आजमगढ़ में भोजपुरी भाषा और लोक साहित्य के अमर हस्ताक्षर, जनमानस के कवि तथा लोक संवेदना के सशक्त स्वर रामजियावन दास 'बावला' को उनकी जयंती पर साहित्य प्रेमियों, बुद्धिजीवियों और भोजपुरी समाज ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। 1 जून 1922 को जन्मे 'बावला' जी ने सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद भोजपुरी साहित्य को अमूल्य रचनाएं प्रदान कीं, जो आज भी जन-जन की जुबान पर हैं। ग्रामीण परिवेश, लोक संस्कृति, मानवीय करुणा और रामभक्ति उनकी रचनाओं की प्रमुख विशेषताएं रहीं। 'बावला' जी की प्रसिद्ध रचना 'कउने नरेसवा क देसवा उजरि गइले, केकरे दुअरिया न छाँव...' को भोजपुरी साहित्य की कालजयी धरोहर माना जाता है। इस गीत में भगवान राम के प्रति लोकमन की आत्मीयता, करुणा और ग्रामीण जीवन की सहज संवेदनाएं जीवंत रूप में दिखाई देती हैं। भोजपुरी साहित्य के जानकारों का मत है कि 'बावला' जी ने अपने गीतों और कविताओं के माध्यम से लोकजीवन की पीड़ा, संघर्ष और सामाजिक मूल्यों को स्वर दिया। उनकी रचनाओं का मंचों, कथा-प्रवचनों और सांस्कृतिक आयोजनों में आज भी व्यापक रूप से गायन किया जाता है। जयंती के अवसर पर वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि रामजियावन दास 'बावला' केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि भोजपुरी लोकसंस्कृति की एक जीवंत पहचान थे, जिनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को भाषा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जोड़ती रहेंगी। हालांकि उनकी अनेक रचनाएं लोकप्रिय हैं, फिर भी समय के साथ उनके योगदान को अपेक्षित चर्चा नहीं मिल सकी है। इस पर साहित्य प्रेमियों ने चिंता व्यक्त की और यह भी माना कि भोजपुरी समाज को उनके साहित्यिक अवदान के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए। देवपुरिया टाइम्स परिवार की ओर से भोजपुरी के अमर लोककवि रामजियावन दास 'बावला' जी को शत-शत नमन किया गया।
आजमगढ़ में भोजपुरी भाषा और लोक साहित्य के अमर हस्ताक्षर, जनमानस के कवि तथा लोक संवेदना के सशक्त स्वर रामजियावन दास 'बावला' को उनकी जयंती पर साहित्य प्रेमियों, बुद्धिजीवियों और भोजपुरी समाज ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। 1 जून 1922 को जन्मे 'बावला' जी ने सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद भोजपुरी साहित्य को अमूल्य रचनाएं प्रदान कीं, जो आज भी जन-जन की जुबान पर हैं। ग्रामीण परिवेश, लोक संस्कृति, मानवीय करुणा और रामभक्ति उनकी रचनाओं की प्रमुख विशेषताएं रहीं। 'बावला' जी की प्रसिद्ध रचना 'कउने नरेसवा क देसवा उजरि गइले, केकरे दुअरिया न छाँव...' को भोजपुरी साहित्य की कालजयी धरोहर माना जाता है। इस गीत में भगवान राम के प्रति लोकमन की आत्मीयता, करुणा और ग्रामीण जीवन की सहज संवेदनाएं जीवंत रूप में दिखाई देती हैं। भोजपुरी साहित्य के जानकारों का मत है कि 'बावला' जी ने अपने गीतों और कविताओं के माध्यम से लोकजीवन की पीड़ा, संघर्ष और सामाजिक मूल्यों को स्वर दिया। उनकी रचनाओं का मंचों, कथा-प्रवचनों और सांस्कृतिक आयोजनों में आज भी व्यापक रूप से गायन किया जाता है। जयंती के अवसर पर वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि रामजियावन दास 'बावला' केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि भोजपुरी लोकसंस्कृति की एक जीवंत पहचान थे, जिनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को भाषा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जोड़ती रहेंगी। हालांकि उनकी अनेक रचनाएं लोकप्रिय हैं, फिर भी समय के साथ उनके योगदान को अपेक्षित चर्चा नहीं मिल सकी है। इस पर साहित्य प्रेमियों ने चिंता व्यक्त की और यह भी माना कि भोजपुरी समाज को उनके साहित्यिक अवदान के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए। देवपुरिया टाइम्स परिवार की ओर से भोजपुरी के अमर लोककवि रामजियावन दास 'बावला' जी को शत-शत नमन किया गया।
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- उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में, दबंगों का कहर खुलेआम पुलिस की मौजूदगी में जारी है। मूल जानकारी के अनुसार, पुलिस बल इस पर कोई कार्रवाई करने के बजाय, किसी के मरने का इंतजार कर रहा है ताकि उसके बाद ही कोई कदम उठाया जा सके।1
- जौनपुर शहर में ग्राम प्रधान के पूर्व प्रत्याशी मुन्नी पाल के नव-निर्मित आवास पर अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के आलापुर थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक मोटरसाइकिल चालक युवक ने एक वृद्ध की हत्या कर दी। यह वारदात तब हुई जब वृद्ध ने युवक को किसी बात के लिए मना किया, जिसके बाद युवक ने इस गंभीर अपराध को अंजाम दिया। इस घटना ने गांवों में बढ़ रहे 'रफ्तार के कहर' और 'मनबढ़ युवकों' के व्यवहार को लेकर चिंता पैदा कर दी है, साथ ही यह भी सावधान कर दिया है कि ऐसे युवकों को मना करना खतरे से खाली नहीं है।1
- देवरिया में भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष काली प्रसाद के आगमन पर कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अपार उत्साह का प्रदर्शन करते हुए उनका भव्य स्वागत किया। उनके अभिनंदन में बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया, जो स्वागत कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण रहा। भाजपा कार्यालय और स्वागत स्थल पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे, जिन्होंने काली प्रसाद को फूल-मालाएं पहनाकर उनका जोरदार अभिनंदन किया। इस अवसर पर, पार्टी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य कार्यकर्ताओं ने काली प्रसाद को उनकी नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी। सभी ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में संगठन और अधिक मजबूत होगा। पूरे स्वागत कार्यक्रम के दौरान एक उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा, और कार्यकर्ताओं ने पार्टी के समर्थन में जमकर नारेबाजी भी की।1
- जौनपुर के जलालगंज स्टेशन पर पानी की व्यवस्था खराब होने से यात्रियों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि स्टेशन पर नल खराब पड़े हैं, जिसके कारण यात्री किशन जैसे लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। इस गंभीर समस्या के बावजूद, रेलवे विभाग की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे यात्रियों में असंतोष व्याप्त है।1
- भाजपा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष काली प्रसाद का भव्य स्वागत किया गया है। इस दौरान विश्वविजय निषाद ने काली प्रसाद का सम्मान किया।1
- अंबेडकर नगर जनपद मुख्यालय पर बड़ी संख्या में पंचायत सहायकों ने धरना प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट के सामने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराते हुए, उन्होंने जिला प्रशासन को एक मांग पत्र भी सौंपा।1
- मऊ जनपद के कोपागंज थाना क्षेत्र के शाहपुर में पूर्वी फाटक के पास एक घटना सामने आई है, जहाँ शाहपुर गाँव निवासी अवनीश मौर्य, पुत्र संतोष मौर्य, अपनी प्रेमिका की शादी तय होने से नाराज़ होकर हाई वोल्टेज बिजली के टावर पर चढ़ गया। इस घटना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और युवक को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नीचे उतरने को तैयार नहीं हुआ। बाद में, जब परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो वे भी घटनास्थल पर पहुँचे और युवक को समझा-बुझाकर सुरक्षित नीचे उतारा। इसके बाद पुलिस ने युवक को अपनी हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी। जानकारी के अनुसार, यह युवक कुछ दिन पहले भी अपनी प्रेमिका को पाने की ज़िद में ज़हरीले पदार्थ का सेवन कर चुका था। उसकी प्रेमिका मऊ के दोहरीघाट थाना क्षेत्र के रसूलपुर गाँव की रहने वाली है, और उसका विवाह अब तय हो चुका है।1