रसोई गैस का संकट: प्रशासन की लापरवाही या कंपनियों की मनमानी? अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती। एक ओर सरकार 'सुशासन' का दावा करती है, तो दूसरी ओर बस्ती जिले की जमीनी हकीकत यह है कि हज़ारों लोग रसोई गैस सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ताजा खबर यह है कि जिले की 11 गैस एजेंसियां पूरी तरह से ठप पड़ी हैं, जिससे आम जनता के घरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। सवालिया निशान रिपोर्ट के अनुसार, जिले में प्रतिदिन 50 हजार सिलेंडरों की मांग है, जबकि बुधवार को मात्र 10,019 सिलेंडरों की आपूर्ति हुई। यह अंतर केवल डेटा का नहीं, बल्कि आम आदमी की बदहाली का है। 11 एजेंसियों पर ताले लटके हैं और प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है। जिम्मेदारी का अभाव: क्या जिला प्रशासन को यह नहीं पता था कि इन 11 एजेंसियों पर आपूर्ति क्यों नहीं हो रही? अगर इन एजेंसियों पर ताले लटके हैं, तो प्रशासन ने अब तक इनके लाइसेंस रद्द करने या किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में क्यों नहीं सोचा? दवा बनाम मर्ज: विभाग का कहना है कि यदि एक हफ्ते तक नियमित 50 हजार सिलेंडर मिलें तो किल्लत खत्म हो जाएगी। यह बयान प्रशासन की लाचारी दिखाने के लिए काफी है। क्या विभाग का काम सिर्फ 'आंकड़े' गिनाना है, या यह सुनिश्चित करना कि जनता को गैस मिले? दावों की पोल: डीएसओ विमल कुमार शुक्ला का कहना है कि 'आपूर्ति हो रही है'। सवाल यह है कि अगर आपूर्ति हो रही है, तो जनता लाइनों में क्यों खड़ी है? हज़ारों उपभोक्ताओं को गैस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि एजेंसियां ताले लगा रही हैं। प्रशासन की चुप्पी कब टूटेगी? यह स्थिति प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है। यदि एजेंसियां नियम का पालन नहीं कर रही हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ कागजों पर रिपोर्ट बनाने तक सीमित रह गए हैं? आम आदमी महंगाई और गैस की किल्लत की दोहरी मार झेल रहा है। जनता को वादों की नहीं, ईंधन की जरूरत है। यदि प्रशासन ने समय रहते इन 11 एजेंसियों की समस्या का समाधान नहीं किया और आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी गहरा सकता है। अब समय आ गया है कि प्रशासन 'कार्रवाई' करे, न कि केवल 'आश्वासन' दे।
रसोई गैस का संकट: प्रशासन की लापरवाही या कंपनियों की मनमानी? अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती। एक ओर सरकार 'सुशासन' का दावा करती है, तो दूसरी ओर बस्ती जिले की जमीनी हकीकत यह है कि हज़ारों लोग रसोई गैस सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ताजा खबर यह है कि जिले की 11 गैस एजेंसियां पूरी तरह से ठप पड़ी हैं, जिससे आम जनता के घरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। सवालिया निशान रिपोर्ट के अनुसार, जिले में प्रतिदिन 50 हजार सिलेंडरों की मांग है, जबकि बुधवार को मात्र 10,019 सिलेंडरों की आपूर्ति हुई। यह अंतर केवल डेटा का नहीं, बल्कि आम आदमी की बदहाली का है। 11 एजेंसियों पर ताले लटके हैं और प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है। जिम्मेदारी का अभाव: क्या जिला प्रशासन को यह नहीं पता था कि इन 11 एजेंसियों पर आपूर्ति क्यों नहीं हो रही? अगर इन एजेंसियों पर ताले लटके हैं, तो प्रशासन ने अब तक इनके लाइसेंस रद्द करने या किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में क्यों नहीं सोचा? दवा बनाम मर्ज: विभाग का कहना है कि यदि एक हफ्ते तक नियमित 50 हजार सिलेंडर मिलें तो किल्लत खत्म हो जाएगी। यह बयान प्रशासन की लाचारी दिखाने के लिए काफी है। क्या विभाग का काम सिर्फ 'आंकड़े' गिनाना है, या यह सुनिश्चित करना कि जनता को गैस मिले? दावों की पोल: डीएसओ विमल कुमार शुक्ला का कहना है कि 'आपूर्ति हो रही है'। सवाल यह है कि अगर आपूर्ति हो रही है, तो जनता लाइनों में क्यों खड़ी है? हज़ारों उपभोक्ताओं को गैस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि एजेंसियां ताले लगा रही हैं। प्रशासन की चुप्पी कब टूटेगी? यह स्थिति प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है। यदि एजेंसियां नियम का पालन नहीं कर रही हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ कागजों पर रिपोर्ट बनाने तक सीमित रह गए हैं? आम आदमी महंगाई और गैस की किल्लत की दोहरी मार झेल रहा है। जनता को वादों की नहीं, ईंधन की जरूरत है। यदि प्रशासन ने समय रहते इन 11 एजेंसियों की समस्या का समाधान नहीं किया और आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी गहरा सकता है। अब समय आ गया है कि प्रशासन 'कार्रवाई' करे, न कि केवल 'आश्वासन' दे।
- अजीत मिश्रा (खोजी) लखनऊ के रिंग रोड स्थित झोपड़पट्टी में अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि लोग संभल नहीं पाए और सड़कों पर छोटे-छोटे मासूम बच्चे बिलखते हुए अपने मां-बाप की तलाश करते नजर आए। झोपड़पट्टी में रह रहे कई परिवारों का सामान और आशियाना जलकर खाक हो गया। सूत्रों के मुताबिक, हादसे में कई लोगों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग के दौरान कई गैस सिलेंडरों में विस्फोट भी हुए, जिससे आग और भड़क गई और स्थिति बेहद भयावह हो गई। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि आग लगने के पीछे किसी साजिश की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है और आग बुझाने के साथ राहत एवं बचाव कार्य जारी है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए।1
- Post by हरिशंकर पांडेय1
- संतकबीरनगर । जनपद में साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में साइबर क्राइम थाना, एसओजी एवं थाना धनघटा की संयुक्त टीम ने समन्वय पोर्टल (I4C) व एनसीआरपी से प्राप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 5 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्तों में विजय यादव (निवासी जगदीशपुर), नीतेश कुमार (निवासी त्रिलोकपुर, गोरखपुर), शक्ति, विकास पाण्डेय एवं आर्यन पाल (सभी निवासी थाना धनघटा क्षेत्र) शामिल हैं। इनके विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। संगठित गिरोह का भंडाफोड़ जांच में सामने आया कि यह एक संगठित गिरोह है, जिसका सरगना शक्ति है। गिरोह गरीब एवं असहाय लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और एटीएम कार्ड, पासबुक व चेकबुक अपने कब्जे में रख लेता था। इसके बाद इन खातों का उपयोग देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की धनराशि मंगाने के लिए किया जाता था। आई4सी पोर्टल से मिली अहम जानकारी थाना धनघटा को गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल (I4C) के माध्यम से संदिग्ध खातों की सूचना प्राप्त हुई थी। जांच के दौरान एक संदिग्ध खाते से जुड़े व्यक्ति से पूछताछ में पूरे गिरोह का खुलासा हुआ, जिसके बाद क्रमशः सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। करोड़ों के लेन-देन का खुलासा साइबर क्राइम थाना की जांच में 37 बैंक खातों के माध्यम से लगभग 5 करोड़ रुपये के लेन-देन की पुष्टि हुई है। इनमें से 6 लाख रुपये से अधिक की धनराशि को होल्ड (फ्रीज) कराया जा चुका है, जबकि अन्य खातों की जांच जारी है। भारी मात्रा में सामान बरामद अभियुक्तों के कब्जे से 33 एटीएम कार्ड, 12 मोबाइल फोन, 24 सिम कार्ड, 29 पासबुक, 18 चेकबुक, 2 लैपटॉप, 1 मोटरसाइकिल, फर्जी दस्तावेजों के साथ-साथ .32 बोर के 8 अवैध जिंदा कारतूस व नकद 16,750 रुपये बरामद किए गए हैं। फर्जी दस्तावेज व बदले नंबर से चलाते थे वाहन पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे तथा मोटरसाइकिल का रजिस्ट्रेशन नंबर बदलकर चलते थे। कागजात प्रस्तुत न करने पर वाहन को सीज कर दिया गया है। कमांडर को भेजते थे डाटा अभियुक्तों ने बताया कि वे सभी खातों का डाटा इटावा निवासी एक ‘कमांडर’ को उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था। पुलिस अब इस मुख्य आरोपी की तलाश में जुटी है। संयुक्त टीम की कार्रवाई इस सफल कार्रवाई में साइबर क्राइम थाना, एसओजी व थाना धनघटा की टीम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस द्वारा मामले की विस्तृत जांच जारी है।1
- धनघटा क्षेत्र में पुलिस का एक संवेदनशील और मानवीय चेहरा उस समय देखने को मिला जब थाने पर तैनात महिला सब इंस्पेक्टर अंजनी सरोज ने सड़क किनारे थक-हार कर बैठी एक महिला की मदद कर इंसानियत की मिसाल पेश की। बताया जाता है कि महिला काफी देर से सड़क किनारे परेशान हालत में बैठी थी। इसी दौरान वहां से गुजर रहीं महिला दरोगा की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने तुरंत रुककर महिला को सहारा दिया, उसकी समस्या को ध्यानपूर्वक सुना और उसे पास की दुकान से पानी खरीदकर पिलाया। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों ने इस मानवीय व्यवहार को देखा तो उन्होंने दरोगा की सराहना की। आमतौर पर पुलिस की सख्त छवि के बीच इस तरह की संवेदनशील पहल ने लोगों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कार्य न केवल पुलिस की छवि को सकारात्मक बनाते हैं, बल्कि समाज में विश्वास और सम्मान भी बढ़ाते हैं। महिला दरोगा के इस सराहनीय कदम की क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है।2
- जिला अस्पताल के पास दो पक्षों में मारपीट, पुलिस ने संभाला मामला संत कबीर नगर। थाना कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के बड़गो स्थित जिला अस्पताल के पास दो पक्षों के बीच मारपीट की घटना सामने आई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद ने बताया कि दोनों पक्षों को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जा रही है। मामले की जांच जारी है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सतर्क है।1
- Post by आज की आवाज1
- संतकबीरनगर, खलीलाबाद। विधानसभा क्षेत्र खलीलाबाद के ग्राम पंचायत थवईपार में मंगलवार को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं शिलापट्ट के अनावरण का कार्यक्रम बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि खलीलाबाद नित्यानंद ने मुख्य रूप से भाग लेते हुए बाबा साहब को नमन किया और कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत माल्यार्पण एवं शिलापट्ट के अनावरण से हुई, जिसके बाद पूरे गांव में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया। इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक बड़े भाई खेदन प्रसाद जी, अमृत चंद्र जी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख सेमरियावा धर्मेंद्र कुमार जी, पूर्व प्रधान रत्नेश जी, डॉ. सुदामा प्रसाद जी, पूर्व प्रधान पूर्णमासी प्रसाद जी, क्षेत्र पंचायत सदस्य अजय कुमार जी, ओम प्रकाश जी, गुड्डू राणा, जगजीवन प्रसाद सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने बाबा साहब के जीवन और उनके योगदान को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में उत्साह, श्रद्धा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।1
- अजीत मिश्रा (खोजी) सीतापुर से भ्रष्टाचार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सिस्टम की जड़ें हिला कर रख दी हैं। एसडीएम के खास 'पेशकार' अनुपम श्रीवास्तव को एंटी करप्शन टीम ने 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। 💸 किसान का पसीना बनाम अधिकारी की लालच मामला वही पुराना है— 'दाखिल-खारिज'। एक किसान अपनी जमीन के हक के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा था। आरोप है कि लगी हुई आपत्ति को हटवाने के बदले पेशकार साहब ने अपनी जेब भरने का सौदा किया। उन्हें लगा होगा कि किसान की बेबसी उनकी चांदी कर देगी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि आज उनका 'हिसाब' होने वाला है। 🌸 पानी गुलाबी हुआ, चेहरा सफेद! कार्रवाई का नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। एंटी करप्शन टीम ने जब सरेआम पेशकार की उंगलियां केमिकल वाले पानी में डलवाईं, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया। गुलाबी पानी: रिश्वतखोरी का पुख्ता सबूत। सफेद चेहरा: पकड़े जाने के बाद साहब की उड़ी हुई हवाइयां। "जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो आम आदमी कहाँ जाए? एक लाख की ये रिश्वत सिर्फ नोटों की गड्डी नहीं, बल्कि एक किसान के भरोसे का कत्ल है।" 🚨 अब क्या होगा? भ्रष्टाचारी पेशकार को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया है। लेकिन सवाल वही है— क्या एक की गिरफ्तारी से सिस्टम सुधरेगा? क्या साहब की मेज के नीचे से चलने वाला ये खेल कभी बंद होगा? जनता देख रही है! सीतापुर की इस घटना ने साफ कर दिया है कि अगर आप भ्रष्टाचार करेंगे, तो कानून के हाथ आपकी गर्दन तक जरूर पहुँचेंगे।1