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हमारे यहां कुआं बहुत है आस पास के लोग नहीं दिखेंगे

1 hr ago
user_SAHEBCHAUDHRY Ji
SAHEBCHAUDHRY Ji
Video Creator तुरकौलिया, पूर्वी चंपारण, बिहार•
1 hr ago

हमारे यहां कुआं बहुत है आस पास के लोग नहीं दिखेंगे

More news from Purbi Champaran and nearby areas
  • ग्रेटर नोएडा में सड़क पर कानून की पिटाई — जब इंसाफ़ देर से मिले, तो भीड़ फ़ैसला करने लगती है #GreaterNoida #DeshrajNagar #LawAndOrder #PoliceFailure #JusticeDelayed #StreetViolence #ConstitutionUnderQuestion #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur
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    ग्रेटर नोएडा में सड़क पर कानून की पिटाई — जब इंसाफ़ देर से मिले, तो भीड़ फ़ैसला करने लगती है
#GreaterNoida #DeshrajNagar #LawAndOrder #PoliceFailure #JusticeDelayed #StreetViolence #ConstitutionUnderQuestion #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur
    user_Ankesh Thakur
    Ankesh Thakur
    News Anchor Kalyanpur, Purbi Champaran•
    11 hrs ago
  • कानपुर में प्रेमिका के घर छिपा बॉयफ्रेंड, लोहे के बक्से से निकलते पकड़ा गया, पुलिस हिरासत में कानपुर में बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए उसके घर पहुंचा। उसी वक्त गर्लफ्रेंड के घर वाले आ गए। छिपाने के लिए गर्लफ्रेंड ने बॉयफ्रेंड को लोहे के बक्से में बंद कर दिया। बक्से से आहट हुई तो उसे खुलवाया गया, तब बॉयफ्रेंड बाहर निकला। पुलिस ने हिरासत में लिया।
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    कानपुर में प्रेमिका के घर छिपा बॉयफ्रेंड, लोहे के बक्से से निकलते पकड़ा गया, पुलिस हिरासत में
कानपुर में बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए उसके घर पहुंचा। उसी वक्त गर्लफ्रेंड के घर वाले आ गए। छिपाने के लिए गर्लफ्रेंड ने बॉयफ्रेंड को लोहे के बक्से में बंद कर दिया। बक्से से आहट हुई तो उसे खुलवाया गया, तब बॉयफ्रेंड बाहर निकला। पुलिस ने हिरासत में लिया।
    user_SUDHANSU KUMAR
    SUDHANSU KUMAR
    Journalist नरकटिया, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    23 hrs ago
  • नौतन पुलिस व STF की संयुक्त कार्रवाई, 3.748 किलो गांजा के साथ चार तस्कर गिरफ्तार
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    नौतन पुलिस व STF की संयुक्त कार्रवाई, 3.748 किलो गांजा के साथ चार तस्कर गिरफ्तार
    user_Akash Kumar
    Akash Kumar
    Journalist नौतन, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    13 hrs ago
  • लाइटिंग लगाना है और
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    लाइटिंग लगाना है और
    user_Nitesh Kumar
    Nitesh Kumar
    मीनापुर, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    14 hrs ago
  • jhitkahi 1 number ward men road jhitkahi
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    jhitkahi 1 number ward men road jhitkahi
    user_Altaf Shaikh
    Altaf Shaikh
    ढाका, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    21 hrs ago
  • Post by SANJEEV KUMAR
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    Post by SANJEEV KUMAR
    user_SANJEEV KUMAR
    SANJEEV KUMAR
    पुरनहिया, शिवहर, बिहार•
    22 min ago
  • *कालाजार के चंगुल से मौत को हरा लाई चाँदनी,सरकारी अस्पताल बना डूबते का सहारा।* (रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) मोतिहारी, 24 जनवरी 2026 मोतिहारी:-निजी चिकित्सक ने जब कहा कि पौने दो लाख का प्रबंध करो तभी उपचार शुरू होगा, तो मुझे अपनी बेटी के चेहरे में साक्षात मौत नजर आने लगी थी। हम जैसे दिहाड़ी मजदूर के लिए इतनी बड़ी राशि एक सपने के समान है। मैं हार चुका था, लेकिन मेरी बेटी कालाजार से लड़ना चाहती थी।" मोतिहारी के तुरकौलिया प्रखंड के सपही गाँव निवासी लालबाबू मांझी जब ये बातें बताते हैं, तो उनकी वाणी में उस समय की लाचारी स्पष्ट झलकती है।यह कहानी दस वर्षीय चाँदनी की है, जिसने वर्ष 2024 में कालाजार जैसी घातक बीमारी से वह युद्ध लड़ा जो उसे भीतर से खोखला कर रहा था। जब टूटने लगा साहस:वर्ष 2024 के प्रारंभ में जब शीत ऋतु विदा ले रही थी, चाँदनी को हल्का बुखार रहने लगा। लालबाबू ने इसे साधारण समझकर स्थानीय स्तर पर कई जगह दिखाया, किंतु बुखार नहीं उतरा। सप्ताह बीतते गए, चाँदनी का शरीर सूखने लगा, भूख समाप्त हो गई और उसका मुख पीला पड़ने लगा। सबसे भयावह दृश्य यह था कि उस अबोध बच्ची का पेट कालाजार के कारण असामान्य रूप से फूलता जा रहा था। हताश पिता उसे गनौली के एक निजी अस्पताल ले गए। वहाँ जाँच के बाद डॉक्टर ने कहा - "इसे कालाजार है।" साथ ही एक ऐसा खर्च का लिस्ट थमा दिया जिसने लालबाबू के होश उड़ा दिए। निजी संस्थान में उपचार का खर्च 1 लाख 80 हजार रुपये बताया गया। बिना पैसे के उपचार असंभव था। लालबाबू अपनी बेटी को लेकर मौन भाव से घर लौट आए, यह मानकर कि अब सब नियति के हाथ में है।कालाजार के विरुद्ध सरकारी तंत्र की मुस्तैदी:निराशा के उस गहन अंधकार में आशा कार्यकर्ता नेरातून एक नई किरण बनकर सामने आईं। उन्होंने जब माता-पिता को विलाप करते देखा, तो तुरंत स्थिति संभाली। नेरातून जानती थीं कि कालाजार प्राणघातक है, किंतु इसका निःशुल्क और सटीक उपचार सरकारी व्यवस्था में उपलब्ध है। उन्होंने बिना विलंब किए परिवार को तुरकौलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चलने को मनाया।वहाँ उनकी भेंट स्वास्थ्य कर्मी ओमकारनाथ से हुई। जाँच में कालाजार की पुष्टि होते ही सरकारी तंत्र सक्रिय हुआ और 10 मई 2024 को रोगी वाहन (एम्बुलेंस) के माध्यम से चाँदनी को मोतिहारी सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।तीन दिन का उपचार और नया जीवन:सदर अस्पताल में चिकित्सकों की विशेष देखरेख में चाँदनी का कालाजार के विरुद्ध उपचार आरंभ हुआ। जिस उपचार के लिए निजी संस्थान लाखों की मांग कर रहे थे, वहां वह पूरी तरह निःशुल्क संपन्न हुआ। औषधियों के साथ-साथ उचित देखभाल का प्रभाव दिखने लगा और मात्र तीन दिनों के भीतर चाँदनी की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार हुआ। 13 मई 2024 को जब चाँदनी को अस्पताल से छुट्टी मिली, तो लालबाबू की आँखों में हर्ष के आंसू थे। जिस बेटी के जीवित बचने की आशा उन्होंने त्याग दी थी, वह कालाजार को मात देकर घर लौट रही थी।कालाजार से मुक्ति के बाद की सुखद तस्वीर:आज जनवरी 2026 है। चाँदनी अब केवल स्वस्थ ही नहीं है, बल्कि वह अपने टोले की सबसे ऊर्जावान बच्ची है। वह खेलती है और पाठशाला जाती है। सरकार ने न केवल उसका निःशुल्क उपचार किया, बल्कि पोषण के लिए उसे 7,100 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की।तुरकौलिया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अर्जुन गुप्ता बताते हैं, "चाँदनी का प्रकरण हमारे लिए एक उदाहरण है। कालाजार प्रभावित क्षेत्रों में, विशेषकर महादलित बस्तियों में, हम लगातार निगरानी रखते हैं। हमारा उद्देश्य केवल उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना है कि कालाजार से डरना नहीं, बल्कि लड़ना है और सरकारी अस्पताल पर विश्वास रखना है।" अब सपही गाँव का वह 'मांझी टोला' कालाजार के प्रति पूर्णतः जागरूक हो चुका है। लालबाबू और उनकी पत्नी अब गाँव के स्वास्थ्य दूत बन गए हैं। वे किसी के भी घर में ज्वर की आहट सुनते हैं, तो उसे निजी दुकानों पर नहीं, बल्कि सीधे सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाने की सलाह देते हैं। चाँदनी की मुस्कान आज इस सत्य की साक्षी है कि यदि सही समय पर सही परामर्श मिल जाए, तो कालाजार का अंत निश्चित है।
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    *कालाजार के चंगुल से मौत को हरा लाई चाँदनी,सरकारी अस्पताल बना डूबते का सहारा।*
(रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार)
मोतिहारी, 24 जनवरी 2026
मोतिहारी:-निजी चिकित्सक ने जब कहा कि पौने दो लाख का प्रबंध करो तभी उपचार शुरू होगा, तो मुझे अपनी बेटी के चेहरे में साक्षात मौत नजर आने लगी थी। हम जैसे दिहाड़ी मजदूर के लिए इतनी बड़ी राशि एक सपने के समान है। मैं हार चुका था, लेकिन मेरी बेटी कालाजार से लड़ना चाहती थी।" मोतिहारी के तुरकौलिया प्रखंड के सपही गाँव निवासी लालबाबू मांझी जब ये बातें बताते हैं, तो उनकी वाणी में उस समय की लाचारी स्पष्ट झलकती है।यह कहानी दस वर्षीय चाँदनी की है, जिसने वर्ष 2024 में कालाजार जैसी घातक बीमारी से वह युद्ध लड़ा जो उसे भीतर से खोखला कर रहा था।
जब टूटने लगा साहस:वर्ष 2024 के प्रारंभ में जब शीत ऋतु विदा ले रही थी, चाँदनी को हल्का बुखार रहने लगा। लालबाबू ने इसे साधारण समझकर स्थानीय स्तर पर कई जगह दिखाया, किंतु बुखार नहीं उतरा। सप्ताह बीतते गए, चाँदनी का शरीर सूखने लगा, भूख समाप्त हो गई और उसका मुख पीला पड़ने लगा। सबसे भयावह दृश्य यह था कि उस अबोध बच्ची का पेट कालाजार के कारण असामान्य रूप से फूलता जा रहा था।
हताश पिता उसे गनौली के एक निजी अस्पताल ले गए। वहाँ जाँच के बाद डॉक्टर ने कहा - "इसे कालाजार है।" साथ ही एक ऐसा खर्च का लिस्ट  थमा दिया जिसने लालबाबू के होश उड़ा दिए। निजी संस्थान में उपचार का खर्च 1 लाख 80 हजार रुपये बताया गया। बिना पैसे के उपचार असंभव था। लालबाबू अपनी बेटी को लेकर मौन भाव से घर लौट आए, यह मानकर कि अब सब नियति के हाथ में है।कालाजार के विरुद्ध सरकारी तंत्र की मुस्तैदी:निराशा के उस गहन अंधकार में आशा कार्यकर्ता नेरातून एक नई किरण बनकर सामने आईं। उन्होंने जब माता-पिता को विलाप करते देखा, तो तुरंत स्थिति संभाली। नेरातून जानती थीं कि कालाजार प्राणघातक है, किंतु इसका निःशुल्क और सटीक उपचार सरकारी व्यवस्था में उपलब्ध है। उन्होंने बिना विलंब किए परिवार को तुरकौलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चलने को मनाया।वहाँ उनकी भेंट स्वास्थ्य कर्मी ओमकारनाथ से हुई। जाँच में कालाजार की पुष्टि होते ही सरकारी तंत्र सक्रिय हुआ और 10 मई 2024 को रोगी वाहन (एम्बुलेंस) के माध्यम से चाँदनी को मोतिहारी सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।तीन दिन का उपचार और नया जीवन:सदर अस्पताल में चिकित्सकों की विशेष देखरेख में चाँदनी का कालाजार के विरुद्ध उपचार आरंभ हुआ। जिस उपचार के लिए निजी संस्थान लाखों की मांग कर रहे थे, वहां वह पूरी तरह निःशुल्क संपन्न हुआ। औषधियों के साथ-साथ उचित देखभाल का प्रभाव दिखने लगा और मात्र तीन दिनों के भीतर चाँदनी की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार हुआ। 13 मई 2024 को जब चाँदनी को अस्पताल से छुट्टी मिली, तो लालबाबू की आँखों में हर्ष के आंसू थे। जिस बेटी के जीवित बचने की आशा उन्होंने त्याग दी थी, वह कालाजार को मात देकर घर लौट रही थी।कालाजार से मुक्ति के बाद की सुखद तस्वीर:आज जनवरी 2026 है। चाँदनी अब केवल स्वस्थ ही नहीं है, बल्कि वह अपने टोले की सबसे ऊर्जावान बच्ची है। वह खेलती है और पाठशाला जाती है। सरकार ने न केवल उसका निःशुल्क उपचार किया, बल्कि पोषण के लिए उसे 7,100 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की।तुरकौलिया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अर्जुन गुप्ता बताते हैं, "चाँदनी का प्रकरण हमारे लिए एक उदाहरण है। कालाजार प्रभावित क्षेत्रों में, विशेषकर महादलित बस्तियों में, हम लगातार निगरानी रखते हैं। हमारा उद्देश्य केवल उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना है कि कालाजार से डरना नहीं, बल्कि लड़ना है और सरकारी अस्पताल पर विश्वास रखना है।"
अब सपही गाँव का वह 'मांझी टोला' कालाजार के प्रति पूर्णतः जागरूक हो चुका है। लालबाबू और उनकी पत्नी अब गाँव के स्वास्थ्य दूत बन गए हैं। वे किसी के भी घर में ज्वर की आहट सुनते हैं, तो उसे निजी दुकानों पर नहीं, बल्कि सीधे सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाने की सलाह देते हैं। चाँदनी की मुस्कान आज इस सत्य की साक्षी है कि यदि सही समय पर सही परामर्श मिल जाए, तो कालाजार का अंत निश्चित है।
    user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    Journalist पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    11 hrs ago
  • यूजीसी पर दो टूक सवाल: 2 दिन का अल्टीमेटम — क्लियर करो या परिणाम का इंतज़ार करो #UGC #UGCविवाद #छात्र_भविष्य #युवा_आक्रोश #शिक्षा_नीति #प्रधानमंत्री #राष्ट्रपति #मुख्यमंत्री #सांसद #विधायक #लोकतंत्र #जवाब_दो #2दिन_का_अल्टीमेटम #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur
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    यूजीसी पर दो टूक सवाल: 2 दिन का अल्टीमेटम — क्लियर करो या परिणाम का इंतज़ार करो
#UGC #UGCविवाद #छात्र_भविष्य #युवा_आक्रोश #शिक्षा_नीति #प्रधानमंत्री #राष्ट्रपति #मुख्यमंत्री #सांसद #विधायक #लोकतंत्र #जवाब_दो #2दिन_का_अल्टीमेटम #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur
    user_Ankesh Thakur
    Ankesh Thakur
    News Anchor Kalyanpur, Purbi Champaran•
    23 hrs ago
  • मीनापुर पीरमोहम्मदपुर
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    मीनापुर पीरमोहम्मदपुर
    user_Nitesh Kumar
    Nitesh Kumar
    मीनापुर, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    15 hrs ago
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