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প্ৰধানমন্ত্ৰী নৰেন্দ্ৰ মোদীয়ে ২০২৬ চনৰ ১৯ এপ্ৰিলত পশ্চিম বংগৰ ঝাড়গ্ৰাম জিলাত নিৰ্বাচনী প্ৰচাৰৰ মাজতে পথৰ কাষৰ এজন বিক্ৰেতাৰ পৰা ১০ টকা দি ঝাল মুৰী (Jhal Muri) কিনি খোৱাৰ এটা ভিডিঅ' সামাজিক মাধ্যমত অত্যন্ত জনপ্ৰিয় হৈ পৰিছে
Batori Pratidin
প্ৰধানমন্ত্ৰী নৰেন্দ্ৰ মোদীয়ে ২০২৬ চনৰ ১৯ এপ্ৰিলত পশ্চিম বংগৰ ঝাড়গ্ৰাম জিলাত নিৰ্বাচনী প্ৰচাৰৰ মাজতে পথৰ কাষৰ এজন বিক্ৰেতাৰ পৰা ১০ টকা দি ঝাল মুৰী (Jhal Muri) কিনি খোৱাৰ এটা ভিডিঅ' সামাজিক মাধ্যমত অত্যন্ত জনপ্ৰিয় হৈ পৰিছে
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- शहर में लंबे समय से चल रही भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की प्रवृत्ति अब आमजन के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में लापरवाही तथा घटिया गुणवत्ता के चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि सड़कों से उड़ती धूल और अधूरे निर्माण कार्य लोगों की सेहत पर भी असर डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई वर्षों से नगर में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। हाल ही में शहर की एक प्रमुख सड़क का निर्माण कार्य किया गया, जो कुछ ही समय में उखड़ने लगी। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और धूल के गुबार से राहगीरों का चलना मुश्किल हो गया है। निवासियों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। कई बार शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग और निगरानी की कमी के कारण इस तरह की समस्याएं सामने आती हैं। वहीं, कुछ लोग इसे सीधे तौर पर कमीशनखोरी से जोड़कर देख रहे हैं, जहां गुणवत्ता से ज्यादा प्राथमिकता निजी लाभ को दी जा रही है। घटिया निर्माण पर उठे सवाल निर्माण के दौरान ही कई जगहों पर सड़क की परतें उखड़ती नजर आईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कार्य के समय ही गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन संबंधित विभाग ने इसे नजरअंदाज कर दिया। अब स्थिति यह है कि सड़क बनने के कुछ समय बाद ही दोबारा मरम्मत की नौबत आ रही है। जनता की मांग शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके। यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह न केवल जनता के स्वास्थ्य बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का भी बड़ा उदाहरण बन सकता है।8