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दतिया के भांडेर में एक विशाल जन समूह को संबोधित करते हुए रामजीवन छोटे राय ने महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि 'हमारा नगर हमारा तीर्थ, हमारी माटी हमारा चंदन'।
पत्रकार जितेंद्र सिंह कौरव
दतिया के भांडेर में एक विशाल जन समूह को संबोधित करते हुए रामजीवन छोटे राय ने महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि 'हमारा नगर हमारा तीर्थ, हमारी माटी हमारा चंदन'।
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- पोद्दार की बगिया में आयोजित एक सुंदरकांड पाठ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल होने पहुँचे। इस धार्मिक आयोजन में बच्चे, माताएं, बहनें और पुरुष सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।1
- भांडेर अनुभाग के गोंदन थाना क्षेत्र के उड़ीना गाँव से अज्ञात कारणों के चलते एक वृद्ध महिला लापता हो गई है। रविवार सुबह मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित प्रकाश कुशवाहा की 60 वर्षीय पत्नी, जो दिमागी रूप से कमजोर बताई गई हैं, 28 मई की सुबह करीब 10:30 बजे अपने घर से लापता हो गईं। परिजनों ने हर जगह उनकी तलाश की, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चल पाया। इसके बाद, परिजनों ने गोंदन थाने पहुंचकर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लापता महिला की तलाश शुरू कर दी है।1
- दतिया की राजनीति में कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है, जहाँ बड़ोनी के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और पूर्व सरपंच अशोक ककोरिया ने, जो कांग्रेस के जनपद सदस्य भी थे, अपने परिवार, समर्थकों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। पूर्व गृह मंत्री और दतिया के वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने इस अवसर पर अशोक ककोरिया का भाजपा परिवार में स्वागत किया। इस दौरान भाजपा मंडल अध्यक्ष पवन पहाड़िया और जनपद उपाध्यक्ष सहित पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे। भाजपा नेताओं का कहना है कि दतिया में लगातार जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं का पार्टी के प्रति बढ़ता विश्वास विकास, जनसेवा और मजबूत नेतृत्व की राजनीति का ही परिणाम है। अशोक ककोरिया के भाजपा में शामिल होने को क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आगामी चुनावी समीकरणों के बीच यह सदस्यता अभियान भाजपा को संगठनात्मक मजबूती देने का काम कर सकता है। फिलहाल, दतिया की सियासत में यह बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक प्रभावों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।1
- इंदरगढ़ में लोकमाता अहिल्या बाई होलकर और माता रमा बाई डॉ. भीमराव अम्बेडकर जैसे महापुरुषों के सम्मान में एक संस्कृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस समारोह में राकेश पाल जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि फूल सिंह बरैया ने इसकी अध्यक्षता की। डॉ. अमित यादव जी और डॉ. कौशल यादव जी के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में लोक गायिका संजू बघेल ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी। इस भव्य आयोजन में हजारों लोगों ने भाग लिया और सहभोज ग्रहण किया।1
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- पोद्दार की बगिया में आयोजित सुंदरकांड पाठ के कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बच्चियों का स्वागत किया।1
- दतिया के भांडेर में सामाजिक समरसता मंगल टोली द्वारा 501 सामूहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। इन पाठों के संपन्न होने के उपरांत, टोली द्वारा महा आरती की गई।1
- मध्य प्रदेश के दतिया जिले से खौफनाक तस्वीरें सामने आई हैं, जहाँ एक व्यक्ति अपनी जान हथेली पर रखकर भागता दिख रहा है, और पीछे दस लाख रुपए का एक ट्रैक्टर छूट जाता है। ये दृश्य किसी एक्शन फिल्म के नहीं, बल्कि दतिया की हकीकत हैं, जो रेत की चोरी से कहीं बढ़कर है। यह सवाल उठाता है कि आखिर वो कौन सा डर है जिसके आगे एक इंसान को अपनी जान की भी परवाह नहीं है, क्या यह कानून का डर है या फिर रेत माफिया के रसूख का? दतिया जिले में ऑन-रिकॉर्ड केवल 39 रेत खदानें ही अधिकृत रूप से वैध हैं, लेकिन आरोप हैं कि चंद वैध खदानों की आड़ में, प्रशासन की कथित सह पर, दर्जनों अवैध खदानों का जाल फैला हुआ है। रेत माफियाओं का दबदबा हर जगह है, और उससे भी बड़ा दबदबा उस रेत कंपनी का बताया जा रहा है, जिसका खौफ आज छोटे ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। थरेट थाना क्षेत्र के चीना बंबा के पास की एक घटना में, एक ट्रैक्टर रेत लेकर निकल रहा था, और जैसे ही उसे खतरा महसूस हुआ, ड्राइवर अपनी जान की परवाह किए बिना चलते ट्रैक्टर से कूदकर भाग खड़ा हुआ। यह साफ दिखाता है कि रेत का परिवहन करने वालों में खनिज विभाग के उड़न दस्ते, दतिया पुलिस और रेत ठेकेदार के कारिंदों का किस कदर खौफ है। रिपोर्ट सवाल करती है कि ड्राइवर अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा है, या अपनी जेब के पैसे बचाने के लिए, या फिर उस प्रताड़ना से बचने के लिए जो पकड़े जाने के बाद ठेकेदार के लठैतों या खाकी के जरिए उसे मिल सकती है। इस रिपोर्ट के माध्यम से दतिया के सम्मानीय कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से सीधे सवाल पूछे गए हैं। पहला, ऐसा कौन सा खौफ पैदा हो चुका है कि एक ड्राइवर अपना 10 लाख रुपए का वाहन लावारिस छोड़कर भागने को मजबूर है? दूसरा, क्या दतिया में कानून का राज चल रहा है, या रेत ठेकेदार की समानांतर सत्ता? और तीसरा, अगर केवल 39 खदानें वैध हैं, तो बाकी जगहों से अवैध रेत आ कहां से रही है, और क्या यह खनिज विभाग व स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे मुमकिन है? रिपोर्ट में कहा गया है कि दतिया में रेत का यह कारोबार अब सिर्फ रॉयल्टी और पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, यह सीधे तौर पर मानवाधिकार और दहशत का पर्याय बनता जा रहा है। अगर ट्रैक्टर चालक गलत है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अगर कार्रवाई के नाम पर खौफ का कारोबार चल रहा है, तो जवाबदेही प्रशासन की भी तय होनी चाहिए। देखना होगा कि दतिया का शीर्ष प्रशासन इस वायरल खौफ पर क्या संज्ञान लेता है, या फिर यह मामला ठंडे बस्ते में ही पड़ा रहेगा।1