सही निर्णय और सच्ची श्रद्धा ही मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करती है,जिनवाणी ही जीवन को पार लगाने वाली नौका है -- मुनिश्री साध्य सागर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र, किला मंदिर पर विराजमान मुनिश्री साध्य सागर मुनिराज ने अपने आशीर्वचन में धर्म,आराधना और आत्मकल्याण का सारगर्भित संदेश दिया। उन्होंने कहा यदि कोई व्यक्ति मुक्ति के मार्ग पर चलकर भी भटक रहा है, तो उसमें मार्ग की नहीं बल्कि व्यक्ति के निर्णय की त्रुटि होती है। सही निर्णय और सच्ची श्रद्धा ही मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करती है।जिनवाणी ही जीवन को पार लगाने वाली नौका है। अतिशय तीर्थ क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अतिशय क्षेत्र को कभी नहीं भूलना चाहिए। आष्टा का दिव्योदय तीर्थ किला मंदिर भी कोई मामूली स्थान नहीं है,यहाँ पर अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की दो प्रतिमाएं भू-गर्भ से प्राप्त हुई हैं तो दूसरी ओर पार्श्वनाथ बाबा की कृपा भी न केवल जैन समाज पर अपितु पूरे आष्टा पर बरस रही है।सभी लोग कैलाश पर्वत नहीं जा सकते, किंतु इसी पावन क्षेत्र में विधि-विधान पूर्वक अनुष्ठान एवं आराधना कर कैलाश पर्वत की तीर्थ यात्रा और मोक्ष मार्ग की अनुभूति प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि आगामी विधान में अत्यंत उत्साह और पूर्ण भाव के साथ सम्मिलित हों।मुनिश्री ने जानकारी दी कि 17 जनवरी को भगवान श्री आदिनाथ जी के निर्वाण कल्याणक के पावन अवसर पर विशेष विधान का आयोजन होगा। इस अवसर पर श्रद्धालु लाड्डू घर से बना कर लाएं और दीपक भी लेकर आए।सामूहिक रूप से विधान एवं आराधना में सहभागी बनें। मुनिश्री साध्य सागर मुनिराज ने कहा कि धर्म में “हम दो, हमारे दो, बाकी को जाने दो” जैसी सोच काम नहीं आती। जिनवाणी में स्पष्ट कहा गया है कि धर्म और जिनवाणी को जीवन का आधार बनाना चाहिए।उन्होंने मार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि आज कई माताएं दो वक्त की रोटी के लिए जिनवाणी को छोड़ देती हैं,जबकि वास्तव में जिनवाणी को ग्रहण करने से ही जीवन को सच्चा संबल और दिशा मिलती है।अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख करते हुए मुनिराज ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षा हेतु सांसारिक रूप में आशीर्वाद प्राप्त किया था। उस समय आचार्यश्री ने उन्हें निरंतर जाप करते रहने की प्रेरणा दी थी, जिसे वे आज भी नियमित रूप से करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने कर्मों को क्षीण करने का साधन खोज लिया है और उसी मार्ग पर निरंतर अग्रसर हैं।मुनिश्री ने आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि आष्टा आगमन के बाद उन्होंने पूरे विश्व में धर्म का डंका बजाया और जैन धर्म की प्रभावना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया पूरे विश्व में क्रांतिकारी, कड़वे प्रवचन देने वाले संत के नाम से जाने लगे थे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि प्रतिदिन तीन बार सभी जीवों से “तस्य मिच्छामि दुक्कडम्” कहकर क्षमा याचना करें। उन्होंने कहा कि भक्त भले ही कभी रूठ जाएं, लेकिन भगवान की भक्ति कभी नहीं छूटनी चाहिए। आज कई लोग बिना चमत्कार देखे नमस्कार भी नहीं करते, किंतु आदिनाथ भगवान की दोनों प्रतिमाओं ने इस अतिशय तीर्थ क्षेत्र में स्वयं चमत्कार प्रकट कर नगर को पुण्य लाभ दिया है। इसके प्रभाव से मंदिर की सभी प्रतिमाएं भी चमत्कारी हो गई हैं।मुनिश्री साध्य सागर मुनिराज ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे विधान एवं अनुष्ठान में बैठने का दृढ़ भाव बनाएं।जिनेन्द्र भगवान की आराधना से ही मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। धर्म आराधना के पथ पर कभी पीछे न हटें और एकता के सूत्र में बंधकर जिन शासन की प्रभावना करें। यही सच्ची श्रद्धा और साधना का मार्ग है।
सही निर्णय और सच्ची श्रद्धा ही मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करती है,जिनवाणी ही जीवन को पार लगाने वाली नौका है -- मुनिश्री साध्य सागर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र, किला मंदिर पर विराजमान मुनिश्री साध्य सागर मुनिराज ने अपने आशीर्वचन में धर्म,आराधना और आत्मकल्याण का सारगर्भित संदेश दिया। उन्होंने कहा यदि कोई व्यक्ति मुक्ति के मार्ग पर चलकर भी भटक रहा है, तो उसमें मार्ग की नहीं बल्कि व्यक्ति के निर्णय की त्रुटि होती है। सही निर्णय और सच्ची श्रद्धा ही मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करती है।जिनवाणी ही जीवन को पार लगाने वाली नौका है। अतिशय तीर्थ क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अतिशय क्षेत्र को कभी नहीं भूलना चाहिए। आष्टा का दिव्योदय तीर्थ किला मंदिर भी कोई मामूली स्थान नहीं है,यहाँ पर अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की दो प्रतिमाएं भू-गर्भ से प्राप्त हुई हैं तो दूसरी ओर पार्श्वनाथ बाबा की कृपा भी न केवल जैन समाज पर अपितु पूरे आष्टा पर बरस रही है।सभी लोग कैलाश पर्वत नहीं जा सकते, किंतु इसी पावन क्षेत्र में विधि-विधान पूर्वक अनुष्ठान एवं आराधना कर कैलाश पर्वत की तीर्थ यात्रा और मोक्ष मार्ग की अनुभूति प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि आगामी विधान में अत्यंत उत्साह और पूर्ण भाव के साथ सम्मिलित हों।मुनिश्री ने जानकारी दी कि 17 जनवरी को भगवान श्री आदिनाथ जी के निर्वाण कल्याणक के पावन अवसर पर विशेष विधान का आयोजन होगा। इस अवसर पर श्रद्धालु लाड्डू घर से बना कर लाएं और दीपक भी लेकर आए।सामूहिक रूप से विधान एवं आराधना में सहभागी बनें। मुनिश्री साध्य सागर मुनिराज ने कहा कि धर्म में “हम दो, हमारे दो, बाकी को जाने दो” जैसी सोच काम नहीं आती। जिनवाणी में स्पष्ट कहा गया है कि धर्म और जिनवाणी को जीवन का आधार बनाना चाहिए।उन्होंने मार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि आज कई माताएं दो वक्त की रोटी के लिए जिनवाणी को छोड़ देती हैं,जबकि वास्तव में जिनवाणी को ग्रहण करने से ही जीवन को सच्चा संबल और दिशा मिलती है।अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख करते हुए मुनिराज ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षा हेतु सांसारिक रूप में आशीर्वाद प्राप्त किया था। उस समय आचार्यश्री ने उन्हें निरंतर जाप करते रहने की प्रेरणा दी थी, जिसे वे आज भी नियमित रूप से करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने कर्मों को क्षीण करने का साधन खोज लिया है और उसी मार्ग पर निरंतर अग्रसर हैं।मुनिश्री ने आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि आष्टा आगमन के बाद उन्होंने पूरे विश्व में धर्म का डंका बजाया और जैन धर्म की प्रभावना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया पूरे विश्व में क्रांतिकारी, कड़वे प्रवचन देने वाले संत के नाम से जाने लगे थे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि प्रतिदिन तीन बार सभी जीवों से “तस्य मिच्छामि दुक्कडम्” कहकर क्षमा याचना करें। उन्होंने कहा कि भक्त भले ही कभी रूठ जाएं, लेकिन भगवान की भक्ति कभी नहीं छूटनी चाहिए। आज कई लोग बिना चमत्कार देखे नमस्कार भी नहीं करते, किंतु आदिनाथ भगवान की दोनों प्रतिमाओं ने इस अतिशय तीर्थ क्षेत्र में स्वयं चमत्कार प्रकट कर नगर को पुण्य लाभ दिया है। इसके प्रभाव से मंदिर की सभी प्रतिमाएं भी चमत्कारी हो गई हैं।मुनिश्री साध्य सागर मुनिराज ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे विधान एवं अनुष्ठान में बैठने का दृढ़ भाव बनाएं।जिनेन्द्र भगवान की आराधना से ही मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। धर्म आराधना के पथ पर कभी पीछे न हटें और एकता के सूत्र में बंधकर जिन शासन की प्रभावना करें। यही सच्ची श्रद्धा और साधना का मार्ग है।
- Post by Jairam panti1
- भोपाल के 10 और 11 नंबर मार्केट के पास नगर निगम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां नर्मदा जल सप्लाई की मुख्य पाइपलाइन फूटने से हजारों लीटर पानी सड़कों पर बह गया। इलाका जलमग्न हो गया, सड़क पर पानी नदी की तरह बहने लगा, जिससे राहगीरों और दुकानदारों को भारी परेशानी हुई। 11 और 12 नंबर क्षेत्र में जल सप्लाई बाधित होने की आशंका है। सूचना के बावजूद निगम के जिम्मेदार अधिकारी देर तक मौके पर नहीं पहुंचे1
- बहुत काम का वीडियो है। देखें और अपने दोस्तों को और रिश्तेदारों को भी। वीडियो शेयर करें।1
- *जोन 7 से इस वक्त की बड़ी खबर भोपाल स्वच्छ अभियान का मजाक बना रहे हैं कुछ अधिकारी और कर्मचार गंदगी का लगा अंबार1
- Post by फूल सिहं बंजारा साब1
- Post by BALVAN SINGH BR2
- इंद्रा कॉलोनी, वार्ड 15 में स्वच्छता की मिसाल इंद्रा कॉलोनी, वार्ड क्रमांक 15 में उस स्थान को पूरी तरह स्वच्छ कर दिया गया है, जहां पहले लंबे समय से भारी मात्रा में कचरा जमा रहता था। हाल ही में चलाए गए विशेष सफाई अभियान के तहत जमा कचरे को हटाकर क्षेत्र को साफ-सुथरा बनाया गया, जिससे स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली है। इस दौरान पार्षद तेज सिंह राठौर ने मौके पर उपस्थित नागरिकों को समझाइश देते हुए कहा कि कचरा केवल कचरा गाड़ी में ही डालें, इधर-उधर बिल्कुल न फेंकें। उन्होंने बताया कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छता अभियान के अंतर्गत चलाया जा रहा है और इसका उद्देश्य शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाना है। प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ₹500 का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, जो जागरूक नागरिक कचरा फेंकने वालों का फोटो खींचकर प्रमाण सहित नगर पालिका को उपलब्ध कराएगा, उसे नगर पालिका द्वारा सम्मानित किया जाएगा। नगर पालिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि घर-घर कचरा संग्रहण वाहन नियमित रूप से भेजा जा रहा है। यदि किसी क्षेत्र में1
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- *इंदौर, एक्सीडेंट में पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी बोनट पर, दर्दनाक वीडियो*1