इंदौर जिला न्यायालय में एक बस चालक ने बस मालिक का रूप धारण कर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन दस्तावेजों की जांच के दौरान उसकी यह धोखाधड़ी पकड़ी गई। कोर्ट ने जब कागजात खंगाले, तब पता चला कि जो व्यक्ति खुद को वाहन मालिक बता रहा था, वह दरअसल बस का चालक है। इसके बाद कोर्ट ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। यह घटना तब सामने आई जब बस चालक अनिल सीताराम, बस मालिक शिवनारायण बनकर बस को सुपुर्दगीनामे पर लेने के लिए अदालत के समक्ष पेश हुआ। कोर्ट को उसके दावों पर संदेह हुआ और जब अन्य दस्तावेज चैक किए गए, तो पूरा मामला खुल गया। जिला न्यायालय के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, एमजी रोड थाना पुलिस ने धोखाधड़ी करने वाले इस बस चालक को गिरफ्तार कर लिया है। थाना प्रभारी विजेंद्र सिसौदिया के अनुसार, पुलिस अब इस व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है। इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायालय में धोखेबाजों के लिए कोई जगह नहीं है, और जिसने भी कूटनीति अपनाकर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की, उसे अनिल की तरह ही जेल की हवा खानी पड़ेगी।
इंदौर जिला न्यायालय में एक बस चालक ने बस मालिक का रूप धारण कर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन दस्तावेजों की जांच के दौरान उसकी यह धोखाधड़ी पकड़ी गई। कोर्ट ने जब कागजात खंगाले, तब पता चला कि जो व्यक्ति खुद को वाहन मालिक बता रहा था, वह दरअसल बस का चालक है। इसके बाद कोर्ट ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। यह घटना तब सामने आई जब बस चालक अनिल सीताराम, बस मालिक शिवनारायण बनकर बस को सुपुर्दगीनामे पर लेने के लिए अदालत के समक्ष पेश हुआ। कोर्ट को उसके दावों पर संदेह हुआ और जब अन्य दस्तावेज चैक किए गए, तो पूरा मामला खुल गया। जिला न्यायालय के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, एमजी रोड थाना पुलिस ने धोखाधड़ी करने वाले इस बस चालक को गिरफ्तार कर लिया है। थाना प्रभारी विजेंद्र सिसौदिया के अनुसार, पुलिस अब इस व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है। इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायालय में धोखेबाजों के लिए कोई जगह नहीं है, और जिसने भी कूटनीति अपनाकर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की, उसे अनिल की तरह ही जेल की हवा खानी पड़ेगी।
- देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर आज अपने वार्ड क्रमांक 1 के सिरपुर क्षेत्र की खराब सड़कों के कारण सवालों के घेरे में है। पहली ही बारिश में यहां की सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई हैं, जिससे स्कूली बच्चों, स्थानीय रहवासियों और राहगीरों को हर दिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि लगभग एक साल से चली आ रही है। बार-बार शिकायतें करने के बावजूद, अब तक इस गंभीर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि स्वच्छता में नंबर 1 के तमगे वाले इंदौर के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की सुध आखिर कब ली जाएगी और क्या जनप्रतिनिधियों व नगर निगम को इस बदहाल स्थिति पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए?1
- इंदौर के नेमावर रोड पर रेती से भरे ट्रकों और भारी वाहनों का अतिक्रमण प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में की गई कार्रवाई के बावजूद, सड़क किनारे वाहनों की कतारें अभी भी लग रही हैं, जिससे सड़क पर गिरती रेती से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। विडंबना यह है कि इस समस्या के बावजूद करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पार्किंग व्यवस्था का उपयोग नहीं हो रहा है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आखिर कब प्रभावी और स्थायी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय रहवासियों, व्यापारिक संगठनों और वाहन चालकों ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन, नगर निगम, यातायात पुलिस और खनिज विभाग से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कार्रवाई की मांग की है। उनका स्पष्ट मत है कि केवल एक-दो दिन की कार्रवाई से यह समस्या हल नहीं होगी, बल्कि इसके लिए नियमित निगरानी, भारी जुर्माना लगाना, अवैध पार्किंग करने वाले वाहनों की जब्ती करना और सड़क पर रेती गिराने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करना बेहद आवश्यक है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो नेमावर रोड किसी बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकता है, और शहर की यातायात व्यवस्था को सुरक्षित तथा व्यवस्थित बनाए रखने के लिए इस समस्या का स्थायी समाधान अब समय की आवश्यकता बन चुका है।1
- इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के एक ठिकाने पर एक साथ तीन टीमों के साथ छापा मारा। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अधिकारी के पास आय से अधिक संपत्ति है, उनकी कुल वैध आय लगभग ढाई करोड़ रुपये होनी थी, जबकि उनकी कुल अर्जित संपत्ति साढ़े नौ करोड़ रुपये पाई गई है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से विभागीय गलियारों में हड़कंप मच गया है। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक डॉक्टर राजेश सहाय को मिली शिकायत और उसके सत्यापन के बाद विशेष न्यायालय से सर्च वारंट प्राप्त कर यह कार्रवाई की गई। लोकायुक्त पुलिस के निरीक्षक आशुतोष मिठास ने बताया कि जांच में पता चला है कि कंडवाल ने अपने लगभग 30 वर्षों के सेवाकाल के दौरान इंदौर, पीथमपुर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया था। अब तक कुल 14 संपत्तियों की जानकारी मिली है, जिनमें शहर के पॉश इलाके स्कीम 140 में कीमती रिहायशी प्लॉट, कई कृषि भूमि और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। इंदौर के स्कीम नंबर-103 स्थित एक चार मंजिला भवन भी जांच के दायरे में है, जिसकी तीन मंजिलों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है और अधिकारी वहां खुद एक जिम संचालित करते हैं, जबकि ऊपरी मंजिल पर उनका निवास है। लोकायुक्त की टीम इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों और निवेश के रिकॉर्ड खंगाल रही है, साथ ही एक बैंक लॉकर की जानकारी मिलने के बाद उसकी भी जांच की जा रही है। लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, छापे की कार्रवाई अभी जारी है, और जांच पूरी होने पर संपत्तियों का आंकड़ा तथा उनका कुल मूल्यांकन और बढ़ने की संभावना है।1
- Available for Sale Locality : Economics Super Corridor Area (dimensions) : 765 Expected Price : 3060000 Property Type : Residential Plot सुपर कॉरिडोर टच कॉलोनी तीनों साईं से 250 ft रोड रहेगा 4 एंट्री गेट रहेंगे 100 ft रोड, 30 ft मकान के सामने, east west फेसिंग कॉलोनी , अंडरग्राउंड इलेक्ट्रिसिटी ,नल फिटिंग के साथ। 1 क्लब हाउस covered compass RERA अपरूप कॉलोनी है 90% लोन हो जाएगा ऑल बैंक5
- इंदौर में अत्याधुनिक रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सुविधा का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्घाटन विधायक गोलू शुक्ला ने किया। यह विशेषज्ञ सेवाएँ डॉ. गिरीश गुप्ता के नेतृत्व में प्रदान की जाएँगी। इस सुविधा के तहत घुटना, कूल्हा, कोहनी सहित सभी प्रकार की जॉइंट सर्जरी रोबोटिक तकनीक का उपयोग करके की जा सकेंगी, जिससे मरीजों को ऑपरेशन के अगले ही दिन चलने-फिरने में सक्षम होने का लाभ मिलेगा।1
- कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीप ने घोषणा की है कि वे आगामी 12 जून को लखनऊ में प्रदर्शन करने आ रहे हैं।1
- इंदौर के विजयनगर थाना क्षेत्र में एक मोबाइल दुकान में हुई लाखों रुपये की चोरी का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी किए गए 17 मोबाइल फोन, नगदी और वारदात में प्रयुक्त दोपहिया वाहन सहित करीब 13 लाख रुपये का माल बरामद किया है। दरअसल, यह घटना 7 जून को स्कीम नंबर-54 स्थित स्पिन मोबाइल गाइड के संचालक अभिषेक तिवारी की दुकान में हुई थी। बदमाशों ने दुकान का ताला तोड़कर विभिन्न कंपनियों के महंगे मोबाइल फोन, मोबाइल एक्सेसरीज और नगदी चुराकर फरार हो गए थे, जिसकी शिकायत तिवारी ने दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, विजयनगर थाना पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की और आसपास के सीसीटीवी फुटेज तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान, पुलिस ने बाग-टांडा क्षेत्र से जुड़े तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की निशानदेही पर 8 आईफोन, 5 वीवो, 3 ओप्पो मोबाइल, एक सैमसंग फोन, मोबाइल एक्सेसरीज और 10 हजार 500 रुपये नगद के साथ-साथ वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल भी बरामद की गई। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पब-बार और मौज-मस्ती के लिए गांव से आकर चोरी करते थे, और चुराए गए माल को शराब, जुआ तथा अन्य गतिविधियों में खर्च करने की योजना बना रहे थे। एसीपी इंदौर पराग सैनी के अनुसार, पुलिस इन आरोपियों से अन्य वारदातों के संबंध में भी गहनता से पूछताछ कर रही है।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जतारा स्थित शासकीय अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास में "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में छात्राओं, अतिथियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पौधरोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।1
- इंदौर में धोखाधड़ी का एक अनोखा मामला सामने आया है, जहाँ बाणगंगा की एक युवती ने खुद को अपर कलेक्टर और सीएम हाउस में पदस्थ अधिकारी बताकर एक युवक को लाखों रुपये का चूना लगाया। युवती ने युवक को सरकारी जमीन उसके नाम कराने का झांसा दिया था। शिकायतकर्ता, जो कि न्यायालय का वाहन चालक है, ने बताया कि आरोपी युवती उसके संपर्क में आई और खुद को प्रशासनिक अधिकारी बताते हुए उसे सरकारी जमीन अपने नाम कराने का लालच दिया। इसके लिए उसने फर्जी तरीके से जमीन से जुड़े दस्तावेज भी तैयार किए और कुछ समय बाद दावा किया कि जमीन का नामांतरण हो चुका है। काम करवाने के एवज में युवती ने पहले ₹5 लाख और फिर ₹2.5 लाख की मांग की, जिसे युवक ने भरोसे में आकर दे दिया। बाद में पीड़ित को पता चला कि सभी दस्तावेज फर्जी थे और जमीन का कोई नामांतरण नहीं हुआ था। युवती इलाके में बड़े अधिकारी की तरह घूमती थी और लोगों को प्रशासन से जुड़ा होने का बताती थी, जिससे कई लोग उसके झांसे में आ गए। उसके पास 'अपर कलेक्टर' लिखी गाड़ी के साथ खींची गई तस्वीरें भी थीं। पीड़ित युवक ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर जनसुनवाई में की है और सख्त कार्रवाई के साथ-साथ अपने पैसे वापस दिलाने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, एडीएम रोशन राय ने इसे गंभीर अपराध करार दिया है और संबंधित थाने की पुलिस को इसकी जांच के आदेश दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस फर्जी अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद धोखाधड़ी के कई और मामले सामने आ सकते हैं।1