प्रदूषण विभाग के लापरवाही के कारण रेणुका नदी का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा लेकिन संबंधित अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ कागजों पर हेरा फेरी कर रहे हैं ओबरा तापी विद्युत परियोजना से निकलने वाली राख जिसे सुनियोजित तरीके से एक लंबे समय अवधि से रेणुका नदी में मिलाया जा रहा है जिसके कारण रेणुका नदी का अस्तित्व समाप्ति के कगार पर आ गया है रेणुका नदी के किनारे बसे गांव की जमीन बंजर हो रही हैं रेणुका नदी जो आगे जाकर सोन नदी में मिलती और सोन नदी आगे जाकर गंगा नदी में मिलती है गंगा नदी की सहायक नदी जिस प्रकार से एक लंबे समय से प्रदूषित हो रही है पूर्व में भी विभिन्न प्रकार की कमेटियों ने या स्पष्ट विवरण जारी किए थे कि जिस प्रकार से धरातल पर नदी को प्रदूषित किया जा रहा है जिसके दूरगामी हानिकारक परिणाम होंगे लेकिन संबंधित प्रकरण अखबारों में सुर्खियां बनने के बाद तो सुधार होते हैं लेकिन उसके बाद धरातल पर कोई परिवर्तन नहीं होता है जिसके लिए प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी के ऊपर कभी कोई कार्रवाई नहीं होता तापी विद्युत परियोजना में जो संबंधित प्रकार जिस अधिकारी के द्वारा देखा जा रहा है जो एक लंबे समय से लापरवाही कर रहा है उसे अधिकारी के ऊपर कार्रवाई के बजाय उसे इनाम स्वरूप प्रमोशन पद पर रहते हुए मिल जाए तो अधिकारियों के हौसले और बड़े हो जाते हैं और इन अधिकारियों के हौसले इसलिए भी बड़े हैं क्यों प्रदूषण विभाग के जो अधिकारी हैं जनपद सोनभद्र में ही क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय है और यहां पर संबंधित विभाग के अधिकारी बैठते हैं जो धरातल पर आकर सोता संज्ञान लेना चाहिए वह शिकायतों के बावजूद शिकायत को नजर अंदाज करते हैं और शिकायत को कोरम पूरा करने के क्रम में सिर्फ निस्तारित कर देते हैं
प्रदूषण विभाग के लापरवाही के कारण रेणुका नदी का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा लेकिन संबंधित अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ कागजों पर हेरा फेरी कर रहे हैं ओबरा तापी विद्युत परियोजना से निकलने वाली राख जिसे सुनियोजित तरीके से एक लंबे समय अवधि से रेणुका नदी में मिलाया जा रहा है जिसके कारण रेणुका नदी का अस्तित्व समाप्ति के कगार पर आ गया है रेणुका नदी के किनारे बसे गांव की जमीन बंजर हो रही हैं रेणुका नदी जो आगे जाकर सोन नदी में मिलती और सोन नदी आगे जाकर गंगा नदी में मिलती है गंगा नदी की सहायक नदी जिस प्रकार से एक लंबे समय से प्रदूषित हो रही है पूर्व में भी विभिन्न प्रकार की कमेटियों ने या स्पष्ट विवरण जारी किए थे कि जिस प्रकार से धरातल पर नदी को प्रदूषित किया जा रहा है जिसके दूरगामी हानिकारक परिणाम होंगे लेकिन संबंधित प्रकरण अखबारों में सुर्खियां बनने के बाद तो सुधार होते हैं लेकिन उसके बाद धरातल पर कोई परिवर्तन नहीं होता है जिसके लिए प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी के ऊपर कभी कोई कार्रवाई नहीं होता तापी विद्युत परियोजना में जो संबंधित प्रकार जिस अधिकारी के द्वारा देखा जा रहा है जो एक लंबे समय से लापरवाही कर रहा है उसे अधिकारी के ऊपर कार्रवाई के बजाय उसे इनाम स्वरूप प्रमोशन पद पर रहते हुए मिल जाए तो अधिकारियों के हौसले और बड़े हो जाते हैं और इन अधिकारियों के हौसले इसलिए भी बड़े हैं क्यों प्रदूषण विभाग के जो अधिकारी हैं जनपद सोनभद्र में ही क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय है और यहां पर संबंधित विभाग के अधिकारी बैठते हैं जो धरातल पर आकर सोता संज्ञान लेना चाहिए वह शिकायतों के बावजूद शिकायत को नजर अंदाज करते हैं और शिकायत को कोरम पूरा करने के क्रम में सिर्फ निस्तारित कर देते हैं
- Post by Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief1
- Post by पत्रकार अमान खान (ब्यूरो चीफ)1
- पब्लिक न्यूज़ पर अभी-अभी न्यूज़ आई है कि केदारनाथ में छोटे बच्चों पर दुकानदार ने हाथ उठाया पुलिस कार्रवाई कर रही है1
- शक्तिनगर बना हादसों का गढ़! आखिर कब जागेगा प्रशासन? शक्तिनगर परिक्षेत्र में एक बार फिर दर्दनाक हादसा… तेज रफ्तार ट्रेलर की चपेट में आकर एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत! हैरानी की बात ये है कि ऐसे हादसे अब आम हो चुके हैं… हर दिन कोई न कोई इस लापरवाही का शिकार बन रहा है। मुख्य वजह क्या है? कोयला और राख (फ्लाई ऐश) ढोने वाले भारी वाहन ओवरलोडिंग और बेलगाम रफ्तार नियमों की खुलेआम अनदेखी सवाल ये है — क्या इंसानी जान की कोई कीमत नहीं बची? प्रशासन से सीधी मांग: ओवरलोड वाहनों पर तुरंत कार्रवाई स्पीड पर सख्त नियंत्रण ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों की एंट्री बंद अब चुप रहना खतरे को बुलावा देना है! आवाज उठाइए… शेयर कीजिए… ताकि ये मुद्दा दब न जाए। आपकी एक शेयर किसी की जान बचा सकती है! #Shaktinagar #Accident #RoadSafety #VoiceForSafety #सुरक्षा_जरूरी1
- Post by Chandrika prasad ji1
- NH-39 पर बोलेरो पेड़ से टकराई, दो घायल — एक की हालत गंभीर1
- Post by Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief1
- Post by Gurumer Singh1
- किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! मध्यप्रदेश सरकार एक बार फिर किसान हित में बड़ा फैसला लेकर आई है। डॉ के. मोहन यादव ने साफ कहा— “हम सदैव किसानों साथ खड़े हैं।” इस बार प्रदेश में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार से कोटा बढ़ाने का अनुरोध किया गया था। अच्छी खबर ये है कि यह मांग स्वीकार कर ली गई है! अब गेहूं उपार्जन का कोटा बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन से सीधे 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है (यानी 22 लाख मीट्रिक टन की बड़ी बढ़ोतरी!) मुख्यमंत्री का भरोसा: किसानों के गेहूं की खरीदी में कोई कमी नहीं रहेगी जरूरत पड़ी तो खरीदी की तारीख भी बढ़ाई जाएगी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद सरकार पूरी तरह तैयार किसानों के चेहरे पर मुस्कान, सरकार का मजबूत साथ! इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर किसान भाई तक पहुंचे #MPकिसान #गेहूंउपार्जन #मोहनयादव #किसानहित #BreakingNews #ViralPost1