Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 31 *श्लोक:* स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि । धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते ॥ ३१ ॥ *अनुवाद:* क्षत्रिय होने के नाते अपने विशिष्ट धर्म का विचार करते हुए तुम्हें जानना चाहिए कि धर्म के लिए युद्ध करने से बढ़ कर तुम्हारे लिए अन्य कोई कार्य नहीं है। अत: तुम्हें संकोच करने की कोई आवश्यकता नहीं है। *तात्पर्य:* सामाजिक व्यवस्था के चार वर्णो में द्वितीय वर्ण उत्तम शासन के लिए है और क्षत्रिय कहलाता है। क्षत् का अर्थ है चोट खाया हुआ। जो क्षति से रक्षा करे वह क्षत्रिय कहलाता है (त्रायते—रक्षा प्रदान करना)। क्षत्रियों को वन में आखेट करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। क्षत्रिय जंगल में जाकर शेर को ललकारता और उससे आमने-सामने अपनी तलवार से लड़ता था। शेर की मृत्यु होने पर उसकी राजसी ढंग से अन्त्येष्टि की जाती थी। आज भी जयपुर रियासत के क्षत्रिय राजा इस प्रथा का पालन करते हैं। क्षत्रियों को विशेष रूप से ललकारने तथा मारने की शिक्षा दी जाती है क्योंकि कभी-कभी धार्मिक हिंसा अनिवार्य होती है। इसलिए क्षत्रियों को सीधे संन्यासाश्रम ग्रहण करने का विधान नहीं है। राजनीति में अहिंसा कूटनीतिक चाल हो सकती है, किन्तु यह कभी भी कारण या सिद्धान्त नहीं रही। धार्मिक संहिताओं में उल्लेख मिलता है— आहवेषु मिथोऽन्योन्यं जिघांसन्तो महीक्षित:। युद्धमाना: परं शक्त्या स्वर्गं यान्त्यपराङ्मुखा: ॥ यज्ञेषु पशवो ब्रह्मन् हन्यन्ते सततं द्विजै:। संस्कृता: किल मन्त्रैश्च तेऽपि स्वर्गमवाप्नुवन् ॥ “युद्ध में विरोधी ईर्ष्यालु राजा से संघर्ष करते हुए मरने वाले राजा या क्षत्रिय को मृत्यु के अनन्तर वे ही उच्चलोक प्राप्त होते हैं जिनकी प्राप्ति यज्ञाग्नि में मारे गये पशुओं को होती है।” अत: धर्म के लिए युद्धभूमि में वध करना तथा याज्ञिक अग्नि के लिए पशुओं का वध करना हिंसा कार्य नहीं माना जाता क्योंकि इसमें निहित धर्म के कारण प्रत्येक व्यक्ति को लाभ पहुँचता है और यज्ञ में बलि दिये गये पशु को एक स्वरूप से दूसरे में बिना विकास प्रक्रिया के ही तुरन्त मनुष्य का शरीर प्राप्त हो जाता है। इसी तरह युद्धभूमि में मारे गये क्षत्रिय यज्ञ सम्पन्न करने वाले ब्राह्मणों को प्राप्त होने वाले स्वर्गलोक में जाते हैं। स्वधर्म दो प्रकार का होता है। जब तक मनुष्य मुक्त नहीं हो जाता तब तक मुक्ति प्राप्त करने के लिए धर्म के अनुसार शरीर विशेष के कर्तव्य करने होते हैं। जब वह मुक्त हो जाता है तो उसका विशेष कर्तव्य या स्वधर्म आध्यात्मिक हो जाता है और देहात्मबुद्धि में नहीं रहता। जब तक देहात्मबुद्धि है तब तक ब्राह्मणों तथा क्षत्रियों के लिए स्वधर्म पालन अनिवार्य होता है। स्वधर्म का विधान भगवान् द्वारा होता है, जिसका स्पष्टीकरण चतुर्थ अध्याय में किया जायेगा। शारीरिक स्तर पर स्वधर्म को वर्णाश्रम-धर्म अथवा आध्यात्मिक बोध का प्रथम सोपान कहते हैं। वर्णाश्रम-धर्म अर्थात् प्राप्त शरीर के विशिष्ट गुणों पर आधारित स्वधर्म की अवस्था से मानवीय सभ्यता का शुभारम्भ होता है। वर्णाश्रम-धर्म के अनुसार किसी कार्य-क्षेत्र में स्वधर्म का निर्वाह करने से जीवन के उच्चतर पद को प्राप्त किया जा सकता है। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 9,शलोक 3. तत्रापि स्वजनसङ्गाच्च भृशमुद्विजमानो भगवतः कर्मबन्धविध्वंसनश्रवणस्मरणगुणविवरणचरणारविन्दयुगलं मनसा विदधदात्मनः प्रतिघातमाशङ्कमानो भगवदनुग्रहेणानुस्मृतस्वपूर्वजन्मावलिरात्मानमुन्मत्तजडान्धबधिरस्वरूपे ण दर्शयामास लोकस्य ॥ ३॥ भगवत्कृपा से भरत महाराज को अपने पूर्वजन्म की घटनाएँ स्मरण थीं । यद्यपि उन्हें ब्राह्मण का शरीर प्राप्त हुआ था, किन्तु वे अपने स्वजनों तथा मित्रों से, जो भक्त नहीं थे, अत्यन्त भयभीत थे । वे ऐसी संगति से सदैव सतर्क रहते, क्योंकि उन्हें भय था कि कहीं पुनः पथच्युत न हो जाँय । फलतः वे जनता के समक्ष उन्मत्त ( पागल ), जड़, अंधे तथा बहरे के रूप में प्रकट होते रहे जिससे दूसरे लोग उनसे बात करने की चेष्टा न करें। इस प्रकार उन्होंने कुसंगति से अपने को बचाए रखा। वे अपने अन्तःकरण में सदा भगवान् के चरणकमल का ध्यान धरते और उनके गुणों का जप करते रहते जो मनुष्य को कर्म - बन्धन से बचाने वाला है । इस प्रकार उन्होंने अपने को अभक्त संगियों के आक्रमण से बचाए रखा। प्रकृति के गुणों के संसर्ग से प्रत्येक जीव विभिन्न कर्मों से बँधा हुआ है। जैसाकि भगवद्गीता (१३.२२) में कथन है- कारणं गुणसंगोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु - यह प्रकृति के संग के कारण है। इस तरह वह विभिन्न योनियों में उत्तम - अधम योनियाँ प्राप्त करता है । हम अपने कर्मों के अनुसार चौरासी लाख योनियों में से विभिन्न प्रकार के शरीर प्राप्त करते हैं । कर्मणा-दैव-नेत्रेण—हम तीन गुणों से दूषित प्रकृति के वश में रह कर कार्य करते हैं और इस प्रकार से हमें ईश्वर की आज्ञा से एक विशेष प्रकार का शरीर प्राप्त होता है । यही कर्म-बन्ध कहलाता है । इस कर्म-बन्ध से बाहर निकलने के लिए भक्ति में संलग्न होने की आवश्यकता होती है । तब मनुष्य पर प्रकृति के गुणों का प्रभाव नहीं पड़ता । भगवद्गीता के अनुसार (१४.२६)— मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते । स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥ जो पूर्णरूप से भक्तियोग के परायण है, जो किसी भी स्थिति में उससे डिगता नहीं वह अविलम्ब त्रिगुणमयी माया का लंघन करके ब्रह्म पद को प्राप्त होता है । भौतिक गुणों के प्रति निश्चेष्ट बनने का उपाय है अपने को भक्ति में लगाना - श्रवणं कीर्तनं विष्णोः । यही जीवन की सिद्धि है। महाराज भरत ब्राह्मण रूप में जन्म लेकर ब्राह्मण कर्तव्यों में रुचि नहीं दिखाते थे, परन्तु वे भीतर ही भीतर शुद्ध वैष्णव रहकर ईश्वर के चरणकमल का निरन्तर चिन्तन करते रहे । भगवद्गीता का उपदेश है— मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु । यही एकमात्र विधि है, जिसके द्वारा बारम्बार जन्म- मरण के भय से बचा जा सकता है । परमात्मा दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टर है और प्रार्थना दुनिया की सबसे बड़ी दवाई सुनो एक पते कि बात बताता हूँ, हमारे दिमाग़ में जो चीज़ लंबे समय से चल रही होती है, ठीक वैसे ही हमारी ज़िंदगी भी बनने लगती है…! ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में अच्छे काम करें और बुराई को दूर करें. नां श्रृंगारों की चकाचौंध से नां भक्ति के झूठे दावों से मेरी प्रभु तो रीझ जाते है केवल मन के सच्चे भावों से जय सीताराम पर-हित एक भारतीय व्यक्ति लंदन में अपने एक मित्र के घर ठहरा हुआ था।उसका मालिक दूध बांटता था। एक दिन उसकी लड़की बहुत उदास थी। भारतीय मित्र ने पूछा,'बहन! आज इतनी उदास क्यों हो?' वह बोली,'क्या करूँ, दूध की सप्लाई तो पूरी करनी है और मेरे पास आज दूध कम है। बड़ी चिंता हो रही है कि मैं सप्लाई कैसे कर पाऊंगी?' उसने कहा,'यह इतनी चिंतित और इतनी उदास होने की बात नहीं है। वैसे भी तुम्हारे पास तो इतना दूध है,थोड़ा-सा पानी मिला दो,तुम्हारी समस्या खत्म हो जाएगी। यह सुनते ही वह अपने पिता के पास जाकर बोली,'किस दुष्ट को आपने घर में ठहराया है?वह तो ऐसी बुरी सलाह देता है कि दूध में पानी मिला दो। क्या मैं ऐसा कर अपने राष्ट्र के नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति अन्याय करूँ? ऐसी सलाह देने वाले को घर से निकाल दो।' हद से ज्यादा स्वार्थीपन और एक -दूसरे से आगे निकलने की होड़ में कई बार लोगों को यह पता नहीं चलता कि वे कब भ्रष्ट,अमानवीय और अराजक हो जाते हैं। सीख-: अपने स्वार्थों के लिए दूसरों का अहित न करें।जय जय श्री राधे 🙏🌹 *सेंधा नमक है सेहत के लिए सबसे बेहतर* 1 सेंधा नमक में लगभग 65 प्रकार के खनिज लवण पाए जाते हैं, जो कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार होते हैं। वहीं इसका एक बढ़िया फायदा यह है कि यह पाचन के लिए फायदेमंद है। चूंकि यह पाचक रसों का निर्माण करता है, इसलिए कब्ज भी दूर करने में सहायक है। 2 यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक है, जिससे दिल के दौरे की संभावना को भी कम करता है। इसके अलावा हाई ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में भी सेंधा नमक फायदेमंद होता है। 3 तनाव अधिक होने पर सेंधा नमक का सेवन करना लाभकारी होगा, यह सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन्स का स्तर शरीर में बनाए रखता है, जो तनाव से लड़ने में आपकी मदद करते हैं। 4 मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन हो, या फिर हड्डयों से जुड़ी कोई समस्या, सेंधा नमक का सेवन करने से आपकी यह समस्या धीरे-धीरे पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगी। 5 पथरी यानि स्टोन हो जाने पर, सेंधा नमक और नींबू को पानी में मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों में पथरी गलने लगती है। वहीं साइनस के दर्द को कम करने में ही सेंधा नमक फायदेमंद है। 6 डाइबिटीज और अस्थमा व आर्थराइटिस के मरीजों के लिए सेंधा नमक का सेवन काफी लाभदायक होता है। यह शरीर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में भी फायदेमंद है। 7 अनिद्रा होने पर सेंधा नमक असरकारी है, वहीं त्वचा रोगों एवं दंत रोगों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। मोटापा कम करने के लिए भी सेंधा नमक का प्रयोग करना बेहतर तरीका है।" जय श्री कृष्ण 🙏🌹
Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 31 *श्लोक:* स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि । धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते ॥ ३१ ॥ *अनुवाद:* क्षत्रिय होने के नाते अपने विशिष्ट धर्म का विचार करते हुए तुम्हें जानना चाहिए कि धर्म के लिए युद्ध करने से बढ़ कर तुम्हारे लिए अन्य कोई कार्य नहीं है। अत: तुम्हें संकोच करने की कोई आवश्यकता नहीं है। *तात्पर्य:* सामाजिक व्यवस्था के चार वर्णो में द्वितीय वर्ण उत्तम शासन के लिए है और क्षत्रिय कहलाता है। क्षत् का अर्थ है चोट खाया हुआ। जो क्षति से रक्षा करे वह क्षत्रिय कहलाता है (त्रायते—रक्षा प्रदान करना)। क्षत्रियों को वन में आखेट करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। क्षत्रिय जंगल में जाकर शेर को ललकारता और उससे आमने-सामने अपनी तलवार से लड़ता था। शेर की मृत्यु होने पर उसकी राजसी ढंग से अन्त्येष्टि की जाती थी। आज भी जयपुर रियासत के क्षत्रिय राजा इस प्रथा का पालन करते हैं। क्षत्रियों को विशेष रूप से ललकारने तथा मारने की शिक्षा दी जाती है क्योंकि कभी-कभी धार्मिक हिंसा अनिवार्य होती है। इसलिए क्षत्रियों को सीधे संन्यासाश्रम ग्रहण करने का विधान नहीं है। राजनीति में अहिंसा कूटनीतिक चाल हो सकती है, किन्तु यह कभी भी कारण या सिद्धान्त नहीं रही। धार्मिक संहिताओं में उल्लेख मिलता है— आहवेषु मिथोऽन्योन्यं जिघांसन्तो महीक्षित:। युद्धमाना: परं शक्त्या स्वर्गं यान्त्यपराङ्मुखा: ॥ यज्ञेषु पशवो ब्रह्मन् हन्यन्ते सततं द्विजै:। संस्कृता: किल मन्त्रैश्च तेऽपि स्वर्गमवाप्नुवन् ॥ “युद्ध में विरोधी ईर्ष्यालु राजा से संघर्ष करते हुए मरने वाले राजा या क्षत्रिय को मृत्यु के अनन्तर वे ही उच्चलोक प्राप्त होते हैं जिनकी प्राप्ति यज्ञाग्नि में मारे गये पशुओं को होती है।” अत: धर्म के लिए युद्धभूमि में वध करना तथा याज्ञिक अग्नि के लिए पशुओं का वध करना हिंसा कार्य नहीं माना जाता क्योंकि इसमें निहित धर्म के कारण प्रत्येक व्यक्ति को लाभ पहुँचता है और यज्ञ में बलि दिये गये पशु को एक स्वरूप से दूसरे में बिना विकास प्रक्रिया के ही तुरन्त मनुष्य का शरीर प्राप्त हो जाता है। इसी तरह युद्धभूमि में मारे गये क्षत्रिय यज्ञ सम्पन्न करने वाले ब्राह्मणों को प्राप्त होने वाले स्वर्गलोक में जाते हैं। स्वधर्म दो प्रकार का होता है। जब तक मनुष्य मुक्त नहीं हो जाता तब तक मुक्ति प्राप्त करने के लिए धर्म के अनुसार शरीर विशेष के कर्तव्य करने होते हैं। जब वह मुक्त हो जाता है तो उसका विशेष कर्तव्य या स्वधर्म आध्यात्मिक हो जाता है और देहात्मबुद्धि में नहीं रहता। जब तक देहात्मबुद्धि है तब तक ब्राह्मणों तथा क्षत्रियों के लिए स्वधर्म पालन अनिवार्य होता है। स्वधर्म का विधान भगवान् द्वारा होता है, जिसका स्पष्टीकरण चतुर्थ अध्याय में किया जायेगा। शारीरिक स्तर पर स्वधर्म को वर्णाश्रम-धर्म अथवा आध्यात्मिक बोध का प्रथम सोपान कहते हैं। वर्णाश्रम-धर्म अर्थात् प्राप्त शरीर के विशिष्ट गुणों पर आधारित स्वधर्म की अवस्था से मानवीय सभ्यता का शुभारम्भ होता है। वर्णाश्रम-धर्म के अनुसार किसी कार्य-क्षेत्र में स्वधर्म का निर्वाह करने से जीवन के उच्चतर पद को प्राप्त किया जा सकता है। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 9,शलोक 3. तत्रापि स्वजनसङ्गाच्च भृशमुद्विजमानो भगवतः कर्मबन्धविध्वंसनश्रवणस्मरणगुणविवरणचरणारविन्दयुगलं मनसा विदधदात्मनः प्रतिघातमाशङ्कमानो भगवदनुग्रहेणानुस्मृतस्वपूर्वजन्मावलिरात्मानमुन्मत्तजडान्धबधिरस्वरूपे ण दर्शयामास लोकस्य ॥ ३॥ भगवत्कृपा से भरत महाराज को अपने पूर्वजन्म की घटनाएँ स्मरण थीं । यद्यपि उन्हें ब्राह्मण का शरीर प्राप्त हुआ था, किन्तु वे अपने स्वजनों तथा मित्रों से, जो भक्त नहीं थे, अत्यन्त भयभीत थे । वे ऐसी संगति से सदैव सतर्क रहते, क्योंकि उन्हें भय था कि कहीं पुनः पथच्युत न हो जाँय । फलतः वे जनता के समक्ष उन्मत्त ( पागल ), जड़, अंधे तथा बहरे के रूप में प्रकट होते रहे जिससे दूसरे लोग उनसे बात करने की चेष्टा न करें। इस प्रकार उन्होंने कुसंगति से अपने को बचाए रखा। वे अपने अन्तःकरण में सदा भगवान् के चरणकमल का ध्यान धरते और उनके गुणों का जप करते रहते जो मनुष्य को कर्म - बन्धन से बचाने वाला है । इस प्रकार उन्होंने अपने को अभक्त संगियों के आक्रमण से बचाए रखा। प्रकृति के गुणों के संसर्ग से प्रत्येक जीव विभिन्न कर्मों से बँधा हुआ है। जैसाकि भगवद्गीता (१३.२२) में कथन है- कारणं गुणसंगोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु - यह प्रकृति के संग के कारण है। इस तरह वह विभिन्न योनियों में उत्तम - अधम योनियाँ प्राप्त करता है । हम अपने कर्मों के अनुसार चौरासी लाख योनियों में से विभिन्न प्रकार के शरीर प्राप्त करते हैं । कर्मणा-दैव-नेत्रेण—हम तीन गुणों से दूषित प्रकृति के वश में रह कर कार्य करते हैं और इस प्रकार से हमें ईश्वर की आज्ञा से एक विशेष प्रकार का शरीर प्राप्त होता है । यही कर्म-बन्ध कहलाता है । इस कर्म-बन्ध से बाहर निकलने के लिए भक्ति में संलग्न होने की आवश्यकता होती है । तब मनुष्य पर प्रकृति के गुणों का प्रभाव नहीं पड़ता । भगवद्गीता के अनुसार (१४.२६)— मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते । स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥ जो पूर्णरूप से भक्तियोग के परायण है, जो किसी भी स्थिति में उससे डिगता नहीं वह अविलम्ब त्रिगुणमयी माया का लंघन करके ब्रह्म पद को प्राप्त होता है । भौतिक गुणों के प्रति निश्चेष्ट बनने का उपाय है अपने को भक्ति में लगाना - श्रवणं कीर्तनं विष्णोः । यही जीवन की सिद्धि है। महाराज भरत ब्राह्मण रूप में जन्म लेकर ब्राह्मण कर्तव्यों में रुचि नहीं दिखाते थे, परन्तु वे भीतर ही भीतर शुद्ध वैष्णव रहकर ईश्वर के चरणकमल का निरन्तर चिन्तन करते रहे । भगवद्गीता का उपदेश है— मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु । यही एकमात्र विधि है, जिसके द्वारा बारम्बार जन्म- मरण के भय से बचा जा सकता है । परमात्मा दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टर है और प्रार्थना दुनिया की सबसे बड़ी दवाई सुनो एक पते कि बात बताता हूँ, हमारे दिमाग़ में जो चीज़ लंबे समय से चल रही होती है, ठीक वैसे ही हमारी ज़िंदगी भी बनने लगती है…! ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में अच्छे काम करें और बुराई को दूर करें. नां श्रृंगारों की चकाचौंध से नां भक्ति के झूठे दावों से मेरी प्रभु तो रीझ जाते है केवल मन के सच्चे भावों से जय सीताराम पर-हित एक भारतीय व्यक्ति लंदन में अपने एक मित्र के घर ठहरा हुआ था।उसका मालिक दूध बांटता था। एक दिन उसकी लड़की बहुत उदास थी। भारतीय मित्र ने पूछा,'बहन! आज इतनी उदास क्यों हो?' वह बोली,'क्या करूँ, दूध की सप्लाई तो पूरी करनी है और मेरे पास आज दूध कम है। बड़ी चिंता हो रही है कि मैं सप्लाई कैसे कर पाऊंगी?' उसने कहा,'यह इतनी चिंतित और इतनी उदास होने की बात नहीं है। वैसे भी तुम्हारे पास तो इतना दूध है,थोड़ा-सा पानी मिला दो,तुम्हारी समस्या खत्म हो जाएगी। यह सुनते ही वह अपने पिता के पास जाकर बोली,'किस दुष्ट को आपने घर में ठहराया है?वह तो ऐसी बुरी सलाह देता है कि दूध में पानी मिला दो। क्या मैं ऐसा कर अपने राष्ट्र के नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति अन्याय करूँ? ऐसी सलाह देने वाले को घर से निकाल दो।' हद से ज्यादा स्वार्थीपन और एक -दूसरे से आगे निकलने की होड़ में कई बार लोगों को यह पता नहीं चलता कि वे कब भ्रष्ट,अमानवीय और अराजक हो जाते हैं। सीख-: अपने स्वार्थों के लिए दूसरों का अहित न करें।जय जय श्री राधे 🙏🌹 *सेंधा नमक है सेहत के लिए सबसे बेहतर* 1 सेंधा नमक में लगभग 65 प्रकार के खनिज लवण पाए जाते हैं, जो कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार होते हैं। वहीं इसका एक बढ़िया फायदा यह है कि यह पाचन के लिए फायदेमंद है। चूंकि यह पाचक रसों का निर्माण करता है, इसलिए कब्ज भी दूर करने में सहायक है। 2 यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक है, जिससे दिल के दौरे की संभावना को भी कम करता है। इसके अलावा हाई ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में भी सेंधा नमक फायदेमंद होता है। 3 तनाव अधिक होने पर सेंधा नमक का सेवन करना लाभकारी होगा, यह सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन्स का स्तर शरीर में बनाए रखता है, जो तनाव से लड़ने में आपकी मदद करते हैं। 4 मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन हो, या फिर हड्डयों से जुड़ी कोई समस्या, सेंधा नमक का सेवन करने से आपकी यह समस्या धीरे-धीरे पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगी। 5 पथरी यानि स्टोन हो जाने पर, सेंधा नमक और नींबू को पानी में मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों में पथरी गलने लगती है। वहीं साइनस के दर्द को कम करने में ही सेंधा नमक फायदेमंद है। 6 डाइबिटीज और अस्थमा व आर्थराइटिस के मरीजों के लिए सेंधा नमक का सेवन काफी लाभदायक होता है। यह शरीर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में भी फायदेमंद है। 7 अनिद्रा होने पर सेंधा नमक असरकारी है, वहीं त्वचा रोगों एवं दंत रोगों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। मोटापा कम करने के लिए भी सेंधा नमक का प्रयोग करना बेहतर तरीका है।" जय श्री कृष्ण 🙏🌹
- बाड़मेर में मोबाइल में युवती की फोटो रखने के आरोप में युवक के साथ मारपीट की गई। मुंह काला करने के बाद उसे यूरिन पिलाया गया और गंदगी खिलाई गई। बाल भी काटे। मामले में पुलिस ने मंगलवार को दो आरोपियों को डिटेन किया। वहीं अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। घटना 26 मार्च को दोपहर एक बजे शिव थाना क्षेत्र में हुई। आरोपियों ने घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया था, जो अब सामने आया है। बाड़मेर एएसपी नितेश आर्य ने बताया- युवक पर बहन-बेटियों की फोटो मोबाइल में रखने का आरोप लगाते हुए कुछ लोगों ने पकड़ा। मारपीट करने के साथ ही उसका मुंह काला किया गया। यूरिन पिलाया। अपशिष्ट (गंदगी) खिलाया।1
- जयपुर के कालवाड़ रोड पर एक बेकाबू ट्रैक्टर चालक ने शराब के नशे में सड़क पर खड़ी और चलती गाड़ियों को टक्कर मार दी। जिससे आसपास के इलाके में अफरातफरी मच गई। हादसे में एक स्विफ्ट डिजायर कार सहित कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैक्टर तेज रफ्तार में था और चालक ने शराब पी रखी थी जिससे ट्रैक्टर चालक ने नियंत्रण खो दिया। जिसके बाद उसने एक के बाद एक कई गाड़ियों को टक्कर मार दी। हादसे के तुरंत बाद चालक मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। दुर्घटना के कारण कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा, जिससे सड़क पर लंबा जाम लग गया। वहीं पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया और यातायात को फिर से सुचारू कराया। फिलहाल पुलिस फरार चालक की तलाश में जुटी है और मामले की जांच जारी है।1
- अड़ाणी द्वारा लीपापोती क़र बनाये गए कवाई के अस्पताल की हालत जर जर है। एक बेड खाली नहीं होता 3 मरीज पहले ही तैयार बैठे होते है। गर्मी से हाल बेहाल है और अस्पताल के सूत्रों से जानकारी मिली है अडाणी वालो ने कुछ AC और पंखे भिजवा रखे है लेकिन अख़बार मे फोटो का इंतजार क़र रहे है 2 माह से। *उसके बाद लगाए जाएगे तब तक गर्मी ही निकल जाएगी। जांच मशीन की मांग करी तो ऐसी मशीन दि है अड़ाणी ने के दुगना समय जांच मे लग रहा है। हजारों समस्याए और भी है।1
- राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस पर जयपुर के अल्बर्ट हॉल संग्रहालय परिसर में भव्य बैंड प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम आयोजित हुआ। देशभक्ति धुनों के बीच हुए ड्रोन शो और आकर्षक आतिशबाज़ी ने पूरे माहौल को यादगार बना दिया और दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। पुलिस बैंड के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं, वहीं बांसुरी की मधुर धुन ने कार्यक्रम में अलग आकर्षण जोड़ा। ढोल की थाप पर हुई सांस्कृतिक प्रस्तुति ने आयोजन को और भव्य रूप दिया। बड़ी संख्या में शहरवासियों और पर्यटकों ने इस शानदार आयोजन का आनंद लिया। #राजस्थान_पुलिस_स्थापना_दिवस #RajasthanPolice #DroneShow #Fireworks #AlbertHallJaipur #JaipurEvents4
- #जयपुर शाहपुरा के अमरसर मे स्थित संचालित अवैध एट भट्टा उद्योग का मामला गरमाया ग्रामीण ने बताया कि 91की कार्रवाई करने के बाद भी अभी तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया1
- 1. राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों की अनुपालना में श्मशान भूमि पर बने आलीशान फार्म हाउस को प्रशासन ने किया ध्वस्त। बर्डोद। नपा क्षेत्र के ग्राम कांकरा बर्डोद में सोमवार को सुबह राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों की अनुपालना में बहरोड़ उपखंड के एसडीएम रामकिशोर मीणा, तहसीलदार राजेन्द्र मोहन के नेतृत्व में आराजी खसरा नंबर 3666 गैर मुमकिन मरघट पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई। सुबह आठ बजे शुरू हुई अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही दोपहर करीब डेढ बजे तक चली। जिसमे प्रशासन ने मौके पर बनें आलीशान फार्म हाउस, सहित मौके पर बनें अन्य कच्चे पक्के निर्माण को दो तीन जेसीबी मशीनों की सहयाता से ध्वस्त करते हुए समीप के प्रदीप कुमार, रतन लाल के मकानों के कुछ हिस्से को ध्वस्त किया। वहीं मौके पर अतिक्रमण की कार्यवाही के दौरान पर्यावरण संरक्षण को नजरंदाज करते हुए अनेक हरे पेड़ों को जड से हटा दिया गया। अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के दौरान मकान मालिक अतिक्रमण की कार्यवाही नहीं करने की बात कहते हुए कार्यवाही नहीं करने की गुहार लगाते रहे। वहीं प्रशासनिक अधिकारी कोर्ट के निर्देश की बात कहते नजर आए। कार्यवाही के दौरान ये लोग मौजूद रहे नायब तहसीलदार प्रवीण कुमार, नीमराना एडीशनल एसपी सुरेश खींचीं, नीमराना डीएसपी पारूल गुप्ता, बहरोड़ डीएसपी सचिन शर्मा, बहरोड़ थाना अंकित सामरिया, सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार, शाहजहांपुर थाना प्रभारी प्रकिता, सब इंस्पेक्टर मनोहर लाल, बहरोड़ नगर परिषद आयुक्त नूर मोहम्मद, बर्डोद नपा अधिषाशी अधिकारी राहुल अग्रवाल, कानूनगा द्वारका प्रसाद, हल्का पटवारी हंसराज, सहित उपखंड के करीब दो दर्जन से अधिक हल्का पटवारी, भू अभिलेख निरिक्षक, सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा। अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के दौरान मिडिया का प्रवेश वर्जित रखा- मौके पर बनें फार्म हाउस पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के दौरान प्रशासनिक अधिकारीयों ने मिडियाकर्मीयो का प्रवेश वर्जित रखा। फार्म हाउस पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के बाद मिडिया को अन्दर जाने दिया। वहीं अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के सम्बन्ध में प्रशासनिक अधिकारी मिडिया के सवालों से बचते रहे। अतिक्रमण करने वाले लोगों ने लगाए आरोप - कार्यवाही से पिडित पिंकी देवी, उनकी सास सरोज देवी, और ससुर रोहिताश्व ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही से पूर्व हमें कोई नोटिस नहीं दिया। साथ ही अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को टारगेट बता कर कार्यवाही करने की बात कही। साथ मौके से पचास हजार रू, एक सोने की चैन गायब होने का आरोप लगाया। कार्यवाही से पूर्व सामान निकालकर, पुराने घर रखा- अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही से पूर्व प्रशासनिक अधिकारीयों के सख्त निर्देशों पर नपा कर्मचारियों के साथ मिलकर मकान से सामान हटवाकर पुराने घर शिफ्ट किया।4
- 🏨 Hotel Amarsar Palace – अमरसर 📍 लोकेशन: अमरसर–कालकी माता रोड, अमरसर (राजस्थान)1
- श्रीपुरा कोली पाड़ा कोर्ट के बालाजी धाम में सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ का भव्य आयोजन।। श्रीपुरा कोली पाड़ा कोर्ट स्थित बालाजी धाम में हिंदुशिवसेना द्वारा सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद सामूहिक रूप से 1050 हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। भक्तों की श्रद्धा और उत्साह देखते ही बनता था। आयोजन स्थल पर “जय श्री राम” और “जय बजरंग बली” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के धार्मिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा, एकता और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किए जाते हैं। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण भी किया गया। हिंदू शिवसेना मंडल संगठन प्रमुख पूजा सिंह के नेतृत्व में यह प्रोग्राम रखा गया ..1