूचना मिली कि एक बुजुर्ग सड़क दुर्घटना में घायल है। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को अस्पताल तो भेजा, लेकिन पुलिसकर्मियों को यह पता ही नहीं चला कि मामला एक्सीडेंट का नहीं, बल्कि गोलीकांड का है। अस्पताल में डॉक्टरों के मुआयने के बाद ही यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि बुजुर्ग के सीने में गोली लगी थी। यह स्थिति प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करती है कि जब पुलिस एक हत्या और दुर्घटना में फर्क नहीं कर पा रही है, तो शहर की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। यह राम दुलारे कोरी की हत्या कोई अकेली वारदात नहीं है; पिछले कुछ महीनों से प्रयागराज, जो कभी शिक्षा और धर्म की त्रिवेणी के लिए जाना जाता था, अब खून से लाल हो रहा है। शहर में सरेआम हत्याओं, बमबाजी और गोलीबारी की घटनाएं आम हो चुकी हैं, और हर कुछ दिनों में एक नई लाश पुलिस की नाकामी का सबूत पेश करती है। पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल है, और वे हत्या होने के बाद सिर्फ 'लकीर पीटते' नजर आते हैं, न हत्या की वजह पता होती है, न हत्यारे का सुराग। चौराहों पर पुलिस गश्त के दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं, जिसके चलते सुबह टहलने निकले आम नागरिक भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं। अब प्रयागराज में कानून-व्यवस्था वेंटिलेटर पर है और जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है। पुलिस प्रशासन केवल घटनाओं के बाद 'कड़ी कार्रवाई' का रटा-रटाया बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। जिस शहर में पुलिस चौकी के महज 100 मीटर के दायरे में हत्यारे बेखौफ होकर ट्रिगर दबा सकते हैं, वहां की पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। राम दुलारे कोरी की जान जाना पुलिस महकमे के लिए एक बहुत बड़ा अलार्म है; यदि अब भी बेलगाम अपराधियों पर नकेल नहीं कसी गई और पुलिस का खौफ सड़कों पर वापस नहीं लाया गया, तो प्रयागराज की पहचान सिर्फ एक 'क्राइम कैपिटल' के रूप में ही रह जाएगी। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़कों पर सुरक्षित महसूस करना चाहती है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शनिवार सुबह कर्नलगंज इलाके के लल्ला चुंगी चौराहे पर 70 वर्षीय राम दुलारे कोरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना विश्वविद्यालय पुलिस चौकी से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई है, जिसने 'सुदृढ़ कानून-व्यवस्था' के दावों की पोल खोल दी है और पुलिस के इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब खाकी का कोई खौफ नहीं रहा, क्योंकि पुलिस की नाक के नीचे हुई इस वारदात से पुलिस बेखबर रही। पुलिस की संवेदनहीनता और लापरवाही का आलम यह रहा कि डायल 112 को सूचना मिली कि एक बुजुर्ग सड़क दुर्घटना में घायल है। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को अस्पताल तो भेजा, लेकिन पुलिसकर्मियों को यह पता ही नहीं चला कि मामला एक्सीडेंट का नहीं, बल्कि गोलीकांड का है। अस्पताल में डॉक्टरों के मुआयने के बाद ही यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि बुजुर्ग के सीने में गोली लगी थी। यह स्थिति प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करती है कि जब पुलिस एक हत्या और दुर्घटना में फर्क नहीं कर पा रही है, तो शहर की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। यह राम दुलारे कोरी की हत्या कोई अकेली वारदात नहीं है; पिछले कुछ महीनों से प्रयागराज, जो कभी शिक्षा और धर्म की त्रिवेणी के लिए जाना जाता था, अब खून से लाल हो रहा है। शहर में सरेआम हत्याओं, बमबाजी और गोलीबारी की घटनाएं आम हो चुकी हैं, और हर कुछ दिनों में एक नई लाश पुलिस की नाकामी का सबूत पेश करती है। पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल है, और वे हत्या होने के बाद सिर्फ 'लकीर पीटते' नजर आते हैं, न हत्या की वजह पता होती है, न हत्यारे का सुराग। चौराहों पर पुलिस गश्त के दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं, जिसके चलते सुबह टहलने निकले आम नागरिक भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं। अब प्रयागराज में कानून-व्यवस्था वेंटिलेटर पर है और जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है। पुलिस प्रशासन केवल घटनाओं के बाद 'कड़ी कार्रवाई' का रटा-रटाया बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। जिस शहर में पुलिस चौकी के महज 100 मीटर के दायरे में हत्यारे बेखौफ होकर ट्रिगर दबा सकते हैं, वहां की पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। राम दुलारे कोरी की जान जाना पुलिस महकमे के लिए एक बहुत बड़ा अलार्म है; यदि अब भी बेलगाम अपराधियों पर नकेल नहीं कसी गई और पुलिस का खौफ सड़कों पर वापस नहीं लाया गया, तो प्रयागराज की पहचान सिर्फ एक 'क्राइम कैपिटल' के रूप में ही रह जाएगी। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़कों पर सुरक्षित महसूस करना चाहती है।
- प्रयागराज के मेजा थाना क्षेत्र से चोरी की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहाँ सोनार तारा स्थित एक एटीएम को चोरों ने अपना निशाना बनाया। देर रात अज्ञात चोर एटीएम के अंदर घुसे और वहाँ लगी तीन बैटरियां चोरी कर फरार हो गए। यह पूरी वारदात एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। इस घटना ने प्रयागराज यमुनानगर के मेजा थाना क्षेत्र में चोरों के आतंक को एक बार फिर उजागर किया है।1
- प्रयागराज में शनिवार की सुबह तेज धूप खिली थी, लेकिन अचानक मौसम ने करवट ली। सुबह लगभग 9 बजे आसमान में काले घने बादल छा गए, जिससे चारों ओर अंधेरा छा गया और तेज आंधी चलने लगी। इसके बाद सुबह 10 बजे से करीब एक घंटे तक धूलभरी आंधी के साथ जोरदार बारिश हुई। इस तेज हवाओं और झमाझम बारिश के कारण लोगों को भीषण गर्मी से काफी राहत मिली।1
- प्रयागराज जिले के करछना थाना क्षेत्र के चुप्पेपुर डीहा गांव में नाली और सड़क के पुराने विवाद ने शनिवार को हिंसक रूप ले लिया। ईंट-पत्थरों से हुए जानलेवा हमले में 26 वर्षीय एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके सिर में गहरी चोटें आई हैं। उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे स्वरूप रानी नेहरू (SRN) जिला अस्पताल रेफर किया गया है। परिजनों ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर करछना पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चुप्पेपुर डीहा गांव में नाली और रास्ते को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही थी और अक्सर विवाद होता रहता था। शनिवार सुबह करीब 11 बजे यह विवाद अचानक बढ़ा, जिसके बाद आरोप है कि गांव के कुछ दबंग यादवों ने पटेल परिवार के सदस्यों पर ईंट-पत्थरों से भयंकर हमला बोल दिया। इस हिंसक झड़प में दयाशंकर पटेल के पुत्र बाल गोबिंद पटेल (26 वर्षीय) को निशाना बनाया गया, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और सिर बुरी तरह फट गया, मौके पर ही भारी खून बहने लगा। लहूलुहान बाल गोबिंद को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) करछना ले जाया गया। सिर में चोट इतनी गहरी और गंभीर थी कि सीएचसी के डॉक्टरों ने टांका लगाने में असमर्थता जताई और प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें तत्काल प्रयागराज के स्वरूप रानी (SRN) जिला अस्पताल रेफर कर दिया। युवक की हालत फिलहाल बेहद नाजुक बनी हुई है। इस पूरी घटना ने स्थानीय करछना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि नाली-रास्ते का यह विवाद पुराना था और यदि पुलिस ने पहले हुए विवादों को गंभीरता से लेते हुए समय रहते उचित और सख्त कार्रवाई की होती, तो दबंगों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते और यह खूनी संघर्ष टाला जा सकता था। उनका कहना है कि पुलिस की हीलाहवाली के कारण ही शनिवार को यह छोटी सी बहस जानलेवा हमले में तब्दील हो गई। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन आरोपियों पर क्या ठोस कार्रवाई करता है, क्योंकि गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।1
- आज दिनांक 13 जून, 2026 को थाना कर्नलगंज अंतर्गत लल्ला चुंगी चौराहे के पास एक घटना घटी। इस घटना के संबंध में सहायक पुलिस आयुक्त कर्नलगंज द्वारा एक बाइट दी गई है।1
- प्रयागराज के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात एक अधिवक्ता के ड्राइवर अमित शुक्ला (35) को घर से बुलाकर गोली मार दी गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। शाहा और पीपलगांव निवासी अमित शुक्ला को कमर में गोली लगी है। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, अमित ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 11 बजे गेंदालाल नाम का व्यक्ति उनके घर आया। उसने उन्हें बाहर बुलाया और बातचीत करते हुए घर से लगभग 50 मीटर दूर ले जाकर गोली मार दी। फायरिंग की आवाज सुनकर परिजन और आस-पास के लोग मौके पर पहुँचे, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुका था। पुलिस ने इस मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है।1
- प्रयागराज के करछना क्षेत्र के चप्पेपुर डीहा गांव में शनिवार को लगभग 11 बजे नाली के विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच झगड़ा शुरू हो गया, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। इस दौरान बाल गोविंद पटेल (26 वर्ष) पुत्र दया शंकर पटेल को गंभीर चोटें आईं और उनकी हालत नाजुक हो गई। उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करछना भेजा गया। करछना में डॉक्टरों ने बाल गोविंद पटेल के सिर में चोट अधिक होने और फटने के कारण टांके नहीं लगाए, जिसके बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में भी युवक की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है। बाल गोविंद पटेल का कहना है कि नाली के विवाद को लेकर आए दिन झगड़े होते रहते हैं, जिसकी शिकायतें तहसील करछना और थाना करछना में कई बार की जा चुकी हैं। हालांकि, इन शिकायतों का कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका, जिसके कारण आज यह विवाद इतना गहरा गया। अब देखना है कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और पीड़ितों को कब तक न्याय मिल पाता है।1