हिम अंचल पेंशनर संघ चंबा की मासिक बैठक लक्ष्मण क्लब चंबा में आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में पेंशनरों ने भाग लिया और अपने विभिन्न लंबित मुद्दों को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक में पेंशनरों ने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार पेंशनरों के हित में घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें आज तक उनके पूरे लाभ नहीं मिल पाए हैं। पेंशनरों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। संघ ने सरकार से मांग की कि पेंशनरों को शीघ्र उनका हक दिया जाए और लंबित लाभों का जल्द समाधान किया जाए। इसके अलावा बैठक में चंबा शहर में दुकानदारों द्वारा सड़कों पर किए गए अतिक्रमण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पेंशनरों ने कहा कि अतिक्रमण के कारण राह चलते लोगों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। संघ ने प्रशासन से मांग की कि अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई कर आम जनता को राहत दी जाए। बैठक के अंत में पेंशनर संघ ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। बाइट पेंशनर संघ के सदस्य।
हिम अंचल पेंशनर संघ चंबा की मासिक बैठक लक्ष्मण क्लब चंबा में आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में पेंशनरों ने भाग लिया और अपने विभिन्न लंबित मुद्दों को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक में पेंशनरों ने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार पेंशनरों के हित में घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें आज तक उनके पूरे लाभ नहीं मिल पाए हैं। पेंशनरों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। संघ ने सरकार से मांग की कि पेंशनरों को शीघ्र उनका
हक दिया जाए और लंबित लाभों का जल्द समाधान किया जाए। इसके अलावा बैठक में चंबा शहर में दुकानदारों द्वारा सड़कों पर किए गए अतिक्रमण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पेंशनरों ने कहा कि अतिक्रमण के कारण राह चलते लोगों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। संघ ने प्रशासन से मांग की कि अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई कर आम जनता को राहत दी जाए। बैठक के अंत में पेंशनर संघ ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। बाइट पेंशनर संघ के सदस्य।
- चंबा में हिंदू–मुस्लिम सौहार्द बिगाड़ने की कोशिशों पर मुस्लिम समुदाय की दो टूक1
- मंडी जिले के टारना वृत्त में 22 दिसंबर 2025 को पल्स पोलियो अभियान के दौरान ड्यूटी निभाते समय गिरने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की हुई मृत्यु ने प्रदेश-भर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को गहरे शोक, पीड़ा और आक्रोश में डाल दिया है। यह घटना केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा नहीं, बल्कि उस लापरवाह व्यवस्था का परिणाम मानी जा रही है, जिसके तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से विभिन्न विभागों के जोखिमपूर्ण और बहु-विभागीय कार्य तो कराए जाते हैं, लेकिन किसी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में न तो सरकार और न ही संबंधित विभाग जिम्मेदारी स्वीकार करता है। गौरतलब है कि यह पहली घटना नहीं है। लगभग दो वर्ष पूर्व कुल्लू जिले के सैंज क्षेत्र में फिसलकर गिरने से एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो चुकी है। इसी तरह जून 2024 में चंबा जिले में बैठक में जाते समय सड़क दुर्घटना में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरला और श्रेष्ठा की जान चली गई थी। इन लगातार हो रही घटनाओं ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनसे स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और विभिन्न सरकारी अभियानों की जिम्मेदारियां निभवाई जाती हैं, लेकिन न तो उन्हें पर्याप्त सुरक्षा, न बीमा और न ही जोखिम भत्ते जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। हादसे के बाद केवल संवेदनाएं व्यक्त कर दी जाती हैं, जबकि स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि शासन-प्रशासन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं है। कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि ड्यूटी के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को कार्य-स्थल हादसा मानते हुए उचित मुआवजा, बीमा सुरक्षा और स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।2
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- पधर:- सीटू ने सीडीपीओ के माध्यम से हिमाचल सरकार को भेजा ज्ञापन1
- बंगाणा, कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के इतिहास में राहत एवं पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उस समय देखने को मिला, जब कुटलैहड़ विस क्षेत्र के विधायक विवेक शर्मा ने अपने वादे को निभाते हुए आपदा ग्रस्त 165 परिवारों को आर्थिक सहायता के चेक वितरित किए। तहसील बंगाणा और उप-तहसील बीहडू के उन परिवारों, जिनके घर प्राकृतिक आपदा के कारण पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे, उन्हें कुल 2 करोड़ 34 लाख 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।1
- जैकेट छोटी हो जाने पर नई खरीदने के बजाय अब लोग एक स्मार्ट ट्रिक अपना रहे हैं। इस तकनीक में जैकेट में एक एक्स्ट्रा ज़िप पैनल जोड़ा जाता है, जिससे साइज आसानी से बढ़ाया जा सकता है। यह तरीका रेडीमेड जैकेट एक्सटेंडर के जरिए किया जाता है। खासकर प्रेग्नेंसी या बेबी कैरियर पहनते समय यह ट्रिक काफ़ी उपयोगी मानी जा रही है। #LifeHacks #SmartTrick #DIYHack #FashionHack #ViralHack #CreativeIdeas1
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