पांगी को मिली नई पहचान, जौ पर MSP बढ़ोतरी और GI टैगिंग से बढ़ेगी किसानों की आय—बजट को मिल रही व्यापक सराहना हिम संदेश पांगी/शिमला, 22 मार्च 2026 हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 को प्रदेशभर में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। खासतौर पर जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के लिए की गई घोषणाओं ने स्थानीय लोगों, किसानों और जनप्रतिनिधियों में उत्साह का माहौल बना दिया है। इस बजट को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बजट की सबसे बड़ी खासियत पांगी क्षेत्र में उत्पादित जौ (भोट जौ) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई वृद्धि है। सरकार ने जौ का MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो कर दिया है, जिससे क्षेत्र के किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। यह फैसला न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि पारंपरिक फसलों को प्रोत्साहन देने में भी अहम भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही पांगी के प्रसिद्ध भोट जौ की GI (Geographical Indication) टैगिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे इस उत्पाद की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। GI टैग मिलने से उत्पाद की प्रामाणिकता (authenticity) सुनिश्चित होगी और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पांगी की पारंपरिक ‘ठांगी’ (हस्तशिल्प/उत्पाद) को रजिस्ट्रेशन के लिए ‘इन-प्रिंसिपल अप्रूवल’ प्राप्त हुआ है। यह कदम स्थानीय कला और परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी बजट में पांगी को बड़ी सौगात दी गई है। किलाड़ को हेलीपोर्ट योजना में शामिल किया गया है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में सुधार होगा और आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। हिमाचल ऊन परिसंघ के निदेशक मंडल सदस्य वीर सिंह राणा ने बजट की सराहना करते हुए कहा, "माननीय मुख्यमंत्री जी ने हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ किया है। खासकर पांगी के लिए जौ पर MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये करना एक सराहनीय और बड़ा निर्णय है।" वहीं, जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य दौलत शर्मा ने इसे "ऐतिहासिक बजट" करार देते हुए कहा कि इसमें समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। स्थानीय प्रतिनिधि चुनी लाल शर्मा ने भी बजट की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे पांगी घाटी के विकास को नई गति मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। कुल मिलाकर यह बजट प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक संतुलित और दूरदर्शी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से पांगी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के लिए की गई घोषणाएं यह संकेत देती हैं कि सरकार आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रही है।
पांगी को मिली नई पहचान, जौ पर MSP बढ़ोतरी और GI टैगिंग से बढ़ेगी किसानों की आय—बजट को मिल रही व्यापक सराहना हिम संदेश पांगी/शिमला, 22 मार्च 2026 हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 को प्रदेशभर में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। खासतौर पर जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के लिए की गई घोषणाओं ने स्थानीय लोगों, किसानों और जनप्रतिनिधियों में उत्साह का माहौल बना दिया है। इस बजट को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बजट की सबसे बड़ी खासियत पांगी क्षेत्र में उत्पादित जौ (भोट जौ) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई वृद्धि है। सरकार ने जौ का MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो कर दिया है, जिससे क्षेत्र के किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। यह फैसला न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि पारंपरिक फसलों को प्रोत्साहन देने में भी अहम भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही पांगी के प्रसिद्ध भोट जौ की GI (Geographical Indication) टैगिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे इस उत्पाद की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। GI टैग मिलने से उत्पाद की प्रामाणिकता (authenticity) सुनिश्चित होगी और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पांगी की पारंपरिक ‘ठांगी’ (हस्तशिल्प/उत्पाद) को रजिस्ट्रेशन के लिए ‘इन-प्रिंसिपल अप्रूवल’ प्राप्त हुआ है। यह कदम स्थानीय कला और परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी बजट में पांगी को बड़ी सौगात दी गई है। किलाड़ को हेलीपोर्ट योजना में शामिल किया गया है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में सुधार होगा और आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। हिमाचल ऊन परिसंघ के निदेशक मंडल सदस्य वीर सिंह राणा ने बजट की सराहना करते हुए कहा, "माननीय मुख्यमंत्री जी ने हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ किया है। खासकर पांगी के लिए जौ पर MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये करना एक सराहनीय और बड़ा निर्णय है।" वहीं, जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य दौलत शर्मा ने इसे "ऐतिहासिक बजट" करार देते हुए कहा कि इसमें समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। स्थानीय प्रतिनिधि चुनी लाल शर्मा ने भी बजट की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे पांगी घाटी के विकास को नई गति मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। कुल मिलाकर यह बजट प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक संतुलित और दूरदर्शी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से पांगी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के लिए की गई घोषणाएं यह संकेत देती हैं कि सरकार आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रही है।
- हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र अपनी अद्भुत प्राकृतिक संपदा और समृद्ध जैव विविधता के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखते हैं। इन्हीं क्षेत्रों में जिला चंबा का पांगी विकास खंड एक ऐसा इलाका है, जिसे वन्य प्राणियों का सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घने जंगल, बर्फ से ढकी चोटियां और दूर-दराज़ की शांत घाटियां यहां के वन्य जीवन को संरक्षण प्रदान करती हैं। पांगी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के दुर्लभ और संरक्षित वन्य जीव पाए जाते हैं। इनमें हिमालयन आइबेक्स, हिमालयन थार, कस्तूरी मृग, बर्फीला तेंदुआ (स्नो लेपर्ड), काला भालू, भूरा भालू, लाल भालू और जंगली बकरी, पक्षीयो में नील नीलो, चकोर, गोरेया, गलोन, गिद प्रमुख हैं। इन जीवों की मौजूदगी इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खास बात यह है कि ये वन्य जीव पांगी की ऊंची धारों (गहारों) में प्राकृतिक रूप से विचरण करते हैं, जिससे यह क्षेत्र जैव विविधता का अनमोल केंद्र बन गया है। प्रदेश सरकार द्वारा पांगी के टावन सैचू क्षेत्र को वन्य जीवों के लिए आरक्षित अभयारण्य घोषित किया गया है, जिससे यहां के वन्य जीवों को अतिरिक्त सुरक्षा मिल रही है। पांगी वन मंडल के अंतर्गत गहार परमार, दुसगहार, हरुई, चस्क भटोरी, हिलूटवान, सुराल हुडान, प्रेग्राम और विन्द्रावानी जैसी अनेक सुंदर धारें स्थित हैं। ये सभी गहार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां के बर्फ से ढके पहाड़, हरे-भरे चरागाह और स्वच्छ वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। वन्य जीवों की गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए पर्यावरण प्रेमी डॉ. नरेश ठाकुर, जो वर्तमान में पशुपालन विभाग पांगी में कार्यरत हैं, बताते हैं कि गर्मियों के मौसम में ये वन्य जीव 9,000 से 12,000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चले जाते हैं। इस दौरान उन्हें पर्याप्त भोजन और अनुकूल वातावरण मिलता है। वहीं सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण ये जीव निचले क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं, जहां उन्हें जीवन यापन के लिए बेहतर परिस्थितियां मिलती हैं। पांगी की ये गहारें न केवल वन्य जीवों के लिए सुरक्षित आवास हैं, बल्कि वन्यजीव पर्यटन के लिए भी अपार संभावनाएं रखती हैं। यदि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए, तो यह स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है। साथ ही, इससे लोगों में वन्य जीवों के प्रति जागरूकता और संरक्षण की भावना भी विकसित होगी। अतः यह आवश्यक है कि हम सभी मिलकर पांगी की इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने का संकल्प लें। वन्य जीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित पर्यटन विकास के माध्यम से ही इस क्षेत्र की सुंदरता और जैव विविधता को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।1
- हिमालय की दुर्गम और प्राकृतिक रूप से समृद्ध घाटियों में वन्यजीवों की मौजूदगी एक सुखद संकेत मानी जाती है। इसी कड़ी में 3 अप्रैल 2026 को पांगी घाटी के चस्क क्षेत्र में एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा हिमालयन आइबेक्स (Himalayan Ibex) का कैमरे में कैद होना न केवल रोमांचक क्षण है, बल्कि यह क्षेत्र में जैव विविधता की समृद्धि और संरक्षण प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है। बताया जा रहा है कि यह दुर्लभ दृश्य चस्क की ऊंची पहाड़ियों में देखा गया, जहां आइबेक्स अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से विचरण करता नजर आया। हिमालयन आइबेक्स एक जंगली बकरी प्रजाति है, जो ऊबड़-खाबड़ चट्टानी इलाकों में रहने के लिए जानी जाती है और इसे देख पाना बेहद कठिन होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की वन्यजीव उपस्थिति यह संकेत देती है कि क्षेत्र का पर्यावरण अभी भी संतुलित है और मानव हस्तक्षेप सीमित है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस दुर्लभ क्षण को साझा करते हुए वन्यजीव पर्यटन (Wildlife Tourism) को बढ़ावा देने की अपील की है, ताकि लोग प्रकृति के करीब आ सकें और इसके संरक्षण के प्रति जागरूक बनें। पांगी घाटी, जो अपनी अनछुई सुंदरता और जैव विविधता के लिए जानी जाती है, अब धीरे-धीरे एडवेंचर और इको-टूरिज्म का केंद्र बनती जा रही है। ऐसे में हिमालयन आइबेक्स जैसे दुर्लभ जीवों की मौजूदगी पर्यटकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से भी यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके और क्षेत्र में जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। 👉 यह दृश्य न केवल एक फोटोग्राफर की उपलब्धि है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, जो हमें प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास कराता है।1
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- Post by Varun Slathia1
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- सुजानपुर सुजानपुर के विश्व प्रसिद्ध काली माता मंदिर प्रांगण में शनिवार को विशेष पूजा अर्चना हवन इत्यादि करने के बाद वार्षिक भंडारा आयोजित किया गया मंदिर परिसर के बाहर सैकड़ो लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया बताते चले की मंदिर कमेटी द्वारा प्रतिवर्ष नवरात्र संपन्न होने के बाद वार्षिक भंडारा आयोजित किया जाता है जिसके चलते यह कार्यक्रम आयोजित हुआ भंडारा शुरू होने से पहले मंदिर परिसर में विशेष पूजा पाठ हवन इत्यादि करवाया गया यहां पंडित आचार्य संजय शर्मा द्वारा तमाम वैदिक रस्मों को निभाते हुए सर्वजन मंगल कल्याण की कामना की गई3
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