अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर सागर के यशोदा भवन में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'काव्यायन' ने अपने स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामयी गोष्ठी एवं विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान संस्था ने मातृशक्ति को परिवार की रीढ़ मानते हुए सर्वसम्मति से ममता भूरिया का चयन काव्य परिवार की मुखिया (अध्यक्ष) के रूप में किया। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए संस्था के संस्थापक अध्यक्ष व अधिवक्ता राम नरेश सिंह राजपूत ने वर्तमान सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि पश्चिमी सभ्यता में एकाकी परिवारों का चलन है, जिसके कारण वहां परिजनों से मिलने के लिए साल में एक दिन (15 मई) तय करना पड़ता है, जबकि भारत की मूल संस्कृति हमेशा से संयुक्त परिवारों की रही है। राजपूत ने चिंता व्यक्त की कि आधुनिकता और वैश्विक चकाचौंध की अंधी दौड़ में आज भारत में भी एकाकी परिवार तेजी से बढ़े हैं, जिससे नई पीढ़ी को कई व्यावहारिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस कठिन परिवेश में उन्होंने संयुक्त परिवारों की महती आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य वक्ता पीआर मलैया, हर्षिता राजपूत एवं टीकाराम त्रिपाठी ने यूरोपीय और एशियन साहित्य के विभिन्न कालखंडों व साहित्यकारों की रचनाओं के उदाहरण देते हुए संयुक्त परिवार की प्रासंगिकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस साहित्यिक समागम में अंचल के लगभग 50 से अधिक रचनाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अधिवक्ता जगमोहन सिंह लोधी मुख्य अतिथि और अधिवक्ता रजनी सिंह राजपूत विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थीं, जबकि डा. गजाधर सागर, महेंद्र कौरव और वृन्दावन राय सरल ने सारस्वत अतिथि के तौर पर मंच साझा किया। कार्यक्रम का सफल एवं क्रमिक संचालन अमित आठिया, अनिल श्रीवास्तव और डा. अभय सिंह ने किया। इस अवसर पर लखन शब्दाक्षरी (नरसिंहपुर), धर्मेंद्र "आज़ाद" तिजोरी वाले (तेंदूखेड़ा), वरिष्ठ साहित्यकार देवी सिंह राजपूत, मीता कनोजिया "सिम्मी", पुष्पेंद्र दुबे, पेट्रिस फुसकेले, कोमेश विश्वकर्मा, मुकेश तिवारी, मणिदेव सिंह ठाकुर, एम. शरीफ़, सुल्तान ख़ान, मधुर गोस्वामी "राही निर्मोही", महबूब ताज, शहज़ाद सागरी, आयुष मेहरा "आदि", जमुना प्रसाद "बेताब", शहज़ाद पेन्टर, मु. इरफ़ान (मुंगावली), नीरज रैकवार और जागेश्वर कुशवाहा सहित काव्यायन संस्था के स्थाई श्रोता व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर सागर के यशोदा भवन में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'काव्यायन' ने अपने स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामयी गोष्ठी एवं विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान संस्था ने मातृशक्ति को परिवार की रीढ़ मानते हुए सर्वसम्मति से ममता भूरिया का चयन काव्य परिवार की मुखिया (अध्यक्ष) के रूप में किया। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए संस्था के संस्थापक अध्यक्ष व अधिवक्ता राम नरेश सिंह राजपूत ने वर्तमान सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि पश्चिमी सभ्यता में एकाकी परिवारों का चलन है, जिसके कारण वहां परिजनों से मिलने के लिए साल में एक दिन (15 मई) तय करना पड़ता है, जबकि भारत की मूल संस्कृति हमेशा से संयुक्त परिवारों की रही है। राजपूत ने चिंता व्यक्त की कि आधुनिकता और वैश्विक चकाचौंध की अंधी दौड़ में आज भारत में भी एकाकी परिवार तेजी से बढ़े हैं, जिससे नई पीढ़ी को कई व्यावहारिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस कठिन परिवेश में उन्होंने संयुक्त परिवारों की महती आवश्यकता
पर जोर दिया। मुख्य वक्ता पीआर मलैया, हर्षिता राजपूत एवं टीकाराम त्रिपाठी ने यूरोपीय और एशियन साहित्य के विभिन्न कालखंडों व साहित्यकारों की रचनाओं के उदाहरण देते हुए संयुक्त परिवार की प्रासंगिकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस साहित्यिक समागम में अंचल के लगभग 50 से अधिक रचनाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अधिवक्ता जगमोहन सिंह लोधी मुख्य अतिथि और अधिवक्ता रजनी सिंह राजपूत विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थीं, जबकि डा. गजाधर सागर, महेंद्र कौरव और वृन्दावन राय सरल ने सारस्वत अतिथि के तौर पर मंच साझा किया। कार्यक्रम का सफल एवं क्रमिक संचालन अमित आठिया, अनिल श्रीवास्तव और डा. अभय सिंह ने किया। इस अवसर पर लखन शब्दाक्षरी (नरसिंहपुर), धर्मेंद्र "आज़ाद" तिजोरी वाले (तेंदूखेड़ा), वरिष्ठ साहित्यकार देवी सिंह राजपूत, मीता कनोजिया "सिम्मी", पुष्पेंद्र दुबे, पेट्रिस फुसकेले, कोमेश विश्वकर्मा, मुकेश तिवारी, मणिदेव सिंह ठाकुर, एम. शरीफ़, सुल्तान ख़ान, मधुर गोस्वामी "राही निर्मोही", महबूब ताज, शहज़ाद सागरी, आयुष मेहरा "आदि", जमुना प्रसाद "बेताब", शहज़ाद पेन्टर, मु. इरफ़ान (मुंगावली), नीरज रैकवार और जागेश्वर कुशवाहा सहित काव्यायन संस्था के स्थाई श्रोता व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
- कैबिनेट मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कि ग्रह ग्राम लोलरी में क्षेत्रीय जनों से मुलाकात1
- बीना के मनोरमा वार्ड स्थित बीबीएम कॉलेज में भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दामोदर वीर सावरकर की जयंती के अवसर पर एक पुष्पांजलि और विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मेरा युवा भारत (माय भारत) सागर और सामाजिक संस्था शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह एवं आजाद क्रांति युवा मण्डल बीना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल ओझा थे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व नगर संघ चालक और समाजसेवी मुरारी गोस्वामी उपस्थित रहे। सर्वप्रथम, सभी उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने वीर सावरकर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य अतिथि अनिल ओझा ने वीर सावरकर को एक महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी, लेखक और समाज सुधारक बताया, जिनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भागुर गाँव में हुआ था। उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए सशस्त्र क्रांति का मार्ग चुना और 'हिंदुत्व' की विचारधारा को मुख्यधारा में लाए। मुख्य वक्ता मुरारी गोस्वामी ने सावरकर जी के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि अंग्रेजों ने उन्हें 'काला पानी' की सजा और दोहरा आजीवन कारावास दिया, जिसमें 50 वर्ष की कड़ी कैद शामिल थी। उन्हें 1911 में अंडमान निकोबार की कुख्यात सेलुलर जेल भेजा गया, जहाँ उन्हें असहनीय शारीरिक यातनाएं दी गईं। अन्य कैदियों की तरह, उन्होंने भी अपनी रिहाई के लिए ब्रिटिश सरकार को कई दया याचिकाएँ भेजीं, जिसके बाद 1921 में उन्हें भारत की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। शहीदों और क्रांतिकारियों के चित्र संग्रहकर्ता राम शर्मा ने बताया कि सावरकर जी 1906 में वकालत की पढ़ाई के लिए लंदन गए, जहाँ उन्होंने 'इंडिया हाउस' की स्थापना कर अंग्रेजों के खिलाफ रणनीतियाँ बनाईं। श्रीमती ज्योति सराफ, श्रीमती सुनीता राय और श्रीमती दमयंती ठाकुर ने उल्लेख किया कि वे 1905 में पुणे में विदेशी कपड़ों की होली जलाने वाले पहले व्यक्ति थे। पूर्व प्राचार्य आर.के. जैन ने बताया कि उन्हें 1910 में नासिक के कलेक्टर जैक्सन की हत्या की साजिश के आरोप में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। कवि मुलचंद सेन के अनुसार, सावरकर जी बहुत बहादुर थे; भारत लाते समय वे फ्रांस के मार्सिले बंदरगाह पर जहाज के शौचालय के रास्ते समुद्र में कूद गए, लेकिन अंततः पकड़े गए। पूर्व शिक्षक उदल सिंह यादव ने बताया कि 1924 में रिहा होने के बाद, उन्हें 1937 तक रत्नागिरी में नजरबंद रखा गया, जहाँ उन्होंने छुआछूत, जाति-प्रथा (जाति की सात बेड़ियाँ) के उन्मूलन, अंतरजातीय विवाह और मंदिर प्रवेश के लिए भारी सामाजिक संघर्ष किया। एडवोकेट श्याम लाल पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि सावरकर जी का पूरा जीवन ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष और हिंदू राष्ट्रवाद के दर्शन को समर्पित रहा। कार्यक्रम के दौरान मनोहर लाल दीक्षित ने 'वतन पे मिटने वालों तुम हमेशा अमर रहोगे' गीत गाया। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रोफेसर डालचंद पटेल ने किया, और अंत में कार्यक्रम संयोजक उमेश शर्मा ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि अनिल ओझा, मुख्य वक्ता मुरारी गोस्वामी, श्रीमती सुनीता राय, श्रीमती ज्योति सराफ, श्रीमती ममता चौरसिया, श्रीमती दमयंती ठाकुर, श्रीमती रितु बुंदेला, सुश्री महक सोनी, पूर्व शिक्षक उदल यादव, पूर्व प्राचार्य आर.के. जैन, पूर्व लेक्चरर मूलचंद सेन, पूर्व शिक्षक देवेंद्र तिवारी, पूर्व शिक्षक रविशंकर अवस्थी, पूर्व शिक्षक मनोहर लाल दीक्षित, एडवोकेट श्याम लाल पटेल, प्रोफेसर डालचंद पटेल, वरिष्ठ समाजसेवी राम शर्मा, पूर्व शिक्षक विनोद श्रीवास्तव, माता प्रसाद अहिरवार, प्रशांत विक्की दुलगज और विवेक रावत सहित अनेक लोग उपस्थित थे।4
- बीना के ग्राम देहरी में एक 55 वर्षीय व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान कल्लू पिता नत्थू चढ़ार के रूप में हुई है, जिनके परिजनों ने इस मामले में हत्या की आशंका जताई है। यह घटना आगासौद थाना क्षेत्र के अंतर्गत सामने आई है। परिजनों के अनुसार, गुरुवार रात कल्लू चढ़ार कथा सुनकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान, गांव का एक व्यक्ति उन्हें अपने बगीचे की ओर ले गया। कुछ देर बाद, मृतक के बेटे राहुल को फोन पर सूचना मिली कि उनके पिता चक्कर खाकर गिर गए हैं। राहुल रात करीब 9:45 बजे मौके पर पहुंचा और अपने पिता को ऑटो से घर ले आया। उस समय कल्लू चढ़ार कोई बातचीत नहीं कर रहे थे। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तत्काल बीना सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि कल्लू चढ़ार की हत्या की गई है, क्योंकि उनके शरीर और गले पर रस्सी जैसे निशान मिले हैं। घटना की सूचना डायल 112 को दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। फिलहाल, पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो पाएगा।1
- भीषण गर्मी के मद्देनजर, तेंदूखेड़ा नगर परिषद ने स्थानीय लोगों से पानी बचाने की अपील की है। परिषद ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि व्यर्थ पानी बिल्कुल न बहाया जाए और वाटर सप्लाई के दौरान मोटर का उपयोग न करें। नगर परिषद ने चेतावनी दी है कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी।1
- मध्य प्रदेश के बीना में अपराधियों के जुलूस पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है, जिससे यह साफ संदेश दिया गया है कि अपराध करने वालों को कानून सड़कों पर ही जवाब देगा। इस कार्रवाई के माध्यम से बीना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो लोग कानून तोड़ेंगे, उन्हें अब समाज के सामने बेनकाब किया जाएगा। पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी के रूप में सामने आई है।1