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विनेश फोगाट का चौंकाने वाला खुलासा रहा आज का- विनेश ने पहली बार लोगों को बताया है कि - जिन 6 महिला पहलवानों से यौन शोषण का आरोप है, उसमे से एक वो खुद भी हैं।
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विनेश फोगाट का चौंकाने वाला खुलासा रहा आज का- विनेश ने पहली बार लोगों को बताया है कि - जिन 6 महिला पहलवानों से यौन शोषण का आरोप है, उसमे से एक वो खुद भी हैं।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- "रामपुर बाघेलान सड़क दुर्घटना में फुटबॉल खिलाड़ी अंशुमान सिंह घायल सतना जिले के रामपुर बाघेलान हनुमानगंज वार्ड क्रमांक एक निवासी फुटबॉल खिलाड़ी,, "सतना से ऋषिकेश त्रिपाठी की स्पेशल रिपोर्ट,, "खबरे तथा विज्ञापन के लिए संपर्क करें_75809217181
- रीवा सिनेमा चौराहा फ्लावर1
- माँ शारदा शक्तिपीठ मैहर आज दिनांक 03,,05,,2026,, दिन रविवार के प्रातःकालीन दर्शन आरती3
- Post by Prakash Pathak Satna1
- *अकहा गाव के नजदीक अज्ञात वाहन की ठोकर से बाइक सवार हुआ घायल।* रविवार की शाम अज्ञात वाहन की ठोकर से बाइक सवार युवक गंभीर रूप से हुआ घायल।मिली जानकारी अनुसार अकहा गाव में डिस्पेंसरी चलाने वाले डॉक्टर राजेश कुमार सिंगरौल देवार गाव एक मरीज का इलाज करने के उपरांत वापस अपने दो पहिया वाहन से अकहा गाव वापस आ रहे थे।इस दौरान सतना उंचेहरा मॉर्ग के मध्य अकहा गाव में अज्ञात वाहन की ठोकर लगने से वह गंभीर रूप से घायल हुए है।जिन्हें परिजनों ने निजी वाहन में लाद आनन फानन इलाज वास्ते शिविल अस्पताल उंचेहरा में किया भर्ती।जहा से वह प्राथमिक उपचार उपरांत आगे इलाज वास्ते जिला अस्पताल सतना हुए रेफर।मिली जानकारी अनुसार कंधे व सर एवं कान में गंभीर चोटें आई है।1
- *अमरपाटन में शराब दुकान बनी अव्यवस्था का केंद्र, नियम ताक पर – जनता बेहाल* अमरपाटन। नगर की एकमात्र शराब दुकान इन दिनों सिर्फ बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि अव्यवस्था और लापरवाही की मिसाल बन चुकी है। यहां न तो व्यवस्था का पालन हो रहा है और न ही ग्राहकों की सुविधा का कोई ध्यान रखा जा रहा है। दुकान पर पहुंचने वाले लोगों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया अव्यवस्थित है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं, जिससे धक्का-मुक्की और विवाद आम बात हो गई है। कई बार हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि आसपास का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुकान संचालक अपने हिसाब से नियम चला रहा है। न तो किसी प्रकार की निगरानी नजर आती है और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचता है। इससे यह धारणा बनती जा रही है कि सब कुछ खुली छूट के साथ चल रहा है। दुकान के बाहर की स्थिति और भी चिंताजनक है। सड़क तक फैली भीड़ के कारण रोजाना यातायात प्रभावित हो रहा है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर इस अव्यवस्था के बीच निकलने को मजबूर हैं। शाम के समय स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो जाती है। नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल व्यवस्था सुधारी जाए, भीड़ नियंत्रण के उपाय किए जाएं और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो, ताकि शहर में कानून व्यवस्था और आमजन की सुविधा बनी रह सके।1
- Post by Abhishek Pandey1
- *🔥मध्यप्रदेश तक🔥* *मैहर सिविल अस्पताल में विशेष सफाई अभियान, कलेक्टर के निर्देश पर नगर पालिका सक्रिय* मैहर मे विगत दिनों कलेक्टर द्वारा मैहर सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया गया था, जिसमें अस्पताल की सफाई व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई गई थी तथा संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में कलेक्टर के निर्देशन एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी के मार्गदर्शन में मैहर सिविल अस्पताल में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। नगर पालिका की टीम द्वारा पूरे अस्पताल परिसर की व्यापक सफाई एवं धुलाई कराई गई। सफाई प्रभारी संजय चौरसिया के नेतृत्व में टीम गठित कर अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित किया गया। अभियान के दौरान वार्ड, परिसर और अन्य स्थानों की विशेष रूप से साफ-सफाई सुनिश्चित की गई। नगर पालिका प्रशासन ने बताया कि भविष्य में भी सफाई व्यवस्था को लेकर नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि मरीजों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। अगर चाहो तो मैं इसे हेडलाइन, बघेली टोन या और ज्यादा दमदार/आक्रामक खबर में भी बदल सकता हूँ।3
- मैहर सिविल अस्पताल में 108 सेवा न होने का बहाना, मरीज को प्राइवेट वाहन से सतना रेफर किया गया मैहर। मैहर सिविल अस्पताल में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, गंभीर हालत में पहुंचे एक मरीज को अस्पताल से यह कहकर टाल दिया गया कि 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में परिजनों को मरीज को प्राइवेट वाहन से सतना रेफर कराना पड़ा।परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासक ने वैकल्पिक व्यवस्था करने के बजाय सीधे हाथ खड़े कर दिए, जबकि आपातकालीन स्थिति में मरीज को तत्काल एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। इस लापरवाही से मरीज की जान को खतरा बढ़ सकता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है अक्सर 108 एंबुलेंस के नाम पर उपलब्ध नही का जवाब देकर मरीजों को निजी साधनों का सहारा लेने पर मजबूर किया जाता है। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसी घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए जांच कराए और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।1