पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी, झारखण्ड की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती: बिरसा सोय ✍️ झारखण्ड राज्य के ग्रामीण एवं दूर-दराज़ क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था आज गंभीर संकट से गुजर रही है। सरकार बार-बार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के दावे करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। स्वास्थ्य व्यवस्था केवल डॉक्टरों के भरोसे नहीं चलती, बल्कि नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, एक्स-रे टेक्नीशियन, वार्ड अटेंडेंट और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दुर्भाग्यवश झारखण्ड में इन आवश्यक पदों की भारी कमी ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कमजोर बना दिया है। आज स्थिति यह है कि राज्य में नर्सिंग स्टाफ के लगभग 61% पद तथा लैब टेक्नीशियन के लगभग 36% पद रिक्त पड़े हैं। इसका सीधा प्रभाव मरीजों के उपचार पर पड़ रहा है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तथा ग्रामीण स्वास्थ्य उपकेंद्र केवल एएनएम (ANM) के भरोसे संचालित हो रहे हैं। सीमित संसाधनों और सीमित मानवबल के कारण एक एएनएम पर कई प्रकार की जिम्मेदारियाँ डाल दी जाती हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। जब अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ नहीं होगा, तो मरीजों की नियमित निगरानी, समय पर दवा देना, आपातकालीन देखभाल और प्रसूति सेवाएं प्रभावित होंगी। वहीं लैब टेक्नीशियन की कमी के कारण आवश्यक रक्त, मूत्र तथा अन्य चिकित्सकीय जांच समय पर नहीं हो पाती हैं। परिणामस्वरूप मरीजों का सही समय पर सही उपचार नहीं हो पाता और कई बार साधारण बीमारी भी गंभीर रूप ले लेती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और आदिवासी परिवार सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उन्हें मजबूरी में जिला अस्पतालों की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर महंगे निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ता है और कई परिवार इलाज के अभाव में अपने प्रियजनों को खो देते हैं। यह स्थिति किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। वृहद झारखण्ड मोर्चा (VJM) का स्पष्ट मानना है कि यदि झारखण्ड को वास्तव में स्वस्थ और विकसित राज्य बनाना है, तो स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार करना होगा। केवल अस्पताल भवन बना देने से स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं होतीं, बल्कि उनमें पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सों, लैब टेक्नीशियनों और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों की नियुक्ति अनिवार्य है। वृहद झारखण्ड मोर्चा राज्य सरकार से मांग करता है कि— राज्य के सभी रिक्त पैरामेडिकल पदों पर शीघ्र और पारदर्शी तरीके से स्थायी नियुक्ति की जाए। प्रत्येक PHC, CHC एवं जिला अस्पताल में निर्धारित मानकों के अनुसार नर्सिंग स्टाफ और लैब टेक्नीशियन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रोत्साहन और आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं। आधुनिक जांच उपकरण, दवाइयां एवं पर्याप्त चिकित्सा संसाधन प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र तक उपलब्ध कराए जाएं। झारखण्ड के स्थानीय युवाओं को पैरामेडिकल शिक्षा एवं रोजगार में प्राथमिकता देकर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए। एक स्वस्थ समाज ही एक मजबूत राज्य की नींव होता है। यदि सरकार सचमुच जनता के जीवन और स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है, तो उसे स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से खाली पड़े पदों को तत्काल भरना होगा। जब तक अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारी उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का सपना अधूरा ही रहेगा। अब समय आ गया है कि झारखण्ड की स्वास्थ्य व्यवस्था को घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस निर्णयों और प्रभावी कार्यान्वयन से मजबूत बनाया जाए। यही जनहित है, यही राज्यहित है और यही एक समृद्ध एवं स्वस्थ झारखण्ड की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा। बिरसा सोय केन्द्रीय अध्यक्ष वृहद झारखण्ड मोर्चा (VJM)
पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी, झारखण्ड की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती: बिरसा सोय ✍️ झारखण्ड राज्य के ग्रामीण एवं दूर-दराज़ क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था आज गंभीर संकट से गुजर रही है। सरकार बार-बार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के दावे करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। स्वास्थ्य व्यवस्था केवल डॉक्टरों के भरोसे नहीं चलती, बल्कि नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, एक्स-रे टेक्नीशियन, वार्ड अटेंडेंट और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दुर्भाग्यवश झारखण्ड में इन आवश्यक पदों की भारी कमी ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कमजोर बना दिया है। आज स्थिति यह है कि राज्य में नर्सिंग स्टाफ के लगभग 61% पद तथा लैब टेक्नीशियन के लगभग 36% पद रिक्त पड़े हैं। इसका सीधा प्रभाव मरीजों के उपचार पर पड़ रहा है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तथा ग्रामीण स्वास्थ्य उपकेंद्र केवल एएनएम (ANM) के भरोसे संचालित हो रहे हैं। सीमित संसाधनों और सीमित मानवबल के कारण एक एएनएम पर कई प्रकार की जिम्मेदारियाँ डाल दी जाती हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। जब अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ नहीं होगा, तो मरीजों की नियमित निगरानी, समय पर दवा देना, आपातकालीन देखभाल और प्रसूति सेवाएं प्रभावित होंगी। वहीं लैब टेक्नीशियन की कमी के कारण आवश्यक रक्त, मूत्र तथा अन्य चिकित्सकीय जांच समय पर नहीं हो पाती हैं। परिणामस्वरूप मरीजों का सही समय पर सही उपचार नहीं हो पाता और कई बार साधारण बीमारी भी गंभीर रूप ले लेती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और आदिवासी परिवार सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उन्हें मजबूरी में जिला अस्पतालों की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर महंगे निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ता है और कई परिवार इलाज के अभाव में अपने प्रियजनों को खो देते हैं। यह स्थिति किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। वृहद झारखण्ड मोर्चा (VJM) का स्पष्ट मानना है कि यदि झारखण्ड को वास्तव में स्वस्थ और विकसित राज्य बनाना है, तो स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार करना होगा। केवल अस्पताल भवन बना देने से स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं होतीं, बल्कि उनमें पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सों, लैब टेक्नीशियनों और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों की नियुक्ति अनिवार्य है। वृहद झारखण्ड मोर्चा राज्य सरकार से मांग करता है कि— राज्य के सभी रिक्त पैरामेडिकल पदों पर शीघ्र और पारदर्शी तरीके से स्थायी नियुक्ति की जाए। प्रत्येक PHC, CHC एवं जिला अस्पताल में निर्धारित मानकों के अनुसार नर्सिंग स्टाफ और लैब टेक्नीशियन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रोत्साहन और आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं। आधुनिक जांच उपकरण, दवाइयां एवं पर्याप्त चिकित्सा संसाधन प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र तक उपलब्ध कराए जाएं। झारखण्ड के स्थानीय युवाओं को पैरामेडिकल शिक्षा एवं रोजगार में प्राथमिकता देकर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए। एक स्वस्थ समाज ही एक मजबूत राज्य की नींव होता है। यदि सरकार सचमुच जनता के जीवन और स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है, तो उसे स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से खाली पड़े पदों को तत्काल भरना होगा। जब तक अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारी उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का सपना अधूरा ही रहेगा। अब समय आ गया है कि झारखण्ड की स्वास्थ्य व्यवस्था को घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस निर्णयों और प्रभावी कार्यान्वयन से मजबूत बनाया जाए। यही जनहित है, यही राज्यहित है और यही एक समृद्ध एवं स्वस्थ झारखण्ड की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा। बिरसा सोय केन्द्रीय अध्यक्ष वृहद झारखण्ड मोर्चा (VJM)
- Seraikella | Kandra : कांड्रा में टोल सड़क पर उड़ती धूल से जनजीवन प्रभावित... Seraikella | kandra : कांड्रा में टोल वसूली जारी, धूल से जनजीवन प्रभावित; सड़क रखरखाव और प्रदूषण नियंत्रण पर उठे सवाल, स्थानीय लोगों ने नियमित सफाई, खुले व ओवरलोड मालवाहक वाहनों पर कार्रवाई तथा जिम्मेदार एजेंसियों से निष्पक्ष जांच और प्रभावी कदम उठाने की मांग की.... बिष्णु पद महापात्र 📲 9471102055 (wa) कांड्रा क्षेत्र में उड़ती धूल से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने सड़क की नियमित सफाई, धूल नियंत्रण, खुले तथा ओवरलोड मालवाहक वाहनों पर कार्रवाई और संबंधित विभागों से निष्पक्ष जांच कर प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की | jharkhandnews | kolhanupdate | pollution | janasamasya | suryodaysamvaad1
- JPSC/JSSC भर्ती घोटाले के विरोध में भाजयुमो का आक्रोश मार्च, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन चाईबासा: भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो), पश्चिमी सिंहभूम के नेतृत्व में शनिवार को झारखंड में JPSC, JSSC, उत्पाद सिपाही सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती घोटालों के विरोध में जिला मुख्यालय चाईबासा में आक्रोश मार्च निकाला गया। मार्च की शुरुआत गीता पेट्रोल पंप, कॉलेज मोड़ से हुई, जहां से कार्यकर्ता और छात्र समर्थक नारेबाजी करते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। इसके बाद राज्यपाल के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।1
- TMH के डायबिटीज केयर सेंटर में 1 अगस्त से Obesity Clinic की शुरुआत, मोटापा और डायबिटीज मरीजों को मिलेगी बेहतर इलाज की सुविधा जमशेदपुर से स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी खबर। Tata Main Hospital (TMH) के डायबिटीज केयर सेंटर में 1 अगस्त से Obesity Clinic की शुरुआत की जा रही है। इस नई सुविधा के माध्यम से मोटापा और डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह, जांच और उपचार एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। अस्पताल का उद्देश्य बढ़ते मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसी ही Jamshedpur Breaking News, Jharkhand News, Health News और TMH की हर बड़ी अपडेट सबसे पहले देखने के लिए Steel City Breaking News चैनल को Subscribe करें, वीडियो को Like करें और अपने दोस्तों के साथ Share करें। #Jamshedpur #TMH #ObesityClinic #Diabetes #HealthNews #JharkhandNews #BreakingNews #SteelCityBreakingNews #Shorts #YouTubeShorts1
- रांची में छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च, न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे छात्र रांची में बड़ी संख्या में छात्रों ने कैंडल मार्च निकालकर अपनी मांगों और न्याय के समर्थन में आवाज बुलंद की। हाथों में मोमबत्तियां लेकर छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से मार्च किया और संबंधित मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। इस दौरान छात्रों ने एकजुटता दिखाते हुए नारे लगाए और प्रशासन से मामले पर जल्द उचित कदम उठाने की अपील की।1
- आभार कार्यक्रम, मंत्री दीपक बिरुवा और जिला के विधायक हुए शामिल। लाभुकों को 226 करोड़ की परिसम्पत्तियों का किया गया वितरण। चाईबासा के कोल्हान विश्वविद्यालय सभागार में आज जिला प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय आभार कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में झारखंड सरकार भू-राजस्व और परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा के साथ जिला के सभी विधायक शामिल हुए। मौके पर सरकार के विभिन्न योजनाओं के लाभुकों को 226 करोड़ की परिसम्पत्तियों का वितरण किया गया। जिसमें मईया सम्मान योजना और पेंशन योजनाओं का डीबीटी के माध्यम से ऑनलाईन ट्रांसफर, आवास योजना, छात्रवृत्ति समेत अन्य योजनाएं शामिल हैं। कार्यक्रम में परिसर में लगाए गए कई स्टॉलों का मंत्री और विधायकों ने निरीक्षण किया। Byte - दीपक बिरुवा, भू-राजस्व और परिवहन मंत्री, झारखंड सरकार1
- जेपीएससी सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में भाजपा का प्रदर्शन, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन सरायकेला -झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल, उत्पाद सिपाही सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक एवं अनियमितताओं के विरोध में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जिला सरायकेला-खरसावां द्वारा उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद पार्टी नेताओं ने उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में पिछले सात वर्षों के दौरान कई भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और भर्ती घोटालों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को शीघ्र सजा दिलाई जानी चाहिए। ज्ञापन में प्रमुख मांगों के रूप में वर्ष 2019 के बाद हुई सभी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने, फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दोषियों पर त्वरित कार्रवाई करने, मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग, जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एवं संबंधित सदस्यों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित करने तथा उत्पाद सिपाही दौड़ परीक्षा में मृत अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग शामिल की गई। इस अवसर पर पूर्व महापौर विनोद श्रीवास्तव, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रमेश हांसदा, जिला महामंत्री राकेश मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष सारथी महतो, शंभू मंडल, ऋतिका मुखी, सतीश शर्मा, ललन शुक्ला, कृष्णा प्रधान, मनोहर दास, गुरजीत सिंह, राजकुमार सिंह, विनय कंचन, सावन गुप्ता सहित भाजपा के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।4